यौन हिंसा से त्रस्त समाज में बदलाव कैसे और कब आएगा? आपकी क्या राय है?...


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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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ऐसे और सवाल
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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखें इसके लिए हम सब कहने पर ही जिम्मेदार होते हैं और हर एक इंसान को अपना रोल प्ले करना पड़ता है अब हम सब कैसे जिम्मेदार है सोच कर देखिए कोई भी इंसान कैसा बनता है उसका व्यक्तित्व कैसे बनता है उसके चरित्र का निर्माण कैसे होता है मैं किसी भी इंसान के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण होते हैं उसके अपने घर से चीजें वहीं से शुरू होती है एक जब बच्चा होता है वह अपने घर से ही सब कुछ चीजें सीखता है उसको संस्कार मिलते हैं उसको शिक्षा मिलती है फॉर्मल एजुकेशन मिलता है इनफॉरमल एजुकेशन मिलता है वह घर में लोगों को देखता है बाहर दोस्तों को देखता है और जब करता है सीखता है समझता है इतने सारे चैनल से इतने सारे सोचते थे जिनसे वह उसके दिमाग में चीजें जाती रहती है उसका आचरण बदलता रहता है वह एक नजरिया बनाता रहता है उसका एक अपना दृष्टिकोण बन जाता है वह जिस किसी भी क्या-क्या चीज के संपर्क में आता है किस तरीके की संगत में वो रहता है यह हेल्प करते हैं या इनेबल करते हैं उस इंसान के व्यक्तित्व व चरित्र के विकास में अगर इंसान का बैकग्राउंड एजुकेशन एक्सपीरियंस संस्कार यह सारे सही नहीं रहे हैं तो आगे चलकर वह इंसान दिक्कत परेशानी का कारण बन सकता है समाज के लिए अपने घर परिवार के लिए प्रिय जनों के लिए या किसी के लिए भी तो पहली तो घर की शिक्षा हो गई दूसरा भाई हम स्कूल में कॉलेज में जहां पर भी जाते हैं वहां पर क्या देखते हैं क्या सीखते हैं अब वह बड़ा इंपोर्टेंट होता है तो उनका भी अपना अहम योगदान होता है रोल होता है तू प्ले ताकि वह एक व्यक्तित्व में या एक इंसान को एक सांचे में ढालने की कोशिश करें प्रयास करें उसके बाद जब इंसान आगे बढ़ता है तो इंसान को क्या मिलता है सोच कर देखिए इंसान एक समाज में जाता है एक समाज में शुरू से ही रहता है लेकिन फिर भी इंसान अपने आप को पढ़ाई लिखाई के बाद इंडिपेंडेंस समझने लगता है वह समाज उसको किस तरीके से देखता है समाज के क्या कार्य कानून होते हैं क्या नियम होता है क्या उसको पता है या नहीं पता और यहीं पर बात आती है क्या उसको पता है कि गवर्मेंट के रूल्स एंड रेगुलेशन क्या है ऐसा आचरण करने पर उसे क्या दंड मिल सकता है क्या पनिशमेंट हो सकती है क्या यह सही है या यह सही नहीं है क्या चीज गलत है क्या सही है इसमें क्या फर्क है और अगर आप कोई गलत रास्ते पर चाहते हो कोई गलत काम करते हो तो उसका अंजाम क्या होता है क्या उसको यह बताएं जाता है क्या उसको कहीं से इंफॉर्मेशन मिलती है कौन बताते हो उसको तो सरकार हो गई है वहां का लोकल जो यूनो और गवर्मेंट हो गया जो आपके राज्य की व्यवस्था हो गई तो अलग-अलग तरीकों से माध्यम से इस इंसान को हर एक इंसान को समझाया जाना चाहिए समझाना हिंदुस्तान कोई क्लास नहीं लेनी है लेकिन उसको आवेदन अवगत कराना बहुत जरूरी है कि भाई यह न्यायोचित है और यह अन्याय के विरुद्ध है यह सही बात नहीं है और अगर आपका आचरण ऐसा कुछ होता है तो आपको उसकी सजा भुगतनी पड़ेगी जैसे कि हम सबको बेसिकली पता होता है कि सिग्नल को क्रॉस नहीं करना जब रेड लाइट होता है तो ट्राफिक सिग्नल का लेकिन जो लोग क्रॉस करते हैं और आगे अगर पुलिस वाला होता है या कैमरे लगे रहते हैं तो पता लग जाता है किसने क्रॉस किया है तो उसकी भाई यह सजा है यह पेनाल्टी है इसी तरह ट्रेन में लिखा होता है क्लीयरली लकी भाई चेन खींचने से गाड़ी रुक जाती है और अगर कोई जानबूझकर हंसी मजाक में खेल खेल में चेन खींचकर गाड़ी रोकता है तो उसका उसे जुर्माना देना पड़ता है इसी तरीके से हमारे समाज में हमारे व्यवस्था में जो भी ऐसे अपराध है जघन्य अपराध हैं उनके बारे में क्या लोगों को पता है या नहीं पता आज उसको किस तरीके देखता है पुलिस अपना रोल कैसे निभाता है और न्यायिक अर्थव्यवस्था कैसी है भाई अन्याय होता है या उसमें देरी होती है हर एक इंसान को अपना अपना रोल हाल एक डिपार्टमेंट को हर एक फंक्शन को अपना रोल अगर बखूबी निभाने आ जाए या करें और पॉलिसी सामरिक ले ली रिफाइंड लोगों को पता हो कि यह क्या करने से क्या होता है क्या सही है क्या गलत है चैटिंग करता इसको बदलने में सक्षम हो सकते हैं एक और बात का शोषण की बातें वैसे तो हम हमारे जो पूर्वज हैं और हमारी जो संस्कृत यह सब सभ्यता है जो संस्कार चले आ रहे हैं घर घरों में जो संस्कार आ रहे हैं सो रहे हैं अभी तक वह अच्छे संस्कार ही रहे हैं लेकिन बदलते हुए समय में जहां पर बहुत सारी चीजें हैं जो कि डिस्टर्ब करती हैं जो कि आई एम प्रोत्साहित नहीं कहूंगा बटर इनफ्लुएंस करती है काफी है तक किसी भी युवक को या युवती को तो उससे ऑयल को कैसे बचाया जाए उनका उनको कैसे मैनेज किया जाए बड़ा इंपोर्ट होता है तो हर तरीके से हर चीज को देखना पड़ेगा इसमें खाली सरकार के रोल की बात नहीं होती हर एक इंसान के रोल की बात होती है समाज की बात होती है सब लोगों को अपना अपना रोल अप्लाई करना पड़ेगा तब जाकर हम एक बेहतर समाज की तरफ आ जा पाएंगे

