वर्तमान शिक्षा प्रणाली कैसी है?...


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Gyandeep Kkr

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3:44
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए वर्तमान शिक्षा पद्धति जहां तक मैंने देखा है कुछ पेंटरली में भी पढ़ती थी तो मुझे ऐसा लगता कि रखता फिकेशन जो है यह बात सही नहीं है और ओवरबर्डन डालकर बच्चों पर उनको पढ़ाना यह भी सही नहीं है कितने लोग पढ़ते हैं आप देखिए हम जितने भी है पढ़ाई से बच्चों से पढ़ाई करनी शुरू की कितना काम करते थे पढ़ाई का और अब हमारे पास हो क्या नॉलेज आप खुद देखिए जितना हमने पढ़ा क्या वह हमें याद है क्या हम उसे यूटिलाइज कर पाए इससे अच्छा कम ही पढ़ाया जाता बच्चों पर बटन कम डालकर जो बिना रटे के चीज होती है जिसमें रुचि भी बनती है और जिस बच्चे का जिस चीज में इंटरेस्ट है उसको स्ट्रोक नहीं अगर जाने दिया जाता यह भी कमी हमारी है क्योंकि शिक्षा पद्धति ऐसी बना दी गई है शुरू से ही ऐसा चयन होना चाहिए कि जिससे बच्चों को जो भी फील्ड में हो जाना चाहिए और ऐसी कोई भी बेकार सर्फिंग जिससे आगे चलकर फायदा होता कि पेरेंट्स को भी लगेगी हम सही दिशा में लेके जा रहे हैं उनको जिससे बच्चे तो पूरा दिन होते हैं बचपन में तो उसी टाइम से उनमें अपने अंदर की होती है उसको यूटिलाइज किया जाए हर एक बच्चा पढ़ाई में बहुत आगे नहीं होता इसका मतलब यह नहीं है कि वह कुछ भी नहीं कर सकता बड़े होने पर आप देखते हैं सरकारी नौकरी कितने लोगों को मिलती है बाकी उनको क्या काम करना पड़ता है बचपन से ही देख लीजिए कि वह बच्चा कितना आगे जा सकता है उस मुताबिक उसको पहले से ही वैसे शिक्षा दी जानी चाहिए और शिक्षा में बहुत जरूरी है अध्यात्मिक ज्ञान के बिना इंसानों भटक जाता है यह व्यर्थ की चीज नहीं है यही सही चीज है इसी के साथ शिक्षा चलनी चाहिए इसलिए बचपन से ही बच्चे को जैसा बना दिया जाता है वैसा बन जाता है हाथों में भी ऐसे निकिता रिपीट नया कुछ भी ऐसे कहीं भी लग गई ऐसे नहीं पहले जान लेना चाहिए जैसे वर्तमान में मैंने बहुत अच्छी पुस्तक देखी है उसका नाम है ज्ञान लूंगा उसमें एक चीज प्रमाण के साथ है और ऐसी है क्या करूं उसको बंदा पढ़ना पढ़ने लगे मन करता है कि कई लोगों ने तो 1 दिन में कंप्लीट करती ऐसी पुस्तक है वह है संत रामपाल जी की उसमें शुरू में विरोध उन लोगों को होता है जो सच्चाई पूरी जान नहीं पाते मैं क्योंकि आप इस पुस्तक को पड़ी एक पुस्तक है जीने की राह भी संत रामपाल जी के दोनों में से किसी एक पुस्तक को मंगवाई एक फ्री मिल जाएगी जब आप खुद देख लेंगे तब आपको पता चलेगा कि सच्चाई क्या है और इस पुस्तक मंगवाने के लिए अपना पूरा नाम पता फोन नंबर इस नंबर पर सेंड कीजिए यह फ्री में मिलती है 74968 01823 इसके साथ-साथ आप इनका सत्संग सुनिए साधना चैनल पर शाम को हर रोज 7:30 से 8:30 तक जवाब दिए पूरा जान लेंगे फिर आपको खुद ही पता चल जाएगा कि मैं वास्तव में कहना क्या चाहती हो मैंने शुरू में अधूरे सुना था मुझे पता नहीं चला जब मैंने लगातार सुनना शुरू किया तब मैं समझ गई आप भी जरूर देखिए

