ब्लैक होल के अंदर सिंगुलरिटी (एकांकी ) से क्या मतलब होता है?...


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virendra singh

physics Faculty

3:55

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ब्लैक होल के अंदर सिंगुलेरिटी या एकाकी का अर्थ यह होता है कि जो भी ब्लैक होल के अंदर है उसमें किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं है जो भी है वह एक जैसा है एक है समुद्र के अंदर हम नहीं बोलते कि यह पानी की बूंदे लगी है पानी की बूंद अलग ध्यान रहे की बूंद तभी होती है जब पानी समुद्र से बाहर आ जाए जब पानी के अंदर है तो बूंद बूंद नहीं रहती बूंद पूरा समुद्र हो जाती है जहां पैसे कह दीजिए कि बिल्कुल एक जैसे ही हैं वहां पर अगर आप संसार को देखेंगे तो संसार में कोई भी दो चीजें एक जैसी नहीं है तो पत्ते भी एक जैसे नहीं है तो इंसान तो दूर की बात तो अब कोई कैसा भी आप चाहे तो प्रमाण दे दीजिए तो हाइड्रोजन के परमाणु भी एक से नहीं है और हाइड्रोजन की और किसी भी एलिमेंट क्या परमाणु दे दीजिए हर एलिमेंट एलिमेंट का अपना एक खुद का सिगनेचर होता है जिसको स्पेक्टर सीरीज बोलते हैं और एलिमेंट की स्पेक्टर सीरीज उसका फिंगरप्रिंट होती है के पास अगर उसकी फिंगरप्रिंट है या निकलती है तो बता सकते हैं कि वह कौन सा एलिमेंट है जैसे कि सूरज का हमें यह पता तभी लगा था कि हाइड्रोजन से बना हुआ जब हमने हाइड्रोजन की फिंगरप्रिंट यानी कि स्पेक्टरिस को जान लिया था तो प्रकृति में दूध एलिमेंट एक से नहीं है और कोई एक एलिमेंट की बात कर ले तो उसके दो परमाणुओं एक से नहीं है सब कुछ सब अलग है यही तुम्हारा है या यही तो कह की बुद्धिमता है प्रभु किया जिसने भी बनाया है संसार को लेकिन ब्लैक होल के अंदर वहां पर दो नहीं रहते चोली में बात की जाए तो हम जिसको बोलते हैं थिंग वोटिंग होती है जिन परमाणुओं को अभी तक स्टडी कर पाए हैं उन से बनी हुई लेकिन इन परमाणुओं की साइज फिक्स नहीं होती हम जिन परमाणुओं को यहां पर अर्थ भी देख रहे हैं उनका व्यास कुछ 10 के पावर माइनस 10 मीटर होता है जिसे अंगस्ट्रोम बोलते हैं आमतौर पर परमाणु आधे से 1 वर्ष तक के उनका अभ्यास होता है लेकिन अगर यही परमाणुओं की बात करी जाए और इन को दबाना शुरू कर दिया जाए तो इनके अंदर इलेक्ट्रॉन्स और पास आते जाते हैं ना भी ज्ञानी न्यूक्लियस के और वह परमाणु अपने आकार में से मिटने लगते हैं समझते समझते ही उसके बाद ही सूरज वाली न्यूक्लियर रिएक्शन होती है जिनमें परमाणु का नाभिक आपस में मिल जाते हैं और अगर वह और सिकुड़ते रहे तो वह सारे परमाणुओं के अंदर इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन आपस में जुड़ करके न्यूट्रॉन बन जाएंगे और सारे न्यूट्रॉनस चिपक चिपक कर के इतने पास आ जाते हैं उसे बोलते हैं न्यूट्रॉन स्टार न्यूट्रॉन स्टार का घनत्व इतना ज्यादा होता है उसकी एक चम्मच ही शायद पूरी धरती से ज्यादा भारी हो नॉनस्टॉप में बहुत बहुत बहुत ज्यादा मांस का यूं कह लीजिए कि मास की वैल्यू होती है बहुत कम एरिया में आमतौर पर परमाणु होता है तो परमाणु के नाभिक होती है उसका घनत्व होता है 10 की पावर 17 केजी पर मीटर क्यूब यानी अगर सिंपल भाषा में बात करें तो अगर हम जो लूडो वाला पैसा होता है 106 वाला उसमें अगर हम परमाणु के अंदर के नाभि डालते हैं तो उस का भजन होगा 10 की पावर 11 किलो यानी क्या बोल सकते हैं कि 10 की पावर साथ होता है करोड़ों 10 की पावर 5 होता है लाख तो वह सकते 10,000 करोड़ किलो के वजन होगा अगर परमाणु के अंदर के नाभिक से हम एक पासा बनाए तो और न्यूट्रॉन स्टार का घनत्व इससे भी ज्यादा होता है जब यह घनत्व बहुत पड़ जाता है तब वह ब्लैक होल बन जाता है तो जैसे ब्लैक होल बनने के बाद अब वहां पर न्यूट्रॉन भी नहीं रहे थे अब कुछ और होता है वहां पर उन्हें हम नहीं जानते हमारे लिए वह हम उन्हें थिंग नहीं कह सकते इसलिए हमने नथिंग कहते हैं पर नथिंग का मतलब यह नहीं होता कि कुछ नहीं नथिंग का मतलब यह है कि जो कोई ठीक नहीं है नो थिंक नथिंग और एक ऑर्टन होती है नोव्हेयर उसका एक औरत बनता है नाव हेयर तो वैसे ही ब्लैक होल के अंदर जो होता है वह एक नहीं एक ही हो जाता है