dekhen iske liye hum sab kehne par hi zimmedar hote hai aur har ek insaan ko apna roll play karna padta hai ab hum sab kaise zimmedar hai soch kar dekhiye koi bhi insaan kaisa baata hai uska vyaktitva kaise baata hai uske charitra ka nirmaan kaise hota hai kisi bhi insaan ke vyaktitva aur charitra ka nirmaan hote hai uske apne ghar se cheezen wahi se shuru hoti hai ek jab baccha hota hai vaah apne ghar se hi sab kuch cheezen sikhata hai usko sanskar milte hai usko shiksha milti hai formal education milta hai inafaramal education milta hai vaah ghar mein logo ko dekhta hai bahar doston ko dekhta hai aur jab karta hai sikhata hai samajhata hai itne saare channel se itne saare sochte the jinse vaah uske dimag mein cheezen jaati rehti hai uska aacharan badalta rehta hai vaah ek najariya banata rehta hai uska ek apna drishtikon ban jata hai vaah jis kisi bhi kya kya cheez ke sampark mein aata hai kis tarike ki sangat mein vo rehta hai yah help karte hai ya enable karte hai us insaan ke vyaktitva va charitra ke vikas mein agar insaan ka background education experience sanskar yah saare sahi nahi rahe hai toh aage chalkar vaah insaan dikkat pareshani ka karan ban sakta hai samaj ke liye apne ghar parivar ke liye priya jano ke liye ya kisi ke liye bhi toh pehli toh ghar ki shiksha ho gayi doosra bhai hum school mein college mein jaha par bhi jaate hai wahan par kya dekhte hai kya sikhate hai ab vaah bada important hota hai toh unka bhi apna aham yogdan hota hai roll hota hai tu play taki vaah ek vyaktitva mein ya ek insaan ko ek sanche mein dhalne ki koshish kare prayas kare uske baad jab insaan aage badhta hai toh insaan ko kya milta hai soch kar dekhiye insaan ek samaj mein jata hai ek samaj mein shuru se hi rehta hai lekin phir bhi insaan apne aap ko padhai likhai ke baad Independence samjhne lagta hai vaah samaj usko kis tarike se dekhta hai samaj ke kya karya kanoon hote hai kya niyam hota hai kya usko pata hai ya nahi pata aur yahin par baat aati hai kya usko pata hai ki government ke rules and regulation kya hai aisa aacharan karne par use kya dand mil sakta hai kya punishment ho sakti hai kya yah sahi hai ya yah sahi nahi hai kya cheez galat hai kya sahi hai isme kya fark hai aur agar aap koi galat raste par chahte ho koi galat kaam karte ho toh uska anjaam kya hota hai kya usko yah bataye jata hai kya usko kahin se information milti hai kaun batatey ho usko toh sarkar ho gayi hai wahan ka local jo uno aur government ho gaya jo aapke rajya ki vyavastha ho gayi toh alag alag trikon se madhyam se is insaan ko har ek insaan ko samjhaya jana chahiye samajhana Hindustan koi class nahi leni hai lekin usko avedan avgat krana bahut zaroori hai ki bhai yah nyayochit hai aur yah anyay ke viruddh hai yah sahi baat nahi hai aur agar aapka aacharan aisa kuch hota hai toh aapko uski saza bhugatani padegi jaise ki hum sabko basically pata hota hai ki signal ko cross nahi karna jab red light hota hai toh traffic signal ka lekin jo log cross karte hai aur aage agar police vala hota hai ya camera lage rehte hai toh pata lag jata hai kisne cross kiya hai toh uski bhai yah saza hai yah penalti hai isi tarah train mein likha hota hai kliyarali lucky bhai chain kheenchne se gaadi ruk jaati hai aur agar koi janbujhkar hansi mazak mein khel khel mein chain khichkar gaadi rokta hai toh uska use jurmana dena padta hai isi tarike se hamare samaj mein hamare vyavastha mein jo bhi aise apradh hai jaghanya apradh hai unke bare mein kya logo ko pata hai ya nahi pata aaj usko kis tarike dekhta hai police apna roll kaise nibhata hai aur nyayik arthavyavastha kaisi hai bhai anyay hota hai ya usme deri hoti hai har ek insaan ko apna apna roll haal ek department ko har ek function ko apna roll agar bakhubi nibhane aa jaaye ya kare aur policy samarik le li Refined logo ko pata ho ki yah kya karne se kya hota hai kya sahi hai kya galat hai chatting karta isko badalne mein saksham ho sakte hai ek aur baat ka shoshan ki batein waise toh hum hamare jo purvaj hai aur hamari jo sanskrit yah sab sabhyata hai jo sanskar chale aa rahe hai ghar gharon mein jo sanskar aa rahe hai so rahe hai abhi tak vaah acche sanskar hi rahe hai lekin badalte hue samay mein jaha par bahut saree cheezen hai jo ki disturb karti hai jo ki I M protsahit nahi kahunga butter inafluens karti hai kaafi hai tak kisi bhi yuvak ko ya yuvati ko toh usse oil ko kaise bachaya jaaye unka unko kaise manage kiya jaaye bada import hota hai toh har tarike se har cheez ko dekhna padega isme khaali sarkar ke roll ki baat nahi hoti har ek insaan ke roll ki baat hoti hai samaj ki baat hoti hai sab logo ko apna apna roll apply karna padega tab jaakar hum ek behtar samaj ki taraf aa ja payenge

देखें इसके लिए हम सब कहने पर ही जिम्मेदार होते हैं और हर एक इंसान को अपना रोल प्ले करना पड

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Nikhil Ranjan

HoD - NIELIT

1:24
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

समाज में बदलाव कैसे और कब आएगा आपकी क्या राय है तो देखिए मेरा मानना है जब तक यहां पर बच्चों को आप मोरल वैल्यू मैनपाट नहीं करेंगे उनको इन तीनों के बारे में नहीं बताएंगे सिर्फ उनको किताबी ज्ञान ही देते रहेंगे तब तक इस तरह की प्रॉब्लम समाज में बनी रहेगी पहले के समय में क्या होते हैं थी तो संस्कार बच्चों को करते ही मिल जाते थे लेकिन जब से न्यूक्लियर फैमिली बनी है मदर फादर भी यहां पर वर्किंग हो गए हैं तो बच्चा किसके साथ रहता है बेबी सीटर के साथ या फिर आया रखी होती है या काम वाली होती है उनके साथ बच्चा अपना समझाना भी आता है उसका रंग जो उसका ओवरऑल डेवलपमेंट है जो उसके अंदर संस्कार जाने हैं वह घर परिवार वाले संस्कार ना जाकर वह अमुक व्यक्ति के संस्कार जाते हैं जिस दिन लोकेलिटी आज जहां को वह बिलॉन्ग करता है अब उसके अच्छे संस्कार भी हो सकते हैं बुरे भी खराब भी हो सकते हैं तो कोशिश करें कि बच्चों के लिए थोड़ा सा यहां पर खुलती समय ज्यादा निकाले दूसरा उनको मोरल वैल्यू आर्टिकल पहले उसके बारे में बताते रहे जब हम रूट लेवल पर चीजें सही कर देंगे तुम पर यकीन मानिए कुछ सालों बाद जब उससे बनाएंगे तो वह भी बहुत ही मीठे होंगे आपकी क्या राय है इस बारे में कमेंट सेक्शन अपनी राय जाहिर करें शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद

