हिंदी माध्यम के छात्र-छात्राएं UPSC में क्यों नहीं सफल हो रहे हैं?...


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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आपने कहा हिंदी माध्यम के छात्र-छात्राएं यूपी में क्यों नहीं सफल हो रहे हैं यह कहना गलत है जो परिश्रम करता है जो मीडियम के चक्कर में नहीं पड़ता जो तैयारी करता है जैसे सामने लक्ष होता है वह किसी भी मीडियम का विद्यार्थियों व निश्चित फल होता है यह अपनी कमजोरी को छुपाने का एक बहाना है हिंदी मीडियम के छात्र सफल नहीं होते हिंदी मीडियम के चाचा कर इंजीनियर बन सकते हैं डॉक्टर बन सकते हैं जज बन सकते हैं चार्टर्ड अकाउंटेंट बन सकते हैं फिर तो नहीं कर सकते माध्यम को चारा डेक्कन अपनी कमजोरी को छुपाने से कभी जिंदगी में सफलता नहीं मिलेगी हिंदी मीडियम में आपको कुछ कठिन शब्दों का कुछ कठिन प्रश्नों का सामना करना पड़ सकता है उसके लिए आप पुस्तकों का सहारा नहीं कोचिंग सेंटरों में भीड़ होती है वहां किसी भी मीडियम चाची सफल नहीं होता केवल वही विद्यार्थी सफल होता है जितने सफल होने की ठंड की है वह घर पर बैठेगा तो भी चलूंगा वह कोचिंग जाएगा तो भी चलूंगा तू भूमिका उसके अपने टाइम देने के लिए उसकी मेहनत करने के लिए आरोप लगाना बंद करें और स्वयं हिंदी मीडियम में पूरी तैयारी के साथ आप असफल साबित करें हिंदी मीडियम के विद्यार्थी सफल होते हैं

aapne kaha hindi madhyam ke chatra chatrae up mein kyon nahi safal ho rahe hain yah kehna galat hai jo parishram karta hai jo medium ke chakkar mein nahi padta jo taiyari karta hai jaise saamne lakshya hota hai vaah kisi bhi medium ka vidyarthiyon va nishchit fal hota hai yah apni kamzori ko chhupaane ka ek bahana hai hindi medium ke chatra safal nahi hote hindi medium ke chacha kar engineer ban sakte hain doctor ban sakte hain judge ban sakte hain chartered accountant ban sakte hain phir toh nahi kar sakte madhyam ko chara deccan apni kamzori ko chhupaane se kabhi zindagi mein safalta nahi milegi hindi medium mein aapko kuch kathin shabdon ka kuch kathin prashnon ka samana karna pad sakta hai uske liye aap pustakon ka sahara nahi coaching sentaron mein bheed hoti hai wahan kisi bhi medium chachi safal nahi hota keval wahi vidyarthi safal hota hai jitne safal hone ki thand ki hai vaah ghar par baithega toh bhi chalunga vaah coaching jaega toh bhi chalunga tu bhumika uske apne time dene ke liye uski mehnat karne ke liye aarop lagana band kare aur swayam hindi medium mein puri taiyari ke saath aap asafal saabit kare hindi medium ke vidyarthi safal hote hain

आपने कहा हिंदी माध्यम के छात्र-छात्राएं यूपी में क्यों नहीं सफल हो रहे हैं यह कहना गलत है

