क्या आप सब पागल हो?...


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J.P. Y👌g i

Psychologist

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एक पल चैन आया है क्या आप सब पागल हो दर्शन पागल जो शब्द है हम इतनी इसकी प्रयुक्ति करते हैं और इसकी अवधारणा अलग-अलग दिमाग में आती है कई लोग पागलपंती को अपने समाज में जंक्शन का दर्शन मिलता है अधिकांश कि वह लापरवाही और अपने पर ध्यान नहीं रखते और उनकी प्रतिक्रिया बाधित नहीं रहती है यार वह ढंग से अपनी प्रतिक्रिया में रत रहते हैं और जो आज सामान अवस्था आती है उनके प्रति वह पागल एक मानसिक विकृति के रूप में जाना जाता है दूसरा यह है कि जैसे की दीवानगी अगर हम दीवानगी भी का जो अर्थ है वह पागल है कौन है तो जब हम दीवानगी शब्द से बोलते हैं तो इतना बुरा नहीं आता और जब हम सीधा पागल शब्दों का प्रयोग करें तो बहुत असर करता है तो कितने गीत बने हैं इस विषय पर तो अगर देखा जाए तो दुनिया में कि जो भी अति चल रही है जो जन सामान्य की अवधारणा अवस्था से भिन्न हो है तो पागलपंती की श्रेष्ठ में हमले करते हैं उसको लेकिन और हर व्यक्ति एक पागलपन की दशा होती है दीवानापन और उसमें अपनी जो अभी रिसीव रहती है कि परिणीति रहती है उसके अंदर तो आजकल जो स्वयं में पागल बनने की उपकरण करते हैं वह एक विशेषता को कहीं ना कहीं मुद्रण के होते हैं कोई मनोरोग के लिए बहुत ज्यादा अग्रसर हो रहा है विज्ञान की क्या है बेटियां तो जबकि की भावना के आवेश में हम अनियंत्रित होते हैं तो वह एक सीमा को पार करने लगता है और वही प्रदेश सामान्य अवस्था में पागलपन को उद्घाटित करता है लेकिन अगर देखा जाए तो पागलपंती किसी को तकलीफ के ऊपर ले जाता है तो अगर कोई जनसमूह के बीच में अगर कोई प्रदर्शन कर रहे तो वह भी पागलपंती तो उस कलाकार में जो व्यक्ति की छमता रियो पागलपंती है तो सारे तो नहीं प्रपोज कर रहे हैं कर पाते हैं एक नेता सामूहिक दल लाखों की संख्या में प्रतिवेदन करता है तो को भी पागलपन है क्षमता के आउट की प्रदर्शित का है ये जो जिसको हम पागलपंती कहते हैं और यह नहीं है कि अगर कोई पुरस्कृत होगा तो वह अगर ढंग में चल रहा है तो उसकी प्रयुक्ति है तो यह वीर क्यों क्या हुआ अब एक है और उसके अंदर की प्रतिक्रिया उद् घोषित हो रहे हैं तो उसको हम पागलपंती की और जिसको दूसरे शब्द में हम मूर्ख ही बोलते हैं हिंदी की परिभाषा में रिचा हिली बोलते हैं फारसी की और कभी-कभी हम ना ऐसे ही शब्दों का प्रयोग करते हैं जिसे कहते हैं गवार है इत्यादि बात है तो यही है कि लगने वाली बात है कि किसको क्या चीज पागल लग रहा है लेकिन उस पागलपंती में जो जिसको प्रिय लग रहा है वह मस्त हो रहा है इसमें लेकिन बस यही है पैकेट डर इस बात का है कि कहीं वह अतिक्रमण ना करें इसका अकर्मक सकर्मक रीवा सेलिना हो बस यही फर्क में बैलेंस हो जाता है तो ही कुछ लोग वास्तविक रूप से इसके रोग ग्रस्त हो जाते हैं तो उसका इलाज होता है तो पागल है वह आपने एक अवस्था पर व्यतीत कर रहा है लेकिन से बड़ा पागल हूं वह हो जाते हैं जो उस पागल को भी समझने की कोशिश करते क्या जरूरत है हम उस उसके लिए कुछ सहयोग कर नहीं सकते हैं तो व्यर्थ है तो एक या तो सहानुभूति रखते हैं कि विचारे के साथ कैसा हो गया कैसा कर रहा है इत्यादि बातें तो यही सब चीजें समझ नहीं चाहिए के पागलपन दीवानगी पन 2G सारी चीज है कि एक मानसिक विवेचना हो रही है कि क्या पागल है लेकिन इतने उत्तर से शायद कुछ ना कुछ आप बाहर लगा सकेंगे के पागलपन अपने आप में क्या महत्व रखता है और क्या नहीं रखता है और जिसका पीछे हटने लगता है वह भी पागल के अवस्था में आता है या खुशी में प्रफुल्लित ज्यादा ही उमंग आउट होता है वह भी पागलपन की दशा में आ जाता है तो इसके बारे में तो क्या है इसमें अगर आप भी कह रहे कि क्या आप सब पागल हो तो हम मान सकते हैं कि उनकी व्यक्तिगत अवधारणा में सारी दुनिया ही पागल है तो पागल के दो रूप होता है या तो पूरी दुनिया पागल है या वह अकेले ही पागल है तो यह सब चीजें हैं तो अगर इस यह वीर जी को भी अगर हम हमें विश्लेषण करेंगे ध्यानपूर्वक तो समझ में आ जाएगा कि इसमें क्या चीज हैं और यह आपके चिंतन का विषय हो सकता है और इसको अगर आपकी खता बन रही है तो हम मेरी गुजारिश है कहीं आप ना समझ में आ जाए अच्छा पसंद है और यही मैं कहना चाह रहा हूं धन्यवाद शुभकामनाएं

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एक पल चैन आया है क्या आप सब पागल हो दर्शन पागल जो शब्द है हम इतनी इसकी प्रयुक्ति करते हैं

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