भारतीयों को अब क्या अच्छा लगने लगा है?...


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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीयों को अब क्या अच्छा लग गए भारतीयों को हमेशा सब कुछ अच्छा लगता था लगता है लगता रहेगा हिंदुस्तान के भारतीय देश के हर हिस्से में रहेंगे हर्षित रहेंगे चाहे कला हो चाहे विज्ञान और टेक्नोलॉजी हो किसी भी चित्र में हो इंडियन टेक्नोलॉजी और किन किन दो विश्व रेट है टेंट के लोग हैं विश्व का कोई ऐसा कंट्रीज नहीं होगा जहां पर ना हो और विश्व का कोई ऐसा व्यवसाय नहीं है जो नहीं करना विश्व में कोई ऐसी नौकरी है जहां पर और नहीं है नहीं है तो आप देख लीजिए देख लीजिए आप खुद एहसास हो जाएगा

bharatiyon ko ab kya accha lag gaye bharatiyon ko hamesha sab kuch accha lagta tha lagta hai lagta rahega Hindustan ke bharatiya desh ke har hisse mein rahenge harshit rahenge chahen kala ho chahen vigyan aur technology ho kisi bhi chitra mein ho indian technology aur kin kin do vishwa rate hai tent ke log hain vishwa ka koi aisa countries nahi hoga jaha par na ho aur vishwa ka koi aisa vyavasaya nahi hai jo nahi karna vishwa mein koi aisi naukri hai jaha par aur nahi hai nahi hai toh aap dekh lijiye dekh lijiye aap khud ehsaas ho jaega

भारतीयों को अब क्या अच्छा लग गए भारतीयों को हमेशा सब कुछ अच्छा लगता था लगता है लगता रहेगा

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Mohammad Bilal

Accountant

2:36

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सवाल है कि भारतीयों को क्या अच्छा लगने लगा है भारतीयों का मतलब हम हिंदुस्तानियों को क्या अच्छा लगने लगा है तो हम तो यही कह सकते हैं कि जो पहले अच्छा लगता था वही अच्छा आज भी लगता है और लगने लगा है क्योंकि अच्छा लगने का मतलब है आपका सवाल करने का मतलब हो सकता है राजनीतिक और आर्थिक होम सामाजिक हो या फिर कोई और तर्क आप ने निकाला हो और यह सवाल आपका इस तरह से आया तो खैर जो बात भी हो यह दौर बड़ा खराब चल रहा है अगर उसकी हकीकत देखी जाए तो क्योंकि हम लोगों की सोच मानसिकता बड़ी विकृत हो गई है उसमें खराबी पैदा हो गई है अब हम अपना स्वार्थ ज्यादा देखने लगे हैं हमको अब यह ज्यादा अच्छा लगने लगा है किसी का क्या होगा क्या हो रहा है उससे हमें कोई मतलब नहीं हमारा अच्छा होना चाहिए तो इस दौर में यह ज्यादा हो गया ऐसी मानसिकता है ज्यादा बन गई है ऐसे विचार ज्यादा होने लगे है याद आख्या जाने लगे हम अच्छे रहना चाहिए हम निरोग रहना चाहिए हमें किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होना चाहिए इस तरह की सोच अक्सर घर करने लगी और घर कर गई है और अब हम उसी पर आगे बढ़ गए हैं क्योंकि हमें बिल्कुल नहीं करना चाहिए हमें स्वार्थ के काम बिल्कुल नहीं करना चाहिए उससे आप की छवि खराब होती भले ही आपको ना लगे लेकिन यह मैं आपको एक वक्त आएगा खुद अच्छा नहीं लगेगा तो इस तरह का हम क्यों सोचें इस तरह का हम क्यों करें हमें यह सोचना चाहिए हमसे कई लोग जुड़े हैं और हमें यह नहीं करना चाहिए हमेशा नहीं सोचना चाहिए और इस दौर में बड़ी थोड़ी थोड़ी सी बातों में कई तरह के झगड़े कई तरह की बातें इस तरह से घर कर जाती है और उसका असर ज्यादा होता है इसलिए हम इन सब बातों से बचना चाहिए छोटी मोटी बातों को छोड़ना चाहिए मानसिकता को सही रखना होगा सकारात्मक सोच रखना होगा अच्छी सोच रखना होगा थैंक यू