samaj me badlav kaise aur kab aayega aapki kya rai hai toh dekhiye mera manana hai jab tak yahan par baccho ko aap moral value mainpat nahi karenge unko in tatvo ke bare me nahi batayenge sirf unko kitabi gyaan hi dete rahenge tab tak is tarah ki problem samaj me bani rahegi pehle ke samay me kya hote hain thi toh sanskar baccho ko karte hi mil jaate the lekin jab se nuclear family bani hai mother father bhi yahan par working ho gaye hain toh baccha kiske saath rehta hai baby seater ke saath ya phir aaya rakhi hoti hai ya kaam wali hoti hai unke saath baccha apna samajhana bhi aata hai uska rang jo uska overall development hai jo uske andar sanskar jaane hain vaah ghar parivar waale sanskar na jaakar vaah amuk vyakti ke sanskar jaate hain jis din lokeliti aaj jaha ko vaah Belong karta hai ab uske acche sanskar bhi ho sakte hain bure bhi kharab bhi ho sakte hain toh koshish kare ki baccho ke liye thoda sa yahan par khulti samay zyada nikale doosra unko moral value article pehle uske bare me batatey rahe jab hum root level par cheezen sahi kar denge tum par yakin maniye kuch salon baad jab usse banayenge toh vaah bhi bahut hi meethe honge aapki kya rai hai is bare me comment section apni rai jaahir kare subhkamnaayain aapke saath hain dhanyavad

समाज में बदलाव कैसे और कब आएगा आपकी क्या राय है तो देखिए मेरा मानना है जब तक यहां पर बच्चो

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8:40
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी समय बदलता गया समय बदलने के साथ लोगों ने समाज ने सोसाइटी ने अपनी सोच विचार मानसिकता नहीं बदल पाई वह इस तरह की एक विशेष एक विशेष प्रकार की मानसिकता नहीं एक वर्ग को एक कम्युनिटी को कमजोर जो है बना दिया महिला सुरक्षा को कमजोर बना दिया है और वही पुराने तौर-तरीकों से आज पूरी व्यवस्था चली आ रही है अब उसमें पहले जो है पुराने समय में जो जरूरत थी इस तरह की थी एक ही है महिलाओं के लिए उन्हें घर की व्यवस्था थी और पुरुष बाहर जाकर की व्यवस्था थी कि पूर्व बाहर जाकर नहीं करेगा सर्वाइकल के लिए और महिला घर संभाले घर की व्यवस्था करें लेकिन जब से समय बदला है ग्लोबलाइज फैशन वशीकरण वगैरह चीजें यह हुई तो सारे देशों की अर्थव्यवस्था में बदली है जब अर्थव्यवस्था में बने हैं तो सारी चीजें बदल चुके हैं ज्यादातर लोग भारत में गांव में रहते थे वहां की यही व्यवस्था थी लेकिन समय बदला लोग गांव से पलायन के शहरों की ओर टू व्यवस्था समय के साथ बदल चुकी है और ग्लोबलाइजेशन और फेसबुक रोड के कारण महिलाएं भी अब अब जो है अपना रोजगार में योगदान दे रहे हैं कंपनी में नौकरी कर रहे हैं या आगे आ रही हैं तो इस वजह से अब उनकी महिलाओं की सुरक्षा पर खतरा है कि पहली महिलाएं घरों में सुरक्षित थी और पुरुष बाहर निकलता था लेकिन अब महिलाएं बाहर निकलने हैं तो जब पहले महिलाएं सुरक्षित हैं घरों में रहकर उस तरह की व्यवस्था बनाई गई है कि पुरुष को केंद्र में रखकर आज तक कि पुराने समय से व्यवस्था चली आ रही थी कि पुरुष को केंद्र में रखकर पूरी व्यवस्था थी तो आज जब महिलाएं बाहर निकल रही हैं तो आज भी महिला सुरक्षा एक बड़ा वह है तो इस वजह से महिला सुरक्षा इसलिए नहीं है ना केवल कानूनी स्तर पर न्यायिक स्तर पर बल्कि महिला सुरक्षा 11 जो है समाज की मानसिकता से भी डिसाइड होती है कि मैं समाज की मानसिकता सोच विचार क्या है लोग आज भी उस तरह की सोच को नए समय बदल चुका है तो उस तरह की सोच को अपना नहीं पाए हैं कि महिलाएं भी कर सकते हैं कि जब हमारा समय बदल गया है आधुनिक समय आ चुका है तो उसमें आज और महिलाओं को शिक्षा क्षेत्र में चाहे वह रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने बढ़ना चाहिए तू आज आगे आ रही हैं वह वह पढ़ रही हैं लिख रही हैं लड़कियां और महिलाएं और नौकरी कर रही हैं तो उनके लिए महिला सुरक्षा एक बड़ा बनता है उसमें उनका रेप होता है यौन हिंसा होती है तो वह एक तरह से इसने मानसिकता भी जिम्मेदार लोग लोगों की वही सोच है कि महिलाएं आज भी कमजोर है और उसी हिसाब से उनको कुचला जा सकता है उनको उनको एक्सप्लेन किया जा सकता है पीड़ित किया जा सकता है तो एक तरह से बराबरी की तरफ बढ़ना चाहिए पहले की जरूरत है कुछ और थी आज की जरूरत कुछ और है आज महिलाएं घर से बाहर निकली है पुरुष भी बाहर निकले हैं थे पहले आज महिलाएं बाहर निकले तो उस समय बदल चुका है चीजें बदल चुके हैं और अब जरूरत कुछ और है पहले कुछ और जरूरत थी तो उस सबसे अब जो है तो महिलाओं को केंद्र में रखकर सारी व्यवस्था बनी चाहिए आज संसद की स्थिति यह है कि वहां भी महिलाओं का प्रतिशत कम है वहां भी महिला का रेप जो रिप्रेजेंटेशन सिस्टम है बहुत कम है ऐसी कई वजह हैं जहां महिलाओं की उपस्थिति कम है और केवल कानून मजबूत बना देने से कुछ नहीं होगा उसका जो है कानून का पालन होने से बहुत कुछ होगा महिलाओं के लिए लड़कियों के लिए सोच बदलने से बहुत कुछ होगा पुराने तरीके से लोग सोचते हैं और अलग-अलग तरह से उसको परिभाषित डिफाइन करते हैं कि यह लोग तुरंत जजमेंटल हो जाते हैं तो काफी कुछ चीजें हैं जिनको देश समाज के तौर पर सोचना होगा समाज को क्या चीजें उन्हें बदलनी चाहिए

