भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने है तो कौनसे कदम उठाए जाएं?...


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Tilak Singh

Sch.Topper,Parnassian & Author

0:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्लीज सबसे पहले जो इंपॉर्टेंट होता है कि सरकारी स्कूलों को बढ़ाने में सरकारी और कर्मचारी और अमीर व्यक्तियों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूल क्यों नहीं पाते सरकारी स्कूल अच्छी कंडीशन उनकी नहीं है तब तक जो शादी नहीं कर सकती दूसरी बात आती है कि जो प्राइवेट कोचिंग बंद कर दिया अपने स्कूल की चढ़ाई ट्यूशन को ज्यादा महत्व देते हैं

please sabse pehle jo important hota hai ki sarkari schoolon ko badhane mein sarkari aur karmchari aur amir vyaktiyon ko apne baccho ko sarkari school kyon nahi paate sarkari school achi condition unki nahi hai tab tak jo shadi nahi kar sakti dusri baat aati hai ki jo private coaching band kar diya apne school ki chadhai tuition ko zyada mahatva dete hain

प्लीज सबसे पहले जो इंपॉर्टेंट होता है कि सरकारी स्कूलों को बढ़ाने में सरकारी और कर्मचारी औ

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Pragati

Aspiring Lawyer

1:57
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए और मेरा तो यही एक सजेशन रहेगा कि सबसे पहले आप एग्जाम कब और इस तरह से ना बढ़ाएं बच्चों के ऊपर कि उनके बीच मार्क्स आने की दौड़ में वह लोग चीजों को समझना भूल जाए और सिर्फ लडकिया फिर सिर्फ एक बार फोन करके उस चीज को आगे एग्जाम में लिख दे परंतु और उसको समझने की कोशिश ना करें उसे क्या क्या यूज हो सकते हैं अपनी लाइफ में उस चीज की कोशिश नहीं करते हैं बच्चे तो यह प्रणाली में यह चेंज होना चाहिए कि बच्चे सिर्फ एक मार्क्स लाने के लिए ना पड़े परंतु वह चीजें समझने के लिए पढ़ें क्योंकि अब यह चीज आजकल हमें बहुत सारे स्कूल में देखने को मिलती है स्पेशली प्राइवेट स्कूल्स में देखने को मिलती है कि मां बाप और बच्चे मां बाप को टीचर अपने बच्चों पर मार्क्स लाने के लिए अच्छा स्कूल करने के लिए और क्लास में फर्स्ट आने के लिए स्पेशल इतना ज्यादा जोर डालते हैं कि वह खेलना और उनकी ग्रोथ में बिल्कुल रुकावट आ चुकी है और आप छोटे छोटे बच्चों तक को देखेंगे कि वह ट्यूब जाते हैं और अपनी क्लास में अच्छा करने के लिए उनके बीच में कंपटीशन हो चुका है और जो कि नहीं होना चाहिए और यही वजह है कि बच्चे आजकल बहुत ही प्रेशर मैंने आने लगे हैं प्रेस पर रहने लगे और जहां बचपन में बच्चे हैं और खेल कूद कर या फिर वक्त चीजों को आसानी से समझ कर आगे पढ़ते थे वही आज कल बच्चे सिर्फ चीजों को राइट कर या फिर जितना जल्दी लौट कर सकते हैं वह कर के आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं अच्छे मार्क्स आने की कोशिश करते हैं और इसका सिर्फ यही वजह है कि शिक्षा प्रणाली में बच्चों के ऊपर इतना ज्यादा स्ट्रेस डाला जाता है इतना टेंशन उनके ऊपर होता है अच्छे नंबर लाने का टीचर्स की तरफ से मेरी तरफ से की ब्लू कम चीजों को समझने की कोशिश भी नहीं करते और सिर्फ अच्छे नंबर लाने की कोशिश करते हैं जिसकी वजह से उनको अंदर रब जो एक कच्ची से समझने के लिए इंटेलिजेंस होनी चाहिए बूथ लेवल कम होता जा रहा है और मैं यही सजेशन देना चाहूंगी कि बच्चों को समझाइए ना कि उनको सिर्फ मार्क्स हटाने के लिए कोर्स करें

