एक छोटा परिवार होने के बावजूद, परिवार के परामर्शदाता की तलाश करना क्यों महत्वपूर्ण होता जा रहा है?...


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Nita Nayyar

Writer ,Motivational Speaker, Social Worker n Counseller.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

परिवार चाहे छोटा हो या बड़ा हो उसमें एक परामर्शदाता की आवश्यकता हमेशा रहती है और मेरा मानना यह है कि घर का मुखिया पिता होता है उसके बाद दूसरे स्थान पर मां का स्थान है यदि घर के मुखिया पिता और उनके साथ जुड़ी हुई माता दोनों ही समझदार हैं तो आप दोनों को ही परामर्शदाता के रूप में स्वीकार कर सकते हैं भले ही परिवार छोटा हो या कि बड़ा हो हर वक्त हमें कोई डिसीजन ऐसे लेने होते हैं जिसमें हमें किसी ना किसी बड़े की सलाह की जरूरत होती है कई घरों में मैंने देखा है कि साथ में माता-पिता रहते हैं बुजुर्ग साथ 70 साल से ऊपर उनको किसी भी सलाह में शामिल नहीं किया जाता जो कि गलत है हम परामर्शदाता के रूप में उनको मैं तो देते हुए उनकी सलाह का भी स्वागत कर सकते हैं क्योंकि उनके पास क्या है उनके पास अनुभव है और अनुभव भी एक तरीके से एक टीचर का ही काम करता है और सही परामर्श आपको दे सकता है क्योंकि उन्होंने जीवन के उतार-चढ़ाव देखे होते हैं कई बार उन्हीं रास्तों से खून निकले होते हैं जिन पर आप आजकल चल रहे हैं तो परिवार छोटे और बड़े होने का सवाल नहीं है आपके परिवार में एक परामर्शदाता अच्छा सा जो सही सलाह दे सके होना चाहिए लेकिन मैं अक्सर देखती हूं आजकल हम पिता को मुखिया की पद पर बैठा तो देते हैं लेकिन पिता कई बार शराब पीते हैं कई बहुत अभी होते हैं कई जुआ खेलने वाले होते हैं कई पब में जाने वाले होते हैं कई और कई तरीके के गलत हरकतों में शामिल होते हैं तो ऐसे पिता की सलाह लेना तो बहुत ही मुश्किल हो जाएगा युवा लोगों के लिए तो जब आप एटीन इयर्स के हो जाएं तो आप कोशिश करिए कि आप किसी एक अपने पुराने अच्छे टीचर से जुड़ी है जो आपको आपके जीवन के बारे में सही सलाह दें और आप को सही रास्ता दिखाए क्योंकि मैं देखती हूं मैं जब रिटायर नहीं भी हुई थी या अब रिटायर हो गई हूं तो भी बहुत से मेरे पुराने स्टूडेंट्स मेरे पास आते हैं क्योंकि उन्होंने क्लास में मेरे लेक्चर सुने होते हैं कि मैडम हमें सही बात बता सकती हैं कई बार वह कहते हैं कि हमें हमारे माता-पिता नहीं गाइड कर पा रहे हैं आप हमें बताइए कि हम जीवन के इस निश्चय को या इस लक्ष्य को कैसे हासिल करें तो आप भी अपने जीवन में कोई अपनी पुरानी टीचर या कोई बुजुर्ग या मौसी जो आपको अच्छी लगती हैं उनसे सलाह ले सकते हैं

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परिवार चाहे छोटा हो या बड़ा हो उसमें एक परामर्शदाता की आवश्यकता हमेशा रहती है और मेरा मानन

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Vinod Kumar Pandey

Life Coach | Career Counsellor ::Relationship Counsellor :: Parenting Counsellor

2:31
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आपने जो प्रश्न किया है उसका उत्तर में मैं यही कहना चाह रहा हूं कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि आज लोग अच्छी शिक्षा लेकर के एक बड़ी नौकरी पा जा रहे हैं लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी हो रही है लेकिन एक परिवार को चलाना वह नहीं सीख पा रहे हैं यह ध्यान रखना होगा कि परिवार को चलाना काफी हद तक सामाजिकता पर आधारित होता है और कहीं स्कूल कॉलेज में सामाजिकता बच्चे में कैसे विकसित हो इसको नहीं सिखाया जा रहा है और यही कारण है कि लोग अपने जीवन में आर्थिक रूप से संपन्न होते चले जा रहे हैं लेकिन कहीं ना कहीं अपने पारिवारिक संबंधों को बनाने में असफल हो रहे हैं और इसीलिए हर एक व्यक्ति कहीं ना कहीं उसको ऐसी जरूरत लगती है कि कोई तो फैमिली काउंसलर है उनकी मदद करें कि ध्यान रखना होगा कि हमारी एजुकेशन सिस्टम कि यह थोड़ी गड़बड़ी है कि हमें ना एजुकेशन सिस्टम ने सिखाया जाता है कि हमें अपने जीवन में अपने जीवन को कैसे अच्छे से जी हैं अपने संबंधों को कैसे से अच्छे से निभाया अपने परिवार को कैसे संभाले और यही कारण है कि ना स्कूल कॉलेज में सिखाया जाता है और ना ही हमें घर परिवार में सुख जाता है लोगों के अंदर स्वार्थ की भावना बढ़ती जा रही है लोग कंपटीशन के वशीभूत होकर के जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं यही कारण है कि लोग बच्चों के अंदर जो वास्तविक सामाजिकता होनी चाहिए वैसा विकसित नहीं हो पा रहा है यही कारण है कि लोग आज सामाजिक संबंधों को बहुत महत्व नहीं दे रहे हैं उस सिर्फ और सिर्फ पैसे या धन को महत्व दे रहे हैं या अपने स्वार्थ को महत्व दे रहे हैं यही कारण है कि उनको जीवन में वह सारी चीजें तो मिल रहे हैं लेकिन कहीं न फिल्म का संबंध होता चला जा रहा है और इसीलिए लोग चुका जो पारिवारिक जो संबंध है वह कहीं खेल होता नजर आ रहा है इसलिए बहुत जरूरत है इस बात की होती है कि आप चाहे जिस परिस्थिति में हो जैसे हो लेकिन आप इन चीजों को सीखने की जरूर जरूर करें हमेशा सामाजिक संबंधों को महत्व दें क्योंकि जब तक आपके पास आपका उससे अच्छा परिवार नहीं है तब तक जीवन सारी चीजें आपके लिए किसी भी काम की नहीं है इसलिए जरूरत इस बात की है कि हम अपनी पढ़ाई जो भी रखें हम जो भी शिक्षा ले लेकिन उसके साथ साथ समाज में कैसे जीना है सामाजिकता जरूरी है परिवार के साथ कैसे जिए अपने सामाजिक संबंधों को कैसे निभाए यह भी बहुत जरूरी है इसको सीखते रहें और जहां भी जरूरत लगे आप उसके जो स्पेसलिस्ट है जो काउंसलर हैं उनसे जरूर मदद लें क्योंकि यह बहुत जरूरी होता है और बहुत अति आवश्यक है मेरी शुभकामनाएं प्ले धन्यवाद

