धर्म को राजनीती से अलग नहीं किया जा सकता,क्यों?...


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धर्म से राय की अलग-अलग धर्म राजनीति को दिशा दिखाने वाला है धर्म राजनीति को सिद्धांत बातें बताता है धर्म राजनीति को नैतिकता बताता है उदाहरण देकर धर्म राजनीति को चलना सिखाता है उसे बताता है कि उसका प्रजा के प्रति क्या धर्म है प्रकृति के प्रति क्या कारण है

dharm se rai ki alag alag dharm raajneeti ko disha dikhane vala hai dharm raajneeti ko siddhant batein batata hai dharm raajneeti ko naitikta batata hai udaharan dekar dharm raajneeti ko chalna sikhata hai use batata hai ki uska praja ke prati kya dharm hai prakriti ke prati kya karan hai

धर्म से राय की अलग-अलग धर्म राजनीति को दिशा दिखाने वाला है धर्म राजनीति को सिद्धांत बातें

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Anil Dwivedi

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

धर्म और राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता है यह शाश्वत सत्य है क्यों क्योंकि इसके लिए हमें समझना होगा कि धर्म क्या है और राजनीति क्या है धर्म भी सेवा भाव परोपकार सिखाता है राजनीति भी धर्म और सेवा भाव सिखाती है लेकिन सिखाती तो दोनों हैं हमें धर्म भी सिखाती है और राजनीति भी सिखाती है लेकिन सीखने में हम गलती कर जाते हैं धर्म निस्वार्थ सेवा की बात करती है और राजनीति हमेशा गिव एंड टेक के सिद्धांत पर चलती है राजनीति क्या है राजनीति का मतलब यही है कि तुम जैसे आपको याद होगा कि स्वतंत्रता आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस जी ने कहा था कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा इसका मतलब क्या था खून का मतलब क्या खून का मतलब अपनी जान देना नहीं था कि तुम मुझे अपनी जान दे दो मैं तुमको आजादी दूंगा जब जान ही दे दोगे तो आजादी किस बात की तो इसका अर्थ ही अनर्थ में बदल जाता है राजनीति में एक बात प्रचलन में है चलन में है जिसको कि हम लोगों ने पिछले 70 सालों में कम से कम सीखने के लिए तो हजारों साल है हमारे पास लेकिन हम अगर 70 साल से ही सीखना चाहे कि हमने राजनीति और धर्म को क्या सीखा धर्म हमारी व्यक्तिगत क्षमता को बढ़ाता है धर्म हमारी व्यक्तिगत क्षमता को बढ़ाता है अगर हम व्यक्तिगत क्षमता की बात करें तो व्यक्तिगत क्षमता क्या है व्यक्तिगत क्षमता में हमारा आत्मविश्वास है हमारा विल पावर है हमारा अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा है हमें अपने कर्म के अनुसार समाज के लिए कुछ देना चाहिए यह है अब राजनीति क्या है अब राजनीति में जैसा मैंने पहले आपको बता ही दिया कि आप हमें वोट दें या अपना समर्थन दें समर्थन के लिए नारे बाजी बाजी बाजी लोगों की जरूरत पड़ती है वोट के लिए तो फिर वोट की जरूरत पड़ती है तो राजनीति में जब तक यह गिव एंड टेक का हल नहीं होगा गिव एंड टेक क्या है राजनीति में राजनीति में गिवेन टेक क्या है कि आप हमें इस पद के लिए यहां पर अपना वोट दीजिए इस पद के लिए हमें यहां पर अपना समर्थन दीजिए समझ रहे हैं मेरी बात को इन दो चीजों को लेकर के ही राजनीति चलती है राजनीति बहुत अच्छी चीज है राजनीति ने हमेशा देश का नुकसान किया है ऐसा भी नहीं है राजनीति भला भी करती है बशर्ते कि हम इन दो चीजों से ऊपर उठ जाए वोट और समर्थन मत जो हम 5 साल में देते हैं समर्थन जो हमेशा देते हैं इन दोनों को लेकर के जब हम अपनी राजनीति को राजनीति को समझेंगे और राजनीति पर प्रतिक्रिया देंगे क्योंकि राजनीति पर प्रतिक्रिया देना अत्यावश्यक है हिंदुस्तान में डेमोक्रेसी को अपना लिया गया है लेकिन डेमोक्रेसी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई प्रतिक्रिया स्वरुप हमने अपने हायर एजुकेशन में पॉलिटिकल साइंस के ट्रांस शुरू कर दिए दिए करा दिया पॉलिटिकल साइंस में हमें करा दिया पीएचडी करा दिया इस पोलिटिकल साइंस का भला नहीं हुआ जरूर भला हुआ लेकिन इस डेमोक्रेसी के जो लोग हैं उनका भला नहीं हुआ क्योंकि वह इन तीनों चीजों में अंतर नहीं कर पाया इसलिए मेरा अपना खुद का मानना है कि पोलिटिकल एजुकेशन फिर पॉलिटिकल साइंस की डिग्री देने से पूरा नहीं होगा पॉलिटिकल एजुकेशन हमें प्राइमरी स्कूल से चालू करना होगा जब हम अपने क्लास का मॉनिटर चुनते हैं जब हम अपने क्लास का कब प्रतिनिधि चुनते हैं और यह प्रक्रिया प्राइमरी मिडिल स्कूल से शुरू हो जाती है तो यहां पर अगर हम अच्छे प्रतिनिधि को अपने चुनना सीख जाएंगे अपना मॉनिटर अच्छा चुना सीख जाएंगे तो सांसद भी अच्छा चुना सीख जाएंगे विधायक जी चुनना सीख जाएंगे और भी जो भी हैं उनको चलना सीख जाएंगे इसको सीखने का सबसे पहला स्थान हमारा प्राइमरी एजुकेशन ही है

