हम क्या हैं हमारा अस्तित्व क्या है?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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आपका बहुत ही उत्तम है जन कल्याणकारी है मैं आपकी सराहना करूंगा मैं यहां बैठा साइकोलॉजी से देखता हूं आप हम पर यात्रा करने वाले अच्छे सनमार्गा में रहती है यह प्रस्ताव कोई नहीं उठा सकता है केवल वही लोग उठाएंगे जो अंतर यात्रा करना पसंद करते हैं संसार के इंतजार ही लोगों में कोई व्यक्ति कामना से जी रहा है कोई धन की कामना सिद्धि रहा है कोई भौतिक सुखों की प्राप्ति के विभाग रहा है लेकिन कोई अध्यक्ष प्रेमी ही आप जैसा प्रस्तुत आ सकता है यार मानव को सोचना चाहिए आसिफ भगवान ने हमको जन्म दिया क्यों दिया कुछ ना कुछ तो कारण होगा क्योंकि वह आपसे चाहता है क्या आप संसार में जाकर के पन्नों की सेवा करें भलाई के कार्य करें आपका शरीर नहीं आपकी आत्मा है आपका महान है आत्मा अजर अमर है आपको समस्त योग की आवश्यकता है जो कि अब कब वजूद आपका अस्तित्व सम्मानित करेगा वही आपको उन्नति गामी बनाएगा आप सांसारिक बंद करके ऐसी कामना धन की कामना भौतिक सुखों की कामना ना करें यह नश्वर हैं या आप को कुछ नहीं देंगे यदि कुछ करना है तो अपने आप को भगवान में तन्मय करो भगवान के अधीन हो जाओ जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए जो कुछ संसार में हो रहा है सब उनकी कृपा मार्च से हो रहा है हमारे कर्मों के परिणाम हैं वह हमको भी अपने आपको आपका मानते हुए समस्त योग को धारण करें यह आपका ही आपका स्थित है मूलरूप अस्तित्व यही है जम्मू जम्मू में आप देखिए करने हैं वह आपके साथ हैं इस शरीर को आप आत्मा नहीं अभी तो आप नास्तिक बना माने यह तो ठीक उसी प्रकार के हैं जैसे कि मानव शरीर पर कपड़ा धरण करता है तो कपड़ा जो देख धारण कर रहा है वह शरीर है और जो आपने भान जिसने किया है वह आत्मा है ऑफिस शब्द आपका बने आप सभी शिक्षक व्यवहार करें जनहितकारी कार्य करें अपने आप को छल कपट झूठ अन्याय अधर्म की दुनिया से बचाएं दूसरों का साथ अन्याय अधर्म आप कभी ना करें दूसरों की बुराइयों में कभी भी डालें क्योंकि यह सभी रास्ते यह शरीर के कार्य हैं जिनके परिणाम भी शरीर को घूमने होते हैं आपको शुद्ध आत्मा है आत्मा है परमात्मा परम ज्योति के आप एक भाग है अंश और अंश का अपने अलसी के प्रति हमेशा ही लगाव होता है कि आप इतनी पत्थर फेंका प्रकाश की ओर बुक कुछ दूरी तक ऊपर जाएगा जाने के बाद बच्ची पर ही आएगा और आकाश में क्यों नहीं गया कारण क्या है कि पृथ्वी का भाग है पृथ्वी का अंत है वह पृथ्वी उसकी अलसी है पत्थर उसका फंक्शन है इसलिए उसका अपने अलसी के प्रति हमेशा यह लगा होता है आप आग जलाते हैं आप की लव स्टोरी के ऊपर की ओर जाती हैं क्यों भूपति में अंदर नीचे की ओर क्यों नहीं गई उसका कारण क्या है कि सूर्य उसका उत्पत्ति करता है आपका अविशी हुआ आपकी जो लगते हैं आगे है वह कल सुबह इसलिए हमेशा अपनी अलसी की ओर बढ़ता है आपको भी उसी परम ज्योति की है इसलिए आंखों से महत्वम् अंतर आत्मा से परमात्मा बनता है जब वह पति पत्नी ईश्वर ने इतना तन्मय हो जाता है इतना तल्लीन हो जाता है कि जिन से अभी तो आवाज आता है उसी को ही हम तन्मय अवस्था कहेंगे उसी को ही अमृत अवस्था कहते हैं आप सदानंद रूप में जय श्री कृष्णा

