गाना कैसे गाये?...


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Vipin Gaur

Musician | Teacher

5:33
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मित्रों गाना गाने के लिए हम हैं जो संगीत से संबंधित तीन बातें हैं सर ताल और लय इन तीनों को समझना होता है अभी इसमें सर के लिए पैमाना होता है उसके लिए हम कोई भी वाद यंत्र ले सकते हैं जैसे हारमोनियम है वीणा है सितार है इस तरह से कोई भी हम एक माध्यम जिससे हमें यह पता चले कि हमें कितनी ऊंचाई पर जाना है अपने सर को कितनी ऊंचाई पर ले जाना कितनी ऊंचाई पर ले जाना कितनी हमें आवश्यकता है शुल्क ऊपर नीचे करने की तो जब हमें सबसे पहले हमें इसका ज्ञान होना जरूरी है जो ईश्वर है हमारे साथ पर है यह सब तक बोलते हैं सा रे गा मा पा धा नि इन का ज्ञान होना आवश्यक है इनकी जानकारी आवश्यक है कि यह हार्मोन को ही ले लेते हैं हम तो हारमोनियम में यह साक्षर सासनी तक तो इसमें अपना आप यह देखें कि सबसे पहले आरोह अवरोह क्रम में उसको कर लें और आरो अग्रो कर्म के बाद में जब आपका आरोह अवरोह कर्म का यह सातवां स्वरों का कम से कम ज्यादा नहीं तो 15 दिन अभ्यास करें और उसके बाद में कुछ अलंकार होते कुछ अलंकार होते हैं उनकी हमें नियोतिया अलंकारों की प्रैक्टिस कम से कम अगर आप बहुत ज्यादा नहीं कर सकते तो कम से कम 6 महीने अवश्य कर लें 2 घंटे लगभग रोजाना उसने क्या है कि फिर आप किसी भी गाने की स्वरलिपि जैसे आप नहीं जानते स्वरलिपि बनानी तो वह स्वरलिपि आप किसी से जलने वाले से बनवा लें जब आपको 10 5 गानों की स्वरलिपि लिखवा एंगे और बजाएंगे तो फिर धीरे-धीरे आप भी किसी भी गाने की स्वरलिपि बना सकते हैं और उस गाने को फिर क्योंकि आपने पहले से ही हर मोड़ पर अभ्यास कर सकता है या किसी अन्य वाद्य यंत्र पर जफर वाले वाद्य यंत्र किसी पर भी आपने अभ्यास कर रखा है तो जब आपका वह अलंकारों का अभ्यास परफेक्ट होगा तो फिर आप किसी भी उस गाने को बजा सकते हैं जिसकी आपने स्वरलिपि लिखवाई है और जब कुछ दिन उनका व्यापार करते हैं तो धीरे धीरे धीरे आप उनको आराम से आसानी से गाने लगता है गाना भी होगा और बजाना भी होगा अगर आप बजाना सीखना नहीं चाहते हैं तो कोई फिर बजाने वाला आपको साथ लेना पड़ेगा क्योंकि जब तक स्वर्ग का आपको ज्ञान नहीं होगा कि सर कितनी नीचे तक जाना कितनी ऊंचाई तक जाना है तब तक गाना संभव नहीं है तो उसके लिए इतना तो करना ही पड़ेगा और जब इनकी जो प्रेक्टिस है अलंकारों की जब तक पूरी हो जाएगी यानी उंगलियों का तालमेल गले का और वाद्य यंत्र का अलंकारों की प्रतिष्ठा जो उद्देश्य ही यही है कि इन तीनों का समावेश करना होता है मेल मिलान करना होता है इन तीनों का तीनों का मिलान हो जाता है तो आप कुछ भी कर सकते हैं और आसानी से जा सकते हैं थोड़ा सा देखने के बाद ही दो-चार बार देखने के बाद ही उसे आसानी से जा सकते हैं जैसे शुरू शुरू में मुझे बहुत वह लगता था कि पता नहीं फिल्मी गाने कैसे गाए जाते लेकिन फिर हमने एक सबसे पहला गाना मैंने जो हारमोनियम पर वाला कि हमारे आस पास कोई ऐसा सिखाने वाला नहीं था मैंने तो अभी यहां प्रभाकर की है 8289 मैंने वह कल से प्रभागीय तो लेकिन उससे पहले मेरी बहुत इच्छा होती थी लेकिन कोई बताने वाला नहीं था कोई सिखाने वाला नहीं था आसपास हमारे तो एक थे तो विधि बताइए जानते थे क्लासिकल दिखाना को नहीं जानते थे वैसे ही जितना वह बजाते थे तो उन्होंने 1 दिन बताई थी मुझे तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नजर ना लगे तो उसको हम ऐसे ही कॉपी करते थे बस जैसे वह बताते थे वैसे हम करते थे लेकिन तरीका यही है जो अभी मैंने आपको बताया कि पहले सौरव का अभ्यास करना चाहता हूं और उसके बाद में जो अलंकार है उनका कम से कम 6 महीने का व्यस्त होना जरूरी है तब पापी चला सकते हैं धन्यवाद