dharm aur raajneeti ko alag nahi kiya ja sakta hai yah shashvat satya hai kyon kyonki iske liye hamein samajhna hoga ki dharm kya hai aur raajneeti kya hai dharm bhi seva bhav paropkaar sikhata hai raajneeti bhi dharm aur seva bhav sikhati hai lekin sikhati toh dono hain hamein dharm bhi sikhati hai aur raajneeti bhi sikhati hai lekin sikhne me hum galti kar jaate hain dharm niswarth seva ki baat karti hai aur raajneeti hamesha give and take ke siddhant par chalti hai raajneeti kya hai raajneeti ka matlab yahi hai ki tum jaise aapko yaad hoga ki swatantrata andolan me subhash chandra bose ji ne kaha tha ki tum mujhe khoon do main tumhe azadi dunga iska matlab kya tha khoon ka matlab kya khoon ka matlab apni jaan dena nahi tha ki tum mujhe apni jaan de do main tumko azadi dunga jab jaan hi de doge toh azadi kis baat ki toh iska arth hi anarth me badal jata hai raajneeti me ek baat prachalan me hai chalan me hai jisko ki hum logo ne pichle 70 salon me kam se kam sikhne ke liye toh hazaro saal hai hamare paas lekin hum agar 70 saal se hi sikhna chahen ki humne raajneeti aur dharm ko kya seekha dharm hamari vyaktigat kshamta ko badhata hai dharm hamari vyaktigat kshamta ko badhata hai agar hum vyaktigat kshamta ki baat kare toh vyaktigat kshamta kya hai vyaktigat kshamta me hamara aatmvishvaas hai hamara will power hai hamara apne kartavya ke prati nishtha hai hamein apne karm ke anusaar samaj ke liye kuch dena chahiye yah hai ab raajneeti kya hai ab raajneeti me jaisa maine pehle aapko bata hi diya ki aap hamein vote de ya apna samarthan de samarthan ke liye nare baazi baazi baazi logo ki zarurat padti hai vote ke liye toh phir vote ki zarurat padti hai toh raajneeti me jab tak yah give and take ka hal nahi hoga give and take kya hai raajneeti me raajneeti me given take kya hai ki aap hamein is pad ke liye yahan par apna vote dijiye is pad ke liye hamein yahan par apna samarthan dijiye samajh rahe hain meri baat ko in do chijon ko lekar ke hi raajneeti chalti hai raajneeti bahut achi cheez hai raajneeti ne hamesha desh ka nuksan kiya hai aisa bhi nahi hai raajneeti bhala bhi karti hai basharte ki hum in do chijon se upar uth jaaye vote aur samarthan mat jo hum 5 saal me dete hain samarthan jo hamesha dete hain in dono ko lekar ke jab hum apni raajneeti ko raajneeti ko samjhenge aur raajneeti par pratikriya denge kyonki raajneeti par pratikriya dena atyavashak hai Hindustan me democracy ko apna liya gaya hai lekin democracy par koi pratikriya nahi di gayi pratikriya swarup humne apne hire education me political science ke trans shuru kar diye diye kara diya political science me hamein kara diya phd kara diya is political science ka bhala nahi hua zaroor bhala hua lekin is democracy ke jo log hain unka bhala nahi hua kyonki vaah in tatvo chijon me antar nahi kar paya isliye mera apna khud ka manana hai ki political education phir political science ki degree dene se pura nahi hoga political education hamein primary school se chaalu karna hoga jab hum apne class ka monitor chunte hain jab hum apne class ka kab pratinidhi chunte hain aur yah prakriya primary middle school se shuru ho jaati hai toh yahan par agar hum acche pratinidhi ko apne chunana seekh jaenge apna monitor accha chuna seekh jaenge toh saansad bhi accha chuna seekh jaenge vidhayak ji chunana seekh jaenge aur bhi jo bhi hain unko chalna seekh jaenge isko sikhne ka sabse pehla sthan hamara primary education hi hai