aapne jo prashna kiya hai uska uttar me main yahi kehna chah raha hoon ki aisa isliye ho raha hai ki aaj log achi shiksha lekar ke ek badi naukri paa ja rahe hain logo ki aarthik sthiti bahut achi ho rahi hai lekin ek parivar ko chalana vaah nahi seekh paa rahe hain yah dhyan rakhna hoga ki parivar ko chalana kaafi had tak samajikta par aadharit hota hai aur kahin school college me samajikta bacche me kaise viksit ho isko nahi sikhaya ja raha hai aur yahi karan hai ki log apne jeevan me aarthik roop se sampann hote chale ja rahe hain lekin kahin na kahin apne parivarik sambandhon ko banane me asafal ho rahe hain aur isliye har ek vyakti kahin na kahin usko aisi zarurat lagti hai ki koi toh family counselor hai unki madad kare ki dhyan rakhna hoga ki hamari education system ki yah thodi gadbadi hai ki hamein na education system ne sikhaya jata hai ki hamein apne jeevan me apne jeevan ko kaise acche se ji hain apne sambandhon ko kaise se acche se nibhaya apne parivar ko kaise sambhale aur yahi karan hai ki na school college me sikhaya jata hai aur na hi hamein ghar parivar me sukh jata hai logo ke andar swarth ki bhavna badhti ja rahi hai log competition ke vashibhut hokar ke jeevan me aage badhne ki koshish kar rahe hain yahi karan hai ki log baccho ke andar jo vastavik samajikta honi chahiye waisa viksit nahi ho paa raha hai yahi karan hai ki log aaj samajik sambandhon ko bahut mahatva nahi de rahe hain us sirf aur sirf paise ya dhan ko mahatva de rahe hain ya apne swarth ko mahatva de rahe hain yahi karan hai ki unko jeevan me vaah saari cheezen toh mil rahe hain lekin kahin na film ka sambandh hota chala ja raha hai aur isliye log chuka jo parivarik jo sambandh hai vaah kahin khel hota nazar aa raha hai isliye bahut zarurat hai is baat ki hoti hai ki aap chahen jis paristhiti me ho jaise ho lekin aap in chijon ko sikhne ki zaroor zaroor kare hamesha samajik sambandhon ko mahatva de kyonki jab tak aapke paas aapka usse accha parivar nahi hai tab tak jeevan saari cheezen aapke liye kisi bhi kaam ki nahi hai isliye zarurat is baat ki hai ki hum apni padhai jo bhi rakhen hum jo bhi shiksha le lekin uske saath saath samaj me kaise jeena hai samajikta zaroori hai parivar ke saath kaise jiye apne samajik sambandhon ko kaise nibhaye yah bhi bahut zaroori hai isko sikhate rahein aur jaha bhi zarurat lage aap uske jo spesalist hai jo counselor hain unse zaroor madad le kyonki yah bahut zaroori hota hai aur bahut ati aavashyak hai meri subhkamnaayain play dhanyavad

आपने जो प्रश्न किया है उसका उत्तर में मैं यही कहना चाह रहा हूं कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि आ