dekhi samay badalta gaya samay badalne ke saath logo ne samaj ne society ne apni soch vichar mansikta nahi badal payi vaah is tarah ki ek vishesh ek vishesh prakar ki mansikta nahi ek varg ko ek community ko kamjor jo hai bana diya mahila suraksha ko kamjor bana diya hai aur wahi purane taur trikon se aaj puri vyavastha chali aa rahi hai ab usme pehle jo hai purane samay mein jo zarurat thi is tarah ki thi ek hi hai mahilaon ke liye unhe ghar ki vyavastha thi aur purush bahar jaakar ki vyavastha thi ki purv bahar jaakar nahi karega cervical ke liye aur mahila ghar sambhale ghar ki vyavastha kare lekin jab se samay badla hai globalaij fashion vashikaran vagera cheezen yah hui toh saare deshon ki arthavyavastha mein badli hai jab arthavyavastha mein bane hai toh saree cheezen badal chuke hai jyadatar log bharat mein gaon mein rehte the wahan ki yahi vyavastha thi lekin samay badla log gaon se palayan ke shaharon ki aur to vyavastha samay ke saath badal chuki hai aur globalization aur facebook road ke karan mahilaye bhi ab ab jo hai apna rojgar mein yogdan de rahe hai company mein naukri kar rahe hai ya aage aa rahi hai toh is wajah se ab unki mahilaon ki suraksha par khatra hai ki pehli mahilaye gharon mein surakshit thi aur purush bahar nikalta tha lekin ab mahilaye bahar nikalne hai toh jab pehle mahilaye surakshit hai gharon mein rahkar us tarah ki vyavastha banai gayi hai ki purush ko kendra mein rakhakar aaj tak ki purane samay se vyavastha chali aa rahi thi ki purush ko kendra mein rakhakar puri vyavastha thi toh aaj jab mahilaye bahar nikal rahi hai toh aaj bhi mahila suraksha ek bada vaah hai toh is wajah se mahila suraksha isliye nahi hai na keval kanooni sthar par nyayik sthar par balki mahila suraksha 11 jo hai samaj ki mansikta se bhi decide hoti hai ki main samaj ki mansikta soch vichar kya hai log aaj bhi us tarah ki soch ko naye samay badal chuka hai toh us tarah ki soch ko apna nahi paye hai ki mahilaye bhi kar sakte hai ki jab hamara samay badal gaya hai aadhunik samay aa chuka hai toh usme aaj aur mahilaon ko shiksha kshetra mein chahen vaah rojgar ke kshetra mein aage badhne badhana chahiye tu aaj aage aa rahi hai vaah vaah padh rahi hai likh rahi hai ladkiyan aur mahilaye aur naukri kar rahi hai toh unke liye mahila suraksha ek bada baata hai usme unka rape hota hai yaun hinsa hoti hai toh vaah ek tarah se isne mansikta bhi zimmedar log logo ki wahi soch hai ki mahilaye aaj bhi kamjor hai aur usi hisab se unko kuchala ja sakta hai unko unko explain kiya ja sakta hai peedit kiya ja sakta hai toh ek tarah se barabari ki taraf badhana chahiye pehle ki zarurat hai kuch aur thi aaj ki zarurat kuch aur hai aaj mahilaye ghar se bahar nikli hai purush bhi bahar nikle hai the pehle aaj mahilaye bahar nikle toh us samay badal chuka hai cheezen badal chuke hai aur ab zarurat kuch aur hai pehle kuch aur zarurat thi toh us sabse ab jo hai toh mahilaon ko kendra mein rakhakar saree vyavastha bani chahiye aaj sansad ki sthiti yah hai ki wahan bhi mahilaon ka pratishat kam hai wahan bhi mahila ka rape jo riprejenteshan system hai bahut kam hai aisi kai wajah hai jaha mahilaon ki upasthitee kam hai aur keval kanoon majboot bana dene se kuch nahi hoga uska jo hai kanoon ka palan hone se bahut kuch hoga mahilaon ke liye ladkiyon ke liye soch badalne se bahut kuch hoga purane tarike se log sochte hai aur alag alag tarah se usko paribhashit define karte hai ki yah log turant judgmental ho jaate hai toh kaafi kuch cheezen hai jinako desh samaj ke taur par sochna hoga samaj ko kya cheezen unhe badalni chahiye

देखी समय बदलता गया समय बदलने के साथ लोगों ने समाज ने सोसाइटी ने अपनी सोच विचार मानसिकता नह

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PRASHANT

Health & Wellness Coach

1:39
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह मुद्दा काफी सीरियस है मगर मैं कहना चाहूंगा कि यह कोई मार्केट में सब्जी के बढ़े हुए रेट की बात नहीं है या मार्केट में मंदी की बात नहीं है कि कब बदलाव आएगा कब चेंज होंगे तब सही होगा समाज क्या है आप हम और हमारे जैसे लोग जब हम अपने अंदर बदलाव लेकर आएंगे तभी तो समाज बदलेगा हम बदलेंगे हमारे जैसे लोग बदलेंगे अपने आप समाज में बदलाव आ जाएगा रे हिंसा ऐसा थोड़ी है कि वह कुछ खाई नहीं किसी ने देखा ही नहीं होगा जब भी एक ऐसे होते हैं कोई सुनता नहीं है आप अपने बच्चे को सिखाओ गे सही जीतू क्यों करेंगे ऐसा आप उनको ठीक से गाड़ी दे देता हम हमेशा कहते हैं कि लड़की हो क्या रो रहे हो हमेशा लड़कियों को छोटा बताया जाता है दूसरी अगर आप मार्केट में भी या कहीं भी आपको कोई किसी से बदतमीजी से बोलना आप अपने बच्चों को सिखाते कैसे कि दूसरे की लड़ाई में आपने पढ़ना नहीं है किस कोई बात कुछ भी हो रहा आपने किसी से कुछ नहीं है ना भैया जब परेशानी आप किधर आएगी तो फिर कहां से हो किसी की मदद मिल जाएगी जो अपने बच्चों को आपसे खाओगे कि गलत नहीं सहना है बस मुझे देखो मुझसे सब्र करो तभी तो आपको भी मदद मिलेगी

yah mudda kaafi serious hai magar main kehna chahunga ki yah koi market mein sabzi ke badhe hue rate ki baat nahi hai ya market mein mandi ki baat nahi hai ki kab badlav aayega kab change honge tab sahi hoga samaj kya hai aap hum aur hamare jaise log jab hum apne andar badlav lekar aayenge tabhi toh samaj badlega hum badalenge hamare jaise log badalenge apne aap samaj mein badlav aa jaega ray hinsa aisa thodi hai ki vaah kuch khai nahi kisi ne dekha hi nahi hoga jab bhi ek aise hote hai koi sunta nahi hai aap apne bacche ko sikhao gay sahi jeetu kyon karenge aisa aap unko theek se gaadi de deta hum hamesha kehte hai ki ladki ho kya ro rahe ho hamesha ladkiyon ko chota bataya jata hai dusri agar aap market mein bhi ya kahin bhi aapko koi kisi se badatamiji se bolna aap apne baccho ko sikhaate kaise ki dusre ki ladai mein aapne padhna nahi hai kis koi baat kuch bhi ho raha aapne kisi se kuch nahi hai na bhaiya jab pareshani aap kidhar aayegi toh phir kahaan se ho kisi ki madad mil jayegi jo apne baccho ko aapse khaoge ki galat nahi sahna hai bus mujhe dekho mujhse sabra karo tabhi toh aapko bhi madad milegi