धर्म और राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता है यह शाश्वत सत्य है क्यों क्योंकि इसके लिए हमें

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धर्म को राजनीति से अलग इसलिए नहीं किया जाता कि अगर धर्म राजनीति को छोड़ना बिछड़ तो राजनीतिक लोग धर्म और व्यक्ति राजनीति चलाने के लिए आगे करते हैं और लोगों को भड़का का धर्म के नाम पर जाति के नाम पर वोट लेकर अब राजनीतिक उल्लू सीधा करना है इसलिए धर्म की राजनीति

dharm ko raajneeti se alag isliye nahi kiya jata ki agar dharm raajneeti ko chhodna bichhad toh raajnitik log dharm aur vyakti raajneeti chalane ke liye aage karte hain aur logo ko bhadaka ka dharm ke naam par jati ke naam par vote lekar ab raajnitik ullu seedha karna hai isliye dharm ki raajneeti

धर्म को राजनीति से अलग इसलिए नहीं किया जाता कि अगर धर्म राजनीति को छोड़ना बिछड़ तो राजनीति

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Nil

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Sunil Kumar Pandey

Editor And Writer

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नमस्कार आपका प्रश्न है धर्म को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता क्यों क्योंकि धर्म और आदमी एक सिक्के के दो पहलू हैं क्योंकि वह राजनीति राजनीति नहीं होती जो धर्म भी होती है क्योंकि धर्म की राजनीति जाएगी तो राजनीति में शुचिता कायम नहीं हो सकती काया बहुत से विचारक का कहते हैं धर्म और राजनीति दोनों जांच के लिए जरूरी है यदि घर पर चलकर आशनीत की जाती है तो वह सभी के लिए कल्याणकारी है ऐसा भारतीय धर्म शास्त्रों में कहा गया है लेकिन काया आजकल कि ऐसा नहीं देख रहा है पराया लोग धर्म और आदमी दोनों को अलग दृश्य देखते हैं मेरी राय में ऐसा नहीं है धर्म के बिना अधूरी है राजनीति के बिना धर्म कार्य दोनों का एक दूसरे की में उन्हें सके लेकिन वह राजनीति है जो धन के साथ कॉल करती है क्या क्योंकि धर्म से युक्त राजनीत हमेशा सही होती है और उसमें जो निर्णय ले जाते हैं और जनहित को ध्यान में रखे जाते हैं धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai dharm ko raajneeti se alag nahi kiya ja sakta kyon kyonki dharm aur aadmi ek sikke ke do pahaloo hain kyonki vaah raajneeti raajneeti nahi hoti jo dharm bhi hoti hai kyonki dharm ki raajneeti jayegi toh raajneeti me shuchita kayam nahi ho sakti kaaya bahut se vicharak ka kehte hain dharm aur raajneeti dono jaanch ke liye zaroori hai yadi ghar par chalkar ashanit ki jaati hai toh vaah sabhi ke liye kalyaankari hai aisa bharatiya dharm shastron me kaha gaya hai lekin kaaya aajkal ki aisa nahi dekh raha hai paraaya log dharm aur aadmi dono ko alag drishya dekhte hain meri rai me aisa nahi hai dharm ke bina adhuri hai raajneeti ke bina dharm karya dono ka ek dusre ki me unhe sake lekin vaah raajneeti hai jo dhan ke saath call karti hai kya kyonki dharm se yukt rajanit hamesha sahi hoti hai aur usme jo nirnay le jaate hain aur janhit ko dhyan me rakhe jaate hain dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है धर्म को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता क्यों क्योंकि धर्म और आदमी

