अधिकांश लोग स्नातक होने के बाद एमबीए करने के लिए क्यों पागल हैं?...


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Prashant Chadha

CEO, Wordpandit

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उसका उसका जवाब है हमारी सिस्टम में जो एस़सीनेशन है अगर आप देखें तो बच्चा जो अगर आप किसी भी बच्चे को देखे किसान को माता-पिता हैं उनका अगर आप जाकर पूछेंगे तो उनकी तीन या चार बड़ी बड़ी होती है महत्वाकांक्षा होती है कि हमारा बच्चा इस फील्ड में आगे निकले तो सबसे पहले वह चाहते हैं तो बच्चा ही था या वो आए या फिर डॉक्टरों को एक-एक लेवल पर रखा जाता है तो बच्चों के इंजीनियरिंग कर लेते हैं खत्म तो उनको अब माता-पिता को भी लगता है बच्चों को भी लगता है क्या आप आ गए क्या तो जितना भी पोस्ट ग्रेजुएट लेवल पर है अगर आप आईएस की तैयारी को साइट पर तो उनमें से जो सबसे ज्यादा आकर्षित करता लोगों को को एमबीए काफी है एक तो स्वयं का टाइम है तो बच्चे सोते एमबीए का मतलब है जबकि ऐसा नहीं है और दूसरी चीज है कि बच्चे उसमें सबसे बड़ी चीज देखते हैं वह देखते हैं कि उनका पे पैकेज कर रखा है ठीक है टॉकीज की चकाचौंध में कि हमारा भी हम भी आएंगे मिलेंगे अहमदाबाद हमारा भी लाखों में पैकेज लग जाएगा उनको काफी दाद आकर्षित करता है उसमें काफी लोग हार्डवर्क को भूल जाते हैं आप लोग भूल जाते हैं कि वहां तक पहुंचना अपने आप में एक जर्नी है और एमबीए क्यों करना है ठीक है तो वह साधक से ज्यादा कर दी का प्रेशर है पीयर प्रेशर भी है उसके अंदर पेमेंट काफी परेशान है और फिर स्टूडेंट की खुद की ऑपरेशन है कि उसको वह पैकेट चाहिए करके को काफी दादा

uska uska jawab hai hamari system mein jo es़asineshan hai agar aap dekhen toh baccha jo agar aap kisi bhi bacche ko dekhe kisan ko mata pita hain unka agar aap jaakar puchhenge toh unki teen ya char badi badi hoti hai mahatwakanksha hoti hai ki hamara baccha is field mein aage nikle toh sabse pehle vaah chahte hain toh baccha hi tha ya vo aaye ya phir doctoron ko ek ek level par rakha jata hai toh bacchon ke Engineering kar lete hain khatam toh unko ab mata pita ko bhi lagta hai bacchon ko bhi lagta hai kya aap aa gaye kya toh jitna bhi post graduate level par hai agar aap ias ki taiyari ko site par toh unmen se jo sabse zyada aakarshit karta logon ko ko mba kafi hai ek toh swayam ka time hai toh bacche sote mba ka matlab hai jabki aisa nahi hai aur dusri cheez hai ki bacche usmein sabse badi cheez dekhte hain vaah dekhte hain ki unka pe package kar rakha hai theek hai talkies ki chakachaundh mein ki hamara bhi hum bhi aayenge milenge ahmedabad hamara bhi laakhon mein package lag jaega unko kafi dad aakarshit karta hai usmein kafi log hardwork ko bhool jaate hain aap log bhool jaate hain ki wahan tak pahunchana apne aap mein ek journey hai aur mba kyon karna hai theek hai toh vaah sadhak se zyada kar di ka pressure hai piyar pressure bhi hai uske andar payment kafi pareshan hai aur phir student ki khud ki operation hai ki usko vaah packet chahiye karke ko kafi dada

उसका उसका जवाब है हमारी सिस्टम में जो एस़सीनेशन है अगर आप देखें तो बच्चा जो अगर आप किसी भी

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