shiksha pranali mein sudhaar lane ke liye aur mera toh yahi ek suggestion rahega ki sabse pehle aap exam kab aur is tarah se na badhaye baccho ke upar ki unke beech marks aane ki daudh mein vaah log chijon ko samajhna bhool jaaye aur sirf ladkiyan phir sirf ek baar phone karke us cheez ko aage exam mein likh de parantu aur usko samjhne ki koshish na kare use kya kya use ho sakte hain apni life mein us cheez ki koshish nahi karte hain bacche toh yah pranali mein yah change hona chahiye ki bacche sirf ek marks lane ke liye na pade parantu vaah cheezen samjhne ke liye padhen kyonki ab yah cheez aajkal hamein bahut saare school mein dekhne ko milti hai speshli private schools mein dekhne ko milti hai ki maa baap aur bacche maa baap ko teacher apne baccho par marks lane ke liye accha school karne ke liye aur class mein first aane ke liye special itna zyada jor daalte hain ki vaah khelna aur unki growth mein bilkul rukavat aa chuki hai aur aap chote chhote baccho tak ko dekhenge ki vaah tube jaate hain aur apni class mein accha karne ke liye unke beech mein competition ho chuka hai aur jo ki nahi hona chahiye aur yahi wajah hai ki bacche aajkal bahut hi pressure maine aane lage hain press par rehne lage aur jaha bachpan mein bacche hain aur khel kud kar ya phir waqt chijon ko aasani se samajh kar aage padhte the wahi aaj kal bacche sirf chijon ko right kar ya phir jitna jaldi lot kar sakte hain vaah kar ke aage badhne ki koshish karte hain acche marks aane ki koshish karte hain aur iska sirf yahi wajah hai ki shiksha pranali mein baccho ke upar itna zyada stress dala jata hai itna tension unke upar hota hai acche number lane ka teachers ki taraf se meri taraf se ki blue kam chijon ko samjhne ki koshish bhi nahi karte aur sirf acche number lane ki koshish karte hain jiski wajah se unko andar rab jo ek kachhi se samjhne ke liye intelligence honi chahiye booth level kam hota ja raha hai aur main yahi suggestion dena chahungi ki baccho ko samjhaiye na ki unko sirf marks hatane ke liye course karen

शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए और मेरा तो यही एक सजेशन रहेगा कि सबसे पहले आप एग्जाम

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Rahul kumar

Junior Volunteer

1:30
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए 20 21 सुन मेरे हिसाब से तो अभी गवर्नमेंट ध्यान में दे रही है जिसकी कोई भी टीचर है बहुत सारे ऐसे टीचर आ गए जिनको खुद पता नहीं है नॉलेज को खुद नहीं है और जो क्या बच्चों को पढ़ाएंगे 20 मिनट में भेजता का अच्छा नहीं रहेगा कोई भी स्टूडेंट का तो जीत भेजो वह कमजोर हो जाता हमेशा उनको डर लगने तक वापस भेज रेस्टोरेंट नहीं है आगे पढ़ाई में कभी प्रॉब्लम होती है तो उसके लिए बेहतर टीचर्स की आवश्यकता है जो कि बच्चे की मानसिकता को समझ के बेहतर तरीके से उन्हें पढ़ा तो मैं तो नॉलेज टेस्ट होने के बाद भी कोई टीचर्स का सिलेक्शन हुआ है जो कि अभी हो रहा है हाल ptet टेस्ट टेस्ट को अच्छी तरह से ले कोई भी इस में कंप्रोमाइज नहीं बताया था कि बच्चों के भविष्य का सवाल है कोई भी कमेंट नहीं बचा कैसे टेस्ट किया जाए और तभी कोई भी जो क्वालीफाई टीचर है उनको ही पढ़ाने का अवसर दिया जाए कि उनको ही स्कूल में भर्ती किया जाए तो इस चीज का चुनाव का नतीजा और शिक्षा प्रणाली में जो अभी की प्रणाली है हमेशा हम जो है लटके पढ़ते कोशिश को सिर्फ याद करते हैं तो उसे उस को याद करने से अच्छा है अधिक हम समझा के प्रेक्टिकल नॉलेज करके हम अगर करते हैं प्रैक्टिकल नॉलेज बच्चों को सिखाते तो वह हमेशा के लिए याद आ जाता है और काफी बेहतर होता है उसके लिए तो अगर करती है तो कमेंट तो शिक्षा प्रणाली में सुधार होने के चांसेस हैं

