क्या आपको लगता है की सोशल मीडिया के आने के बाद रेडीओ की महत्वता कम हो गयी है?...


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Abhishek Kumar Yadav

Expert In Account & Finance, Motivational Speaker& Life Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार मैं अभिषेक यादव जैसा कि लोगों ने प्रश्न पूछा है कि क्या आपको लगता है सोशल मीडिया के आने के बाद जेडीओ का महत्व कम हो गया है तो सबसे पहले मैं आपको बताना चाहूंगा कि लोगों की पसंद आना पसंद बिल्कुल अलग अलग होती है दूसरी चीज होती है एपीडी से जैसे जीते आई थी वह आज भी वैसे ही है अर्जुन नई पीढ़ी है उसकी पसंद कुछ और है मेरे कहने का तात्पर्य है कि सोशल मीडिया पर जो जुड़े हुए लोग हैं कोई ज्यादा कर 1140 केएसके हैं मतलब वह नवीन पुरी या मध्यम नवीन पीड़ित हैं वह लेकिन जो रेडियो जो सुनते हैं लोग जो हमारे बाबा दादा आजा सुनते हैं जो लोग आज भी है वह आज भी रेडियो के ही शौकीन ना हम कभी रेडियो के शौकीन थे ना आज है ना कभी साथ होंगे लेकिन जो उस रेडियो के शौकीन थे वह आज भी हैं और हमेशा उस समय समय की बात होती है वक्त बदल जाते हैं लोगों के शौक नहीं बदलते हैं शौक अक्सर वही होते हैं जो पुराने होते हैं एक कहावत सुनी होगी नाक में ओल्ड इज गोल्ड रेडियो के विविध भारती भले ही पुरानी हो गई हो लेकिन उसके सदाबहार गाने अभी वैसे ही हैं और उसके सदाबहार को संसद आज भी ऐसे ही ऐसे ना जाने से रेडियो के विविध भारतीय की विविधता कदम नहीं हुई है बल्कि व्यवस्था और अच्छी हो गई इतना ही नहीं कुछ नई पीढ़ी के भी लोग हैं जो रेडियो के विरूद्ध भारती को पसंद करते हैं जैसे कि मैं आज भी मैं सुनता हूं तो उसमें के पुराने गाने देते हैं जिसमें से एक मुझे सीख सीखने को मिलती है उसमें कुछ न कुछ चीज होती है जो मुझ सीखने को मिलती है जो जीवन के बारे में सिखाते हैं जो पुराने जो प्राचीन गाने हुआ करते थे उसमें कुछ न कुछ सीखने को मिलते हैं उसके कुछ न कुछ बोल हुआ करते थे उस जाने के कुछ न कुछ उपदेश हुआ करते थे वह बहुत कुछ कहने की कोशिश करता था लेकिन आज के समय जो एफएम है जेल से जितने सोशल मीडिया है यह केवल एक करंट अफेयर्स भरी हुई है उससे ज्यादा कुछ नहीं इस पर जो समाचार होते हैं समाचार भी बहुत ज्यादा मोरल नहीं होते हैं एक मोरल एजुकेशन हमें नहीं रहते हैं यह ज्यादा करेक्ट ऑनलाइन लॉजिक ऊपर काम करते हैं उनकी बुराई करते नहीं मिलेगी कोई भी तो दर्शन चैनल एबीपी चैनल रेडियो चैनल जो पुराने हैं जो चल रहे हैं वह सरकार की बुराई नहीं करते हैं जिओ को नहीं दिखाते हैं अब ऋतिक अभद्रता वशिष्ठ और अभद्रता किसको कहा अश्लीलता से बहुत दूर हैं वह आज भद्रथा के साथ काम करते हैं शिष्टाचार के साथ काम करते हैं और यह समाचार होते हैं उनको भी सुनने वाले थे वह भी सिर्फ के आज भी शुरू कर दिया है क्योंकि जो लोग रेडियो सुनने वाले से बात भी सुनते हैं और हमेशा रहेंगे देश दुनिया की खबरें आती हैं सदाबहार की रंगोली गाने आते सब कुछ बिकता से भरी हुई है इतनी विविधता को अन्य न्यू सोशल मीडिया पर या फेसबुक और व्हाट्सएप पर आपको नहीं देखने को मिलती है आजकल के लोग 2 प्रैक्टिकल हो गए हैं मैं अपने आप को इंक्लूड करके बोलता हूं कि मैं भी बहुत लॉजिकल हूं बहुत ज्यादा पसंद क्योंकि वर्तमान में जीना पसंद करता हूं वर्तमान के पीड़ित हूं लेकिन जो मेरे पिताजी हैं जो उनके पिताजी थे वह लोग इतने प्रैक्टिकल नहीं हुआ करते थे शायद यही कारण था कि उनके अंदर नैतिकता कूट-कूट कर भरी थी वह एक दूसरे को मदद करते थे करते थे उसका कारण यही था कि उन तक जो खबरें पहुंचाई जाती थी वह नैतिक हुआ करती थी उनका नैतिक मनोबल बढ़ता था इसलिए यह दो अलग-अलग चीजें हैं सोशल मीडिया अलग चीज है रेडी वाला चीज है दोनों के फैन फॉलोअर्स अलग अलग है जो रेडियो पसंद करने वाले हैं वह भी रेडियो सुनते हैं जो सोशल मीडिया पर लगे रहते हैं वह भी आज में लगे रहते हैं तो मुझे नहीं लगता कि सोशल मीडिया के आने से रेडियो का के सोशल मीडिया अपने आपको बहुत ज्यादा है जरूर कर दिया लेकिन मैं तो मैं बता दूं आपको कुछ उसके प्रशंसक रेडियो को वह आज भी उनको वह कम नहीं कर पाई है अगर यह मेरा विचार आपको अच्छा लगा सुनने में समझ में आए तो कृपया करके लाइक करिएगा क्योंकि यह बिल्कुल फ्री सेवा है और हम आप तक अपने विचारों को पहुंचाते हैं इसके लिए हम आपके रिप्लाई की अपेक्षा करते हैं क्योंकि आपका एक लाइक हमें ऊर्जा से ओतप्रोत कर देता है धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