dekhiye vartaman shiksha paddhatee jaha tak maine dekha hai kuch painterly mein bhi padhati thi toh mujhe aisa lagta ki rakhta fikeshan jo hai yah baat sahi nahi hai aur ovarabardan dalkar baccho par unko padhana yah bhi sahi nahi hai kitne log padhte hain aap dekhiye hum jitne bhi hai padhai se baccho se padhai karni shuru ki kitna kaam karte the padhai ka aur ab hamare paas ho kya knowledge aap khud dekhiye jitna humne padha kya vaah hamein yaad hai kya hum use utilize kar paye isse accha kam hi padhaya jata baccho par button kam dalkar jo bina ratte ke cheez hoti hai jisme ruchi bhi banti hai aur jis bacche ka jis cheez mein interest hai usko stroke nahi agar jaane diya jata yah bhi kami hamari hai kyonki shiksha paddhatee aisi bana di gayi hai shuru se hi aisa chayan hona chahiye ki jisse baccho ko jo bhi field mein ho jana chahiye aur aisi koi bhi bekar surfing jisse aage chalkar fayda hota ki parents ko bhi lagegi hum sahi disha mein leke ja rahe hain unko jisse bacche toh pura din hote hain bachpan mein toh usi time se unmen apne andar ki hoti hai usko utilize kiya jaaye har ek baccha padhai mein bahut aage nahi hota iska matlab yah nahi hai ki vaah kuch bhi nahi kar sakta bade hone par aap dekhte hain sarkari naukri kitne logo ko milti hai baki unko kya kaam karna padta hai bachpan se hi dekh lijiye ki vaah baccha kitna aage ja sakta hai us mutabik usko pehle se hi waise shiksha di jani chahiye aur shiksha mein bahut zaroori hai adhyatmik gyaan ke bina insano bhatak jata hai yah vyarth ki cheez nahi hai yahi sahi cheez hai isi ke saath shiksha chalni chahiye isliye bachpan se hi bacche ko jaisa bana diya jata hai waisa ban jata hai hathon mein bhi aise nikita repeat naya kuch bhi aise kahin bhi lag gayi aise nahi pehle jaan lena chahiye jaise vartaman mein maine bahut achi pustak dekhi hai uska naam hai gyaan lunga usme ek cheez pramaan ke saath hai aur aisi hai kya karu usko banda padhna padhne lage man karta hai ki kai logo ne toh 1 din mein complete karti aisi pustak hai vaah hai sant rampal ji ki usme shuru mein virodh un logo ko hota hai jo sacchai puri jaan nahi paate main kyonki aap is pustak ko padi ek pustak hai jeene ki raah bhi sant rampal ji ke dono mein se kisi ek pustak ko mangavai ek free mil jayegi jab aap khud dekh lenge tab aapko pata chalega ki sacchai kya hai aur is pustak mangwane ke liye apna pura naam pata phone number is number par send kijiye yah free mein milti hai 74968 01823 iske saath saath aap inka satsang suniye sadhna channel par shaam ko har roj 7 30 se 8 30 tak jawab diye pura jaan lenge phir aapko khud hi pata chal jaega ki main vaastav mein kehna kya chahti ho maine shuru mein adhure suna tha mujhe pata nahi chala jab maine lagatar sunana shuru kiya tab main samajh gayi aap bhi zaroor dekhiye

देखिए वर्तमान शिक्षा पद्धति जहां तक मैंने देखा है कुछ पेंटरली में भी पढ़ती थी तो मुझे ऐसा

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pervs

Tutor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो अभी हम शिक्षा है मतलब शिक्षा इनोवेटिव नहीं है ऐप लाइट नहीं है और वर्किंग नहीं हूं का मतलब आप वर्तमान में पढ़ लिए हैं कैसा माध्यम से आप मतलब ही नहीं है

hello abhi hum shiksha hai matlab shiksha innovative nahi hai app light nahi hai aur working nahi hoon ka matlab aap vartaman mein padh liye hain kaisa madhyam se aap matlab hi nahi hai