bharatiya shiksha pranali mein sudhaar lane ke liye 20 21 sun mere hisab se toh abhi government dhyan mein de rahi hai jiski koi bhi teacher hai bahut saare aise teacher aa gaye jinako khud pata nahi hai knowledge ko khud nahi hai aur jo kya baccho ko padhaenge 20 minute mein bhejta ka accha nahi rahega koi bhi student ka toh jeet bhejo vaah kamjor ho jata hamesha unko dar lagne tak wapas bhej restaurant nahi hai aage padhai mein kabhi problem hoti hai toh uske liye behtar teachers ki avashyakta hai jo ki bacche ki mansikta ko samajh ke behtar tarike se unhe padha toh main toh knowledge test hone ke baad bhi koi teachers ka selection hua hai jo ki abhi ho raha hai haal ptet test test ko achi tarah se le koi bhi is mein compromise nahi bataya tha ki baccho ke bhavishya ka sawaal hai koi bhi comment nahi bacha kaise test kiya jaaye aur tabhi koi bhi jo qualify teacher hai unko hi padhane ka avsar diya jaaye ki unko hi school mein bharti kiya jaaye toh is cheez ka chunav ka natija aur shiksha pranali mein jo abhi ki pranali hai hamesha hum jo hai latke padhte koshish ko sirf yaad karte hain toh use us ko yaad karne se accha hai adhik hum samjha ke practical knowledge karke hum agar karte hain practical knowledge baccho ko sikhaate toh vaah hamesha ke liye yaad aa jata hai aur kaafi behtar hota hai uske liye toh agar karti hai toh comment toh shiksha pranali mein sudhaar hone ke chances hain

भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए 20 21 सुन मेरे हिसाब से तो अभी गवर्नमेंट ध्यान

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Bhaskar Sharma

B.E.,forester

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे सबसे भारतीय शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी जो है वह कमीशन की कमी जैसे की हम IIT जॉब PMT नहीं होने देते नए-नए क्योंकि इससे आईआईटी और पीएमटी की वैल्यू खत्म हो जाएगी लेकिन इस चक्कर में पूरी भारतीय शिक्षा प्रणाली की व्यवस्था ही खत्म हो रही है क्योंकि हमारे यहां करोड़ों विद्यार्थी के बीच में एक सीट होती है तो यह बहुत ही खतरनाक होते हैं जबकि अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में हजार बच्चों के 1 सीट होती है तो उन लोगों के लिए पढ़ना बहुत आसान होता है इसीलिए उन लोगों में पढ़ाई के बाद भी कौन सा अच्छा है पढ़ने के साथ भी और हम अपने उसको स्कूल कॉलेजों को विदेशी विदेशी यूनिवर्सिटी से कम पर करें ना कि आपस में IIT अच्छा आ जाए जपले अच्छा मेरे सबसे तो ID को बनाए रखो और जो इटली और हर तबके के कॉलेजों उनको खत्म करते जाओ केवल ID होना चाहिए 80 से ऊपर भी कुछ होना चाहिए जो कि हर्बल वगैरा को कंपेयर कर सके जैसे कि मैं स्कूल में देखते हैं इस स्कूल आजकल स्कूलों में व्यवस्था सही होती जा रही है धीरे-धीरे क्योंकि स्कूल में फंक्शन है क्योंकि स्कूलों को खोलने के लिए कोई बहन नहीं है किसी की तरीका आप कोई भी स्कूल खोल सकते हैं दूसरी बात यह कि हम जो सिलेबस पढ़ाते हैं वह सारे इंग्लिश में ही होना चाहिए एक कंफ्यूजन लगवाती कंज़र्वेटिव तरीके का सिलेबस है हम उसे अपनी भाषा में कर सकते हैं इंग्लिश में हिंदी में नहीं तो इंग्लिश में कर सकते हैं हिंदी प्लस इंगलिश में जिस से क्या होगा कि बच्चे दिमाग खुलेगा अपने को तमिल भाषा में कोई देखेगा तो जल्दी सीख पाएगा क्योंकि हमें निर्माता चाहिए काम करने वाला नहीं इसीलिए हमें अपनी भाषा में ज्ञान देना ही होगा

mere sabse bharatiya shiksha pranali ki sabse badi kami jo hai vaah commision ki kami jaise ki hum IIT job PMT nahi hone dete naye naye kyonki isse IIT aur pmt ki value khatam ho jayegi lekin is chakkar mein puri bharatiya shiksha pranali ki vyavastha hi khatam ho rahi hai kyonki hamare yahan karodo vidyarthi ke beech mein ek seat hoti hai toh yah bahut hi khataranaak hote hain jabki america aur england jaise deshon mein hazaar baccho ke 1 seat hoti hai toh un logo ke liye padhna bahut aasaan hota hai isliye un logo mein padhai ke baad bhi kaun sa accha hai padhne ke saath bhi aur hum apne usko school collegeon ko videshi videshi university se kam par kare na ki aapas mein IIT accha aa jaaye japale accha mere sabse toh ID ko banaye rakho aur jo italy aur har tabke ke collegeon unko khatam karte jao keval ID hona chahiye 80 se upar bhi kuch hona chahiye jo ki herbal vagera ko compare kar sake jaise ki main school mein dekhte hain is school aajkal schoolon mein vyavastha sahi hoti ja rahi hai dhire dhire kyonki school mein function hai kyonki schoolon ko kholne ke liye koi behen nahi hai kisi ki tarika aap koi bhi school khol sakte hain dusri baat yah ki hum jo syllabus padhate hain vaah saare english mein hi hona chahiye ek confusion lagavaatee kanzarvetiv tarike ka syllabus hai hum use apni bhasha mein kar sakte hain english mein hindi mein nahi toh english mein kar sakte hain hindi plus English mein jis se kya hoga ki bacche dimag khulega apne ko tamil bhasha mein koi dekhega toh jaldi seekh payega kyonki hamein nirmaata chahiye kaam karne vala nahi isliye hamein apni bhasha mein gyaan dena hi hoga