black hole ke andar singuleriti ya ekaki ka arth yah hota hai ki jo bhi black hole ke andar hai usme kisi tarah ka koi bhedbhav nahi hai jo bhi hai vaah ek jaisa hai ek hai samudra ke andar hum nahi bolte ki yah paani ki bundein lagi hai paani ki boond alag dhyan rahe ki boond tabhi hoti hai jab paani samudra se bahar aa jaaye jab paani ke andar hai toh boond boond nahi rehti boond pura samudra ho jaati hai jaha paise keh dijiye ki bilkul ek jaise hi hain wahan par agar aap sansar ko dekhenge toh sansar mein koi bhi do cheezen ek jaisi nahi hai toh patte bhi ek jaise nahi hai toh insaan toh dur ki baat toh ab koi kaisa bhi aap chahen toh pramaan de dijiye toh hydrogen ke parmanu bhi ek se nahi hai aur hydrogen ki aur kisi bhi element kya parmanu de dijiye har element element ka apna ek khud ka signature hota hai jisko spector series bolte hain aur element ki spector series uska fingerprint hoti hai ke paas agar uski fingerprint hai ya nikalti hai toh bata sakte hain ki vaah kaun sa element hai jaise ki suraj ka hamein yah pata tabhi laga tha ki hydrogen se bana hua jab humne hydrogen ki fingerprint yani ki spektaris ko jaan liya tha toh prakriti mein doodh element ek se nahi hai aur koi ek element ki baat kar le toh uske do parmanuo ek se nahi hai sab kuch sab alag hai yahi tumhara hai ya yahi toh keh ki buddhimata hai prabhu kiya jisne bhi banaya hai sansar ko lekin black hole ke andar wahan par do nahi rehte choli mein baat ki jaaye toh hum jisko bolte hain thing voting hoti hai jin parmanuo ko abhi tak study kar paye hain un se bani hui lekin in parmanuo ki size fix nahi hoti hum jin parmanuo ko yahan par arth bhi dekh rahe hain unka vyas kuch 10 ke power minus 10 meter hota hai jise angastrom bolte hain aamtaur par parmanu aadhe se 1 varsh tak ke unka abhyas hota hai lekin agar yahi parmanuo ki baat kari jaaye aur in ko dabana shuru kar diya jaaye toh inke andar electrons aur paas aate jaate hain na bhi gyani nucleus ke aur vaah parmanu apne aakaar mein se mitne lagte hain samajhte samajhte hi uske baad hi suraj wali nuclear reaction hoti hai jinmein parmanu ka nabhik aapas mein mil jaate hain aur agar vaah aur sikudate rahe toh vaah saare parmanuo ke andar electron proton aapas mein jud karke neutron ban jaenge aur saare nyutranas chipak chipak kar ke itne paas aa jaate hain use bolte hain neutron star neutron star ka ghanatva itna zyada hota hai uski ek chammach hi shayad puri dharti se zyada bhari ho nonstop mein bahut bahut bahut zyada maas ka yun keh lijiye ki mass ki value hoti hai bahut kam area mein aamtaur par parmanu hota hai toh parmanu ke nabhik hoti hai uska ghanatva hota hai 10 ki power 17 KG par meter cube yani agar simple bhasha mein baat kare toh agar hum jo ludo vala paisa hota hai 106 vala usme agar hum parmanu ke andar ke nabhi daalte hain toh us ka bhajan hoga 10 ki power 11 kilo yani kya bol sakte hain ki 10 ki power saath hota hai karodo 10 ki power 5 hota hai lakh toh vaah sakte 10 000 crore kilo ke wajan hoga agar parmanu ke andar ke nabhik se hum ek pasa banaye toh aur neutron star ka ghanatva isse bhi zyada hota hai jab yah ghanatva bahut pad jata hai tab vaah black hole ban jata hai toh jaise black hole banne ke baad ab wahan par neutron bhi nahi rahe the ab kuch aur hota hai wahan par unhe hum nahi jante hamare liye vaah hum unhe thing nahi keh sakte isliye humne nothing kehte hain par nothing ka matlab yah nahi hota ki kuch nahi nothing ka matlab yah hai ki jo koi theek nahi hai no think nothing aur ek artan hoti hai noveyar uska ek aurat baata hai nav hair toh waise hi black hole ke andar jo hota hai vaah ek nahi ek hi ho jata hai

ब्लैक होल के अंदर सिंगुलेरिटी या एकाकी का अर्थ यह होता है कि जो भी ब्लैक होल के अंदर है उस

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