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गोपाल पांडेय

Journalist, Counselor, motivational speaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों मैं गोपाल पांडे या बहुत जरूरी क्वेश्चन है कि छोटा परिवार होने के बावजूद परिवार की ब्राह्मण सरिता की तलाश क्यों महत्वपूर्ण होती जा रही है इसका रीजन यह है कि प्राचीन समय में हमारे समाज में परिवार हुआ करते थे जो बहुत ही विशाल हुआ करते थे जिसमें बहुत सारे लोग होते थे बहुत से संबंध स्थापित करना पड़ता था जिस देश में लोगों को एक आती है रिलेशनशिप में रहना पड़ता था जिसमें बच्चों को दादा-दादी नाना-नानी चाचा चाची मामा मामी की सारी चीजें मिला करती थी जिस आरो का स्नेह मिला करता था इस वजह से उस समय के बच्चे थे उनके मन में कुछ भी भावनाएं होती थी वह सीधा किसी ना किसी से वह पूछ लिया करते थे दादा दादी जो होते थे वह विशेष तौर पर बच्चों को से बहुत कुछ नहीं किया करते थे इसलिए की वजह से जो दादा-दादी और बच्ची का जो रिलेशनशिप बिल्ड अप फॉर करता था वह बड़ा स्ट्रांग हुआ करता था तो इस वजह से होता यह था कि उस समय दादा-दादी बच्चों के गुरु हुआ करते थे इस वजह से उनके जो संस्कार हुआ करते थे वह बहुत ही उच्च कोटि के हुआ करते क्योंकि यह संस्कार हमें कोई भी एकेडमी के अच्छे-अच्छे भी इंस्टिट्यूट में पढ़ाई कर ले लेकिन जो भावनात्मक रिलेशन होता है यह हमें सिर्फ और सिर्फ परिवार से मिला करता है अगर हम स्मॉल फैमिली में रहते हैं तो उसमें मम्मी पापा और भाई या बहन इसके सिवा कोई नहीं होता लेकिन जब हम किसी विशाल परिवार में रहते हैं वह हमें अण्यनेशन के बहुत से लोग मिलते हैं दादा दादी का स्नेह मिलता है या बहुत ही जरूरी है कि अगर बच्चा कोई गलती करें तो उसे जानने पहचानने महसूस करने वाला कुछ होता था परिवार में लेकिन आज के दौर में ऐसा कुछ नहीं है आज के दौर में ऋषि भी है कि बच्चा क्या कर रहा है मम्मी पापा को उससे कोई मतलब नहीं होता आज के दौर में तो सिर्फ एक चीज है कि बच्चा पढ़ाई कर पढ़ाई कर कैरियर कैरियर कैरियर क्या करोगे ऐसे कैरियर बना कैसे पैसे कमाते जिसमें इंसान सिर्फ पैसे कमाने की मशीन बन जाता है तो ऐसी मशीन बनाने से अच्छा है कि आप समाज को एक ऐसे व्यक्तित्व दो जिसमें लोग महात्मा गांधी जैसे निकले स्वामी विवेकानंद जैसे निकले गौतम बुद्ध जैसे निकले लेकिन आजकल दो आजकल के लोग उसी के लिए चाहते हैं कि हमारा बेटा सिर्फ और सिर्फ अनिल अंबानी मुकेश अंबानी जैसे उद्योगपति और पैसे वाला रहे मेरे हिसाब से तो यह है कि ऐसी शिक्षा देने से अच्छा परिवारिक शिक्षा पर जोर दिया जाए परिवार का महत्व बताया जाए लोगों लोगों का जुड़ाव रहे तो ज्यादा अच्छा होगा सिर्फ यही रीजन है आजकल कुछ पैसे की खातिर परामर्शदाता के पास पहुंच जाते हैं जिससे ऐसा लगता है कि हम यहां पर खर्चा किए वह परामर्श करेगा और हमारे बच्चे सुधर जाएंगे जिससे हमारी छोटी सी जिंदगी बहुत अच्छी हो जाएगी लेकिन दोस्तों ऐसा नहीं होता या सिर्फ और सिर्फ अपने मन को शांत करने की भावनाएं होती है इसी के साथ ई हद कर दी मस्त रहें हंसते रहें गाते रहें और दिन ही बनाते रहें धन्यवाद

namaskar doston main gopal pandey ya bahut zaroori question hai ki chota parivar hone ke bawajud parivar ki brahman sarita ki talash kyon mahatvapurna hoti ja rahi hai iska reason yah hai ki prachin samay me hamare samaj me parivar hua karte the jo bahut hi vishal hua karte the jisme bahut saare log hote the bahut se sambandh sthapit karna padta tha jis desh me logo ko ek aati hai Relationship me rehna padta tha jisme baccho ko dada dadi nana naani chacha chachi mama mami ki saari cheezen mila karti thi jis RO ka sneh mila karta tha is wajah se us samay ke bacche the unke man me kuch bhi bhaavnaye hoti thi vaah seedha kisi na kisi se vaah puch liya karte the dada dadi jo hote the vaah vishesh taur par baccho ko se bahut kuch nahi kiya karte the isliye ki wajah se jo dada dadi aur bachi ka jo Relationship build up for karta tha vaah bada strong hua karta tha toh is wajah se hota yah tha ki us samay dada dadi baccho ke guru hua karte the is wajah se unke jo sanskar hua karte the vaah bahut hi ucch koti ke hua karte kyonki yah sanskar hamein koi bhi academy ke acche acche bhi institute me padhai kar le lekin jo bhavnatmak relation hota hai yah hamein sirf aur sirf parivar se mila karta hai agar hum small family me rehte hain toh usme mummy papa aur bhai ya behen iske siva koi nahi hota lekin jab hum kisi vishal parivar me rehte hain vaah hamein anyaneshan ke bahut se log milte hain dada dadi ka sneh milta hai ya bahut hi zaroori hai ki agar baccha koi galti kare toh use jaanne pahachanne mehsus karne vala kuch hota tha parivar me lekin aaj ke daur me aisa kuch nahi hai aaj ke daur me rishi bhi hai ki baccha kya kar raha hai mummy papa ko usse koi matlab nahi hota aaj ke daur me toh sirf ek cheez hai ki baccha padhai kar padhai kar carrier carrier carrier kya karoge aise carrier bana kaise paise kamate jisme insaan sirf paise kamane ki machine ban jata hai toh aisi machine banane se accha hai ki aap samaj ko ek aise vyaktitva do jisme log mahatma gandhi jaise nikle swami vivekananda jaise nikle gautam buddha jaise nikle lekin aajkal do aajkal ke log usi ke liye chahte hain ki hamara beta sirf aur sirf anil ambani mukesh ambani jaise udyogpati aur paise vala rahe mere hisab se toh yah hai ki aisi shiksha dene se accha pariwarik shiksha par jor diya jaaye parivar ka mahatva bataya jaaye logo logo ka judav rahe toh zyada accha hoga sirf yahi reason hai aajkal kuch paise ki khatir paramarshadata ke paas pohch jaate hain jisse aisa lagta hai ki hum yahan par kharcha kiye vaah paramarsh karega aur hamare bacche sudhar jaenge jisse hamari choti si zindagi bahut achi ho jayegi lekin doston aisa nahi hota ya sirf aur sirf apne man ko shaant karne ki bhaavnaye hoti hai isi ke saath E had kar di mast rahein hansate rahein gaate rahein aur din hi banate rahein dhanyavad

