18 सो 57 की क्रांति के बारे में बताएं?...


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Geetanjali

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18 57 की क्रांति के बारे में बताया था सो 57 की क्रांति को प्रथम स्वतंत्रा संग्राम भी कहा जाता है इसी समय से सबकी कंपनी के अधीन छोड़कर क्राउन के हाथों में शासन चला गया था 9897 की क्रांति के हर इतिहास करके अपना अपना मत है सबसे ज्यादा मत माना जाता है कि सैनिक विद्रोह था

18 57 ki kranti ke bare me bataya tha so 57 ki kranti ko pratham swatantra sangram bhi kaha jata hai isi samay se sabki company ke adheen chhodkar crown ke hathon me shasan chala gaya tha 9897 ki kranti ke har itihas karke apna apna mat hai sabse zyada mat mana jata hai ki sainik vidroh tha

18 57 की क्रांति के बारे में बताया था सो 57 की क्रांति को प्रथम स्वतंत्रा संग्राम भी कहा ज

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18 57 की क्रांति का तात्कालिक कारण बताइए भारत में सेना के द्वारा गाय और सुअर की चर्बी लगी हुई वस्तु रो का प्रयोग करने से इंकार करना 18 57 क्रांति का नेतृत्व करने वाली 2 महिलाओं के नाम रानी लक्ष्मीबाई बेगम हजरत महल अट्ठारह सत्तावन का संदल किसने किया गया सिंह मुगल सम्राट बहादुर शास्त्री के नेतृत्व में किया गया कैसे करें कि मुस्लिम पंडित रिंगटोन बताइए अट्ठारह सत्तावन की क्रांति में इतिहासकारों ने मुस्लिम पंडित परिणाम बताएं दक्षिण भारत में चार प्रमुख केंद्रों के नाम बताएं जहां 18 57 की क्रांति की घटना हुई गवा है पांडिचेरी महाराष्ट्र बेंगलुरु दक्षिण भारत का संगम में गति देने वाला नमक था रंगाबाबू 31 मई अट्ठारह सत्तावन को जन्मदिन संपूर्ण भारत में एक साथ विद्रोह करने की या जून 18 सो 57 में झांसी का विद्रोह की शुरुआत 5 जून अट्ठारह सौ साल कानपुर में विद्रोह की शुरुआत 4 जून 18 सत्रह को लखनऊ का विद्रोह अट्ठारह सौ बासठ मुगल सम्राट बाबर की मृत्यु 12 मई 18 को दिल्ली का क्रांतिकारियों पर अधिकार 10 अट्ठारह के सैनिकों का विद्रोह 19 मार्च 18 सितंबर को विरोध 13 फरवरी 2856 को आवेदन करें थेंक्स सो मच 18 स्थान क्रांति के बारे में बता चुका हूं

18 57 ki kranti ka tatkalik karan bataye bharat mein sena ke dwara gaay aur suar ki charbi lagi hui vastu ro ka prayog karne se inkar karna 18 57 kranti ka netritva karne wali 2 mahilaon ke naam rani lakshmibai begum hazrat mahal attharah sattawan ka sandal kisne kiya gaya Singh mughal samrat bahadur shastri ke netritva mein kiya gaya kaise kare ki muslim pandit ringtone bataye attharah sattawan ki kranti mein itihasakaron ne muslim pandit parinam bataye dakshin bharat mein char pramukh kendron ke naam bataye jaha 18 57 ki kranti ki ghatna hui gawa hai pondicherry maharashtra bengaluru dakshin bharat ka sangam mein gati dene vala namak tha rangababu 31 may attharah sattawan ko janamdin sampurna bharat mein ek saath vidroh karne ki ya june 18 so 57 mein jhansi ka vidroh ki shuruat 5 june attharah sau saal kanpur mein vidroh ki shuruat 4 june 18 satrah ko lucknow ka vidroh attharah sau basath mughal samrat babar ki mrityu 12 may 18 ko delhi ka krantikariyon par adhikaar 10 attharah ke sainikon ka vidroh 19 march 18 september ko virodh 13 february 2856 ko avedan kare thenks so match 18 sthan kranti ke bare mein bata chuka hoon

18 57 की क्रांति का तात्कालिक कारण बताइए भारत में सेना के द्वारा गाय और सुअर की चर्बी लगी