यह मुद्दा काफी सीरियस है मगर मैं कहना चाहूंगा कि यह कोई मार्केट में सब्जी के बढ़े हुए रेट

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Vimal Kumar Gour

General Physician

4:02
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो गुड आफ्टरनून सभी मेरे फ्लावर को को मेरे सुनने वालों को लिए मैं आपको आप एक जानकारी टावर जाप का क्वेश्चन है तो है इसमें बच्चा होता है उसके अंदर वह घर से सीखता है कैंसर से सीखता जब बचपन से घर पर देखता है कोई बचा सकता है ऐसे हम हिंदुस्तान में मेहंदी लगाने के बाद शाम को आ जाती अमेरिका गंज व्यक्ति समाज में बदलाव आएगा हम खुद सुबह में कभी समाप्त करेगा हालत खराब है स्कूल में जाएंगे पहले शिक्षा छोटे से 800 साल तक की शिक्षा होती है शिवाजी स्कूल में आता है उसमें स्कूल में रहने से मिलता है वह मैं जैसे संगत में बढ़ता है उसी संगत से पड़ता है यह हमारे साथ पढ़ते हैं हिंसा से संगत से बदलाव तो हम लाना कल नहीं आ सकता मेरी राय यह सब अपने ऊपर डिपेंड करती हो और तुम्हें क्या सुनाओ कुछ लोग खुशबूदार होते और थोड़ा ब्लू पिक्चर का जो ऐसा वर्ड रही है इसको पहनाओ और है इस पर फर्क पड़ता है इससे हमारा कल्चर इफेक्ट पड़ता है यह हम पर डिपेंड है अगर हम सही हैं तो सब सही है और हम गलत हैं तो सब गलत है खुद पर बंदा मेरा तो खुद ही तरीका है कि आप किसी अच्छी संगत में बैठे अच्छे लोगों से संपर्क करते लोग आपके आक्रोश में किसी से अब्रायल हो गए आए कहां से ब्लैकमेल करने के लिए आ गया कुछ जानता नहीं दूसरे को सपोर्ट इन कर रहा है तो वस्तु जो आपसे जलते उनसे संपर्क ना रहे हो आप तो गलत राह दिखाएंगे आपको गलत सभी अपनी फोटो मानसी मेरी कोई इसमें गलती हो तो क्षमा करें

hello good afternoon sabhi mere flower ko ko mere sunne walon ko liye main aapko aap ek jaankari tower jaap ka question hai toh hai isme baccha hota hai uske andar vaah ghar se sikhata hai cancer se sikhata jab bachpan se ghar par dekhta hai koi bacha sakta hai aise hum Hindustan mein mehendi lagane ke baad shaam ko aa jaati america ganj vyakti samaj mein badlav aayega hum khud subah mein kabhi samapt karega halat kharab hai school mein jaenge pehle shiksha chote se 800 saal tak ki shiksha hoti hai shivaji school mein aata hai usme school mein rehne se milta hai vaah main jaise sangat mein badhta hai usi sangat se padta hai yah hamare saath padhte hain hinsa se sangat se badlav toh hum lana kal nahi aa sakta meri rai yah sab apne upar depend karti ho aur tumhe kya sunao kuch log khushboodaar hote aur thoda blue picture ka jo aisa word rahi hai isko pahnao aur hai is par fark padta hai isse hamara culture effect padta hai yah hum par depend hai agar hum sahi hain toh sab sahi hai aur hum galat hain toh sab galat hai khud par banda mera toh khud hi tarika hai ki aap kisi achi sangat mein baithe acche logo se sampark karte log aapke aakrosh mein kisi se abrayal ho gaye aaye kahaan se blackmail karne ke liye aa gaya kuch jaanta nahi dusre ko support in kar raha hai toh vastu jo aapse jalte unse sampark na rahe ho aap toh galat raah dikhayenge aapko galat sabhi apni photo mansi meri koi isme galti ho toh kshama karen

हेलो गुड आफ्टरनून सभी मेरे फ्लावर को को मेरे सुनने वालों को लिए मैं आपको आप एक जानकारी टाव

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Rajendra

Education

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पल्ला पर तू तो यही है कि क्या हमारा समाज वाकई में यौन हिंसा से त्रस्त है कि वह हिंसा की छिटपुट घटनाओं के प्रकाश में आने से हम यह कैसे मान ले कि हमारा समाज जो हिंसा से त्रस्त है यह वही समाज है जिसमें हम आप रहते हमारे सब के लोग रहते हैं यह कोई बाहर के लोग नहीं आए हैं आप पर तो आप यह कैसे मान लेते हैं कि समाज जो हिंसा से त्रस्त है खास करके अब जबकि आजकल घरों की बेटियां लड़कियां महिलाएं तब पूरी स्वतंत्रता के साथ घूम रही है डाल रही है आ जा रही हैं मां-बाप को कोई बहुत चिंता नहीं होती तो एक हम सुरक्षित और परिलक्षित वातावरण में हमारी बेटियां और ज्यादातर महिलाएं रह रही है उसमें और पहले की तुलना में महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए महिलाओं के अधिकार के लिए उनके सम्मान के लिए एक बेहतर भाव लोगों में पैदा हुआ है और इसी के साथ साथ हैं कानून-व्यवस्था के अच्छे होने से और स्तनों के जरा भी अत्याचार के प्रति तमाम संस्थाओं का एकदम लेट हो जाना जागरूक हो जाना क्रियाशील हो जाना और अंत तक जा करके उसमें कारवाही करना यह सब बातें इस बात का सबूत है कि समाज और राज्य सरकार सतत सक्रिय है और इस सक्रियता और कारगर उपायों के कारण महिलाओं के प्रति दुर्भावना ग्रस्त होकर किया हिंसा के बारे में पहले की तुलना में आज ज्यादा भय व्याप्त है ऐसे लोगों में जो ऐसा करने की सोचते हैं तो कुछ घटनाओं के मीडिया में बार-बार बताए जाने से वहां बना करके लिखे जाने से ऐसा हम कैसे मान लेंगे कि हम यूंही साथ 17 समाज के लोग हैं हमको या विद्यार्थी ध्यान रखनी चाहिए कि हम जब अपने बारे में इस तरह की भ्रांतियां गांव को बार-बार कहते हैं तो हमारी अपनी धारणाओं को दुनिया के और देश भी देखते और समझते हैं फिलहाल हमारे समाज एवं हिंसा चित्र समाज तो नहीं है ना