नमस्कार दोस्तों मैं गोपाल पांडे या बहुत जरूरी क्वेश्चन है कि छोटा परिवार होने के बावजूद पर

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Narshi Ram Aazad

Agriculture Expert Or Motivational Speaker

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नेगी जी आप का प्रश्न है कि छोटा परिवार होने के बावजूद परिवार के परामर्शदाता की आवश्यकता क्यों पड़ती है तो मैं आपको बता देना चाहता हूं कि हम जो है परिवार में अच्छा छोटा परिवार हम एक दूसरे की जो बात को एक्सेप्ट नहीं करते वाली सबसे बड़ी कारण है या बड़ा जो कारण यही है कि हम एक ऐसी परामर्शदाता की आवश्यकता पड़ती है कि हम एक दूसरे को समझ नहीं पाते और कोई दूसरी बात को एक्सेप्ट नहीं करते अगर हम एक दूसरे की बातों को स्वीकार करना सीख गए तब हमें दुनिया में किसी भी प्रदाता की आवश्यकता नहीं पड़ेगी तो मैं आपसे यही कहूंगा कि एक दूसरे की जो किसी की अगर गलती हो तो उसको मैंने कोई आपकी गलती तो तुम मानने को तैयार हूं आप और दूसरा आपको कोई अगर परिवार का कोई भी मेंबर कोई सदस्य अगर आपको कुछ कहता है तो उसको आप को फॉलो करने की जरूरत है उस चीज को आप स्वीकार कीजिए तब आपको किसी भी पर मरता था कि आवश्यकता नहीं पड़ेगी

negi ji aap ka prashna hai ki chota parivar hone ke bawajud parivar ke paramarshadata ki avashyakta kyon padti hai toh main aapko bata dena chahta hoon ki hum jo hai parivar me accha chota parivar hum ek dusre ki jo baat ko except nahi karte wali sabse badi karan hai ya bada jo karan yahi hai ki hum ek aisi paramarshadata ki avashyakta padti hai ki hum ek dusre ko samajh nahi paate aur koi dusri baat ko except nahi karte agar hum ek dusre ki baaton ko sweekar karna seekh gaye tab hamein duniya me kisi bhi pradaata ki avashyakta nahi padegi toh main aapse yahi kahunga ki ek dusre ki jo kisi ki agar galti ho toh usko maine koi aapki galti toh tum manne ko taiyar hoon aap aur doosra aapko koi agar parivar ka koi bhi member koi sadasya agar aapko kuch kahata hai toh usko aap ko follow karne ki zarurat hai us cheez ko aap sweekar kijiye tab aapko kisi bhi par marta tha ki avashyakta nahi padegi

नेगी जी आप का प्रश्न है कि छोटा परिवार होने के बावजूद परिवार के परामर्शदाता की आवश्यकता क्

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Akash Mishra

Yoga Expert | Author | Naturopathist | Acupressure Specialist |

0:28
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बरेली छोटा परिवार होने के बावजूद भी परिवार के बारे में कितना ताकि तलाश करना क्यों महत्वपूर्ण है कि आज के समय में आपस में मतभेद तेरे ज्यादा होते हैं लोगों के सारे बड़ा अंतर होता है इस वजह से बहुत महत्वपूर्ण है परामर्शदाता कर सकते हैं और विभिन्न प्रकार की काउंसलिंग के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं

bareilly chota parivar hone ke bawajud bhi parivar ke bare me kitna taki talash karna kyon mahatvapurna hai ki aaj ke samay me aapas me matbhed tere zyada hote hain logo ke saare bada antar hota hai is wajah se bahut mahatvapurna hai paramarshadata kar sakte hain aur vibhinn prakar ki kaunsaling ke liye humse sampark kar sakte hain

बरेली छोटा परिवार होने के बावजूद भी परिवार के बारे में कितना ताकि तलाश करना क्यों महत्वपूर