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अभी बात चल गई के जो जो कारतूस चलाए गए हैं उनको डांट से काटा जाना है और दांत से काटे जाने के लिए जो है जो उस ईश्वर और गाय का गाय की चर्बी है अब गाय को हिंदू जो है पवित्र मानते हैं और सूअर को जो है वह मुस्लिम नहीं खाते हैं तो इन दोनों में बहुत ज्यादा जो है वह एक नमक सीमेंट का जो सिपाही था उसने मना कर दिया कि मैं नहीं खिलाऊंगा अवित्रों है क्या कमल का फूल यह दो चीज है जो है लेकर जाते थे ताकि शहर शहर में अवरोध गांव गांव में घूमते थे यह क्रांति का प्रतीक जो है वह शुरू हो गया शुरू हो गया और फिर उसके बाद जो है 18 सो 57 में जो मंगल पांडे को दिल्ली में तब बहादुर शाह जफर द्वितीय जो बड़े बुजुर्ग थे और कविताएं लिखते थे शायराना अंदाज के आदमी से अंकुश है उनको शत-शत ने अपना नेता नेता चुन लिया और नेता चुनने के बाद जो है यह सारी जो दिल्ली से चली ग्वालियर झांसी उत्तर भारत में तकरीबन हर जगह पर यह क्रांति फैल गई और रहे तो शुभ शुभ में अंग्रेज अंग्रेजों को तो इस बात का पता ही नहीं था कि ऐसा भी होना है तो अंग्रेज जो है वह हार पर चले गए लेकिन थोड़ा टाइम बीतने के बाद वह जो है वो इकट्ठे हुए और उन्होंने जो है भारतीयों को प्राप्त करना शुरू कर दिया इसके कारण क्या है एक तो कारण था डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स राजा का वंशज नहीं होता था वह ना तो बहुत को गोद दे सकता था जिनका मूल नाम मणिकर्णिका था वह जो है उसने कहा कि मैं अपनी झांसी मैं अपने झांसी को हाथ नहीं लगाएंगे तो उसका क्योंकि अपना बेटा कोई नहीं था दत्तक पुत्र था और उसको जो है जो है उसने दक्षिण ऑफिस के अंदर उसको अपने पर जो है ब्रिटिश राज्य में शामिल कर दिया था उसके बाद जो है यह समाप्त हो गया जो विद्रोह हुआ जिसे हम लोग कहते हैं स्वतंत्रता संग्राम उसमें सब लोग मारे गए बहादुर शाह जफर रंगून में थे और अंगूर में ही उनकी मृत्यु हुई है एक लिखा था सिखाते लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में आदमी के उम्र दराज मांग कर लाए थे 4 दिन दो आरजू में कट गए दो इंतजार में तो उनकी रंगून में मिलती हुई और वहीं पर उनको दफना दिया गया बाद में जो है उनसे उनके जो वापस भारत लेकर आए महारानी लक्ष्मी बाई के बारे में खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी उनके उनको बढ़ा चढ़ाकर बताया गया है तेरा संग्राम जो है वह असफल रहा

abhi baat chal gayi ke jo jo kartoos chalaye gaye hai unko dant se kaata jana hai aur dant se kaate jaane ke liye jo hai jo us ishwar aur gaay ka gaay ki charbi hai ab gaay ko hindu jo hai pavitra maante hai aur suar ko jo hai vaah muslim nahi khate hai toh in dono mein bahut zyada jo hai vaah ek namak cement ka jo sipahi tha usne mana kar diya ki main nahi khilaunga avitron hai kya kamal ka fool yah do cheez hai jo hai lekar jaate the taki shehar shehar mein avarodh gaon gaon mein ghumte the yah kranti ka prateek jo hai vaah shuru ho gaya shuru ho gaya aur phir uske baad jo hai 18 so 57 mein jo mangal pandey ko delhi mein tab bahadur shah jafar dwitiya jo bade bujurg the aur kavitayen likhte the shayrana andaaz ke aadmi se ankush hai unko shat shat ne apna neta neta chun liya aur neta chunane ke baad jo hai yah saree jo delhi se chali gwalior jhansi uttar bharat mein takareeban har jagah par yah kranti fail gayi aur rahe toh shubha shubha mein angrej angrejo ko toh is baat ka pata hi nahi tha ki aisa bhi hona hai toh angrej jo hai vaah haar par chale gaye lekin thoda time beetane ke baad vaah jo hai vo ikatthe hue aur unhone jo hai bharatiyon ko prapt karna shuru kar diya iske karan kya hai ek toh karan tha doctrine of lapes raja ka vanshaj nahi hota tha vaah na toh bahut ko god de sakta tha jinka mul naam manikarnika tha vaah jo hai usne kaha ki main apni jhansi main apne jhansi ko hath nahi lagayenge toh uska kyonki apna beta koi nahi tha dattak putra tha aur usko jo hai jo hai usne dakshin office ke andar usko apne par jo hai british rajya mein shaamil kar diya tha uske baad jo hai yah samapt ho gaya jo vidroh hua jise hum log kehte hai swatantrata sangram usme sab log maare gaye bahadur shah jafar Rangoon mein the aur angoor mein hi unki mrityu hui hai ek likha tha sikhaate lagta nahi hai dil mera ujade dayar mein aadmi ke umr daraj maang kar laye the 4 din do aaraju mein cut gaye do intejar mein toh unki Rangoon mein milti hui aur wahi par unko dafana diya gaya baad mein jo hai unse unke jo wapas bharat lekar aaye maharani laxmi bai ke bare mein khoob ladi mardaani vaah toh jhansi wali rani thi unke unko badha chadhakar bataya gaya hai tera sangram jo hai vaah asafal raha

अभी बात चल गई के जो जो कारतूस चलाए गए हैं उनको डांट से काटा जाना है और दांत से काटे जाने क

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2897 की क्रांति में सामान आदमियों ने वा क्रांतिकारियों ने उस तुलजा एस ने भाग लिया था

2897 ki kranti mein saamaan adamiyo ne va krantikariyon ne us tulja s ne bhag liya tha

2897 की क्रांति में सामान आदमियों ने वा क्रांतिकारियों ने उस तुलजा एस ने भाग लिया था

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