अगर कोई इंसान किसी का सफर में साथ छोड़ दे तो क्या उस इंसान को माफ कर देना चाहिए?...


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En Rajendra Kumar Joshi

Life Coach, Motivator

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नमस्कार आपने कहा कि कोई इंसान अगर सफर में साथ छोड़ दे तो क्या उसे माफ करना चाहिए देखिए सफर कई तरीके के होते हैं आप शायद हम सफर की बात कर रहे हैं अगर एक हमसफर आपका साथ छोड़ देता है उसमें आपको ठंडे दिमाग से सोचना पड़ेगा कि अगर आपका साथ छोटा है तो उसके पीछे क्या कारण था क्या आपके साथी का ही कर्तव्य था कि वह आपका साथ चलता रहता या कहीं ऐसा तो नहीं हुआ कि बीच में आपने उनके साथ चलने में आनाकानी की या फिर आप लोगों का तालमेल आपस में धन से नहीं बैठा और कब बहुत ही व्यर्थ पैसा होता है लेकिन ऐसा भी होता है हरित यही होता है कि जो साथी पछतावा करता है दूसरे साथी के जाने का वह पीड़ित होता है और जो छोड़कर चला गया वह किसी लालच के कारण छोड़कर जाता है अगर कोई आपको अपने लालच के कारण छोड़ कर गया है तो आपको शुक्रगुजार होना चाहिए इस प्रकार के लालची इंसान से आपके मुक्ति के जीवन एक सफर है और इसमें साथी आवाज चाहिए लेकिन ऐसा चाहती नहीं चाहिए जो इस सफर को दुर्बल बना दे आपको दुखों के वातावरण थे उससे तो अच्छा यही है कि आप अकेले चले और अगर कभी मौका मिले कोई ऐसा साथी जिसे आप सच्चा साथ निभाने आए उसको कैसा सफर है सफर में आपको यात्री मिलते रहते हैं उस यात्री अपने साथ चलते हैं खुशियां आपको छोड़कर आगे चल देते हैं तो कुछ यात्रियों को आप छोड़ कर आगे निकल लेते हैं पछतावा मत कीजिए जो यात्री आपके साथ नहीं चल पा रहे उनके बारे में सोचकर अपनी यात्रा को और कठिन ना बनाएं अपना चले आखिर पड़े जब तक यात्रा पूरी करनी है करते रहे धन्यवाद

namaskar aapne kaha ki koi insaan agar safar me saath chhod de toh kya use maaf karna chahiye dekhiye safar kai tarike ke hote hain aap shayad hum safar ki baat kar rahe hain agar ek humsafar aapka saath chhod deta hai usme aapko thande dimag se sochna padega ki agar aapka saath chota hai toh uske peeche kya karan tha kya aapke sathi ka hi kartavya tha ki vaah aapka saath chalta rehta ya kahin aisa toh nahi hua ki beech me aapne unke saath chalne me aanakaani ki ya phir aap logo ka talmel aapas me dhan se nahi baitha aur kab bahut hi vyarth paisa hota hai lekin aisa bhi hota hai harit yahi hota hai ki jo sathi pachtava karta hai dusre sathi ke jaane ka vaah peedit hota hai aur jo chhodkar chala gaya vaah kisi lalach ke karan chhodkar jata hai agar koi aapko apne lalach ke karan chhod kar gaya hai toh aapko shukragujar hona chahiye is prakar ke lalchi insaan se aapke mukti ke jeevan ek safar hai aur isme sathi awaaz chahiye lekin aisa chahti nahi chahiye jo is safar ko durbal bana de aapko dukhon ke vatavaran the usse toh accha yahi hai ki aap akele chale aur agar kabhi mauka mile koi aisa sathi jise aap saccha saath nibhane aaye usko kaisa safar hai safar me aapko yatri milte rehte hain us yatri apne saath chalte hain khushiya aapko chhodkar aage chal dete hain toh kuch yatriyon ko aap chhod kar aage nikal lete hain pachtava mat kijiye jo yatri aapke saath nahi chal paa rahe unke bare me sochkar apni yatra ko aur kathin na banaye apna chale aakhir pade jab tak yatra puri karni hai karte rahe dhanyavad

नमस्कार आपने कहा कि कोई इंसान अगर सफर में साथ छोड़ दे तो क्या उसे माफ करना चाहिए देखिए सफर

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