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Dr Nisha Khanna

Renowned Indian Counselling Psychologist, Tedx Speaker, Columnist

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इसकी बात करें हम लोग भी इंसान के किसी बच्चे के ड्रेस में जाने का टिकट करने का किसी को हमारे बच्चों की इमोशनल इमोशनल हाउस पर ध्यान नहीं देते हैं मोटी प्रॉब्लम फ्लाइट में फोटो पानी में रहती है जिसमें मर्डर 2 यार अपने बारे में कभी अपने आप को प्यार करना जरूरी है क्या नहीं newlifeag.in बैलेंस बचा नहीं है जो मां बाप की या अपनी भी बात को लेकिन साथ में से मानकर चलें और सही रास्ते पर चलो समझना बहुत जरूरी बच्चों के पास नहीं होता है बच्चों को काम को लेकर झगड़े का टाइम टेबल पड़ता है इसी वजह से यह ध्यान देने की जरूरत पड़ती है जो बताए अपने बच्चे के साथ क्वालिटी एंड क्वांटिटी क्वालिटी में क्वांटिटी में टाइपिंग करते हैं क्वालिटी

iski baat kare hum log bhi insaan ke kisi bacche ke dress mein jaane ka ticket karne ka kisi ko hamare baccho ki emotional emotional house par dhyan nahi dete hain moti problem flight mein photo paani mein rehti hai jisme murder 2 yaar apne bare mein kabhi apne aap ko pyar karna zaroori hai kya nahi newlifeag in balance bacha nahi hai jo maa baap ki ya apni bhi baat ko lekin saath mein se maankar chalen aur sahi raste par chalo samajhna bahut zaroori baccho ke paas nahi hota hai baccho ko kaam ko lekar jhagde ka time table padta hai isi wajah se yah dhyan dene ki zarurat padti hai jo bataye apne bacche ke saath quality and quantity quality mein quantity mein typing karte hain quality

इसकी बात करें हम लोग भी इंसान के किसी बच्चे के ड्रेस में जाने का टिकट करने का किसी को हमार

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Mahendra Joshi

Motivational Speaker www.mahendrajoshi.com

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छोटा परिवार होने के बावजूद परिवार के परामर्शदाता की तलाश करना क्यों महत्वपूर्ण होता जा रहा है मित्रों एक सबसे बड़ी जरूरी चीज होने लगी है आज के कुछ सालों पहले तक हमें सुनते आए थे कि जॉइंट फैमिली और न्यूक्लीयर फैमिली करते हैं कि न्यूक्लियर फैमिली की संख्या बढ़ने लगी है मैं अगर मेरे ही व्यक्तिगत जीवन का आपको बताऊंगी काम मेरा जब्बा फर्स्ट बेबी का जन्म हुआ था मेरे माता-पिता ईश्वर की कृपा से जीवित है तो वह बच्चा हमारा कब बड़ा होने लग गया कब दो-तीन साल का हो गया हमें पता ही नहीं चला और उसके बाद उनका जन्म हुआ उसके बाद जब मैं और मेरी पत्नी और मेरा बालक अकेला रह गया फिर दूसरे बेबी का टाइम आया तो हम ही जानते हैं कि हमारे बताना बहुत मुश्किल है कि किस तरीके से हमें उस बच्चे को बड़ा करना पड़ा हमारे बुजुर्गों हमारी सीनियर्स के साथ होते हुए कई सारी समस्याओं का समाधान बहुत आराम से हो जाता है और है कि इन फैमिली होती थी तो पढ़ा जाता है उसके अंदर ही होते थे क्योंकि उनके अनुभवों से देखकर और यूरो वन थिंग बहुत सारी चीजें आपके जीवन की वही सॉल्व कर देते थे आपको पता भी नहीं चलता परिवार छोटा हो गया है केवल आपने आपकी वाइफ है और आपके बच्चे हैं कहीं कोई आता है जिससे कभी आपका सामना पहले नहीं हुआ है तो निश्चित रूप से आपको परामर्शदाता की जरूरत पड़ती है और बड़ा मर जाता है कोई साइकोलॉजिस्ट हो कोई काउंसलर हो जरूरी नहीं है ऐसे कोई व्यक्ति भी हो सकते हैं आपके परिवार के बड़े रिश्ते हूं मैं आपसे बड़े आपके पास पड़ोस में आपसे बड़े जिनको आप जिनसे आप बैठे रिलेशन करके रखें ताकि वह आवश्यकता पड़ने पर आपको बेहतर सलाह दे सकते हैं और आपका जीवन सुखमय हो सकता है आराम से भी सकता है धन्यवाद नमस्कार

chota parivar hone ke bawajud parivar ke paramarshadata ki talash karna kyon mahatvapurna hota ja raha hai mitron ek sabse badi zaroori cheez hone lagi hai aaj ke kuch salon pehle tak hamein sunte aaye the ki joint family aur nyukliyar family karte hain ki nuclear family ki sankhya badhne lagi hai agar mere hi vyaktigat jeevan ka aapko bataungi kaam mera jabba first baby ka janam hua tha mere mata pita ishwar ki kripa se jeevit hai toh vaah baccha hamara kab bada hone lag gaya kab do teen saal ka ho gaya hamein pata hi nahi chala aur uske baad unka janam hua uske baad jab main aur meri patni aur mera balak akela reh gaya phir dusre baby ka time aaya toh hum hi jante hain ki hamare bataana bahut mushkil hai ki kis tarike se hamein us bacche ko bada karna pada hamare bujurgon hamari seniors ke saath hote hue kai saree samasyaon ka samadhan bahut aaram se ho jata hai aur hai ki in family hoti thi toh padha jata hai uske andar hi hote the kyonki unke anubhavon se dekhkar aur euro van thing bahut saree cheezen aapke jeevan ki wahi solve kar dete the aapko pata bhi nahi chalta parivar chota ho gaya hai keval aapne aapki wife hai aur aapke bacche hain kahin koi aata hai jisse kabhi aapka samana pehle nahi hua hai toh nishchit roop se aapko paramarshadata ki zarurat padti hai aur bada mar jata hai koi psychologist ho koi counselor ho zaroori nahi hai aise koi vyakti bhi ho sakte hain aapke parivar ke bade rishte hoon main aapse bade aapke paas pados mein aapse bade jinako aap jinse aap baithe relation karke rakhen taki vaah avashyakta padane par aapko behtar salah de sakte hain aur aapka jeevan sukhmay ho sakta hai aaram se bhi sakta hai dhanyavad namaskar