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Prakash sharma

Social Worker

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धर्म को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि धर्म धर्म की जगह है और राजनीति राजनीति राजनीति तो अलग ही अलग नहीं किया जा सकता धर्म का अपना अलग है और राजनीति का अलग जो आज है जो राजनीतिक लोग हैं वह एक धर्म को लेकर उस पे वोट मांगना लिए बहुत ही चर्चा का विषय भी है वैसे क्या हमारे देश में जो हमारा देश है उसमें 130 करोड है कि समथिंग हैं जो और जनता है तो उसमें 28 से 26 28 करोड़ को अल्पसंख्यक मुस्लिम भाई हैं लेकिन जो वोटों का समय आता है तो ऐसा कुछ भी नहीं है जो पार्टी है वह कुछ हिंदुओं को और हिंदू के नाम से उस मुस्लिम के नाम से या कुछ दूसरे सिखों के नाम से साईं के नाम से जो धर्म के नाम पर वोट मौत हुआ तोड़ते हैं यह बहुत गलत बात है सबको साथ दे कितनी सबका साथ सबका विकास धर्म धर्म अपनी जगह है और राजनीति अपनी जगह है धर्म को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और राजनीति को धर्म से अलग ही रखना चाहिए

dharm ko raajneeti se alag nahi kiya ja sakta kyonki dharm dharm ki jagah hai aur raajneeti raajneeti raajneeti toh alag hi alag nahi kiya ja sakta dharm ka apna alag hai aur raajneeti ka alag jo aaj hai jo raajnitik log hain vaah ek dharm ko lekar us pe vote maangna liye bahut hi charcha ka vishay bhi hai waise kya hamare desh me jo hamara desh hai usme 130 crore hai ki something hain jo aur janta hai toh usme 28 se 26 28 crore ko alpsankhyak muslim bhai hain lekin jo voton ka samay aata hai toh aisa kuch bhi nahi hai jo party hai vaah kuch hinduon ko aur hindu ke naam se us muslim ke naam se ya kuch dusre Sikhon ke naam se sai ke naam se jo dharm ke naam par vote maut hua todte hain yah bahut galat baat hai sabko saath de kitni sabka saath sabka vikas dharm dharm apni jagah hai aur raajneeti apni jagah hai dharm ko raajneeti se nahi joda jana chahiye aur raajneeti ko dharm se alag hi rakhna chahiye

धर्म को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि धर्म धर्म की जगह है और राजनीति राजनीति रा

