प्यार में लोग दीवाने क्यों हो जाते हैं?...


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Yashwant Singh Lodhi

प्राकृत-शिक्षक (प्राकृत धर्म ही सर्वोपरि है, इसका बचाव ही जीवन है।)

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जंघई दोस्तों जी आपका तो प्यार में लोग दीवाने क्यों हो जाते हैं तो देखिएगा व्यक्ति को जिनका किसी पर अधिकार जमाना मैंने मेहनत करके अधिकार जमाना बात छुपाता जी के जीवन मुक्त में ही यदि कोई शिकार ना जाए यदि कारण करने की कोशिश करते शायद इसलिए लोग प्यार में दीवाने करते मेरा कहने का तात्पर्य व्यक्ति अपने कर्म से मुक्त हैं अपने परिवार वालों द्वारा जीवन यापन की संपूर्ण व्यवस्था कर दी जाती है तब व्यक्ति फ्री टाइम में कुछ नहीं करता सिर्फ अपने विपरीत लिंग के संपर्क में आकर सिर्फ अपनी मनु वासना की पूर्ति करने में जुट जाता है जिस कारण भक्ति प्यार का सांझा करता है तो भी प्यार तो सीधी बात की है कि प्यार एक मानसिक प्रक्रिया जिसमें लोग दूसरों को अपने आकर्षक में एक-दूसरे के विपरीत जाकर के समाजवादी किया में जुड़ जाते हैं और दीवाने हो जाते हैं जिसके परिणाम आज हमारी अर्थव्यवस्था सॉरी हमारी समाज में ऐसे का नाम सूर्य निकलता है या तो हम अपनी जॉब से हमारे कैरियर से धराशाई जाते हैं जो व्यक्ति अपने के लिए अपने मां-बाप से अपनी समाज से हर तरीके से गिरे तो आ जाता है तो कोई बात नहीं प्यार करें दीवाना हो जाए वह बाद में उसको पछताना ही जीवन भर है थैंक यू धन्यवाद जय माता

janghai doston ji aapka toh pyar me log deewane kyon ho jaate hain toh dekhiega vyakti ko jinka kisi par adhikaar jamana maine mehnat karke adhikaar jamana baat chhupata ji ke jeevan mukt me hi yadi koi shikaar na jaaye yadi karan karne ki koshish karte shayad isliye log pyar me deewane karte mera kehne ka tatparya vyakti apne karm se mukt hain apne parivar walon dwara jeevan yaapan ki sampurna vyavastha kar di jaati hai tab vyakti free time me kuch nahi karta sirf apne viprit ling ke sampark me aakar sirf apni manu vasana ki purti karne me jut jata hai jis karan bhakti pyar ka sanjha karta hai toh bhi pyar toh seedhi baat ki hai ki pyar ek mansik prakriya jisme log dusro ko apne aakarshak me ek dusre ke viprit jaakar ke samajwadi kiya me jud jaate hain aur deewane ho jaate hain jiske parinam aaj hamari arthavyavastha sorry hamari samaj me aise ka naam surya nikalta hai ya toh hum apni job se hamare carrier se dharashai jaate hain jo vyakti apne ke liye apne maa baap se apni samaj se har tarike se gire toh aa jata hai toh koi baat nahi pyar kare deewana ho jaaye vaah baad me usko pachhataana hi jeevan bhar hai thank you dhanyavad jai mata

जंघई दोस्तों जी आपका तो प्यार में लोग दीवाने क्यों हो जाते हैं तो देखिएगा व्यक्ति को जिनक

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