क्या चीन और भारत के रिश्ते एक मुलाकात से सुधर पाएंगे? आपको क्या लगता है चीन सुधरेगा?...


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चीन और भारत के रिश्ते मुलाकात से सुधर पाएंगे या नहीं जहां तक मेरा मानना है कि आता ताई प्रवृत्ति के लोग कभी मुलाकातों से नहीं माना करते जो नीतियां है हमारी साम दाम दंड और भेद यह नेता दंड नीतियों से ही समझने की कोशिश करते हैं कि कि इनको प्रेम की भाषा समझ में नहीं आती अब कितनी मुलाकातों का दौर लगा लीजिए ना तो दे प्रवृत्ति के लोगों के लिए यह ऐसी गंदी मानसिकता है इनकी यह कोई भी संबंध ठीक से नहीं रखेंगे जहां पर इनका अपना उल्लू सीधा होता है वहीं पर संबंध अच्छे से रहते हैं और हमको लगता है कि बात नहीं हल नहीं निकलता हर चीजों का उसके लिए बहुत सारी चीजें ऐसी होती है सरकारी कर सकती हैं लेकिन हमें कोई जरूरत ही नहीं है कि हम ऐसे ही आदत है प्रवृति के लोगों के साथ अपने रिश्ते सही रखे अपने रिश्ते को कायम करें और जितना ज्यादा हो सके भारतीयों से यही हमारी एक रिक्वेस्ट है चीनी सामानों का चाइनीस प्रोडक्ट ओं का बहिष्कार करें स्वदेशी निर्मित स्वदेश में निर्मित स्वदेशी प्रोडक्ट्स हमारे उनका यूज करें आप प्रेरणा ने एक बहुत बड़े उद्योगपति का नाम ले रहा हूं आदरणीय टाटा जी जिस समय मुंबई हमला हुआ था रिबन 4000 से 5000 सुनो गाड़ियों का आर्डर आया हुआ था पाकिस्तान से जिसको उन्होंने यह कहते हुए कैंसिल कर दिया कि हमारी ही बनाई हुई गाड़ियां हम ऐसे मुल्क को अगर देंगे जो कि हमारे ही खिलाफ चीजों को करने में यूज होंगी तो हमें जरूरत नहीं है कि हम ऐसे लोगों को गाड़ी अपनी बना करके तो उन्होंने वह आर्डर कैंसिल कर दिया था नाक रगड़ता रह गया वहां का डीलिंग प्रसन्न लेकिन टाटा जी अटल विश्वास के आगे झुके नहीं और ऐसे आता तरी प्रवृति के लोगों के साथ में करना भी यही चाहिए चाइना पाकिस्तान इन लोगों की सोच ही दूषित है और ऐसे दूसरे सोच वालों को हम मुलाकात के रास्ते पर गजल के सूची मना ले कुछ टाइम पहले ही हमारे प्रथम प्रधानमंत्री जी द्वारा बनाया गया पंचशील सिद्धांत भी फेल हो गया था हिंदी चीनी भाई भाई का नारा जो दिया था उन्होंने उसका खामियाजा हम लोगों ने 1962 की लड़ाई में उगता है तो उसने हजारों किलोमीटर वर्ग किलोमीटर की जमीन हमारी चली गई और इसमें यही कहना चाहेंगे कि चाइना के साथ रिश्ते प्रगाढ़ करने से अच्छे करने से हमारा कोई लाभ नहीं है क्योंकि वह हमेशा लाख की बातें सोचता है तो भारत को भी इस विषय में सोचना कि भारत का भी लाभ तभी तो के बारे में सोचें और जितना ज्यादा हो सके इन हाथों से प्रवृत्ति के लोगों से दूर ही रहे अपनी आर्थिक चीजों को हम मजबूत करें और स्वदेश में निर्मित हुई पदार्थ प्रोडक्ट का यूज करें सभी चीजों का यूज करें जिससे आपकी कौन में अच्छी होगी हमारी कौन में अच्छी होगी देश की कौन में अच्छी होगी हमारे देश का विकास हो पाए धन्यवाद

china aur bharat ke rishte mulakat se sudhar payenge ya nahi jaha tak mera manana hai ki aata taii pravritti ke log kabhi mulakaton se nahi mana karte jo nitiyan hai hamari saam daam dand aur bhed yah neta dand nitiyon se hi samjhne ki koshish karte hain ki ki inko prem ki bhasha samajh me nahi aati ab kitni mulakaton ka daur laga lijiye na toh de pravritti ke logo ke liye yah aisi gandi mansikta hai inki yah koi bhi sambandh theek se nahi rakhenge jaha par inka apna ullu seedha hota hai wahi par sambandh acche se rehte hain aur hamko lagta hai ki baat nahi hal nahi nikalta har chijon ka uske liye bahut saari cheezen aisi hoti hai sarkari kar sakti hain lekin hamein koi zarurat hi nahi hai ki hum aise hi aadat hai pravirti ke logo ke saath apne rishte sahi rakhe apne rishte ko kayam kare aur jitna zyada ho sake bharatiyon se yahi hamari ek request hai chini samanon ka Chinese product on ka bahishkar kare swadeshi nirmit swadesh me nirmit swadeshi products hamare unka use kare aap prerna ne ek bahut bade udyogpati ka naam le raha hoon adaraniya tata ji jis samay mumbai hamla hua tha ribbon 4000 se 5000 suno gadiyon ka order aaya hua tha pakistan se jisko unhone yah kehte hue cancel kar diya ki hamari hi banai hui gadiyan hum aise mulk ko agar denge jo ki hamare hi khilaf chijon ko karne me use hongi toh hamein zarurat nahi hai ki hum aise logo ko gaadi apni bana karke toh unhone vaah order cancel kar diya tha nak ragdata reh gaya wahan ka dealing prasann lekin tata ji atal vishwas ke aage jhuke nahi aur aise aata tari pravirti ke logo ke saath me karna bhi yahi chahiye china pakistan in logo ki soch hi dushit hai aur aise dusre soch walon ko hum mulakat ke raste par gazal ke suchi mana le kuch time pehle hi hamare pratham pradhanmantri ji dwara banaya gaya Panchsheel siddhant bhi fail ho gaya tha hindi chini bhai bhai ka naara jo diya tha unhone uska khamiyaja hum logo ne 1962 ki ladai me ugata hai toh usne hazaro kilometre varg kilometre ki jameen hamari chali gayi aur isme yahi kehna chahenge ki china ke saath rishte pragadh karne se acche karne se hamara koi labh nahi hai kyonki vaah hamesha lakh ki batein sochta hai toh bharat ko bhi is vishay me sochna ki bharat ka bhi labh tabhi toh ke bare me sochen aur jitna zyada ho sake in hathon se pravritti ke logo se dur hi rahe apni aarthik chijon ko hum majboot kare aur swadesh me nirmit hui padarth product ka use kare sabhi chijon ka use kare jisse aapki kaun me achi hogi hamari kaun me achi hogi desh ki kaun me achi hogi hamare desh ka vikas ho paye dhanyavad

चीन और भारत के रिश्ते मुलाकात से सुधर पाएंगे या नहीं जहां तक मेरा मानना है कि आता ताई प्रव

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