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देखिए राजनीति का अर्थ है वैसी नीति जिसके माध्यम से राजकाज जलाया जाए और राजकाज चलाने के लिए जवाब नीति बना रहे हैं उसमें परोपकार का भाव नहीं हो लोगों की मदद की कल्पना नहीं हो तो फिर क्या राजनीति हुई धर्म का अर्थ क्या है परहित सरिस धर्म नहिं भाई पर पीड़ा सम नहिं हमारे धर्म का आरती है पर दूसरों का भला और जो राजनीति भलाई के रास्ते पर नहीं जाती ईमानदारी के रास्ते पर नहीं जाती स्वार्थ पर आधार हरित राजनीति लोक कल्याणकारी नहीं हो सकती है इसलिए राजनीति को तो बिल्कुल धार्मिक होना चाहिए और राजा को सन्यासी होना चाहिए बहुत-बहुत धन्यवाद

dekhiye raajneeti ka arth hai vaisi niti jiske madhyam se rajkaj jalaya jaaye aur rajkaj chalane ke liye jawab niti bana rahe hain usme paropkaar ka bhav nahi ho logo ki madad ki kalpana nahi ho toh phir kya raajneeti hui dharm ka arth kya hai parhit saris dharm nahi bhai par peeda some nahi hamare dharm ka aarti hai par dusro ka bhala aur jo raajneeti bhalai ke raste par nahi jaati imaandaari ke raste par nahi jaati swarth par aadhar harit raajneeti lok kalyaankari nahi ho sakti hai isliye raajneeti ko toh bilkul dharmik hona chahiye aur raja ko sanyaasi hona chahiye bahut bahut dhanyavad

देखिए राजनीति का अर्थ है वैसी नीति जिसके माध्यम से राजकाज जलाया जाए और राजकाज चलाने के लिए

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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किस तरीके से जनता को हिंदू मुस्लिम या फिर भी हमारे मोदी जी ने कुछ ही समय में इसको कॉल कर दिया मंदिर बनेगा मस्जिद राम जन्मभूमि है उसका आयोजकों को राम मंदिर बनाने के लिए और जो मुसलमान अगर हम जनता समझदार हो जाए तो निश्चित रूप से राजनीति में धर्म को लाते हैं बिना पति के

kis tarike se janta ko hindu muslim ya phir bhi hamare modi ji ne kuch hi samay mein isko call kar diya mandir banega masjid ram janmbhoomi hai uska ayojakon ko ram mandir banane ke liye aur jo musalman agar hum janta samajhdar ho jaaye toh nishchit roop se raajneeti mein dharm ko laate hain bina pati ke

किस तरीके से जनता को हिंदू मुस्लिम या फिर भी हमारे मोदी जी ने कुछ ही समय में इसको कॉल कर द

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

2:08
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राजनीति और धर्म दोनों अलग-अलग है समझने का प्रयास करना चाहिए धर्म एक आध्यात्मिक शांति का प्रतीक है राजनीति शासन को चलाने के लिए जनहितकारी शासन चलाने के लिए जो नीतियों होती है जो राज्य के द्वारा या शासन करने वाले लोगों के द्वारा जो एक्सेप्ट की जाती हैं जो नीतियां होती है बे राजनीति चलाती हैं अब धर्म को राजनीति पर आरोपित करना 183 आप धर्म को राजनीति में जवाब दे सकते हैं तो वह जबरदस्ती का कार्य होता है जबकि दोनों ही अलग-अलग और जो देश धर्म को नहीं मानते तो क्या वे अपना जीवन नहीं जी रहे वहां के लोग या वहां पर शासन गई हो रहा है चाइना को लीजिए और तू भी धर्मपाल अभी भारत में तो धार्मिक सकता है इसलिए हर व्यक्ति अपनी अपनी तांता और चाइना में आप देखिए वहां एक व्यक्ति नहीं बोल सकता है जो शासन है उसके अनुसार काम करना होगा आपको जबकि अन्य देशों में जहां पर धर्म में है वहां पर उन लोगों ने अपने धर्म को जबरदस्ती राजनीति पारित कर दिया कि धर्म के नियमों के अनुसार ही आपको चलना होगा वहां पर जो अन्य धर्मों के मानने वाले हैं विशुद्ध पूर्वक नहीं जी सकते हैं इन सब बातों को ध्यान में रख कर के हमारे संविधान में धार्मिक स्थल प्रदान की है अतः सभी धर्मावलंबी स्वतंत्र हैं लेकिन एक दूसरे पर आरोप ना लगाएं एक दूसरे के धर्म को बतिया ना करें धर्मों को अपशब्द ना करें अपने अपने कर्मों को दूध के साथ पालन करने का अधिकार है