मेरे सबसे भारतीय शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी जो है वह कमीशन की कमी जैसे की हम IIT जॉब

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munmun

Volunteer

1:47

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज की शिक्षा कुछ है हाई लेवल तक पहुंचाने के लिए जो है हमें पहले स्कूलों की जो निर्माण है जरा से करना चाहिए जहां पर जो हर बच्चा जाना चाहिए और इसके लिए जो है हम बच्चों से पहले बड़ों को शिक्षित करने की जरूरत है और बच्चे कुदरती तौर पर जो है खुशमिजाज होते हैं और वे आबादी का ऐसा हिस्सा होता है जिनके साथ काम करना सबसे आसान होता तो फिर यह पढ़ाने के लिए जो है माहौल को बेहद खुशनुमा बनाना चाहिए और एक मुश्किल काम जो यह यह हो जाता है कि आज हमारे पास जो है ऐसे कई वैज्ञानिक और चिकित्सक प्रमाण मौजूद है कि जिन से साबित होता है कि अगर आप एक खुशनुमा माहौल में होते हैं तो आपका शरीर और दिमाग जैसे विशेष तरीके से जो काम करता है अगर आप एक भी जो है पल भी ना उत्तेजना चिड़चिड़ा हो तो चिंता बेचैनी और उस के रहते हैं तो अगर आप जो है सहज रूप से खुश रहते हैं तो कहा जाता है कि बुद्धि का इस्तेमाल करने की आपकी क्षमता एक ही दिन में जो है ऑफिस भी पढ़ सकते तो ऐसा माहौल होना चाहिए शिक्षा का की जो है हर बच्चा गरीब से गरीब बच्चा भी और हमेशा में बच्चा वीडियो है पढ़ाई को जो है शिक्षा को जो है हम अपनी इंडस्ट्री अपनी रुचि से पढ़े और और यह जो स्कूलों में जो पीस होती है उसमें जो फीस होती उनको भी जो है थोड़ा कम कर देना चीकू की जिसे जो है अमीर बच्चे तो पढ़ पाएंगे और यह गरीब बच्चे भी जो है पढ़ पाएंगे

aaj ki shiksha kuch hai high level tak pahunchane ke liye jo hai hamein pehle schoolon ki jo nirmaan hai zara se karna chahiye jaha par jo har baccha jana chahiye aur iske liye jo hai hum baccho se pehle badon ko shikshit karne ki zarurat hai aur bacche kudarati taur par jo hai khushmijaj hote hain aur ve aabadi ka aisa hissa hota hai jinke saath kaam karna sabse aasaan hota toh phir yah padhane ke liye jo hai maahaul ko behad khushnuma banana chahiye aur ek mushkil kaam jo yah yah ho jata hai ki aaj hamare paas jo hai aise kai vaigyanik aur chikitsak pramaan maujud hai ki jin se saabit hota hai ki agar aap ek khushnuma maahaul mein hote hain toh aapka sharir aur dimag jaise vishesh tarike se jo kaam karta hai agar aap ek bhi jo hai pal bhi na uttejna chidchida ho toh chinta bechaini aur us ke rehte hain toh agar aap jo hai sehaz roop se khush rehte hain toh kaha jata hai ki buddhi ka istemal karne ki aapki kshamta ek hi din mein jo hai office bhi padh sakte toh aisa maahaul hona chahiye shiksha ka ki jo hai har baccha garib se garib baccha bhi aur hamesha mein baccha video hai padhai ko jo hai shiksha ko jo hai hum apni industry apni ruchi se padhe aur aur yah jo schoolon mein jo peace hoti hai usme jo fees hoti unko bhi jo hai thoda kam kar dena Chiku ki jise jo hai amir bacche toh padh payenge aur yah garib bacche bhi jo hai padh payenge

आज की शिक्षा कुछ है हाई लेवल तक पहुंचाने के लिए जो है हमें पहले स्कूलों की जो निर्माण है ज

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