योग किसे कहते हैं?...


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Radha Mohan

Yoga & Naturopathy Expert

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नमस्कार दोस्तों कैसे हैं योग किसे कहते हैं उसे सामान्य शब्दों में भी हम बात करें तो किन्हीं दो या दो से अधिक वस्तुओं का आपस में जोड़ना उनका मिलना है फिर एकीकरण होना यू कहलाता है यदि हम आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो आत्मा का परमात्मा से मिलना योग कहा जाता है नशिबात अंजलि ने अपनी पुस्तक योग सूत्र में योग को परिभाषित करते हुए लिखा है योगश्चित्त वृत्ति निरोध है अर्थात जब हम अपनी आत्मा अपनी जो मन में विचार जो उठ रहे हैं ऐसे विचार जो हमें परमात्मा से दूर करते हैं या फिर ऐसे विचार जो हमारे जीवन के लिए बुरे हैं कलुषित हैं तो ऐसे असंख्य विचार अनवरत रूप से हमारे मन मस्तिष्क में चिप में चलते रहते हैं तो जब हम इनको रोक लगाते हुए इनको मोड़ते हुए अपने मस्तिष्क को जब हम परमात्मा की तरफ आकर्षित करके जब ध्यान कंसंट्रेट करते हैं तो इसके द्वारा हम अपनी आत्मा की मोक्ष की प्राप्ति कर और इसे की योग कहा जाता है दोस्तों योग का जो अभिप्राय है वह बहुत विस्तृत है वह तो विशाल है आयोग को केवल परमात्मा को पाने का जरिया ही नहीं समझना चाहिए आज के समय में योग की जो क्षेत्र में काफी विस्तृत हो चुका है आज के समय में जो लोग योग का अभ्यास करते हैं उनका मुख्य उद्देश्य होता है कि अपने मानसिक जितने भी बीमारियां हैं उनको दूर करना है साथ ही साथ जितने शारीरिक रोग हैं उन से पीछा छुड़ाना और शासक अपने आदमी को नाते करने के साथ-साथ अपने वैचारिक और भावनात्मक पक्ष को मजबूत करना आता योग का अभ्यास करना बहुत ही आवश्यक है धन्यवाद

namaskar doston kaise hain yog kise kehte hain use samanya shabdon me bhi hum baat kare toh kinhi do ya do se adhik vastuon ka aapas me jodna unka milna hai phir ekikaran hona you kehlata hai yadi hum aadhyatmik drishti se dekhen toh aatma ka paramatma se milna yog kaha jata hai nashibat anjali ne apni pustak yog sutra me yog ko paribhashit karte hue likha hai yogashchitt vriti nirodh hai arthat jab hum apni aatma apni jo man me vichar jo uth rahe hain aise vichar jo hamein paramatma se dur karte hain ya phir aise vichar jo hamare jeevan ke liye bure hain kalushit hain toh aise asankhya vichar anvarat roop se hamare man mastishk me chip me chalte rehte hain toh jab hum inko rok lagate hue inko modte hue apne mastishk ko jab hum paramatma ki taraf aakarshit karke jab dhyan concentrate karte hain toh iske dwara hum apni aatma ki moksha ki prapti kar aur ise ki yog kaha jata hai doston yog ka jo abhipray hai vaah bahut vistrit hai vaah toh vishal hai aayog ko keval paramatma ko paane ka zariya hi nahi samajhna chahiye aaj ke samay me yog ki jo kshetra me kaafi vistrit ho chuka hai aaj ke samay me jo log yog ka abhyas karte hain unka mukhya uddeshya hota hai ki apne mansik jitne bhi bimariyan hain unko dur karna hai saath hi saath jitne sharirik rog hain un se picha chhudana aur shasak apne aadmi ko naate karne ke saath saath apne vaicharik aur bhavnatmak paksh ko majboot karna aata yog ka abhyas karna bahut hi aavashyak hai dhanyavad

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं योग किसे कहते हैं उसे सामान्य शब्दों में भी हम बात करें तो किन्ही

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