छोटा परिवार होने के बावजूद परिवार के परामर्शदाता की तलाश करना क्यों महत्वपूर्ण होता जा रहा

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Abhay Pratap

Advocate | Social Welfare Activist

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इस छोटा परिवार होने के बाद भी परामर्शदाता की तलाश होती है आज के जनरेसन में आज के वातावरण में लोकगीत दूसरे को भले न समझे पर अगर वास्तविक और सत्य पर मतदाता है उसके विचारों से लोग कुछ तो बुरे रास्ते को खत्म कर रहे हैं परामर्शदाता एक परिवार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है

is chota parivar hone ke baad bhi paramarshadata ki talash hoti hai aaj ke janaresan mein aaj ke vatavaran mein lokgeet dusre ko bhale na samjhe par agar vastavik aur satya par matdata hai uske vicharon se log kuch toh bure raste ko khatam kar rahe hain paramarshadata ek parivar ke liye mahatvapurna ho jata hai

इस छोटा परिवार होने के बाद भी परामर्शदाता की तलाश होती है आज के जनरेसन में आज के वातावरण म

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नमस्कार आपका सवाल यह है एक छोटा परिवार होने के बावजूद परिवार के प्रा मतदाता की तलाश करना क्यों महत्वपूर्ण पद आचार्य परिवार छोटा हो या बड़ा परिवार में डिसीजन लेना एक महत्वपूर्ण होता है उसका कारण होता है परिवार की जिम्मेदारियां उस हद तक पहुंचती है जहां पर परिवार के सभी लोगों की भविष्य निहित होते हैं और ऐसे में परामर्शदाता की जरूरत इसलिए है कि जो भी हम डिसीजन लेते हैं उस डिसीजन में हानियां और फायदे एंड नुकसान और फायदे दोनों ही शामिल होते हैं उदाहरण के लिए जिसे कहते हैं कि फिलॉस्फी प्रदर्शन और चिंतन दोनों में अंतर है चिंतन कोई भी कर सकता है लेकिन दर्शन वह भी दे सकता है जिसकी बात जिसके पास अच्छा और बुरा का ज्ञान है तो परिवार छोटा होता है या बड़ा होता है लेकिन अच्छा और बुरे का ज्ञान एक परामर्शदाता के पास ही होता है इसीलिए परिवार में एक परामर्शदाता की महत्वपूर्ण था अवश्य धन्यवाद जाए

namaskar aapka sawaal yah hai ek chota parivar hone ke bawajud parivar ke pra matdata ki talash karna kyon mahatvapurna pad aacharya parivar chota ho ya bada parivar mein decision lena ek mahatvapurna hota hai uska karan hota hai parivar ki zimmedariyan us had tak pohchti hai jaha par parivar ke sabhi logo ki bhavishya nihit hote hain aur aise mein paramarshadata ki zarurat isliye hai ki jo bhi hum decision lete hain us decision mein haniyan aur fayde and nuksan aur fayde dono hi shaamil hote hain udaharan ke liye jise kehte hain ki philosophy pradarshan aur chintan dono mein antar hai chintan koi bhi kar sakta hai lekin darshan vaah bhi de sakta hai jiski baat jiske paas accha aur bura ka gyaan hai toh parivar chota hota hai ya bada hota hai lekin accha aur bure ka gyaan ek paramarshadata ke paas hi hota hai isliye parivar mein ek paramarshadata ki mahatvapurna tha avashya dhanyavad jaaye

नमस्कार आपका सवाल यह है एक छोटा परिवार होने के बावजूद परिवार के प्रा मतदाता की तलाश करना क