sawaal hai ki bharatiyon ko kya accha lagne laga hai bharatiyon ka matlab hum hindustaniyon ko kya accha lagne laga hai toh hum toh yahi keh sakte hain ki jo pehle accha lagta tha wahi accha aaj bhi lagta hai aur lagne laga hai kyonki accha lagne ka matlab hai aapka sawaal karne ka matlab ho sakta hai raajnitik aur aarthik home samajik ho ya phir koi aur tark aap ne nikaala ho aur yah sawaal aapka is tarah se aaya toh khair jo baat bhi ho yah daur bada kharab chal raha hai agar uski haqiqat dekhi jaaye toh kyonki hum logo ki soch mansikta badi vikrit ho gayi hai usme kharabi paida ho gayi hai ab hum apna swarth zyada dekhne lage hain hamko ab yah zyada accha lagne laga hai kisi ka kya hoga kya ho raha hai usse hamein koi matlab nahi hamara accha hona chahiye toh is daur mein yah zyada ho gaya aisi mansikta hai zyada ban gayi hai aise vichar zyada hone lage hai yaad akhya jaane lage hum acche rehna chahiye hum nirog rehna chahiye hamein kisi tarah ki koi takleef nahi hona chahiye is tarah ki soch aksar ghar karne lagi aur ghar kar gayi hai aur ab hum usi par aage badh gaye hain kyonki hamein bilkul nahi karna chahiye hamein swarth ke kaam bilkul nahi karna chahiye usse aap ki chhavi kharab hoti bhale hi aapko na lage lekin yah main aapko ek waqt aayega khud accha nahi lagega toh is tarah ka hum kyon sochen is tarah ka hum kyon kare hamein yah sochna chahiye humse kai log jude hain aur hamein yah nahi karna chahiye hamesha nahi sochna chahiye aur is daur mein badi thodi thodi si baaton mein kai tarah ke jhagde kai tarah ki batein is tarah se ghar kar jaati hai aur uska asar zyada hota hai isliye hum in sab baaton se bachna chahiye choti moti baaton ko chhodna chahiye mansikta ko sahi rakhna hoga sakaratmak soch rakhna hoga achi soch rakhna hoga thank you

सवाल है कि भारतीयों को क्या अच्छा लगने लगा है भारतीयों का मतलब हम हिंदुस्तानियों को क्या अ

