मैं जो सोचता हूँ वो कभी होता ही नहीं है अगर होता भी है तो उल्टा, ऐसा क्यों होता है मेरे ज़िंदगी में?...


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Er Pankaj Rai

International Motivational speaker · Counsellor · Writer. Trainer

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निश्चित तौर पर आपका सवाल नकारात्मक है क्योंकि आप मानते हैं कि जो आप सोचते हैं वह कभी नहीं होता और जो आप मानते हैं कि वह कभी नहीं होगा तो वही होता है जो आप मानते हैं इसलिए सबसे पहले अपनी धारणा परिवर्तित करिए क्योंकि फोन बिकम थिंग्स आपके विचार जीवन में वस्तुओं में परिणित होते हैं आपके विचार आपके जीवन में घटित होते हैं क्योंकि विचार शब्दों में परिवर्तित होते हैं शब्द आपके कार्यों में परिवर्तित होते हैं और कार्यों को जवाब कई बार दोहराते तो आपकी जीवनशैली बन जाती है तो सर्वप्रथम यह सोचना छोड़ दीजिए कि जो आप सोचते हैं वह नहीं होगा अपनी सोच बदलिए नकारात्मक सोच से अपनी सोच सकारात्मक करिए कभी यह मत सोचिए कि आप जो सोचेंगे उसका उल्टा होता है क्योंकि जब आप सोच रहे हैं कि उल्टा होगा तो उल्टा घटित हो जाता है इसलिए अपने आप पर भरोसा रखें सकारात्मक विचार ज्यादा से ज्यादा अपने दिमाग में रखे सकारात्मक दृष्टिकोण सकारात्मक लोगों की संगति करें तो निश्चित तौर पर जब आपके विचार चेंज होंगे जब आपकी भावनाएं चेंज होगी तो इसका सीधा संबंध आपके शब्दों में आपके कार्यों में आपकी जीवनशैली में और आपके आने वाले भविष्य में भी पड़ेगा लेकिन एक बेहतर भविष्य के लिए वर्तमान को सकारात्मक शब्दों की बीज रोपित करिए तभी आप एक उज्जवल भविष्य का निर्माण कर पाएंगे धन्यवाद

nishchit taur par aapka sawaal nakaratmak hai kyonki aap maante hain ki jo aap sochte hain vaah kabhi nahi hota aur jo aap maante hain ki vaah kabhi nahi hoga toh wahi hota hai jo aap maante hain isliye sabse pehle apni dharana parivartit kariye kyonki phone become things aapke vichar jeevan me vastuon me parinit hote hain aapke vichar aapke jeevan me ghatit hote hain kyonki vichar shabdon me parivartit hote hain shabd aapke karyo me parivartit hote hain aur karyo ko jawab kai baar dohrate toh aapki jeevan shaili ban jaati hai toh sarvapratham yah sochna chhod dijiye ki jo aap sochte hain vaah nahi hoga apni soch badaliye nakaratmak soch se apni soch sakaratmak kariye kabhi yah mat sochiye ki aap jo sochenge uska ulta hota hai kyonki jab aap soch rahe hain ki ulta hoga toh ulta ghatit ho jata hai isliye apne aap par bharosa rakhen sakaratmak vichar zyada se zyada apne dimag me rakhe sakaratmak drishtikon sakaratmak logo ki sangati kare toh nishchit taur par jab aapke vichar change honge jab aapki bhaavnaye change hogi toh iska seedha sambandh aapke shabdon me aapke karyo me aapki jeevan shaili me aur aapke aane waale bhavishya me bhi padega lekin ek behtar bhavishya ke liye vartaman ko sakaratmak shabdon ki beej ropit kariye tabhi aap ek ujjawal bhavishya ka nirmaan kar payenge dhanyavad

निश्चित तौर पर आपका सवाल नकारात्मक है क्योंकि आप मानते हैं कि जो आप सोचते हैं वह कभी नहीं

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