जीवन की रुकावटों का सामना कैसे करें?...


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Mr. Mukesh Kumar

Youtuber, https://youtu.be/lxwi7CXLHSQ

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मानव जीवन ही एक ऐसा जीवन में तरह तरह की रुकावट आती है क्योंकि हमारी ख्वाहिश से अधिक हैं हमारी चाहत अधिक है हमारी अभिलाषा देखें और जब भी किसी भी चीज में आती होती है तो उन में कठिनाइयां आती ही कारण हमारे जीवन में तरह तरह की रुकावट आती अब यहां प्रश्न यह उठता है कि हम इन लोका टोका कैसे सामना करें कैसे इन सभी दुकानों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंचे इसके गुण होना चाहिए यदि किसी सफल व्यक्ति की बात करें तो हम पाएंगे कि उस व्यक्ति में कई गुण पाए जाते हैं जिसके कारण वह आज के डेट में उसकी देखते हैं तो कहते हैं अरे यार तू तो बड़ा नसीब वाला है कि तुझे ऐसा मिल गया वैसा मिल गया तो यह कर लिया तो वह कर लिया पर यह भूल जाते हैं उसके अंदर जो यहां बनाई है उसने कोई अचीव किया है वह बैठे-बैठे नहीं किया है तरह-तरह के दुरुपयोग करते हुए तेरा चला दे चुके अपने अंदर जो है उसका प्रयोग करते हुए प्राप्त किया जीवन की दुकान पर कसाना करने के लिए सबसे पहले जो भी होता है वह हड़ताल आत्मविश्वास यदि किसी व्यक्ति में आत्मविश्वास वह खुद की शक्ति को नहीं पहचान सकते हैं खुद के मनोबल को नहीं पहचान सकता है हमेशा जब भी कोई कार्य करेगा उसे लगेगा कि मैं कमजोर हूं मुझे पता नहीं मैं नहीं कर सकता क्योंकि आप विश्वास तो अपने गोल को जरूर करेगा उसके लिए किसी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी यदि किसी की आवश्यकता पड़ती है तो वह अपने बाल अपने अंदर की गुणों से आकर्षित करके काम निकलवाने का इसी को कहते हैं आंखों में यदि किसी व्यक्ति के पास भी भेजना हो तो वह कुछ भी नहीं कर सकता क्योंकि उसके अंदर ही नहीं होगा अगर थोड़ी सी गलतियां हो जाती तो तुरंत उस काम को छोड़ देगा कर देगा लक्ष्य को छोड़ देगा ऐसे पैसे की में धैर्य बनाए रखना होगा कि मैं जो कर रहा उससे मैं जरूर करूंगा उसमें थोड़ा समय लगेगा तीसरा जो सबसे महत्वपूर्ण होता है वह तक्षशिला नागपंचमी जितना अधिकतम करने की क्षमता रखते हैं कुछ ऐसी महत्वपूर्ण चीजें होती हैं जो हमारे जीवन में आए विभिन्न तरह की रुकावट को सही से और आसानी से और कम समय में सामना करते हुए आगे की तरफ बढ़ाने में सहयोग करता है धन्यवाद

manav jeevan hi ek aisa jeevan mein tarah tarah ki rukavat aati hai kyonki hamari khwaahish se adhik hain hamari chahat adhik hai hamari abhilasha dekhen aur jab bhi kisi bhi cheez mein aati hoti hai toh un mein kathinaiyaan aati hi karan hamare jeevan mein tarah tarah ki rukavat aati ab yahan prashna yah uthata hai ki hum in loka toka kaise samana kare kaise in sabhi dukaano ka samana karte hue apne lakshya tak pahuche iske gun hona chahiye yadi kisi safal vyakti ki baat kare toh hum payenge ki us vyakti mein kai gun paye jaate hain jiske karan vaah aaj ke date mein uski dekhte hain toh kehte hain are yaar tu toh bada nasib vala hai ki tujhe aisa mil gaya waisa mil gaya toh yah kar liya toh vaah kar liya par yah bhool jaate hain uske andar jo yahan banai hai usne koi achieve kiya hai vaah baithe baithe nahi kiya hai tarah tarah ke durupyog karte hue tera chala de chuke apne andar jo hai uska prayog karte hue prapt kiya jeevan ki dukaan par kasana karne ke liye sabse pehle jo bhi hota hai vaah hartal aatmvishvaas yadi kisi vyakti mein aatmvishvaas vaah khud ki shakti ko nahi pehchaan sakte hain khud ke manobal ko nahi pehchaan sakta hai hamesha jab bhi koi karya karega use lagega ki main kamjor hoon mujhe pata nahi main nahi kar sakta kyonki aap vishwas toh apne gol ko zaroor karega uske liye kisi ki avashyakta nahi padegi yadi kisi ki avashyakta padti hai toh vaah apne baal apne andar ki gunon se aakarshit karke kaam nikalavane ka isi ko kehte hain aankho mein yadi kisi vyakti ke paas bhi bhejna ho toh vaah kuch bhi nahi kar sakta kyonki uske andar hi nahi hoga agar thodi si galtiya ho jaati toh turant us kaam ko chod dega kar dega lakshya ko chod dega aise paise ki mein dhairya banaye rakhna hoga ki main jo kar raha usse main zaroor karunga usme thoda samay lagega teesra jo sabse mahatvapurna hota hai vaah takshashila nagpanchami jitna adhiktam karne ki kshamta rakhte hain kuch aisi mahatvapurna cheezen hoti hain jo hamare jeevan mein aaye vibhinn tarah ki rukavat ko sahi se aur aasani se aur kam samay mein samana karte hue aage ki taraf badhane mein sahyog karta hai dhanyavad

मानव जीवन ही एक ऐसा जीवन में तरह तरह की रुकावट आती है क्योंकि हमारी ख्वाहिश से अधिक हैं हम

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