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो दोस्तों हाउ आर यू आज मेरे सामने है इसका कोई जवाब नहीं दिया जा सकता है कि एक भारतीय होने के नाते हम किस दिशा में जा रहे हैं हमारी पसंद और नापसंद किन चीजों से प्रभावित हो रही है और अब धीरे-धीरे हमारे समाज और हमारे व्यक्तिगत जीवन में हमारे खान पान रहन सहन हमारी बोली भाषा हमारी संस्कृति हमारे साहित्य हमारा जीवन जीने की कला हमारा धर्म परिवर्तन परिवर्तन के आधार पर हम कुछ ऐसे बिंदु को ढूंढने का प्रयास करेंगे जो हमारे जीवन को बहुत गहरे तरीके से प्रभावित भी कर रहे हैं और इसके साथ-साथ उसमें परिवर्तन खिला रहे हैं और हमारे जो और लाइक्स एंड डिसलाइक्स ए हमारी पसंद और नापसंद है उनको भी प्रभावित कर रहे हैं जब हम किसी भी समाज या किसी भी देश के बदलते बदलते प्रतिरूप का अध्ययन करते हैं वहां की सामाजिक व्यवस्था में बदलाव का अध्ययन करते हैं और पुराने से नवीन समाज में या नए समय में जब कोई भी समाज इंटर करता है या प्रवेश करता है प्रारंभ करता है तो उसमें कुछ बेसिक परिवर्तन आते हैं जैसे सबसे पहला परिवर्तन आता है उसकी आर्थिक संरचना जब एक विकासशील से विकसित देश बनने की प्रक्रिया हर देश में पूरी होती है एक चरणबद्ध प्रक्रिया होती है इसके बारे में कई नेताओं ने और स्त्रियों ने अपना-अपना मॉडल प्रस्तुत किया है और गरीब देश से विकासशील देश में और विकासशील देश में सैनिक देश में परिवर्तित होता है तो उसकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन के लिए अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदलता है इसमें एक कृषि अर्थव्यवस्था से औद्योगिक अर्थव्यवस्था और फिर सेवा इकोनामी की ओर आगे बढ़ता है जैसे आज अगर हम यूरोपियन यूनियन के देश को देखें या फिर जो है एक परसेंट या दो परसेंट के लिए बल पर ही काम करती है और इतनी ही दो पूरे देश के लिए खाद्यान्न की उपलब्धता को सुनिश्चित कर देते हैं लेकिन जब हमारे देश में भारत की टोटल 50% या कहें समय रेडिकलाइजेशन अगर आजादी के समय देखा जाए तो इस सेक्टर में आता है वह है इकोनॉमिक्स इकोनॉमिक्स सेक्टर में जो बदलाव आते हैं उसके साथ-साथ हमारे लोग काम करने के तरीके में बदलाव होता है हमारे रहन-सहन में बदलाव आता है हमारी जो प्रकृति है वह कृषि से आगे बढ़कर होती हो और उद्योग से आगे बढ़कर सेवा क्षेत्र की होती है वहां पर काम करने के लिए जनसंख्या कौन गांव से बाहर निकलकर औद्योगिक संकुल औद्योगिक नगरों की गोश्त प्रवास करना पड़ता है इसके कारण ग्रामीण जनसंख्या शहरी जनसंख्या के प्रभाव पड़ता है इसलिए अर्थव्यवस्था के साथ-साथ समाज व्यवस्था हमारे जीवन प्रणाली