raajneeti aur dharm dono alag alag hai samjhne ka prayas karna chahiye dharm ek aadhyatmik shanti ka prateek hai raajneeti shasan ko chalane ke liye janahitkari shasan chalane ke liye jo nitiyon hoti hai jo rajya ke dwara ya shasan karne waale logo ke dwara jo except ki jaati hain jo nitiyan hoti hai be raajneeti chalati hain ab dharm ko raajneeti par aropit karna 183 aap dharm ko raajneeti mein jawab de sakte hain toh vaah jabardasti ka karya hota hai jabki dono hi alag alag aur jo desh dharm ko nahi maante toh kya ve apna jeevan nahi ji rahe wahan ke log ya wahan par shasan gayi ho raha hai china ko lijiye aur tu bhi dharmpal abhi bharat mein toh dharmik sakta hai isliye har vyakti apni apni tanta aur china mein aap dekhiye wahan ek vyakti nahi bol sakta hai jo shasan hai uske anusaar kaam karna hoga aapko jabki anya deshon mein jaha par dharm mein hai wahan par un logo ne apne dharm ko jabardasti raajneeti paarit kar diya ki dharm ke niyamon ke anusaar hi aapko chalna hoga wahan par jo anya dharmon ke manne waale hain vishudh purvak nahi ji sakte hain in sab baaton ko dhyan mein rakh kar ke hamare samvidhan mein dharmik sthal pradan ki hai atah sabhi dharmavalambi swatantra hain lekin ek dusre par aarop na lagaye ek dusre ke dharm ko batiya na kare dharmon ko apashabd na kare apne apne karmon ko doodh ke saath palan karne ka adhikaar hai

राजनीति और धर्म दोनों अलग-अलग है समझने का प्रयास करना चाहिए धर्म एक आध्यात्मिक शांति का प्

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akhil

Journalist

0:46
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धर्म को केवल राजनीति से नहीं किसी चीज से आप अलग नहीं कर सकते धर्म जो है अलग चीज है और पंत जो है मजहब जो है जो मत है वह लक्ष्य धर्म धर्म धर्म है धर्म का कोई नाम नहीं होता हमारे मंदिरों में धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो जाता क्या सनातन धर्म की जय हो अधर्म की जय हो यह कहा जाता है इसलिए धर्म अलग चीज है मजा वाला चीज है तो धर्म जो है वह किसी चीज से अलग नहीं रखा जा सकता क्योंकि धर्म से ही तो पूरा दुनिया चलती है व्यक्ति का निर्माण होता है व्यक्तित्व का निर्माण होता है समाज का निर्माण होता है थोड़ा अलग से आपको देखना चाहिए यह जरूरी है

dharam ko keval raajneeti se nahi kisi cheez se aap alag nahi kar sakte dharm jo hai alag cheez hai aur pant jo hai majhab jo hai jo mat hai vaah lakshya dharm dharam dharm hai dharm ka koi naam nahi hota hamare mandiro mein dharm ki jai ho adharma ka naash ho jata kya sanatan dharm ki jai ho adharma ki jai ho yah kaha jata hai isliye dharm alag cheez hai maza vala cheez hai toh dharm jo hai vaah kisi cheez se alag nahi rakha ja sakta kyonki dharm se hi toh pura duniya chalti hai vyakti ka nirmaan hota hai vyaktitva ka nirmaan hota hai samaj ka nirmaan hota hai thoda alag se aapko dekhna chahiye yah zaroori hai

धर्म को केवल राजनीति से नहीं किसी चीज से आप अलग नहीं कर सकते धर्म जो है अलग चीज है और पंत

