यौन हिंसा से त्रस्त समाज में बदलाव कैसे और कब आएगा? आपकी क्या राय है?...


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Nikhil Ranjan

Programme Coordinator - National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT)

1:24
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समाज में बदलाव कैसे और कब आएगा आपकी क्या राय है तो देखिए मेरा मानना है जब तक यहां पर बच्चों को आप मोरल वैल्यू मैनपाट नहीं करेंगे उनको इन तीनों के बारे में नहीं बताएंगे सिर्फ उनको किताबी ज्ञान ही देते रहेंगे तब तक इस तरह की प्रॉब्लम समाज में बनी रहेगी पहले के समय में क्या होते हैं थी तो संस्कार बच्चों को करते ही मिल जाते थे लेकिन जब से न्यूक्लियर फैमिली बनी है मदर फादर भी यहां पर वर्किंग हो गए हैं तो बच्चा किसके साथ रहता है बेबी सीटर के साथ या फिर आया रखी होती है या काम वाली होती है उनके साथ बच्चा अपना समझाना भी आता है उसका रंग जो उसका ओवरऑल डेवलपमेंट है जो उसके अंदर संस्कार जाने हैं वह घर परिवार वाले संस्कार ना जाकर वह अमुक व्यक्ति के संस्कार जाते हैं जिस दिन लोकेलिटी आज जहां को वह बिलॉन्ग करता है अब उसके अच्छे संस्कार भी हो सकते हैं बुरे भी खराब भी हो सकते हैं तो कोशिश करें कि बच्चों के लिए थोड़ा सा यहां पर खुलती समय ज्यादा निकाले दूसरा उनको मोरल वैल्यू आर्टिकल पहले उसके बारे में बताते रहे जब हम रूट लेवल पर चीजें सही कर देंगे तुम पर यकीन मानिए कुछ सालों बाद जब उससे बनाएंगे तो वह भी बहुत ही मीठे होंगे आपकी क्या राय है इस बारे में कमेंट सेक्शन अपनी राय जाहिर करें शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद

samaj me badlav kaise aur kab aayega aapki kya rai hai toh dekhiye mera manana hai jab tak yahan par baccho ko aap moral value mainpat nahi karenge unko in tatvo ke bare me nahi batayenge sirf unko kitabi gyaan hi dete rahenge tab tak is tarah ki problem samaj me bani rahegi pehle ke samay me kya hote hain thi toh sanskar baccho ko karte hi mil jaate the lekin jab se nuclear family bani hai mother father bhi yahan par working ho gaye hain toh baccha kiske saath rehta hai baby seater ke saath ya phir aaya rakhi hoti hai ya kaam wali hoti hai unke saath baccha apna samajhana bhi aata hai uska rang jo uska overall development hai jo uske andar sanskar jaane hain vaah ghar parivar waale sanskar na jaakar vaah amuk vyakti ke sanskar jaate hain jis din lokeliti aaj jaha ko vaah Belong karta hai ab uske acche sanskar bhi ho sakte hain bure bhi kharab bhi ho sakte hain toh koshish kare ki baccho ke liye thoda sa yahan par khulti samay zyada nikale doosra unko moral value article pehle uske bare me batatey rahe jab hum root level par cheezen sahi kar denge tum par yakin maniye kuch salon baad jab usse banayenge toh vaah bhi bahut hi meethe honge aapki kya rai hai is bare me comment section apni rai jaahir kare subhkamnaayain aapke saath hain dhanyavad

समाज में बदलाव कैसे और कब आएगा आपकी क्या राय है तो देखिए मेरा मानना है जब तक यहां पर बच्चो

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