व्यवस्था हमारी हमारी मान्यता है कि लगता है कि हमारे समाज में हमारे खान-पान में हमारे हार में क्या परिवर्तन आए हैं तो हम उस प्रकार आत्मा का और नकारात्मक परिवर्तनों को पहचान पाएंगे सबसे पहली बात यह है कि जैसे-जैसे औद्योगीकरण का विकास भारत में होता है वैसे-वैसे नगरीकरण की प्रक्रिया भी तेज होती है आज भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार 31 परसेंट की आबादी जो है हर बात करती है और कहा जा रहा है कि 2050 तक भारत में 50% से अधिक जनसंख्या धीरे-धीरे अधिवास के या माननीय निवास के प्रमुख स्थान बनते जा रहे हैं प्रमुख अंडे बनते जा रहे हैं जहां हमारा भविष्य निर्धारित पूरा तू शहरीकरण जब होता है तो उसके साथ-साथ हमारे व्यवहार हमारे खान-पान भरी जीवनशैली में परिवर्तन आता है व्यक्ति के तौर पर जब हम की संरचना को देखते हैं तो दो जो समाज की जो संरचना होती है उसमें संयुक्त परिवार प्रणाली पाई जाती है वहां पर जाति के बंधनों की जलन होती है शिक्षा का प्रसार नहीं होता है हमारे मूल्य हमारी पुरानी जो व्यवस्था है हमारे जो पुराने विश्वास है हमारे जो पानी मान्यता है उनके आधार पर टिके होते हैं गांव में जो कि एक संयुक्त सामाजिक व्यवस्था होती है संयुक्त सामाजिक प्रणाली होती है हर एक व्यक्ति नियमों और आदर्शों की उसमें बना होता है तो इस कारण गांव में जो स्वतंत्रता का पहलू है वह थोड़ा कम हो जाता है और वहां पर हर व्यक्ति के सामने नैतिकता और इन सब चीजों की वॉल्यूम को ज्यादा होती है लेकिन एक समाज में उनकी व्यक्ति अब गांव की जनसंख्या धारा करते उन से बाहर निकल कर जब शहर की ओर बढ़ता है तब उसके जीवन में बहुत बड़े बदलाव आते हैं उसे पहली बात है उसको फ्रीडम उसको जोड़ डेमोक्रेटिक फ्रीडम प्रदान की जाती है भारतीय संविधान के 12 को भोग करता है उसको शिक्षा की फैसिलिटी ज्यादा बेहतर रातों में सिक्योरिटी स्वतंत्र होता है रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं सभी व्यक्तियों को अभिव्यक्ति की आजादी आजादी मिलने के कारण जो सामान होते हैं पीले पड़ जाते हैं उसमें ग्लोबलाइजेशन या फिर काहे की सबसे ज्यादा प्रभाव दिखता है महिलाओं को अवसर मिले हैं उनको बाहर निकालने के लिए सेवन की गतिशीलता में वृद्धि हुई है वह सरकारी नौकरियां शिक्षा स्वास्थ्य परिवार कल्याण सुरक्षा विज्ञान इन सभी क्षेत्रों में अपनी भूमिका में उन्होंने बेहतर तरीके से अदा किया है तो इसीलिए हमारी इसमें हमारे स्वभाव में हमारी हमारे खान-पान में हमारे हमारे पहनावे में तेजी से परिवर्तन हैं और यह परिवर्तन धीरे-धीरे हमें एक ग्लोबलाइज सोसायटी बनाने में आगे की ओर बढ़ा रहे हैं