हेलो अभी हम शिक्षा है मतलब शिक्षा इनोवेटिव नहीं है ऐप लाइट नहीं है और वर्किंग नहीं हूं का

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली कैसी है कहने की आवश्यकता नहीं इससे पूर्व भी अपने विवेचना में अपने व्याख्यान में मैं इस बात को कह चुका हूं कि यह प्रणाली व्यक्ति का निर्माण नहीं करते यह प्रणाली हायर एजुकेशन में तो आप समान रूप से हम आ गए हैं लेकिन आधारित शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा अभी भी हम दोस्तों हैं जो एक गीली मिट्टी को बच्चा त्रेक पीली मिट्टी के समान होता है जो आकृति प्रारंभ में उसको प्रदान की जाएगी आवे पर चढ़ने के पश्चात सूखने की मिट्टी सूखने के पश्चात उसका बिना डिस्ट्रॉय किए हुए उस मूर्ति को हम बदल नहीं सकते वह एक खाका जो एक तैयार हो जाता है मानसिक रूप से उसको बदलना असंभव सा कार्य है बाल्मीकि विरले लोग होते हैं शिक्षा व्यवस्था यदि प्रारंभिक स्वस्थ हो तो देश विकसित होता है विकास की ओर बढ़ता है लोगों में अच्छी भावनाओं का जागरण होता है और वर्तमान शिक्षा प्रणाली इसको पूरा करने में अक्षम है इसमें मूल चूल परिवर्तन की आवश्यकता है जिससे हम व्यक्ति का निर्माण कर सकें अहंकार का नहीं जो व्यक्ति पढ़ाई लिखाई करने के बाद अपनी संस्कृति अपने व्यवहार में पूरी तरह से बदल जाता है ना तो वह देश का काम करते इसके लिए होता है ना ही परिवार के लिए होता है नहीं वह समाज के लिए विकसित हो सकता है अतः शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए वर्तमान में यह शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन होगा समान शिक्षा प्रणाली लागू होगी हर एक व्यक्ति के लिए चाहे वह किसी भी वर्ग और जाति का हो तो निश्चित रूप से आने वाले 10 सालों के पश्चात हम एक स्वर्णिम भविष्य की कल्पना कर सकते हैं धन्यवाद

vartaman shiksha pranali kaisi hai kehne ki avashyakta nahi isse purv bhi apne vivechna me apne vyakhyan me main is baat ko keh chuka hoon ki yah pranali vyakti ka nirmaan nahi karte yah pranali hire education me toh aap saman roop se hum aa gaye hain lekin aadharit shiksha aur madhyamik shiksha abhi bhi hum doston hain jo ek gili mitti ko baccha trek pili mitti ke saman hota hai jo akriti prarambh me usko pradan ki jayegi aawe par chadhne ke pashchat sukhne ki mitti sukhne ke pashchat uska bina destroy kiye hue us murti ko hum badal nahi sakte vaah ek khaka jo ek taiyar ho jata hai mansik roop se usko badalna asambhav sa karya hai balmiki virle log hote hain shiksha vyavastha yadi prarambhik swasth ho toh desh viksit hota hai vikas ki aur badhta hai logo me achi bhavnao ka jagran hota hai aur vartaman shiksha pranali isko pura karne me aksham hai isme mul chula parivartan ki avashyakta hai jisse hum vyakti ka nirmaan kar sake ahankar ka nahi jo vyakti padhai likhai karne ke baad apni sanskriti apne vyavhar me puri tarah se badal jata hai na toh vaah desh ka kaam karte iske liye hota hai na hi parivar ke liye hota hai nahi vaah samaj ke liye viksit ho sakta hai atah shiksha pranali aisi honi chahiye vartaman me yah shiksha pranali me parivartan hoga saman shiksha pranali laagu hogi har ek vyakti ke liye chahen vaah kisi bhi varg aur jati ka ho toh nishchit roop se aane waale 10 salon ke pashchat hum ek swarnim bhavishya ki kalpana kar sakte hain dhanyavad

