अमेरिका के राष्ट्रपति की बढ़ती शक्तियों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए?...


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Shantanu Purohit

Political Analyst, Life Management, Career Counseler

2:41

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अपने प्रश्न क्या है कि अमेरिका के राष्ट्रपति की बढ़ती शक्तियों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए या यूं कहें कि विश्व की राजनीति में वह ज्यादा शक्तिशाली हो रहा हो तो अमेरिका देखी शुरू से ही एक शक्तिशाली राष्ट्र है और अमेरिका में की व्यवस्था है एडीएम अमेरिका के भीतर उसके राष्ट्रपति की भर्ती शक्तियों की बात करें तो अमेरिका के भीतर जो व्यवस्था है राज व्यवस्था है जो अमेरिका की राष्ट्रपति प्रणाली से संबंधित है अमेरिका में जो लोकतंत्र और राष्ट्रपति प्रणाली के अंतर्गत लोकतंत्र की दो राष्ट्रपति है उसके हाथ में पूरी कार्यकारी व्यवस्था होती है यानी कि जो कार्यकारी की नियुक्ति है वह राष्ट्रपति जरूरी नहीं है कि वहां के संसद के सदस्यों को आमंत्रित करेगा वह किसी को भी कर सकता है कि स्कूल क्लिक कर सकता किसी को भी हटा सकता है इसे भारत में प्रधानमंत्री सरकार अवश्य राष्ट्रपति सरकार वहां जो राष्ट्रपति है वह सुप्रीम होता है हमारे प्रधानमंत्री हमारे राष्ट्रपति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री कह नहीं सकते की शक्तियां बढ़ रही हैं या घट रही है क्योंकि वहां तो 4 साल के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति है वह नियुक्त किया जाता है और 4 साल के बाद भी करो चुनाव लड़ना चाहिए कार्यकाल के बाद दूसरा एक और कार्यकाल ले सकता है उसके लाभ ले सकता अमेरिका में 1 राष्ट्रपति के सिर्फ दो कार्यकाल हो सकते हैं चार चार बार शक्तियां बड़े अभी तो कोई दिक्कत नहीं होगी 8 वर्ष की बात है उनके लिए वह कर लेंगे तानाशाही की है तेरी अमेरिका में तानाशाही शासन लागू हो जाता है मालिनी डोनाल्ड ट्रंप कहां के राष्ट्रपति हैं तो वह तराशा हो जाते हैं तो वह अमेरिका के लिए दिक्कत पैदा करने वाली बात होगी बस विश्व वैश्विक राजनीति में विश्व कूटनीति की हम बात करें तो यदि अमेरिका शक्तिशाली होता है अमेरिका का राष्ट्रपति शक्तिशाली होता है तो आज के समय में कहा नहीं जा सकता कि वह शक्तियों का पूरी तरह से उपयोग कर भी पाएगा या उतना शक्तिशाली होगी पाएगा इस दुनिया जो है कभी दूध हुई थी तो अभी वह बहुत ही होने होने होने लगी है उसका जो आभार है वह दुनिया को बहुत जल्दी बना रहा है और वैश्वीकरण जिस तरह से सिमट रहा है वापस वापस वैश्वीकरण सिकुड़ रहा है वैश्वीकरण की जो उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है तो अभी किसी भी देश का शक्तिशाली हो जाना उस तरह से तानाशाह बन जाना पूरी दुनिया पर दादागिरी दिखाना उस तरह से संभाल नहीं है धन्यवाद

apne prashna kya hai ki america ke rashtrapati ki badhti shaktiyon ka aalochanaatmak parikshan kijiye ya yun kahein ki vishwa ki raajneeti me vaah zyada shaktishali ho raha ho toh america dekhi shuru se hi ek shaktishali rashtra hai aur america me ki vyavastha hai ADM america ke bheetar uske rashtrapati ki bharti shaktiyon ki baat kare toh america ke bheetar jo vyavastha hai raj vyavastha hai jo america ki rashtrapati pranali se sambandhit hai america me jo loktantra aur rashtrapati pranali ke antargat loktantra ki do rashtrapati hai uske hath me puri kaaryakari vyavastha hoti hai yani ki jo kaaryakari ki niyukti hai vaah rashtrapati zaroori nahi hai ki wahan ke sansad ke sadasyon ko aamantrit karega vaah kisi ko bhi kar sakta hai ki school click kar sakta kisi ko bhi hata sakta hai ise bharat me pradhanmantri sarkar avashya rashtrapati sarkar wahan jo rashtrapati hai vaah supreme hota hai hamare pradhanmantri hamare rashtrapati rashtrapati pradhanmantri keh nahi sakte ki shaktiyan badh rahi hain ya ghat rahi hai kyonki wahan toh 4 saal ke liye pradhanmantri aur rashtrapati hai vaah niyukt kiya jata hai aur 4 saal ke baad bhi karo chunav ladana chahiye karyakal ke baad doosra ek aur karyakal le sakta hai uske labh le sakta america me 1 rashtrapati ke sirf do karyakal ho sakte hain char char baar shaktiyan bade abhi toh koi dikkat nahi hogi 8 varsh ki baat hai unke liye vaah kar lenge tanashahi ki hai teri america me tanashahi shasan laagu ho jata hai malini donald trump kaha ke rashtrapati hain toh vaah taraasha ho jaate hain toh vaah america ke liye dikkat paida karne wali baat hogi bus vishwa vaishvik raajneeti me vishwa kootneeti ki hum baat kare toh yadi america shaktishali hota hai america ka rashtrapati shaktishali hota hai toh aaj ke samay me kaha nahi ja sakta ki vaah shaktiyon ka puri tarah se upyog kar bhi payega ya utana shaktishali hogi payega is duniya jo hai kabhi doodh hui thi toh abhi vaah bahut hi hone hone hone lagi hai uska jo abhar hai vaah duniya ko bahut jaldi bana raha hai aur vaishvikaran jis tarah se simat raha hai wapas wapas vaishvikaran sikud raha hai vaishvikaran ki jo ulti ginti shuru ho chuki hai toh abhi kisi bhi desh ka shaktishali ho jana us tarah se tanashah ban jana puri duniya par dadagiri dikhana us tarah se sambhaal nahi hai dhanyavad

अपने प्रश्न क्या है कि अमेरिका के राष्ट्रपति की बढ़ती शक्तियों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए

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