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Kanta Jhanwar

Self Employed

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार देखिए ऐसा नहीं है कि धर्म को राजनीति से अलग नहीं करने का तो सवाल ही नहीं होता है राजनीति में धर्म कहां है हमारे भारत की राजनीति में धर्म कहीं भी बीच में नहीं आता है कुछ पहले कुछ नेता लोग भले ही धर्म को बीच में लाते होंगे या जबरदस्ती प्रचार करते होंगे था लेकिन आज के समय में मुझे ऐसा नहीं कि राजनीति में लोग धर्म को ला रहे हैं पर क्यों कार्य करना है या कोई कार्य अधूरा है उसका सारे प्रमाण के साथ सबका सहयोग लेकर कि वह कोई कार्य को करेंगे उस अब वह धर्म से जुड़ी हुई है यदि कार्यप्रणाली को हम यह नहीं कहेंगे कि यह राजनीति धर्म से जुड़ी तो यह आप अपने मन से निकाल देते की राजनीति धर्म पर चल रही है धर्म पर चल रही होती तब अलग करने की सोचते जब धर्म की राजनीति चल ही नहीं रही है राजनीति तो जानी देश सेवा राष्ट्र सेवा के हिसाब से चल रही है और राष्ट्र को ऊंचा उठाने के लिए चल रही है तो धर्म की बात तो आती नहीं होगी

namaskar dekhiye aisa nahi hai ki dharm ko raajneeti se alag nahi karne ka toh sawaal hi nahi hota hai raajneeti me dharm kaha hai hamare bharat ki raajneeti me dharm kahin bhi beech me nahi aata hai kuch pehle kuch neta log bhale hi dharm ko beech me laate honge ya jabardasti prachar karte honge tha lekin aaj ke samay me mujhe aisa nahi ki raajneeti me log dharm ko la rahe hain par kyon karya karna hai ya koi karya adhura hai uska saare pramaan ke saath sabka sahyog lekar ki vaah koi karya ko karenge us ab vaah dharm se judi hui hai yadi Karya Pranali ko hum yah nahi kahenge ki yah raajneeti dharm se judi toh yah aap apne man se nikaal dete ki raajneeti dharm par chal rahi hai dharm par chal rahi hoti tab alag karne ki sochte jab dharm ki raajneeti chal hi nahi rahi hai raajneeti toh jani desh seva rashtra seva ke hisab se chal rahi hai aur rashtra ko uncha uthane ke liye chal rahi hai toh dharm ki baat toh aati nahi hogi

नमस्कार देखिए ऐसा नहीं है कि धर्म को राजनीति से अलग नहीं करने का तो सवाल ही नहीं होता है

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हेलो जी मैं यकीन करता हूं तुझे ठीक नहीं है कि धर्म को धर्म को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता यह कंफर्टेबल बिल्कुल सही है धर्म को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि अगर धर्म को राजनीति से अलग कर देंगे तो धर्म का जॉब टाइटल पूरी पहले से ही वह राजनीतिक पर आधारित है राजनीतिक दल जैसे कि हमारे देश के अधिकारों के बारे में है उसमें कहीं ना कहीं दम की बात आती है कि जैसे कि राज्य का निर्माण मातृसत्तात्मक देवी सिद्धांत के अनुसार जो बीत गया है इसके अनुसार उसमें राजनीति का कुछ ना कुछ तो धर्म के ऊपर अपना हाथ होता ही है तो इसीलिए राजनीति और धर्म को अलग नहीं किया

hello ji main yakin karta hoon tujhe theek nahi hai ki dharm ko dharm ko raajneeti se alag nahi kiya ja sakta yah Comfortable bilkul sahi hai dharm ko raajneeti se alag nahi kiya ja sakta kyonki agar dharm ko raajneeti se alag kar denge toh dharm ka job title puri pehle se hi vaah raajnitik par aadharit hai raajnitik dal jaise ki hamare desh ke adhikaaro ke bare mein hai usme kahin na kahin dum ki baat aati hai ki jaise ki rajya ka nirmaan matrisattatmak devi siddhant ke anusaar jo beet gaya hai iske anusaar usme raajneeti ka kuch na kuch toh dharm ke upar apna hath hota hi hai toh isliye raajneeti aur dharm ko alag nahi kiya

हेलो जी मैं यकीन करता हूं तुझे ठीक नहीं है कि धर्म को धर्म को राजनीति से अलग नहीं किया जा

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