palla par tu toh yahi hai ki kya hamara samaj vaakai mein yaun hinsa se trast hai ki vaah hinsa ki chitput ghatnaon ke prakash mein aane se hum yah kaise maan le ki hamara samaj jo hinsa se trast hai yah wahi samaj hai jisme hum aap rehte hamare sab ke log rehte hain yah koi bahar ke log nahi aaye hain aap par toh aap yah kaise maan lete hain ki samaj jo hinsa se trast hai khaas karke ab jabki aajkal gharon ki betiyan ladkiyan mahilaye tab puri swatantrata ke saath ghum rahi hai daal rahi hai aa ja rahi hain maa baap ko koi bahut chinta nahi hoti toh ek hum surakshit aur parilakshit vatavaran mein hamari betiyan aur jyadatar mahilaye reh rahi hai usme aur pehle ki tulna mein mahilaon ki swatantrata ke liye mahilaon ke adhikaar ke liye unke sammaan ke liye ek behtar bhav logo mein paida hua hai aur isi ke saath saath hain kanoon vyavastha ke acche hone se aur stanon ke zara bhi atyachar ke prati tamaam sasthaon ka ekdam late ho jana jagruk ho jana kriyasheel ho jana aur ant tak ja karke usme karyawahi karna yah sab batein is baat ka sabut hai ki samaj aur rajya sarkar satat sakriy hai aur is sakriyata aur kargar upayo ke karan mahilaon ke prati durbhavana grast hokar kiya hinsa ke bare mein pehle ki tulna mein aaj zyada bhay vyapt hai aise logo mein jo aisa karne ki sochte hain toh kuch ghatnaon ke media mein baar baar bataye jaane se wahan bana karke likhe jaane se aisa hum kaise maan lenge ki hum yunhi saath 17 samaj ke log hain hamko ya vidyarthi dhyan rakhni chahiye ki hum jab apne bare mein is tarah ki bhrantiyan gaon ko baar baar kehte hain toh hamari apni dharnaon ko duniya ke aur desh bhi dekhte aur samajhte hain filhal hamare samaj evam hinsa chitra samaj toh nahi hai na

पल्ला पर तू तो यही है कि क्या हमारा समाज वाकई में यौन हिंसा से त्रस्त है कि वह हिंसा की छि

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जो भी इस प्रकार की जय हिंद सर कर रहे हैं तो यह जीवन को एक दो को आराम से किसी को फांसी दे दिया किसी को गोली मार दी तो यह समस्या है वह समाप्त हो जाएगी डर की वजह से बहुत सारे कार्य रुक जाते हैं और तो यह होना जरूरी है और जैसे अपन बात करें तो हमारे जो सविधान है वह अनेक देशों की आप उनको जो कॉपी करके जो बनाया गया है तो 12 कानून ऐसे भी बनाने चाहिए जैसे सऊदी अरब में बहुत अच्छा काम है कि महिलाओं के खिलाफ जो भी कुछ गलत करेगा तो उसे फांसी की सजा दे दी जाएगी ऐसा कानून भारत में भी होना चाहिए यदि जो महिलाओं के साथ कुकर्म कर रहे हैं गलत कर रहे हैं तो उनको सजा जरूर मिलनी चाहिए 12 विदेशी को सजा मिलेगी ऐसी समस्या कभी नहीं होगी लेकिन भारत की जो नई प्रणाली है वह बहुत धीमी है यह केस 75 साल लग जाते हैं कितने लाखों केस पेंडिंग में पड़े हैं तो लोगों को ना पर से भी भरोसा उठ रहा है लेकिन इसमें बदलाव पर लेख बहुत ज्यादा आवश्यकता है

jo bhi is prakar ki jai hind sir kar rahe hain toh yah jeevan ko ek do ko aaram se kisi ko fansi de diya kisi ko goli maar di toh yah samasya hai vaah samapt ho jayegi dar ki wajah se bahut saare karya ruk jaate hain aur toh yah hona zaroori hai aur jaise apan baat kare toh hamare jo samvidhan hai vaah anek deshon ki aap unko jo copy karke jo banaya gaya hai toh 12 kanoon aise bhi banane chahiye jaise saudi arab mein bahut accha kaam hai ki mahilaon ke khilaf jo bhi kuch galat karega toh use fansi ki saza de di jayegi aisa kanoon bharat mein bhi hona chahiye yadi jo mahilaon ke saath kukarm kar rahe hain galat kar rahe hain toh unko saza zaroor milani chahiye 12 videshi ko saza milegi aisi samasya kabhi nahi hogi lekin bharat ki jo nayi pranali hai vaah bahut dheemi hai yah case 75 saal lag jaate hain kitne laakhon case pending mein pade hain toh logo ko na par se bhi bharosa uth raha hai lekin isme badlav par lekh bahut zyada avashyakta hai

जो भी इस प्रकार की जय हिंद सर कर रहे हैं तो यह जीवन को एक दो को आराम से किसी को फांसी दे द

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महेश सेठ

रेकी ग्रैंडमास्टर,लाइफ कोच

2:24
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यौन हिंसा से त्रस्त समाज में कैसे बदलाव और कब आएगा अच्छा सवाल है आपका यह बदला जब आप आएगा जब हमारे यहां के युवा लोग पोर्न वीडियो देखना बंद करेंगे सेक्स वाली चीजें देखना बंद करेंगे किताबें पढ़ना बंद करेंगे कहानियां बन्ना इस नई कहानियां सुनना बंद करेंगे और अपना ध्यान शो विकास में अच्छे बाद में लगाएंगे यह मेरे विचार से यह जो टीवी पर सेक्स परोसा जाता है पत्रिका में सेक्स परोसा जाता है वीडियो में व्हाट्सएप पर ढेर सारी सेक्सी पिक्चर आती रहती हैं वीडियो आते रहते हैं वह सब देख देख के अंतर्मन में नेकेड सेक्स के प्रति कुछ भावना जागृत होती हैं वह खत्म हो उसके लिए हर व्यक्ति को सजग होना होगा उसके लिए डंडे से काम नहीं होगा क्योंकि घर में कोई क्या कर रहा है किसी को कैसे पता चलेगा तो जरूरत है कि हर जगह है इसके विभिन्न लगे यूट्यूब पर बैन लगे सोशल मीडिया पर बैन लगे और इतना हाय तो बना बचाया जाए जो हार नहीं होती है उसके लिए इतनी हाय तौबा मचाते हैं तो उससे कुछ और लोगों को प्रेरणा मिलती है कि चलोगे कर लो तो वह भी बंद होना चाहिए यह घटना है उसको घटना दिखाएं लेना चाहिए और कोशिश यही हो और यह तो यौन हिंसा जो आपको समाचार मिलती है उसके अलावा भी जो हमारे देश में पता नहीं दुनिया में भी हो तो पता नहीं एक स्त्रियों की बच्चियों की ट्रैफिकिंग होती है उनको अपहरण कर लेते हैं और उनको विद्यालयों में भेज देते हैं बेच देते हैं दुबई में बेच देते हैं यह भी उसी का हिस्सा है उसको भी रोकना है वह तो एक ऑर्गेनाइज्ड क्राईम है उसको भी रोकना चाहिए और उसके लिए भी सबको सजग होना चाहिए और ऐसा कहीं अगर मिलता है तो उसके ऊपर तुरंत रिजेक्ट करना चाहिए कि यह गलत हो रहा है चुपचाप बैठे रहने से केवल सवाल पूछने से कुछ नहीं होने वाला है वे ऑल हैव टू बी ए व्हेयरअबाउट्स थैंक यू गॉड ब्लेस यू