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Hemant rajbale

शिक्षा सेवा, लेखक, विचारक

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सबसे पहली बात तो परामर्शदाता कौन होता है उसके अनुभव क्या है और उसकी विश्वसनीयता कितनी है क्या आप उस पर भरोसा कर सकते हैं यह परामर्शदाता के गुण माने जाते हैं हम आपके छोटे परिवार में परिवार के अंदर बहुत सारी समस्याएं आएगी बच्चों की समस्या इमोशनल समस्याएं भी आ सकती है मैनेज करना मान ले जाओ पति बाहर गए पत्नी अकेले अकेले बोर हो गई क्या करें उसके पास कुछ करने के लिए काम वाला चाहिए तो जब परामर्शदाता है वह परामर्श देंगे कि काम करें और काम की जो व्यवस्था है उसे बोरका से बचाएगी पकड़ने के लिए पेपर मस्ती सकता है तो परामर्शदाता विश्वसनीय होना चाहिए अनुभवी होना चाहिए और अपना होना चाहिए अपना होगा तभी हो विश्वास नहीं होगा तो परिवार के प्रमुख दादा की तलाश करना क्यों महत्वपूर्ण होता जा रहा है इसलिए मैं होता जा रहा है क्योंकि हम एकाकी जीवन जी ने क्या व्यस्त हो गए हैं हमने जीवन से संघर्ष बहुत कम कर दिया है हमें आदत है आसाराम की हमने उनके और संघर्ष भरे अनुभवों को नहीं लिया है जो हमारे पिता ने लिया हमारे बुजुर्गों ने लिया जो ऐसी परिस्थितियों से गुजर चुके थे कि उन्हें इस प्रकार का अनुभव हो गया था कि वो हर परिस्थिति के संदर्भ में के अंदर हमको परामर्श दे सकें परंतु अब ऐसी स्थिति रही नहीं गांव में अभी थोड़ी बहुत भाई स्थिति बची है फिर भी बच्चे अपने पिता और उनकी बात मानते नहीं है तो परामर्शदाता की तलाश शुरू हो जाती है मुझे क्या करना चाहिए जैसे वोकल्स पर यह प्रश्न पूछा गया था कि क्या करें मैं आगे पढ़ना चाहते मेरे प्रति मेरा साथ देते हैं तो उन्होंने कहा कि मेरे पति बचा नहीं चाहते हो मैं अभी प्रेग्नेंट हूं और मैं पढ़ना चाहती हूं अब यह सवाल वोकल्स पर हैं और सब परामर्शदाता 113 लेकिन क्या उन्हें स्वयं यह नहीं मालूम क्या वह यह निर्णय नहीं ले सकते उनका बच्चा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण चीज है अगर कोई बड़ा बुजुर्ग उनके साथ में परामर्श के रूप में होता तूने यह कहने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती पोंचो आज परामर्शदाता की आवश्यकता आ पड़ी सर वोकल्स का जन्म भी इसी के लिए हुआ है हजारों प्रमाण परामर्शदाता है जो आपकी समस्याओं का समाधान कक्षा 10 प्रश्न का उत्तर देर से प्रश्नों के उत्तर दिए जा सकते तो अनुभव सुष्मिता यह सब परामर्शदाता किया है और ना होने चाहिए और छोटा परिवार जो है भी इसका कारण है परामर्शदाता ढूंढने का परामर्श चाहिए ही चाहिए धन्यवाद

sabse pehli baat toh paramarshadata kaun hota hai uske anubhav kya hai aur uski visvasaniyata kitni hai kya aap us par bharosa kar sakte hain yah paramarshadata ke gun maane jaate hain hum aapke chote parivar me parivar ke andar bahut saari samasyaen aayegi baccho ki samasya emotional samasyaen bhi aa sakti hai manage karna maan le jao pati bahar gaye patni akele akele bore ho gayi kya kare uske paas kuch karne ke liye kaam vala chahiye toh jab paramarshadata hai vaah paramarsh denge ki kaam kare aur kaam ki jo vyavastha hai use borka se bachayegi pakadane ke liye paper masti sakta hai toh paramarshadata viswasniya hona chahiye anubhavi hona chahiye aur apna hona chahiye apna hoga tabhi ho vishwas nahi hoga toh parivar ke pramukh dada ki talash karna kyon mahatvapurna hota ja raha hai isliye main hota ja raha hai kyonki hum ekaki jeevan ji ne kya vyast ho gaye hain humne jeevan se sangharsh bahut kam kar diya hai hamein aadat hai asharam ki humne unke aur sangharsh bhare anubhavon ko nahi liya hai jo hamare pita ne liya hamare bujurgon ne liya jo aisi paristhitiyon se gujar chuke the ki unhe is prakar ka anubhav ho gaya tha ki vo har paristhiti ke sandarbh me ke andar hamko paramarsh de sake parantu ab aisi sthiti rahi nahi gaon me abhi thodi bahut bhai sthiti bachi hai phir bhi bacche apne pita aur unki baat maante nahi hai toh paramarshadata ki talash shuru ho jaati hai mujhe kya karna chahiye jaise vocals par yah prashna poocha gaya tha ki kya kare main aage padhna chahte mere prati mera saath dete hain toh unhone kaha ki mere pati bacha nahi chahte ho main abhi pregnant hoon aur main padhna chahti hoon ab yah sawaal vocals par hain aur sab paramarshadata 113 lekin kya unhe swayam yah nahi maloom kya vaah yah nirnay nahi le sakte unka baccha sabse zyada mahatvapurna cheez hai agar koi bada bujurg unke saath me paramarsh ke roop me hota tune yah kehne ki avashyakta hi nahi padti poncho aaj paramarshadata ki avashyakta aa padi sir vocals ka janam bhi isi ke liye hua hai hazaro pramaan paramarshadata hai jo aapki samasyaon ka samadhan kaksha 10 prashna ka uttar der se prashnon ke uttar diye ja sakte toh anubhav sushmita yah sab paramarshadata kiya hai aur na hone chahiye aur chota parivar jo hai bhi iska karan hai paramarshadata dhundhne ka paramarsh chahiye hi chahiye dhanyavad

सबसे पहली बात तो परामर्शदाता कौन होता है उसके अनुभव क्या है और उसकी विश्वसनीयता कितनी है क