namaskar main abhishek yadav jaisa ki logo ne prashna poocha hai ki kya aapko lagta hai social media ke aane ke baad JDO ka mahatva kam ho gaya hai toh sabse pehle main aapko batana chahunga ki logo ki pasand aana pasand bilkul alag alag hoti hai dusri cheez hoti hai APD se jaise jeete I thi vaah aaj bhi waise hi hai arjun nayi peedhi hai uski pasand kuch aur hai mere kehne ka tatparya hai ki social media par jo jude hue log hain koi zyada kar 1140 KSK hain matlab vaah naveen puri ya madhyam naveen peedit hain vaah lekin jo radio jo sunte hain log jo hamare baba dada aajad sunte hain jo log aaj bhi hai vaah aaj bhi radio ke hi shaukin na hum kabhi radio ke shaukin the na aaj hai na kabhi saath honge lekin jo us radio ke shaukin the vaah aaj bhi hain aur hamesha us samay samay ki baat hoti hai waqt badal jaate hain logo ke shauk nahi badalte hain shauk aksar wahi hote hain jo purane hote hain ek kahaavat suni hogi nak me old is gold radio ke vividh bharati bhale hi purani ho gayi ho lekin uske sadabahar gaane abhi waise hi hain aur uske sadabahar ko sansad aaj bhi aise hi aise na jaane se radio ke vividh bharatiya ki vividhata kadam nahi hui hai balki vyavastha aur achi ho gayi itna hi nahi kuch nayi peedhi ke bhi log hain jo radio ke virudh bharati ko pasand karte hain jaise ki main aaj bhi main sunta hoon toh usme ke purane gaane dete hain jisme se ek mujhe seekh sikhne ko milti hai usme kuch na kuch cheez hoti hai jo mujhse sikhne ko milti hai jo jeevan ke bare me sikhaate hain jo purane jo prachin gaane hua karte the usme kuch na kuch sikhne ko milte hain uske kuch na kuch bol hua karte the us jaane ke kuch na kuch updesh hua karte the vaah bahut kuch kehne ki koshish karta tha lekin aaj ke samay jo FM hai jail se jitne social media hai yah keval ek current affairs bhari hui hai usse zyada kuch nahi is par jo samachar hote hain samachar bhi bahut zyada moral nahi hote hain ek moral education hamein nahi rehte hain yah zyada correct online logic upar kaam karte hain unki burayi karte nahi milegi koi bhi toh darshan channel ABP channel radio channel jo purane hain jo chal rahe hain vaah sarkar ki burayi nahi karte hain jio ko nahi dikhate hain ab ritik abhadtrata vashistha aur abhadtrata kisko kaha ashlilata se bahut dur hain vaah aaj bhadratha ke saath kaam karte hain shishtachar ke saath kaam karte hain aur yah samachar hote hain unko bhi sunne waale the vaah bhi sirf ke aaj bhi shuru kar diya hai kyonki jo log radio sunne waale se baat bhi sunte hain aur hamesha rahenge desh duniya ki khabren aati hain sadabahar ki rangoli gaane aate sab kuch bikta se bhari hui hai itni vividhata ko anya new social media par ya facebook aur whatsapp par aapko nahi dekhne ko milti hai aajkal ke log 2 practical ho gaye hain main apne aap ko include karke bolta hoon ki main bhi bahut logical hoon bahut zyada pasand kyonki vartaman me jeena pasand karta hoon vartaman ke peedit hoon lekin jo mere pitaji hain jo unke pitaji the vaah log itne practical nahi hua karte the shayad yahi karan tha ki unke andar naitikta kut kut kar bhari thi vaah ek dusre ko madad karte the karte the uska karan yahi tha ki un tak jo khabren pahunchai jaati thi vaah naitik hua karti thi unka naitik manobal badhta tha isliye yah do alag alag cheezen hain social media alag cheez hai ready vala cheez hai dono ke fan followers alag alag hai jo radio pasand karne waale hain vaah bhi radio sunte hain jo social media par lage rehte hain vaah bhi aaj me lage rehte hain toh mujhe nahi lagta ki social media ke aane se radio ka ke social media apne aapko bahut zyada hai zaroor kar diya lekin main toh main bata doon aapko kuch uske prasanshak radio ko vaah aaj bhi unko vaah kam nahi kar payi hai agar yah mera vichar aapko accha laga sunne me samajh me aaye toh kripya karke like kariega kyonki yah bilkul free seva hai aur hum aap tak apne vicharon ko pahunchate hain iske liye hum aapke reply ki apeksha karte hain kyonki aapka ek like hamein urja se otaprot kar deta hai dhanyavad aapka din shubha ho