hello doston how R you aaj mere saamne hai iska koi jawab nahi diya ja sakta hai ki ek bharatiya hone ke naate hum kis disha mein ja rahe hain hamari pasand aur napasand kin chijon se prabhavit ho rahi hai aur ab dhire dhire hamare samaj aur hamare vyaktigat jeevan mein hamare khan pan rahan sahan hamari boli bhasha hamari sanskriti hamare sahitya hamara jeevan jeene ki kala hamara dharm parivartan parivartan ke aadhar par hum kuch aise bindu ko dhundhne ka prayas karenge jo hamare jeevan ko bahut gehre tarike se prabhavit bhi kar rahe hain aur iske saath saath usme parivartan khila rahe hain aur hamare jo aur likes and dislaiks a hamari pasand aur napasand hai unko bhi prabhavit kar rahe hain jab hum kisi bhi samaj ya kisi bhi desh ke badalte badalte pratirup ka adhyayan karte hain wahan ki samajik vyavastha mein badlav ka adhyayan karte hain aur purane se naveen samaj mein ya naye samay mein jab koi bhi samaj inter karta hai ya pravesh karta hai prarambh karta hai toh usme kuch basic parivartan aate hain jaise sabse pehla parivartan aata hai uski aarthik sanrachna jab ek vikasshil se viksit desh banne ki prakriya har desh mein puri hoti hai ek charanabddh prakriya hoti hai iske bare mein kai netaon ne aur sthreeyon ne apna apna model prastut kiya hai aur garib desh se vikasshil desh mein aur vikasshil desh mein sainik desh mein parivartit hota hai toh uski arthavyavastha ke saath saath samajik parivartan ke liye arthavyavastha ka swaroop badalta hai isme ek krishi arthavyavastha se audyogik arthavyavastha aur phir seva economy ki aur aage badhta hai jaise aaj agar hum european union ke desh ko dekhen ya phir jo hai ek percent ya do percent ke liye bal par hi kaam karti hai aur itni hi do poore desh ke liye khadyann ki upalabdhata ko sunishchit kar dete hain lekin jab hamare desh mein bharat ki total 50 ya kahein samay rediklaijeshan agar azadi ke samay dekha jaaye toh is sector mein aata hai vaah hai economics economics sector mein jo badlav aate hain uske saath saath hamare log kaam karne ke tarike mein badlav hota hai hamare rahan sahan mein badlav aata hai hamari jo prakriti hai vaah krishi se aage badhkar hoti ho aur udyog se aage badhkar seva kshetra ki hoti hai wahan par kaam karne ke liye jansankhya kaun gaon se bahar nikalkar audyogik sankul audyogik nagaron ki gosht pravas karna padta hai iske karan gramin jansankhya shahri jansankhya ke prabhav padta hai isliye arthavyavastha ke saath saath samaj vyavastha hamare jeevan pranali vyavastha hamari hamari manyata hai ki lagta hai ki hamare samaj mein hamare khan pan mein hamare haar mein kya parivartan aaye hain toh hum us prakar aatma ka aur nakaratmak parivartanon ko pehchaan payenge sabse pehli baat yah hai ki jaise jaise audyogikaran ka vikas bharat mein hota hai waise waise nagrikaran ki prakriya bhi tez hoti hai aaj bharat mein 2011 ki janganana ke anusaar 31 percent ki aabadi jo hai har baat karti hai aur kaha ja raha hai ki 2050 tak bharat mein 50 se adhik jansankhya dhire dhire adhivas ke ya mananiya niwas ke pramukh sthan bante ja rahe hain pramukh ande bante ja rahe hain jaha hamara bhavishya nirdharit pura tu shaharikaran jab hota hai toh uske saath saath hamare vyavhar hamare khan pan bhari jeevan shaili mein parivartan aata hai vyakti ke taur par jab hum ki sanrachna ko dekhte hain toh do jo samaj ki jo sanrachna hoti hai usme sanyukt parivar pranali payi jaati hai wahan par jati ke bandhanon ki jalan hoti hai shiksha ka prasaar nahi hota hai hamare mulya hamari purani jo vyavastha hai hamare jo purane vishwas hai hamare jo paani manyata hai unke aadhar par tike hote hain gaon mein jo ki ek sanyukt samajik vyavastha hoti hai sanyukt samajik pranali hoti hai har ek vyakti niyamon aur aadarshon ki usme bana hota hai toh is karan gaon mein jo swatantrata ka pahaloo hai vaah thoda kam ho jata hai aur wahan par har vyakti ke saamne naitikta aur in sab chijon ki volume ko zyada hoti hai lekin ek samaj mein unki vyakti ab gaon ki jansankhya dhara karte un se bahar nikal kar jab shehar ki aur badhta hai tab uske jeevan mein bahut bade badlav aate hain use pehli baat hai usko freedom usko jod democratic freedom pradan ki jaati hai bharatiya samvidhan ke 12 ko bhog karta hai usko shiksha ki facility zyada behtar raatoon mein Security swatantra hota hai rojgar ke avsar prapt hote hain sabhi vyaktiyon ko abhivyakti ki azadi azadi milne ke karan jo saamaan hote hain peele pad jaate hain usme globalization ya phir kaahe ki sabse zyada prabhav dikhta hai mahilaon ko avsar mile hain unko bahar nikalne ke liye seven ki gatisheelta mein vriddhi hui hai vaah sarkari naukriyan shiksha swasthya parivar kalyan suraksha vigyan in sabhi kshetro mein apni bhumika mein unhone behtar tarike se ada kiya hai toh isliye hamari isme hamare swabhav mein hamari hamare khan pan mein hamare hamare pahnawe mein teji se parivartan hain aur yah parivartan dhire dhire hamein ek globalaij sociaty banane mein aage ki aur badha rahe hain

हेलो दोस्तों हाउ आर यू आज मेरे सामने है इसका कोई जवाब नहीं दिया जा सकता है कि एक भारतीय हो

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय को अब पता नहीं क्या विदेशी का विदेशी चीजें बहुत अच्छे लगने लगे हमारे लिए बहुत खराब चीज अपने बनाए रखने और हमें अपने लिहाज से अपनी संस्कृत को तैयार करना चाहिए

bharatiya ko ab pata nahi kya videshi ka videshi cheezen bahut acche lagne lage hamare liye bahut kharab cheez apne banaye rakhne aur hamein apne lihaj se apni sanskrit ko taiyar karna chahiye

भारतीय को अब पता नहीं क्या विदेशी का विदेशी चीजें बहुत अच्छे लगने लगे हमारे लिए बहुत खराब

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