कभी धर्म के नाम पर कभी मंदिर मस्जिद के नाम पर कभी गाय के नाम पर कभी प्यार जिहाद के नाम पर, मुसलमानों को मारा जा रहा है क्या सरकार को इस पर कोई करवाई नहीं करनी चाहिए?...


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Mo.Azhar Shaikh

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सरकारी योजना करता है हर किसी को पूरा-पूरा अधिकार की लुगाई

sarkari yojana karta hai har kisi ko pura pura adhikaar ki lugai

सरकारी योजना करता है हर किसी को पूरा-पूरा अधिकार की लुगाई

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज हमारे देश में हर जगह संप्रदायवाद जातिवाद भेदभाव कुछ ज्यादा ही बढ़ रहा है और जब भी कोई अत्याचार होता है तो वह हिंदुस्तान पर होता है एक भारतीय पर होता है क्योंकि मुझे लगता है कि हम सब पहले एक भारतीय हैं उसके बाद हिंदू मुस्लिम सिख इसाई जातियों से पहचाने जाते हैं इसलिए मुझे लगता है कि जब भी कहीं कोई दंगा फसाद होता है या जब भी कहीं कोई अप्रिय घटना होती है कोई न कोई जो भारत का नागरिक होता है रूप उसमें हताहत होता है वह जरूर पीड़ा पाता है वह जरूर तकलीफ आता है उसमें हिंदू मुस्लिम का कोई मुद्दा मुझे नजर नहीं आता क्योंकि हर जगह सानिया तकलीफ आती है हर जगह इंसानियत को तकलीफ होती है इसलिए मुझे लगता है कि हमें समाज को जनता को मिलकर इस भेदभाव को खत्म करना चाहिए इस संप्रदाय वाद को बढ़ावा नहीं देकर इसे अपने स्नेह और स्वभाव से खत्म करना चाहिए यह हम लोग ही कर सकते हैं क्योंकि कोई भी तीसरा आदमी कोई भी अपराध जगत का इंसान जब कोई भी राजनेता या कोई भी बाबा पंडित पाऊंगा यही चाहेगा कि हमारे देश में संप्रदायवाद पहले हमारे देश में आपकी बात चले हम लोग धर्म के नाम पर लड़ाई तभी उन की दुकानें चलेगी इसलिए हमें एक होना होगा हमें एकता से और स्नेह से रहना होगा तभी हमारी एकता और अखंडता इन लोगों को कुछ भी नहीं करने देने के लिए मजबूर करेंगी और वह हमारी एकता को नहीं तोड़ पाएंगे तो वह हमें कुछ भी नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे जब हम स्वयं एक हो जाएंगे तो वह किस तरह से हमें धर्म और संप्रदाय के नाम पर अलग कर सकते हैं इसलिए मुझे लगता है कि पहले हम एक भारतीय हैं और कहीं भी एक भारतीय को तकलीफ होती है किसी संप्रदाय को निजी

aaj hamare desh mein har jagah sampradayvad jaatiwad bhedbhav kuch zyada hi badh raha hai aur jab bhi koi atyachar hota hai toh vaah Hindustan par hota hai ek bharatiya par hota hai kyonki mujhe lagta hai ki hum sab pehle ek bharatiya hain uske baad hindu muslim sikh isai jaatiyo se pehchane jaate hain isliye mujhe lagta hai ki jab bhi kahin koi danga fasad hota hai ya jab bhi kahin koi apriya ghatna hoti hai koi na koi jo bharat ka nagarik hota hai roop usme hatahat hota hai vaah zaroor peeda pata hai vaah zaroor takleef aata hai usme hindu muslim ka koi mudda mujhe nazar nahi aata kyonki har jagah saniya takleef aati hai har jagah insaniyat ko takleef hoti hai isliye mujhe lagta hai ki hamein samaj ko janta ko milkar is bhedbhav ko khatam karna chahiye is sampraday vad ko badhawa nahi dekar ise apne sneh aur swabhav se khatam karna chahiye yah hum log hi kar sakte hain kyonki koi bhi teesra aadmi koi bhi apradh jagat ka insaan jab koi bhi raajneta ya koi bhi baba pandit paunga yahi chahega ki hamare desh mein sampradayvad pehle hamare desh mein aapki baat chale hum log dharm ke naam par ladai tabhi un ki dukanein chalegi isliye hamein ek hona hoga hamein ekta se aur sneh se rehna hoga tabhi hamari ekta aur akhandata in logo ko kuch bhi nahi karne dene ke liye majboor karengi aur vaah hamari ekta ko nahi tod payenge toh vaah hamein kuch bhi nuksan nahi pohcha payenge jab hum swayam ek ho jaenge toh vaah kis tarah se hamein dharm aur sampraday ke naam par alag kar sakte hain isliye mujhe lagta hai ki pehle hum ek bharatiya hain aur kahin bhi ek bharatiya ko takleef hoti hai kisi sampraday ko niji

आज हमारे देश में हर जगह संप्रदायवाद जातिवाद भेदभाव कुछ ज्यादा ही बढ़ रहा है और जब भी कोई अ

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