नमस्कार मैं अभिषेक यादव जैसा कि लोगों ने प्रश्न पूछा है कि क्या आपको लगता है सोशल मीडिया क

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Rj Shashi

Radio Jockey at Radio Mirchi since 2005

1:29

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किसी का सीन जो पेपर हुआ था लेकिन गाड़ियों में क्या में अभी भी वह ऐसे में चलता था चलता है और चलता रहेगा तो दोस्तों 1GB मिलेगा उसके बाद असाइनी वाली स्पीड की तरफ हम लोग जा रहे हैं इसमें स्मार्टफोन में तो लोग उसी तरीके से अपने आपको और वीडियोस पर ज्यादा देखने हैं तो उधर की मम्मी पापा बहुत बदल चुका है बॉक्सिंग बदल चुका है बदल बॉक्स डिजिटल की तरफ जा रहे हैं वीडियो गाना रसिया

kisi ka seen jo paper hua tha lekin gadiyon mein kya mein abhi bhi vaah aise mein chalta tha chalta hai aur chalta rahega toh doston 1GB milega uske baad assignee wali speed ki taraf hum log ja rahe hain isme smartphone mein toh log usi tarike se apne aapko aur videos par zyada dekhne hain toh udhar ki mummy papa bahut badal chuka hai boxing badal chuka hai badal box digital ki taraf ja rahe hain video gaana rasiya

किसी का सीन जो पेपर हुआ था लेकिन गाड़ियों में क्या में अभी भी वह ऐसे में चलता था चलता है औ

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सोशल मीडिया क्या अनुवाद रेडियो की महत्ता कम हो गई यह कहना कुछ हद तक उचित तो है ही लेकिन कहा गया है कि समय के साथ सारी चीजें बदलती जाती है लेकिन आज भी लोग रेडियो सुनना पसंद करते हैं क्योंकि रेडियो के कार्यक्रमों में जो अच्छी-अच्छी जानकारियां पुराने की नाटक अलग-अलग जानकारियां मिलती है वह बहुत ही सराहनीय है सोशल मीडिया के आने पर कुछ हद तक सही हो सकता है लेकिन मेरी नजर में पूर्णता नहीं क्योंकि मैं तो बराबर है नहीं सुनता हूं और अपने सभी सुनने वालों को भी कह रहा हूं उन्होंने न चाहे रेडियो के सारे कार्यक्रम धन्यवाद

social media kya anuvad radio ki mahatta kam ho gayi yah kehna kuch had tak uchit toh hai hi lekin kaha gaya hai ki samay ke saath saari cheezen badalti jaati hai lekin aaj bhi log radio sunana pasand karte hain kyonki radio ke karyakramon me jo achi achi jankariyan purane ki natak alag alag jankariyan milti hai vaah bahut hi sarahniya hai social media ke aane par kuch had tak sahi ho sakta hai lekin meri nazar me purnata nahi kyonki main toh barabar hai nahi sunta hoon aur apne sabhi sunne walon ko bhi keh raha hoon unhone na chahen radio ke saare karyakram dhanyavad