mitron gaana gaane ke liye hum hain jo sangeet se sambandhit teen batein hain sir taal aur laya in tatvo ko samajhna hota hai abhi isme sir ke liye paimaana hota hai uske liye hum koi bhi vad yantra le sakte hain jaise Harmonium hai vina hai sitar hai is tarah se koi bhi hum ek madhyam jisse hamein yah pata chale ki hamein kitni uchai par jana hai apne sir ko kitni uchai par le jana kitni uchai par le jana kitni hamein avashyakta hai shulk upar niche karne ki toh jab hamein sabse pehle hamein iska gyaan hona zaroori hai jo ishwar hai hamare saath par hai yah sab tak bolte hain sa ray jaayega ma paa dha ni in ka gyaan hona aavashyak hai inki jaankari aavashyak hai ki yah hormone ko hi le lete hain hum toh Harmonium mein yah sakshar sasni tak toh isme apna aap yah dekhen ki sabse pehle aroha avaroh kram mein usko kar le aur RO agro karm ke baad mein jab aapka aroha avaroh karm ka yah satvaan swaron ka kam se kam zyada nahi toh 15 din abhyas kare aur uske baad mein kuch alankar hote kuch alankar hote hain unki hamein niyotiya alankaron ki practice kam se kam agar aap bahut zyada nahi kar sakte toh kam se kam 6 mahine avashya kar le 2 ghante lagbhag rojana usne kya hai ki phir aap kisi bhi gaane ki swaralipi jaise aap nahi jante swaralipi banani toh vaah swaralipi aap kisi se jalne waale se banwa le jab aapko 10 5 gaano ki swaralipi likhva enge aur bajaenge toh phir dhire dhire aap bhi kisi bhi gaane ki swaralipi bana sakte hain aur us gaane ko phir kyonki aapne pehle se hi har mod par abhyas kar sakta hai ya kisi anya vadhya yantra par jafar waale vadhya yantra kisi par bhi aapne abhyas kar rakha hai toh jab aapka vaah alankaron ka abhyas perfect hoga toh phir aap kisi bhi us gaane ko baja sakte hain jiski aapne swaralipi likhvai hai aur jab kuch din unka vyapar karte hain toh dhire dhire dhire aap unko aaram se aasani se gaane lagta hai gaana bhi hoga aur bajana bhi hoga agar aap bajana sikhna nahi chahte hain toh koi phir bajane vala aapko saath lena padega kyonki jab tak swarg ka aapko gyaan nahi hoga ki sir kitni niche tak jana kitni uchai tak jana hai tab tak gaana sambhav nahi hai toh uske liye itna toh karna hi padega aur jab inki jo practice hai alankaron ki jab tak puri ho jayegi yani ungaliyon ka talmel gale ka aur vadhya yantra ka alankaron ki prathishtha jo uddeshya hi yahi hai ki in tatvo ka samavesh karna hota hai male milaan karna hota hai in tatvo ka tatvo ka milaan ho jata hai toh aap kuch bhi kar sakte hain aur aasani se ja sakte hain thoda sa dekhne ke baad hi do char baar dekhne ke baad hi use aasani se ja sakte hain jaise shuru shuru mein mujhe bahut vaah lagta tha ki pata nahi filmy gaane kaise gaayen jaate lekin phir humne ek sabse pehla gaana maine jo Harmonium par vala ki hamare aas paas koi aisa sikhane vala nahi tha maine toh abhi yahan prabhakar ki hai 8289 maine vaah kal se prabhagiya toh lekin usse pehle meri bahut iccha hoti thi lekin koi batane vala nahi tha koi sikhane vala nahi tha aaspass hamare toh ek the toh vidhi bataye jante the classical dikhana ko nahi jante the waise hi jitna vaah bajaate the toh unhone 1 din batai thi mujhe teri pyaari pyaari surat ko kisi ki nazar na lage toh usko hum aise hi copy karte the bus jaise vaah batatey the waise hum karte the lekin tarika yahi hai jo abhi maine aapko bataya ki pehle saurav ka abhyas karna chahta hoon aur uske baad mein jo alankar hai unka kam se kam 6 mahine ka vyast hona zaroori hai tab papi chala sakte hain dhanyavad

मित्रों गाना गाने के लिए हम हैं जो संगीत से संबंधित तीन बातें हैं सर ताल और लय इन तीनों को

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