जीवन क्या है और मनुष्य या कोई भी जीव जन्तु एक निश्चित आयु के बाद क्यों मर जाते है सर मरना भी जरुरी है मगर मरते क्यों है...


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Krishna Singh

Motivational Speaker

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जीवन क्या है और मनुष्य कोई भी जीव जंतु एक निश्चित आयु के बाद क्यों मर जाते हैं सर मरना भी जरूरी है मगर मत देखिए अगर मैं आपको कहूं कि आप एक पौंड का पानी पीती फोंट बनारस जहां पानी बहता नहीं है स्टैग्नेंट होता है आप पिएंगे नहीं पिएंगे अब किसी नदी की अविरल धारा जर्जर बहती जा रही है वहां अगर आपको प्यास लगी तो पानी द्वारा पी लेंगे क्योंकि वह बहती नदी से पानी स्वच्छ है माना उसका सूचक र बराबर चल रहा है अगर वह रुक जाता पाउंड की तरह वह कुछ चक्कर में परिवर्तित हो जाता है गुलाम हो जाता है तो अगर इस चराचर को इस ब्रह्मांड के अंदर सारी चीजें शिथिल हो जाएंगे तो एक चक्कर साहब काम हो जाएगा और संचालित कर होते रहना सतत गतिशील रहना यह एक पशु चक्कर फॉर्म करता है जिसकी वजह से सारी चीजें सही चल रही है अपने घर में आप जिंदा रहेंगे आपका बेटा जिंदा रहेगा उसके भी इतनी पूछते आप जिंदा ही रहेंगे कैसा लगेगा आप बूढ़े भी होते जा रहे हैं लेकिन आप जीवित हैं किस आपकी इच्छा भी है आपके पैसे हाथ पैर काम नहीं कर रहे कुछ नहीं कर लेकिन आप जीवित हो जाएगा तो यह सोचा करो जो चल रहा है सही तरीके से ब्रह्मांड का यही सत्य है और इसको हमें स्वीकार करना चाहिए मरना अर्थात कोई खराब वस्तु नहीं है आप मरते कभी नहीं लिखा की बात तो ये जान लीजिए आपने यह चोला जब पुराना हुआ तो छोड़ दिया आत्मा कभी नहीं मरती आप अर्थात आत्मा नया चोला धारण किया आपके पिछले कर्मों के हिसाब से अब नया चोला धारण करके नया पाठ बजाएंगे अब उसी में रहेंगे और शरीर जर्जर होता जा रहा है कितना बड़ा कुचक्र हो तुम मरते इसलिए हैं अब मरना अर्थात बहुत ही अच्छी चीज है आपके शरीर जब काम नहीं करी अब अपने चोला धारण कर रहे हैं उसमें अपना पाठ बाजार है ऐसे ही चक्कर चल रहा है तो बहुत अच्छी चीज है

jeevan kya hai aur manushya koi bhi jeev jantu ek nishchit aayu ke baad kyon mar jaate hain sir marna bhi zaroori hai magar mat dekhiye agar main aapko kahun ki aap ek pond ka paani piti font banaras jaha paani bahta nahi hai staignent hota hai aap piyenge nahi piyenge ab kisi nadi ki aviral dhara jarjar behti ja rahi hai wahan agar aapko pyaas lagi toh paani dwara p lenge kyonki vaah behti nadi se paani swachh hai mana uska suchak r barabar chal raha hai agar vaah ruk jata pound ki tarah vaah kuch chakkar me parivartit ho jata hai gulam ho jata hai toh agar is charachar ko is brahmaand ke andar saari cheezen shithil ho jaenge toh ek chakkar saheb kaam ho jaega aur sanchalit kar hote rehna satat gatisheel rehna yah ek pashu chakkar form karta hai jiski wajah se saari cheezen sahi chal rahi hai apne ghar me aap zinda rahenge aapka beta zinda rahega uske bhi itni poochhte aap zinda hi rahenge kaisa lagega aap budhe bhi hote ja rahe hain lekin aap jeevit hain kis aapki iccha bhi hai aapke paise hath pair kaam nahi kar rahe kuch nahi kar lekin aap jeevit ho jaega toh yah socha karo jo chal raha hai sahi tarike se brahmaand ka yahi satya hai aur isko hamein sweekar karna chahiye marna arthat koi kharab vastu nahi hai aap marte kabhi nahi likha ki baat toh ye jaan lijiye aapne yah chola jab purana hua toh chhod diya aatma kabhi nahi marti aap arthat aatma naya chola dharan kiya aapke pichle karmon ke hisab se ab naya chola dharan karke naya path bajaenge ab usi me rahenge aur sharir jarjar hota ja raha hai kitna bada kuchakra ho tum marte isliye hain ab marna arthat bahut hi achi cheez hai aapke sharir jab kaam nahi kari ab apne chola dharan kar rahe hain usme apna path bazaar hai aise hi chakkar chal raha hai toh bahut achi cheez hai

