क्या भारतीय शिक्षा प्रणाली को व्यवसायीकरण से जोड़ना चाहिए?...


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Jyoti saxena

Pharmacist

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आपने पूछा है क्या भारतीय शिक्षा प्रणाली को व्यवसाय करण से जोड़ना चाहिए जीमेल आंसर बिल्कुल हां है क्योंकि हमारी जो वर्तमान शिक्षा प्रणाली है वह व्यवसायीकरण के लिए जो चीजें चाहिए इसके अंदर चोट कैसी है जो उसकी गुणवत्ता चाहिए उस पर काम नहीं करती है अभी और आने वाले समय में किसी भी कंपनी में और किसी की जगह पर काम करने के लिए छात्रों के अंदर तिल का होना बहुत जरूरी है यानी कि अगर हम बात करें कि उनकी एजुकेशन है जो उनकी टिकरी है कभी सोता है ऐसा एक भी जवाब नहीं होगी जब तक नहीं डालेंगे वह सॉरी जो एक इंडस्ट्री को चाहिए उसके में तब एक बच्चा इंडस्ट्री के लिए किसी काम का नहीं है यानी शिक्षा देने के बाद भी बेरोजगारी से बढ़ता हुआ जो ग्राहक है वह उसी चीज को इंगित करता है कि हमारी शिक्षा प्रणाली है वो व्यवसायीकरण नहीं दिखाती है इंटरव्यू नहीं बना रहे हैं हम दिल नहीं दे रहे हैं क्योंकि फिट हो सके हमसे हम कहीं भी उस एजुकेशन को अपडेट नहीं कर रहे हैं आज के हिसाब से आज के जो एजुकेशन है उसकी सबसे बड़ी मांग है कि 20 बच्चों को नहीं दे रहे हैं हमारी पूरी जो शिक्षा प्रणाली है वह पिक्चर रोटी कल्पेश है और उस वजह से बेरोजगारी पर प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है तो अगर हमें उसको कम करना है हमें अपने स्टूडेंट को अपने युवाओं को सक्षम बनाना है और कोई जरूरी नहीं कि मैं यहां पर सरकारी नौकरियां प्राइवेट नौकरी की बात कर रही हूं हम उन्हें एक अच्छा इंटरव्यू नतीजे ब्लॉक कर सकते हैं इसके लिए हमारी शिक्षा प्रणाली में व्यवसायीकरण की नीति बहुत ज्यादा जरूरी है

aapne poocha hai kya bharatiya shiksha pranali ko vyavasaya karan se jodna chahiye gmail answer bilkul haan hai kyonki hamari jo vartaman shiksha pranali hai vaah vyavasayikaran ke liye jo cheezen chahiye iske andar chot kaisi hai jo uski gunavatta chahiye us par kaam nahi karti hai abhi aur aane waale samay me kisi bhi company me aur kisi ki jagah par kaam karne ke liye chhatro ke andar til ka hona bahut zaroori hai yani ki agar hum baat kare ki unki education hai jo unki tikri hai kabhi sota hai aisa ek bhi jawab nahi hogi jab tak nahi daalenge vaah sorry jo ek industry ko chahiye uske me tab ek baccha industry ke liye kisi kaam ka nahi hai yani shiksha dene ke baad bhi berojgari se badhta hua jo grahak hai vaah usi cheez ko ingit karta hai ki hamari shiksha pranali hai vo vyavasayikaran nahi dikhati hai interview nahi bana rahe hain hum dil nahi de rahe hain kyonki fit ho sake humse hum kahin bhi us education ko update nahi kar rahe hain aaj ke hisab se aaj ke jo education hai uski sabse badi maang hai ki 20 baccho ko nahi de rahe hain hamari puri jo shiksha pranali hai vaah picture roti kalpesh hai aur us wajah se berojgari par pratidin badhta chala ja raha hai toh agar hamein usko kam karna hai hamein apne student ko apne yuvaon ko saksham banana hai aur koi zaroori nahi ki main yahan par sarkari naukriyan private naukri ki baat kar rahi hoon hum unhe ek accha interview natije block kar sakte hain iske liye hamari shiksha pranali me vyavasayikaran ki niti bahut zyada zaroori hai

आपने पूछा है क्या भारतीय शिक्षा प्रणाली को व्यवसाय करण से जोड़ना चाहिए जीमेल आंसर बिल्कुल

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