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मुझे लगता है कि प्रश्न की प्रकृति ही गलत है प्रश्न ऐसे होना चाहिए था कि आज के परिवेश में छोटा परिवार होने के बावजूद परिवार के परामर्शदाता की तलाश करना क्यों महत्वपूर्ण होता जा रहा है मैंने प्रश्न में कुछ बदलाव किए हैं इसका एक कारण है कि आज का जो हमारी सामाजिक संरचना है सांस्कृतिक संघर्ष ना हो वह जटिल होता जा रहा है यह भौतिकता वादी युग है लोग ऑथेंटिक होते जान आप सब मेरी बात को नहीं समझ पा रहे हो तो मैं फिर से रिपीट करता हूं दोहराता हूं और अपनी बात को कि लोग अचीव करना चाह रहे हैं कि मेरा बच्चा डॉक्टर बने मेरा बच्चा इंजीनियर बने मेरा बच्चा आर्किटेक्ट बने जे उनकी सोच पहले से बच्चा जब जन्म लेता है तभी से उनकी सोच बन जाती है कि मुझे यह करना है जी खाना है या ऐसे रहना है मुझे कि अब ऐसी परिस्थिति में मां-बाप बच्चों की समस्याओं को नहीं समझ पाते हैं कि हमारा बच्चा किस के लायक है उसके क्या-क्या कर सकता है इस पर कोई ध्यान नहीं देता है प्रत्येक व्यक्ति में कुछ ना कुछ ईश्वर प्रदत कौशल होते हैं विशेष कौशल होते हैं जिसमें वह काफी अच्छा कर सकता है जैसे कोई अच्छा पेंटर हो सकता है कोई अच्छा जर्नलिस्ट हो सकता है कोई अच्छा लेखक हो सकता है कोई अच्छा डॉक्टर हो सकता है तो ऐसे में मां बाप अपने बच्चों से कुछ आकांक्षाएं लगा लेते हैं इच्छाएं उन पर व्यक्त करते रहते हैं कितने यह करना है यह करना है यह करना है ऐसे में बच्चे डिप्रेस्ड हो जाते हैं उनकी भावनाएं कहीं ना कहीं विलुप्त हो जाती हैं और वह ऐसे में गलत रास्ते पर बढ़ जाते हैं परिवार में अगर माता-पिता और बच्चे हैं तो बच्चों के सामने यह समस्या आती है तूने अपने माता-पिता के आकांक्षाओं को पूरा करना है माता पिता है उनकी भी अपने जीवन में सोच होती है कि मुझे इस साल यह कर लेना यह टारगेट बनाते हैं कि मुझे इस साल गाड़ी खरीदनी है मुझे घर बनाना है मुझे बैंक बैलेंस जमा करना है और जब इच्छा है और युद्ध होने लगती है पूरी नहीं हो पाती है तब घर में झगड़े बढ़ते हैं नशाखोरी बढ़ती है तरह तरह के तनाव उत्पन्न होते हैं मां बाप के बीच झगड़े बच्चों में तनाव उत्पन्न करते हैं पति पत्नी के बीच में विदेश उत्पन्न करते हैं ऐसे में उनके बीच दूरी बढ़ने लगती है और तब एक छोटा परिवार जो है उसे भी परामर्शदाता की आवश्यकता पड़ती

mujhe lagta hai ki prashna ki prakriti hi galat hai prashna aise hona chahiye tha ki aaj ke parivesh me chota parivar hone ke bawajud parivar ke paramarshadata ki talash karna kyon mahatvapurna hota ja raha hai maine prashna me kuch badlav kiye hain iska ek karan hai ki aaj ka jo hamari samajik sanrachna hai sanskritik sangharsh na ho vaah jatil hota ja raha hai yah bhautikata wadi yug hai log authentic hote jaan aap sab meri baat ko nahi samajh paa rahe ho toh main phir se repeat karta hoon dohrata hoon aur apni baat ko ki log achieve karna chah rahe hain ki mera baccha doctor bane mera baccha engineer bane mera baccha architect bane je unki soch pehle se baccha jab janam leta hai tabhi se unki soch ban jaati hai ki mujhe yah karna hai ji khana hai ya aise rehna hai mujhe ki ab aisi paristhiti me maa baap baccho ki samasyaon ko nahi samajh paate hain ki hamara baccha kis ke layak hai uske kya kya kar sakta hai is par koi dhyan nahi deta hai pratyek vyakti me kuch na kuch ishwar pradat kaushal hote hain vishesh kaushal hote hain jisme vaah kaafi accha kar sakta hai jaise koi accha painter ho sakta hai koi accha journalist ho sakta hai koi accha lekhak ho sakta hai koi accha doctor ho sakta hai toh aise me maa baap apne baccho se kuch akanchaye laga lete hain ichhaen un par vyakt karte rehte hain kitne yah karna hai yah karna hai yah karna hai aise me bacche depressed ho jaate hain unki bhaavnaye kahin na kahin vilupt ho jaati hain aur vaah aise me galat raste par badh jaate hain parivar me agar mata pita aur bacche hain toh baccho ke saamne yah samasya aati hai tune apne mata pita ke akankshaon ko pura karna hai mata pita hai unki bhi apne jeevan me soch hoti hai ki mujhe is saal yah kar lena yah target banate hain ki mujhe is saal gaadi kharidani hai mujhe ghar banana hai mujhe bank balance jama karna hai aur jab iccha hai aur yudh hone lagti hai puri nahi ho pati hai tab ghar me jhagde badhte hain nashakhori badhti hai tarah tarah ke tanaav utpann hote hain maa baap ke beech jhagde baccho me tanaav utpann karte hain pati patni ke beech me videsh utpann karte hain aise me unke beech doori badhne lagti hai aur tab ek chota parivar jo hai use bhi paramarshadata ki avashyakta padti

मुझे लगता है कि प्रश्न की प्रकृति ही गलत है प्रश्न ऐसे होना चाहिए था कि आज के परिवेश में छ

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