जीवन क्या है और मनुष्य कोई भी जीव जंतु एक निश्चित आयु के बाद क्यों मर जाते हैं सर मरना भी

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लगभग सभी सजीवों में एक निश्चित आई होती है और एक निश्चित उम्र उनका जो है परिवर्तन का समय होता है जैसे कि जितने भी सजीव है एक निश्चित अवस्था में और एक निश्चित समय अंतराल में अपनी जो है वह अपने स्वरूप को अपने अस्तित्व को बचाए रखते हुए लेकिन अपनी खुद का नेता को खो देते हैं जैसे कि माना जाए कि एक आदमी जो बच्चा होता है वह किसी का बच्चा होता है फिर वह कि वह किसी बच्चे को पैदा करता है फिर उसका भरण पोषण करता फिरता है इस प्रकार से सजी प्रोडक्शन और यह वैज्ञानिक कारण तो सबसे पहले सजीव के जितने भी सजीव बने हैं वह छोटी-छोटी सेल से बना हुआ होता है और जीवन की एक मौलिक इकाई जो है मैन यूनिट ऑफ लिविंग फॉर एक्सेल होती है एक कोशिका हर एक हर एक जीव अपनी अपनी एक विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना हुआ होता है तो उसकी शरीर की जो भी कोशिकाएं होती है उसकी एक निश्चित आयु के बाद वह धीरे-धीरे अपने आप में तीन होते चला जाता है तो यह इसी चीन होने के वजह से एक समय ऐसा भी आता है कि उनका काम और स्थिति बहुत ही गंभीर और बहुत ही नाजुक हो जाती है तो उस टाइम में आकर वह उसका बिल नहीं रहता है कि जिस कारण वह पहले रहता है तो इसकी वजह से भी इंसान मरता है या फिर कहिए तो पेड़ पौधे सूख जाते हैं तो बहुत सारी हर चीज हर एक जीवन में जितने भी शादी में सबका एक जीवन एक लक्षण है और यही लगभग सजीव और निर्जीव के बीच अंतर भी और सबसे बड़ा कारण भी है और बहुत कुछ भी हैं धन्यवाद

lagbhag sabhi sajivon mein ek nishchit I hoti hai aur ek nishchit umr unka jo hai parivartan ka samay hota hai jaise ki jitne bhi sajeev hai ek nishchit avastha mein aur ek nishchit samay antaral mein apni jo hai vaah apne swaroop ko apne astitva ko bachaye rakhte hue lekin apni khud ka neta ko kho dete hain jaise ki mana jaaye ki ek aadmi jo baccha hota hai vaah kisi ka baccha hota hai phir vaah ki vaah kisi bacche ko paida karta hai phir uska bharan poshan karta phirta hai is prakar se saji production aur yah vaigyanik karan toh sabse pehle sajeev ke jitne bhi sajeev bane hain vaah choti choti cell se bana hua hota hai aur jeevan ki ek maulik ikai jo hai man unit of living for excel hoti hai ek koshika har ek har ek jeev apni apni ek vibhinn prakar ki koshikaaon se milkar bana hua hota hai toh uski sharir ki jo bhi koshikayen hoti hai uski ek nishchit aayu ke baad vaah dhire dhire apne aap mein teen hote chala jata hai toh yah isi china hone ke wajah se ek samay aisa bhi aata hai ki unka kaam aur sthiti bahut hi gambhir aur bahut hi naajuk ho jaati hai toh us time mein aakar vaah uska bill nahi rehta hai ki jis karan vaah pehle rehta hai toh iski wajah se bhi insaan marta hai ya phir kahiye toh ped paudhe sukh jaate hain toh bahut saree har cheez har ek jeevan mein jitne bhi shadi mein sabka ek jeevan ek lakshan hai aur yahi lagbhag sajeev aur nirjeev ke beech antar bhi aur sabse bada karan bhi hai aur bahut kuch bhi hain dhanyavad