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Sudhir Kumar

Life Coach

6:35
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हिंदी माध्यम के छात्र-छात्राएं यूपीएससी में क्यों नहीं सफल हो रहे हैं एक अच्छा सवाल है और जरूर कुछ कारण बताना चाहूंगा आप दिखे दरअसल अभी कुछ सालों में हिंदी माध्यम कब जो हमारे देश की भाषा है उनके माध्यम से जो पैसे देने वाले छात्र-छात्राएं हैं जो कैंडीडेट्स हैं वह उनका परसेंटेज बहुत गिरा है और इसके जो है मूल में जो कारण हैं एक तो यह है कि जो हिंदी माध्यम और विदेशी भाषाओं के जो पेपर होते हैं जो वह हम में मुख्यतः अनुवादित होते हैं उनको अनुवाद किया जाता है वह मूल रूप से नहीं बनाए जाते हैं तो अनुवादित पेपर जो होते हैं हिंदी के कठिन शब्दावली का प्रयोग करते हैं जो जो प्रचलित नहीं है जो प्रचलन में नहीं है ऐसी शब्दावली का प्रयोग करते हैं और इसलिए भाषा के स्तर पर कठिनाई आती है और कई सारे कैंडीडेट्स अपनी ही भाषा में अपनी भाषा के शब्दों में रखे गए प्रश्नों को समझ नहीं पाता है और दूसरी तरफ यह कि हिंदी माध्यम बात हिंदी माध्यम की नहीं है बात यह है कि जो छात्र छात्राएं जो कैंडिडेट हिंदी माध्यम से पढ़ कर आते हैं तो जिन संस्थाओं में हिंदी माध्यम में अध्ययन अध्यापन होता है ऐसी संस्थाएं बहुत कम ऐसी संस्थाएं सबसे बड़ी बात है कि जो देश की प्रीमियर से आए हैं जो प्रतिष्ठित हैं उन सभी संस्थाओं में अध्यापन अध्ययन अध्यापन इंग्लिश मीडियम में होता है तो आप ही समझिए कि आईआईटी ले लीजिए हमसे लीजिए एनआईटी ले लीजिए और न्यू और और जो है और इसी तरह के जो केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं डीयू है वहां इन प्रतिष्ठित और प्रीमियर संस्था में अध्यापन और अध्यन मुख्यतः नजरली इंग्लिश में होता तो छात्र यहां से निकल कर आते हैं क्योंकि यह प्रतिष्ठित होती हैं तो इन छात्रों की ग्रूमिंग भी बहुत अच्छी होती है व्यक्तित्व विकास विभाग अच्छा होता है और बात केवल माध्यम की नहीं होती है बात यह है कि प्रतिष्ठित संस्थाएं जो हैं और देश में ऐसी कितनी प्रतिशत है जो हिंदी माध्यम में काम कर रही हैं तो जहर सी बातें हिंदी माध्यम से जो पढ़कर आने वाले जो छात्र छात्राएं होते हैं वह आमतौर पर मध्यवर्गीय या निम्न मध्यवर्गीय बैकग्राउंड से होते हैं तो संस्थाओं का छात्र छात्राओं की प्रतिभा के विकास में विकास में बहुत बड़ा योगदान होता है तो यह कोई संयोग नहीं है कि इस समय ज्यादातर जो छात्र यदि कांग्रेट्स है जो यूपीएससी में क्वालीफाई हो रहे हैं आईएस बन रहे हैं या फिर महत्वपूर्ण जो कार्ड अर्जुन को मिल रहे हैं वह जो है कहीं ना कहीं जाकर प्रतिष्ठित संस्थाओं से संबंध रखते हैं और यह प्रतिष्ठित संस्थाएं जो हैं वहां अधीन अध्यापन जो होता है इंग्लिश मीडियम में होता है प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन हिंदी माध्यम में भी हो रहा होता तो मेरा मानना है कि इसी में हिंदी माध्यम में बहुत ज्यादा संख्या में अभ्यर्थी सफल हो रहे होते तो यह कारण है और दूसरा यह कि हिंदी माध्यम के जो छात्र छात्राएं हैं कैंडिडेट हैं उनके पास जो है नॉलेज रिसोर्सेज तक पहुंच नहीं होती है हिंदी और देसी भाषा में ज्ञान का जो विकास भी अभी उतना नहीं हुआ है तमाम विषय हैं समाज सामाजिक विज्ञान हैं इतिहास भूगोल इतिहास में तो फिर भी काफी कुछ सामग्री आपको हिंदी माध्यम और देसी भाषा में बाधाएं मिल जाती है लेकिन दो अन्य विषय विज्ञान हिंदी माध्यम में बहुत ज्यादा सामग्री तो नहीं मिल पाती है आओ उच्च कोटि की सामग्री दूसरी बात भी है कि इंग्लिश मीडियम के जो अभ्यर्थी होते हैं वह इंटरनेट और गूगल की मदद से जो इंटरनेट पर उपलब्ध है जो है तमाम जो है साइंसेज है विषय हैं उनमें ज्ञान का जो जो जो भंडार है उसकी मदद से कंपैरेटिव स्टडी आसानी से कर लेते हैं और तुलनात्मक अध्यन आसानी से कर लेते हैं और तुलनात्मक अध्ययन और विभिन्न स्रोतों से अध्ययन एक बहुत अच्छी है अध्ययन की विधि कही जाती है तो इस तरह की कई बातें हैं जो हिंदी माध्यम के स्टूडेंट के साथ नहीं है तो और और सबसे महत्वपूर्ण बात तो यही है कि हिंदी माध्यम और जो देशी भाषाओं के माध्यम के छात्र होते हैं मुख्यत है उनकी जो बैकग्राउंड होती है वह अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों के बैकग्राउंड से हमेशा आमतौर पर नीचे ही होती है तो बैकग्राउंड क्लास और देसी भाषा में ज्ञान के विकास और इंटरनेट पर देशी भाषाओं में जो जो उपलब्ध सामग्री की कमी कई कारण हैं और दूसरा एक कारण यह भी है कि यूपीएससी पेपर चेक होते हैं तो कई बार जो है जो प्रोफेसर सोते हैं सामान्य जीके समाजशास्त्र का कोई प्रोफेसर है तो उसने समाजशास्त्र की जो ऊंची पढ़ाई है सारी इंग्लिश में की हुई है और हिंदी की शब्दावली नहीं आती है ठीक से तो हिंदी भाषा में हिंदी माध्यम में लिखा गया सवाल और कृष्ण का जो जो जो उत्तर हैं वह बहुत अच्छे से समझ में नहीं आता हिंदी माध्यम के जो कैंडिडेट होते हैं उनके जो प्रश्न पत्रों की जांच होती है वह भी जो है बहुत अच्छे से नहीं हो पाती है तो ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी जो है यूपीएससी में बहुत ज्यादा मात्रा में सफल नहीं हो पा रहे हैं यह हो सकता है कि आपको मेरा जवाब पसंद आया हो

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हिंदी माध्यम के छात्र-छात्राएं यूपीएससी में क्यों नहीं सफल हो रहे हैं एक अच्छा सवाल है और

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