धर्मशास्त्र क्या है, तथा हमारे जीवन में इसका क्या भूमिका है?...


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धर्मशास्त्र क्या है तथा हमारे जीवन में इसका क्या भूमिका है देखिए आज चाय हवाई जहाज उड़ाना हो चैट ट्रेन चलाना हो चाहे ना हो चलाना चाहे बाइक चलाना हो सबके पीछे कहीं ना कहीं विज्ञान छुपा हुआ है कहां कितना वजन रहना चाहिए कहां कितना एयर कंप्रेसर होना चाहिए कहां कितना झुकाव होना चाहिए इन सभी चीजों का ख्याल तकनीक के क्षेत्र में विज्ञान के क्षेत्र में रखा जाता है चुंबकीय प्रभाव क्या है हवा का दबाव क्या है इन सभी चीजों को आज विज्ञान इन्हीं मामलों में बहुत छोटे स्तर पर सीमित है हमारा प्राचीन आध्यात्मिक विज्ञान सूर्य धर्मा पृथ्वी समुद्र पर्वत जंगल इन सबों के बारे में बहुत बेहतर जानकारी रखता था सूर्योदय सूर्यास्त मध्य रात्रि 2:00 पर कब क्या करें कब क्या नहीं करें इन सभी चीजों को हमारे प्राचीन वैज्ञानिकों ने जो आज के वैज्ञानिकों से कहीं ज्यादा जानकारी रखते थे तो हमारे जीवन शैली को उन्होंने जिस तरीके से सजाया उसी का नाम धर्म पड़ा और उनकी चर्चा जैन शास्त्रों में है उन्हें धर्म शास्त्र कहते हैं जैसे दिन के समय मिथुन नहीं करना याद इनके समय नहीं सोना या रात को सोना दिन में जागना या रात में जल्दी सोना सुबह जल्दी उठना सूर्योदय से 2 घंटे पूर्व उठ जाना सूर्यास्त के 2 घंटे बाद सो जाना सूर्यास्त के बाद भोजन न करना यह सब कायदे कानून बनाए गए कहीं ना कहीं इसमें बहुत बड़ी वैज्ञानिकता छुपी हुई है से सोच जाना है ए लोग सुनता हो या सोचो एनिमल मूत्र के उत्सर्जन के बाद उन इंद्रियों को धोना उनमें मिट्टी लगाना उनको फिर से बोलना आप दोनों पैर धोना कुल्ला करना भोजन करने से पहले पैर धोना जमीन पर आसन लगाकर भोजन करना भोजन करते समय सिखा खुली छोड़ देना पूजा करते समय शिखा को बांदलेना शिकार रखना यज्ञोपवीत पहनना इन सबों के पीछे बहुत बहुत बड़ा वैज्ञानिक रास्ते और हमारे प्राचीन मार्च बहुत बड़े साइंटिस्ट थे चाहे वह सूर्य को अर्घ्य देने की बात पूछा है चंद्रमा को अर्घ्य देने की बात चाहे गंगा को मामा ने की बात चाहे पीपल और जाए में सभी देवताओं का निवास मरने के बाद प्रकृति संरक्षण प्रकृति के साथ पूर्ण अनुकूलन यही हमारे धर्म शास्त्रों के मूल में और बिल्कुल चुंबकीय प्रभाव एयर प्रेशर इन सबों के बड़े ज्ञाता हमारे धर्म परोस हुए और उन चीजों की चर्चा से शास्त्र में हो जगह पवित कम करें विवाह कब करें मुहूर्त किस का कैसे होगा नहीं होगा यह सब चीजें धर्मशास्त्र में है धन्यवाद

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धर्मशास्त्र क्या है तथा हमारे जीवन में इसका क्या भूमिका है देखिए आज चाय हवाई जहाज उड़ाना ह

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सुरेश चंद आचार्य

Social Worker ( Self employed )