yaun hinsa se trast samaj mein kaise badlav aur kab aayega accha sawaal hai aapka yah badla jab aap aayega jab hamare yahan ke yuva log porn video dekhna band karenge sex wali cheezen dekhna band karenge kitaben padhna band karenge kahaniya banna is nayi kahaniya sunana band karenge aur apna dhyan show vikas mein acche baad mein lagayenge yah mere vichar se yah jo TV par sex parosa jata hai patrika mein sex parosa jata hai video mein whatsapp par dher saree sexy picture aati rehti hain video aate rehte hain vaah sab dekh dekh ke antarman mein naked sex ke prati kuch bhavna jagrit hoti hain vaah khatam ho uske liye har vyakti ko sajag hona hoga uske liye dande se kaam nahi hoga kyonki ghar mein koi kya kar raha hai kisi ko kaise pata chalega toh zarurat hai ki har jagah hai iske vibhinn lage youtube par ban lage social media par ban lage aur itna hi toh bana bachaya jaaye jo haar nahi hoti hai uske liye itni hi tauba machate hain toh usse kuch aur logo ko prerna milti hai ki chaloge kar lo toh vaah bhi band hona chahiye yah ghatna hai usko ghatna dikhaen lena chahiye aur koshish yahi ho aur yah toh yaun hinsa jo aapko samachar milti hai uske alava bhi jo hamare desh mein pata nahi duniya mein bhi ho toh pata nahi ek sthreeyon ki bachiyo ki trafficking hoti hai unko apahran kar lete hain aur unko vidhayalayo mein bhej dete hain bech dete hain dubai mein bech dete hain yah bhi usi ka hissa hai usko bhi rokna hai vaah toh ek argenaijd kraim hai usko bhi rokna chahiye aur uske liye bhi sabko sajag hona chahiye aur aisa kahin agar milta hai toh uske upar turant reject karna chahiye ki yah galat ho raha hai chupchap baithe rehne se keval sawaal poochne se kuch nahi hone vala hai ve all have to be a whereabouts thank you god bless you

यौन हिंसा से त्रस्त समाज में कैसे बदलाव और कब आएगा अच्छा सवाल है आपका यह बदला जब आप आएगा ज

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यौन हिंसा से त्रस्त समाज में बदलाव लाने के लिए कानून को कड़ा और शीघ्र न्याय की व्यवस्था करनी पड़ेगी जब तक शीघ्र न्याय और तत्काल सजा सार्वजनिक सजा जिस प्रकार जो मुस्लिम देशों में जो यौन अपराध और इस प्रकार के जो आपराधिक प्रकरण होते हैं उनमें जो सजा दी जाती है वह सार्वजनिक रूप से दी जाती हैं वह तत्काल न्याय होता है वहां पर आप स्थिति देखें वहां पर यौन अपराध और इस प्रकार के जो आपराधिक कृत्य हैं वह बहुत कम तू जब तक उस प्रकार की कानून व्यवस्था है हमारे देश में लागू नहीं होगी तब तक इस तरह से समाज में बदलाव की उम्मीद बेमानी है

yaun hinsa se trast samaj mein badlav lane ke liye kanoon ko kada aur shighra nyay ki vyavastha karni padegi jab tak shighra nyay aur tatkal saza sarvajanik saza jis prakar jo muslim deshon mein jo yaun apradh aur is prakar ke jo apradhik prakaran hote hain unmen jo saza di jaati hai vaah sarvajanik roop se di jaati hain vaah tatkal nyay hota hai wahan par aap sthiti dekhen wahan par yaun apradh aur is prakar ke jo apradhik kritya hain vaah bahut kam tu jab tak us prakar ki kanoon vyavastha hai hamare desh mein laagu nahi hogi tab tak is tarah se samaj mein badlav ki ummid bemani hai

यौन हिंसा से त्रस्त समाज में बदलाव लाने के लिए कानून को कड़ा और शीघ्र न्याय की व्यवस्था कर

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जब समाज में जागरूकता पैदा होगी मां बाप अपने बच्चों को सही संस्कार देंगे तब बलात्कार रुक सकते हैं कानून पुलिस या किसी डर से या किसी सजा से यह नहीं रुक सकते

jab samaj mein jagrukta paida hogi maa baap apne baccho ko sahi sanskar denge tab balatkar ruk sakte hain kanoon police ya kisi dar se ya kisi saza se yah nahi ruk sakte

जब समाज में जागरूकता पैदा होगी मां बाप अपने बच्चों को सही संस्कार देंगे तब बलात्कार रुक सक