सोशल मीडिया क्या अनुवाद रेडियो की महत्ता कम हो गई यह कहना कुछ हद तक उचित तो है ही लेकिन क

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सोशल मीडिया के आने के बाद रेडियो की महत्व कम नहीं हुई है और और ज्यादा बढ़ गई है लोग देखना कम सुनना ज्यादा पसंद करते हैं रेडियो में समाचार हो या मनोरंजन कोई भी चीज हो तो ज्यादातर सुनते रहते हैं मेरा मानना बस यही है

social media ke aane ke baad radio ki mahatva kam nahi hui hai aur aur zyada badh gayi hai log dekhna kam sunana zyada pasand karte hain radio mein samachar ho ya manoranjan koi bhi cheez ho toh jyadatar sunte rehte hain mera manana bus yahi hai

सोशल मीडिया के आने के बाद रेडियो की महत्व कम नहीं हुई है और और ज्यादा बढ़ गई है लोग देखना

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या मुझे लगता है कि सोशल मीडिया के आने के बाद रेडियो नाचो है अपना महत्व कहीं न कहीं अपने आप में कम हो चुका है क्योंकि जो सोशल मीडिया चुका है तो कोई भी इंतजार नहीं करता है कि अब रेडियो पर क्रिकेट की कमेंट्री आएगी या फिर जो है वह आपकी फरमाइश जैसे कुछ से कार्यक्रम चलते थे जब हम कॉल लगाने के लिए वेट करते थे हमारा कौन लगता था और फिर जो है वहां से हमारी फरमाइश सुनी जाती थी और फिर वह हमें गाना सुना जाता था लेकिन सोशल मीडिया का जमाना है उस वक्त आप उसे दोबारा सुन सकते हैं डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी रिंगटोन भी लगा सकते हैं क्योंकि सोशल मीडिया में जो है वह कहीं ना कहीं महत्व जो है वह जरूर कम कर दिया है और रेडियो की महत्ता कम करता जा रहा है लेकिन वीडियो एक अपने आप में बड़ा ही अनोखा मनोरंजन का और सूचना आदान-प्रदान का साधन हुआ करता था

kya mujhe lagta hai ki social media ke aane ke baad radio nacho hai apna mahatva kahin na kahin apne aap me kam ho chuka hai kyonki jo social media chuka hai toh koi bhi intejar nahi karta hai ki ab radio par cricket ki commentary aayegi ya phir jo hai vaah aapki faramaish jaise kuch se karyakram chalte the jab hum call lagane ke liye wait karte the hamara kaun lagta tha aur phir jo hai wahan se hamari faramaish suni jaati thi aur phir vaah hamein gaana suna jata tha lekin social media ka jamana hai us waqt aap use dobara sun sakte hain download kar sakte hain aur apni ringtone bhi laga sakte hain kyonki social media me jo hai vaah kahin na kahin mahatva jo hai vaah zaroor kam kar diya hai aur radio ki mahatta kam karta ja raha hai lekin video ek apne aap me bada hi anokha manoranjan ka aur soochna aadaan pradan ka sadhan hua karta tha

क्या मुझे लगता है कि सोशल मीडिया के आने के बाद रेडियो नाचो है अपना महत्व कहीं न कहीं अपने

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Akashmehra

Dancer teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा मिलती भी नहीं है वीडियो का महत्व आज भी नहीं है आज भी लोग रेडी सुनते हैं आज भी लोग रेडियो कितने खुश होते हैं टीवी देखते में नहीं है फोन चलाते हुए नहीं वीडियो आपने देखा बहुत बेस्ट है वीडियो प्लेयर कोई नहीं ले सकता इस दुनिया में

aisa milti bhi nahi hai video ka mahatva aaj bhi nahi hai aaj bhi log ready sunte hain aaj bhi log radio kitne khush hote hain TV dekhte me nahi hai phone chalte hue nahi video aapne dekha bahut best hai video player koi nahi le sakta is duniya me

ऐसा मिलती भी नहीं है वीडियो का महत्व आज भी नहीं है आज भी लोग रेडी सुनते हैं आज भी लोग रेडि

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