वर्तमान शिक्षा प्रणाली कैसी है कहने की आवश्यकता नहीं इससे पूर्व भी अपने विवेचना में अपने

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मेरे प्यारे भाइयों को मेरा नमस्कार वर्तमान शिक्षा प्रणाली ठीक है चुप करके पढ़ाई करें और कड़ी मेहनत कर अपने आप को सुधारें शिक्षा प्रणाली में कोई दोस्त नहीं है और हमारे मेरे से बात की थी दिन का काम है वह इस पर फोकस करते रहते हैं अपने चेहरे के ग्राफ में सुझाव

mere pyare bhaiyo ko mera namaskar vartaman shiksha pranali theek hai chup karke padhai kare aur kadi mehnat kar apne aap ko sudhare shiksha pranali me koi dost nahi hai aur hamare mere se baat ki thi din ka kaam hai vaah is par focus karte rehte hain apne chehre ke graph me sujhaav

मेरे प्यारे भाइयों को मेरा नमस्कार वर्तमान शिक्षा प्रणाली ठीक है चुप करके पढ़ाई करें और कड

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Anku

Teaching

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली जोआना टाइम बहुत रहती है मतलब अगर बच्चों के बेसिक्स की बात करें तो बेसिक्स के ऊपर ध्यान नहीं जाता बच्चे क्वेश्चन क्वेश्चन कर जाते हैं अगर कोई भी होती है तो उसमें क्वेश्चन ही क्वेश्चन दिया होते हैं कि नहीं पता तो वह क्वेश्चन कैसे कर लेगा करने को तो पता ही नहीं कि आई का बेस क्या है तो मतलब कैसे कोई पॉसिबल नहीं है पेपर में तो कहीं से भी क्वेश्चन आ सकता है तो बस हमारी एजुकेशन सिस्टम को थोड़ा ध्यान देना चाहिए कि जहां पर वह क्वेश्चंस पर ध्यान देती है वहां पर वह बेसिक के ऊपर ज्यादा ध्यान दें

vartmaan shiksha pranali joaana time bahut rehti hai matlab agar baccho ke basics ki baat kare toh basics ke upar dhyan nahi jata bacche question question kar jaate hain agar koi bhi hoti hai toh usme question hi question diya hote hain ki nahi pata toh vaah question kaise kar lega karne ko toh pata hi nahi ki I ka base kya hai toh matlab kaise koi possible nahi hai paper mein toh kahin se bhi question aa sakta hai toh bus hamari education system ko thoda dhyan dena chahiye ki jaha par vaah questions par dhyan deti hai wahan par vaah basic ke upar zyada dhyan dein

वर्तमान शिक्षा प्रणाली जोआना टाइम बहुत रहती है मतलब अगर बच्चों के बेसिक्स की बात करें तो ब

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Prabhat Verma

primary teacher government of bihar

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भारत के वर्तमान शिक्षा प्रणाली को परतंत्र काल की शिक्षा प्रणाली माना जाता है यह ब्रिटिश शासन की देन मानी जाती है इस प्रणाली को लॉर्ड मैकाले ने जन्म दिया था इस प्रणाली की वजह से आज भी सफेद कॉल रो वाले लिपि और बाबू ही पैदा हो रहे हैं इसे चप्पल आदि की वजह से विद्यार्थियों का शारीरिक और आत्मिक विकास नहीं हो पा रहा है

bharat ke vartaman shiksha pranali ko partantra kaal ki shiksha pranali mana jata hai yah british shasan ki then maani jaati hai is pranali ko lord maikale ne janam diya tha is pranali ki wajah se aaj bhi safed call ro waale lipi aur babu hi paida ho rahe hain ise chappal aadi ki wajah se vidyarthiyon ka sharirik aur atmik vikas nahi ho paa raha hai

भारत के वर्तमान शिक्षा प्रणाली को परतंत्र काल की शिक्षा प्रणाली माना जाता है यह ब्रिटिश शा

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