aapka bahut hi uttam hai jan kalyaankari hai main aapki sarahana karunga main yahan baitha psychology se dekhta hoon aap hum par yatra karne waale acche sanmarga me rehti hai yah prastaav koi nahi utha sakta hai keval wahi log uthayenge jo antar yatra karna pasand karte hain sansar ke intejar hi logo me koi vyakti kamna se ji raha hai koi dhan ki kamna siddhi raha hai koi bhautik sukho ki prapti ke vibhag raha hai lekin koi adhyaksh premi hi aap jaisa prastut aa sakta hai yaar manav ko sochna chahiye asif bhagwan ne hamko janam diya kyon diya kuch na kuch toh karan hoga kyonki vaah aapse chahta hai kya aap sansar me jaakar ke pannon ki seva kare bhalai ke karya kare aapka sharir nahi aapki aatma hai aapka mahaan hai aatma ajar amar hai aapko samast yog ki avashyakta hai jo ki ab kab wajood aapka astitva sammanit karega wahi aapko unnati gami banayega aap sansarik band karke aisi kamna dhan ki kamna bhautik sukho ki kamna na kare yah nashwar hain ya aap ko kuch nahi denge yadi kuch karna hai toh apne aap ko bhagwan me tanmay karo bhagwan ke adheen ho jao jahi vidhi rakhe ram tahi vidhi rahiye jo kuch sansar me ho raha hai sab unki kripa march se ho raha hai hamare karmon ke parinam hain vaah hamko bhi apne aapko aapka maante hue samast yog ko dharan kare yah aapka hi aapka sthit hai mulrup astitva yahi hai jammu jammu me aap dekhiye karne hain vaah aapke saath hain is sharir ko aap aatma nahi abhi toh aap nastik bana maane yah toh theek usi prakar ke hain jaise ki manav sharir par kapda dharan karta hai toh kapda jo dekh dharan kar raha hai vaah sharir hai aur jo aapne bhan jisne kiya hai vaah aatma hai office shabd aapka bane aap sabhi shikshak vyavhar kare janahitkari karya kare apne aap ko chhal kapat jhuth anyay adharma ki duniya se bachaen dusro ka saath anyay adharma aap kabhi na kare dusro ki buraiyon me kabhi bhi Daalein kyonki yah sabhi raste yah sharir ke karya hain jinke parinam bhi sharir ko ghoomne hote hain aapko shudh aatma hai aatma hai paramatma param jyoti ke aap ek bhag hai ansh aur ansh ka apne aalsi ke prati hamesha hi lagav hota hai ki aap itni patthar fenkaa prakash ki aur book kuch doori tak upar jaega jaane ke baad bachi par hi aayega aur akash me kyon nahi gaya karan kya hai ki prithvi ka bhag hai prithvi ka ant hai vaah prithvi uski aalsi hai patthar uska function hai isliye uska apne aalsi ke prati hamesha yah laga hota hai aap aag jalate hain aap ki love story ke upar ki aur jaati hain kyon bhoopati me andar niche ki aur kyon nahi gayi uska karan kya hai ki surya uska utpatti karta hai aapka avishi hua aapki jo lagte hain aage hai vaah kal subah isliye hamesha apni aalsi ki aur badhta hai aapko bhi usi param jyoti ki hai isliye aakhon se mahatwam antar aatma se paramatma banta hai jab vaah pati patni ishwar ne itna tanmay ho jata hai itna tallinn ho jata hai ki jin se abhi toh awaaz aata hai usi ko hi hum tanmay avastha kahenge usi ko hi amrit avastha kehte hain aap sadanand roop me jai shri krishna

आपका बहुत ही उत्तम है जन कल्याणकारी है मैं आपकी सराहना करूंगा मैं यहां बैठा साइकोलॉजी से द

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