लगभग सभी सजीवों में एक निश्चित आई होती है और एक निश्चित उम्र उनका जो है परिवर्तन का समय हो

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अपने कर्तव्यों का पालन करना ही जीवन है और इसके साथ ही सवाल है कि मरते क्यों आपको मैं साइंस से नहीं समझा लूंगा तंत्रिका तंत्र जो है कार्यप्रणाली जो है शरीर की वह कमजोर होने लगती है फिर आपने बिल्कुल आप एक किस दे जिससे आप रह रहे हो वह ब्रह्मांड तक आपने शायद नियम ना पढ़ा हो तो नियम है कि जो बिग बैंग हुआ है तो हमारा जो ब्रह्मांड को फैल रहा है खेल रहा है खेल रहा है एक निश्चित स्थिति के प्रति जाकर वह फिर वापिस स्कूल नहीं लगेगा और वापिस मटर के दाने जितना बन जाएगा तो एक निश्चित सीमा तक कोई भी चीज होती है पूरे ब्रह्मांड में ऐसे नहीं कि जीवन में पेड़ पौधे देख लीजिए आप जीवन देख आप मानेंगे नहीं यहां तक कि पर्वत जब एक पर्वत बनता है प्लेट टेक्टोनिक होगी और पर्वत बनेगा वलित पर्वत की ऊंचाई तक जाएगा एक निश्चित सीमा पार करने के बाद अब हवाओ से काटना शुरु कर दू संतुलन बनाने के लिए मरना जरूरी है किसी भी चीज का अपरदन मान लीजिए इसे जो अपना हिमालय है वह नव वलित पर्वत अभी वह बढ़ रहा है 8848 8850 अरावली पर्वत है वह पूरा अपार्ट होने लग रहा है रोशन हो रहा है तो मुझे लगता है आप समझ

apne kartavyon ka palan karna hi jeevan hai aur iske saath hi sawaal hai ki marte kyon aapko main science se nahi samjha lunga tantrika tantra jo hai Karya Pranali jo hai sharir ki vaah kamjor hone lagti hai phir aapne bilkul aap ek kis de jisse aap reh rahe ho vaah brahmaand tak aapne shayad niyam na padha ho toh niyam hai ki jo big bang hua hai toh hamara jo brahmaand ko fail raha hai khel raha hai khel raha hai ek nishchit sthiti ke prati jaakar vaah phir vaapas school nahi lagega aur vaapas matar ke daane jitna ban jaega toh ek nishchit seema tak koi bhi cheez hoti hai poore brahmaand mein aise nahi ki jeevan mein ped paudhe dekh lijiye aap jeevan dekh aap manenge nahi yahan tak ki parvat jab ek parvat banta hai plate tectonic hogi aur parvat banega walit parvat ki uchai tak jaega ek nishchit seema par karne ke baad ab havao se kaatna shuru kar do santulan banane ke liye marna zaroori hai kisi bhi cheez ka aparadan maan lijiye ise jo apna himalaya hai vaah nav walit parvat abhi vaah badh raha hai 8848 8850 aravalli parvat hai vaah pura apart hone lag raha hai roshan ho raha hai toh mujhe lagta hai aap samajh

अपने कर्तव्यों का पालन करना ही जीवन है और इसके साथ ही सवाल है कि मरते क्यों आपको मैं साइंस

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