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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यौन हिंसा से त्रस्त समाज में बदलाव कैसे उत्पन्न आएगा आपकी क्या राय है जॉन सा राशिफल बदलाव कैसे आएगा जैसे हम इस बात को एक समस्या के रूप में देखें एक सामाजिक समस्या है और यह समाज के लोगों में मानसिक समस्या भी है और यह सरकार को भी इसको गंभीरता से लेने की जरूरत है पुलिस प्रशासन है वह एक-एक व्यक्ति के पीछे ड्यूटी नहीं लगा सकता समय-समय पर इंसान अकेला भी रहता है लेकिन की सुरक्षा की गारंटी सरकार जिम्मेदारी लेती है लेकिन मुहैया नहीं कर सकती दूरदराज के गांव देहात में अगर महिलाएं सुरक्षित नहीं है तो उसमें समाज के रहने वाले लोग भी उसे कुछ तरीके से जिम्मेदार हैं महिलाओं की सुरक्षा के प्रति यौन हिंसा उसे सब लोग मीणा के नजरों से यौन हिंसा को देखते हैं लेकिन कभी-कभी इंटरेस्ट लेकर बहुत चाहा उसे नीचे से जब तक की दृष्टि नहीं बदलेगी लोगों की डोरी दृष्टि तब तक इसमें बदलाव आने की संभावना कम है जब लड़कों को अगर हम अपने घर में कहां जाते हैं वह क्या करते हैं उनके क्या एक्टिविटी है कितने बजे आते हैं कितने बजे जाते हैं उनके ऊपर हम ध्यान नहीं रखेंगे किसके साथ हो उसे बैठते हैं कहां मिलते बैठते हैं बच्चे गणपति किशोरावस्था से लेकर 25 26 साल तक के युवक पर जो है उनके ऊपर हमें ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि अब जो पोर्नोग्राफी है वह मोबाइल उनके हाथ में क्या देखते हैं फुंसी यूट्यूब चैनल में हूं देख रहे हैं वह पर्सनली को देख लेते हैं चुप कर और दिमाग उनका उस बारे में घूमने लगता है उस तरफ ज्यादा सही बात बताना वह भी जरूरी हो गया है कि महिलाओं के प्रति लड़कियों के प्रति उनके जैसे किसी क्योंकि वर्ग के लोग माता-पिता और शिक्षक कभी भी यह सब बातों को सिखाते नहीं है कि ऐसी गलत शिक्षा वह लोग नहीं देते जो हमको इस तरह की शिक्षा मिलती है इस तरह कार्य करने की प्रेरणा मिलती है वह या तो दोस्तों से मिलती है गलत संगत से मिलती है या आजकल मोबाइल के द्वारा ही सरकार को भी चाहिए कि पोर्नोग्राफी ऑर्गन भर्ती पर रोक लगाए और इन सब कंटेंट है ब्लॉक करें इस तरह से अगर सामाजिक समस्या और सरकारी कुछ समस्या समझेंगे तो इसमें कुछ बदलाव आने की संभावना है वरना इस पर एस्से चिंता हो रही है उसे सिर्फ पर होने देंगे और नंबर क्या लेकर और दिखाओ करेंगे तो कोई मतलब नहीं है पुलिस प्रशासन को भी सरकार को और भी पिक करना पड़ेगा अगर किसी लड़की या महिला के 24 घंटे में कभी भी एक तो हेल्पलाइन नंबर जारी किया है उसमें करता है कॉल आती है तो उसे तुरंत सीरियसली लेकर और एक्शन में पुलिस को आना पड़ेगा हैदराबाद के कारण ऐसा हुआ कि उस लड़की की बहन ने कॉल किया लेकिन पुलिस ने उसे हल्के में लिया अगर पुलिस ने उस समय लिया होता तो शायद नहीं हो पाती पुलिस को भी अब एक्शन में आना पड़ेगा और सरकार को यह दबाव बनाना पड़ेगा इस तरह से यौन हिंसा के प्रति कुछ आगे बढ़ पाएंगे संवाद

yaun hinsa se trast samaj mein badlav kaise utpann aayega aapki kya rai hai john sa rashifal badlav kaise aayega jaise hum is baat ko ek samasya ke roop mein dekhen ek samajik samasya hai aur yah samaj ke logo mein mansik samasya bhi hai aur yah sarkar ko bhi isko gambhirta se lene ki zarurat hai police prashasan hai vaah ek ek vyakti ke peeche duty nahi laga sakta samay samay par insaan akela bhi rehta hai lekin ki suraksha ki guarantee sarkar jimmedari leti hai lekin muhaiya nahi kar sakti durdaraj ke gaon dehaant mein agar mahilaye surakshit nahi hai toh usme samaj ke rehne waale log bhi use kuch tarike se zimmedar hai mahilaon ki suraksha ke prati yaun hinsa use sab log meena ke nazro se yaun hinsa ko dekhte hai lekin kabhi kabhi interest lekar bahut chaha use niche se jab tak ki drishti nahi badalegi logo ki dori drishti tab tak isme badlav aane ki sambhavna kam hai jab ladko ko agar hum apne ghar mein kahaan jaate hai vaah kya karte hai unke kya activity hai kitne baje aate hai kitne baje jaate hai unke upar hum dhyan nahi rakhenge kiske saath ho use baithate hai kahaan milte baithate hai bacche ganapati kishoraavastha se lekar 25 26 saal tak ke yuvak par jo hai unke upar hamein dhyan rakhna bahut zaroori hai kyonki ab jo pornography hai vaah mobile unke hath mein kya dekhte hai phunsi youtube channel mein hoon dekh rahe hai vaah personally ko dekh lete hai chup kar aur dimag unka us bare mein ghoomne lagta hai us taraf zyada sahi baat bataana vaah bhi zaroori ho gaya hai ki mahilaon ke prati ladkiyon ke prati unke jaise kisi kyonki varg ke log mata pita aur shikshak kabhi bhi yah sab baaton ko sikhaate nahi hai ki aisi galat shiksha vaah log nahi dete jo hamko is tarah ki shiksha milti hai is tarah karya karne ki prerna milti hai vaah ya toh doston se milti hai galat sangat se milti hai ya aajkal mobile ke dwara hi sarkar ko bhi chahiye ki pornography organ bharti par rok lagaye aur in sab content hai block kare is tarah se agar samajik samasya aur sarkari kuch samasya samjhenge toh isme kuch badlav aane ki sambhavna hai varna is par essay chinta ho rahi hai use sirf par hone denge aur number kya lekar aur dikhaao karenge toh koi matlab nahi hai police prashasan ko bhi sarkar ko aur bhi pic karna padega agar kisi ladki ya mahila ke 24 ghante mein kabhi bhi ek toh helpline number jaari kiya hai usme karta hai call aati hai toh use turant seriously lekar aur action mein police ko aana padega hyderabad ke karan aisa hua ki us ladki ki behen ne call kiya lekin police ne use halke mein liya agar police ne us samay liya hota toh shayad nahi ho pati police ko bhi ab action mein aana padega aur sarkar ko yah dabaav banana padega is tarah se yaun hinsa ke prati kuch aage badh payenge samvaad

यौन हिंसा से त्रस्त समाज में बदलाव कैसे उत्पन्न आएगा आपकी क्या राय है जॉन सा राशिफल बदला

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धर्मदेव सिंह भाटी

कुश्ती प्रशिक्षक

0:43
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यौन हिंसा से त्रस्त समाज में बदलाव कैसे और कब आएगा इस विषय पर मेरी राय है यौन हिंसा समाज में बदलाव हमारे खुद की वजह से आएगा कहावत भी है हम सुधरेंगे जग सुधरेगा इस हिंसा को जड़ से खत्म करने के लिए हमें अपने बच्चों में संस्कार डालने होंगे सबसे पहले अपने आप को सुधारना होगा अपने करीबियों को सुधारना होगा सुधारने का यही दौर चलता रहा तो निश्चित ही रूप से हमारे समाज से यौन हिंसा खत्म हो जाएगी

yaun hinsa se trast samaj mein badlav kaise aur kab aayega is vishay par meri rai hai yaun hinsa samaj mein badlav hamare khud ki wajah se aayega kahaavat bhi hai hum sudhrenge jag sudhrega is hinsa ko jad se khatam karne ke liye hamein apne baccho mein sanskar dalne honge sabse pehle apne aap ko sudharna hoga apne karibiyon ko sudharna hoga sudhaarne ka yahi daur chalta raha toh nishchit hi roop se hamare samaj se yaun hinsa khatam ho jayegi

यौन हिंसा से त्रस्त समाज में बदलाव कैसे और कब आएगा इस विषय पर मेरी राय है यौन हिंसा समाज म

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