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नमस्कार दोस्तों धर्मशास्त्र का मूल अर्थ है कि वे प्राचीन रचनाएं जो मनुष्य को उसके करने योग्य कर्म का ज्ञान कराएं उसके न करने योग्य काम का ज्ञान कराएं उसे मार्गदर्शन करें उसे व्यवस्थित मर्यादा पूर्ण और आदर्श जीवन के रास्ते बताएं और जो पूर्व काल के पूर्वजों और सभ्यताओं या संसार के ग्रहों और ईश्वर के प्रति ज्ञान करवाएं क्योंकि यह तो सभी ही मानते हैं कि ईश्वर है उस ईश्वर को किस रूप में माने कैसे माने कौन सा रास्ता सही है कौन सा रास्ता गलत है यह सब बातें पूर्व काल में भिन्न-भिन्न समुदाय के लोगों द्वारा भिन्न-भिन्न मतों से व्याख्या की गई है कर्म किए गए हैं और उन कर्मों को लिखा गया है और वे लिखे गए जो शास्त्र हैं वे प्रत्येक धर्म में है और उनको ही धर्म शास्त्रों की संज्ञा दी गई है जो प्रत्येक धर्म के मान्यता के अनुसार लिखे गए हैं जिनमें मनुष्य की उत्पत्ति संबंधी मनुष्य के कर्मों संबंधी मनुष्य को अच्छे बुरे का ज्ञान कराने संबंधी मनुष्य को सत्य सत्य का ज्ञान कराने संबंधी मनुष्य को जीवन भर निरंतर आगे बढ़ने संबंधी प्रेम संबंधी मर्यादा संबंधी व्यवस्थित जीने संबंधी वाणी संबंधी आचार विचार संबंधी मिथुन संबंधी ऐसे सभी प्रकार के जो ज्ञान है वह धर्म शास्त्रों के द्वारा मनुष्य को समय-समय पर दिए गए हैं जो आज मनुष्य के जीवन उपयोगी है और ने पढ़कर मनुष्य पूर्व उल्लेखित बातों का ज्ञान प्राप्त करता है और जो उसके वर्तमान में बहुत ही सहायक है और भविष्य में भी सहायक होती हैं नमस्कार

namaskar doston dharmashastra ka mul arth hai ki ve prachin rachnaye jo manushya ko uske karne yogya karm ka gyaan karaye uske na karne yogya kaam ka gyaan karaye use margdarshan kare use vyavasthit maryada purn aur adarsh jeevan ke raste bataye aur jo purv kaal ke purvajon aur sabhyatao ya sansar ke grahon aur ishwar ke prati gyaan karvaaein kyonki yah toh sabhi hi maante hain ki ishwar hai us ishwar ko kis roop me maane kaise maane kaun sa rasta sahi hai kaun sa rasta galat hai yah sab batein purv kaal me bhinn bhinn samuday ke logo dwara bhinn bhinn maton se vyakhya ki gayi hai karm kiye gaye hain aur un karmon ko likha gaya hai aur ve likhe gaye jo shastra hain ve pratyek dharm me hai aur unko hi dharm shastron ki sangya di gayi hai jo pratyek dharm ke manyata ke anusaar likhe gaye hain jinmein manushya ki utpatti sambandhi manushya ke karmon sambandhi manushya ko acche bure ka gyaan karane sambandhi manushya ko satya satya ka gyaan karane sambandhi manushya ko jeevan bhar nirantar aage badhne sambandhi prem sambandhi maryada sambandhi vyavasthit jeene sambandhi vani sambandhi aachar vichar sambandhi maithun sambandhi aise sabhi prakar ke jo gyaan hai vaah dharm shastron ke dwara manushya ko samay samay par diye gaye hain jo aaj manushya ke jeevan upyogi hai aur ne padhakar manushya purv ullekhit baaton ka gyaan prapt karta hai aur jo uske vartaman me bahut hi sahayak hai aur bhavishya me bhi sahayak hoti hain namaskar

नमस्कार दोस्तों धर्मशास्त्र का मूल अर्थ है कि वे प्राचीन रचनाएं जो मनुष्य को उसके करने यो

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

0:31
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धर्मशास्त्र धर्म के ऊपर अति उत्तम व्याख्या है धर्मशास्त्र हमें अच्छी शिक्षा मिलती है धर्मशास्त्र पर हमारे पास उसका अधिकारी कार्य करते हैं सदा इन कमर

dharmashastra dharm ke upar ati uttam vyakhya hai dharmashastra hamein achi shiksha milti hai dharmashastra par hamare paas uska adhikari karya karte hain sada in kamar

धर्मशास्त्र धर्म के ऊपर अति उत्तम व्याख्या है धर्मशास्त्र हमें अच्छी शिक्षा मिलती है धर्मश

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