नैतिक शिक्षा किन दो शब्दों से मिलकर बना है?...


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vedprakash singh

Psychologist

2:57

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है नैतिक शिक्षा किन दो शब्दों से बना है तो एक है नैतिक मतलब रोज का और एक शिक्षा मतलब क्या नैतिक शिक्षा हो गया एक नैतिक और एक शिक्षा बता दो चीजों से बनाएं मतलब क्या है नित रोज का नीति का शिक्षा एक दूसरा होता है नीतीश और शिक्षा मतलब क्या नीति की जो बात होती है जो शुक्राचार्य है शुक्र नीति इन सब चीजों के देखा जाता है नीति शास्त्र भी आते हैं समाजशास्त्र खगोल शास्त्र भूगर्भ शास्त्र समुंद्र शास्त्र पुंसारी शास्त्रों की बात होती है उसमें जो नीति का जीव विज्ञान है जिसे नीति जो शासन नीति शास्त्र कहते हैं उन दो चीजों से बना है और नैतिक नैतिक मतलब नित रोज का शिक्षा नैतिक नैतिक जो कर्तव्य होता है मतलब जिसके साथ जुहू कर्तव्य करना है उसी कर्तव्य किया जाए दूसरा कर्तव्य ना किया जाए और जिस तरह की शिक्षा दे मतलब हमें किसके साथ पिता के साथ क्या व्यवहार करने माता के साथ बहन के साथ वीडियो के साथ कोई भी दूसरा यही दूसरा होता है जैसे हम किसी और से मिलते तो वही रिश्ता होता हो तो उनके साथ जो दिखी आ जाए तो उन्हीं शिक्षा को देखा जाए तो उन शिक्षकों में नैतिक शिक्षा करते हैं क्योंकि शिक्षा देता है और नित रोज का और क्या देना चाहिए तो उन शिक्षा को हम नैतिक शिक्षा करते हैं दूसरा और कोई शिक्षा नहीं है नैतिक शिक्षा का यही सब मतलब होता है कि नैतिक नित्य कर्म इसको शिक्षा के बाद अपना आपको शिक्षा जोड़ने सकते हो यह नहीं कि आप अपना शिक्षा जोड़ दिया कुछ अपना कुछ नियम जोड़ दिया नहीं एक विशेष कर्तव्य कर्तव्य होता है कि प्रणाम करना है छोटे को बड़े को छोटे बड़े को प्रणाम करेगा बड़े छोटे को प्यार करेगा इन्हीं को जो है सो हम एक कर्तव्य बोलते हैं नहीं तो दूसरा और कोई तरीके नहीं है और सब लोग इन चीजों को अपनी अपनी औरतों में लेते हैं सारे लोग इन चीजों का अपनी अपनी औरतों में लेते हैं क्योंकि सारे लोग अपनी अपनी औरतों में इन चीजों को लेते हैं क्योंकि हर किसी का सोचने का नजरिया अलग होता है कि किसके साथ कैसे बर्ताव किया जाए तो बातचीत का यह सिलसिला होता है किसके साथ कैसा होना चाहिए क्या करना चाहिए इन तरह की को जो शिक्षा दी जाती ने नैतिक शिक्षा का थे इसके बाद भी एक लेवल होता है एक लोक आदमी यह सोचता है कि हमें किसके साथ कैसे व्यवहार में लाने हैं वह खुद डिसीजन करता है इसे हम बोलते हैं यह तो अभी दानिश रशीदिया साधारण आदमी अपनी सोच विचार से जो करते हैं उसका धर्म होता है

aapka sawaal hai naitik shiksha kin do shabdon se bana hai toh ek hai naitik matlab roj ka aur ek shiksha matlab kya naitik shiksha ho gaya ek naitik aur ek shiksha bata do chijon se banaye matlab kya hai neeta roj ka niti ka shiksha ek doosra hota hai nitish aur shiksha matlab kya niti ki jo baat hoti hai jo shukraachaary hai shukra niti in sab chijon ke dekha jata hai niti shastra bhi aate hain samajshastra khagol shastra bhugarbh shastra samundra shastra punsari shastron ki baat hoti hai usme jo niti ka jeev vigyan hai jise niti jo shasan niti shastra kehte hain un do chijon se bana hai aur naitik naitik matlab neeta roj ka shiksha naitik naitik jo kartavya hota hai matlab jiske saath juhoo kartavya karna hai usi kartavya kiya jaaye doosra kartavya na kiya jaaye aur jis tarah ki shiksha de matlab hamein kiske saath pita ke saath kya vyavhar karne mata ke saath behen ke saath video ke saath koi bhi doosra yahi doosra hota hai jaise hum kisi aur se milte toh wahi rishta hota ho toh unke saath jo dikhi aa jaaye toh unhi shiksha ko dekha jaaye toh un shikshakon mein naitik shiksha karte hain kyonki shiksha deta hai aur neeta roj ka aur kya dena chahiye toh un shiksha ko hum naitik shiksha karte hain doosra aur koi shiksha nahi hai naitik shiksha ka yahi sab matlab hota hai ki naitik nitya karm isko shiksha ke baad apna aapko shiksha jodne sakte ho yah nahi ki aap apna shiksha jod diya kuch apna kuch niyam jod diya nahi ek vishesh kartavya kartavya hota hai ki pranam karna hai chote ko bade ko chote bade ko pranam karega bade chote ko pyar karega inhin ko jo hai so hum ek kartavya bolte hain nahi toh doosra aur koi tarike nahi hai aur sab log in chijon ko apni apni auraton mein lete hain saare log in chijon ka apni apni auraton mein lete hain kyonki saare log apni apni auraton mein in chijon ko lete hain kyonki har kisi ka sochne ka najariya alag hota hai ki kiske saath kaise bartaav kiya jaaye toh batchit ka yah silsila hota hai kiske saath kaisa hona chahiye kya karna chahiye in tarah ki ko jo shiksha di jaati ne naitik shiksha ka the iske baad bhi ek level hota hai ek lok aadmi yah sochta hai ki hamein kiske saath kaise vyavhar mein lane hain vaah khud decision karta hai ise hum bolte hain yah toh abhi danish rasidiya sadhaaran aadmi apni soch vichar se jo karte hain uska dharm hota hai

आपका सवाल है नैतिक शिक्षा किन दो शब्दों से बना है तो एक है नैतिक मतलब रोज का और एक शिक्षा

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