नागरिकता संशोधन बिल में कहीं नहीं है 'उत्पीड़ित अल्पसंख्यक' का जिक्र, फिर बीजेपी इसे क्यों उछाल रही?...


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1:09

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समझने की जरूरत है लोकगीत बिल्कुल समझ ही नहीं पाना है और बेवजह कि इसमें बहस बाजी हो रही है नागरिकता भी उन लोगों के लिए जो विदेशों से पलायन कर मार्केट करके भारत में आते हैं उनमें हिंदू जैन सिख इसाई आदेशा धर्मों के लोगों को बाहर से आने पर यहां पर प्रवेश दिया जाएगा मुस्लिमों को छोड़कर सारे देश मुस्लिम है तो वहां से उन लोगों को वहां पर जो सुरक्षा है तो उन्हें भारत आने की कोई जरूरत नहीं है इसलिए उन्हें इनसे दूर रखा गया है बाकी कोई भारत में रहने वाले लोगों को बाहर निकाला नहीं जा रहा है ना कि 9 लोगों को निकाला जा रहा है जो पहले से आ रहे हैं वह आने वाले लोगों के लिए यह मामला है लेकिन लोग और कांग्रेसियों विपक्षी पार्टियों के ब्रह्म में आ रहे हैं कृपया इस लिंक को समझें और फिर इसके ऊपर बात करें

samjhne ki zarurat hai lokgeet bilkul samajh hi nahi paana hai aur bewajah ki isme bahas baazi ho rahi hai nagarikta bhi un logo ke liye jo videshon se palayan kar market karke bharat mein aate hain unmen hindu jain sikh isai adesha dharmon ke logo ko bahar se aane par yahan par pravesh diya jaega muslimo ko chhodkar saare desh muslim hai toh wahan se un logo ko wahan par jo suraksha hai toh unhe bharat aane ki koi zarurat nahi hai isliye unhe inse dur rakha gaya hai baki koi bharat mein rehne waale logo ko bahar nikaala nahi ja raha hai na ki 9 logo ko nikaala ja raha hai jo pehle se aa rahe hain vaah aane waale logo ke liye yah maamla hai lekin log aur congressiyo vipakshi partiyon ke Brahma mein aa rahe hain kripya is link ko samajhe aur phir iske upar baat karen

समझने की जरूरत है लोकगीत बिल्कुल समझ ही नहीं पाना है और बेवजह कि इसमें बहस बाजी हो रही है

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:08
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नागिन नाटक की कोई बात नहीं कोई बात नहीं सिर्फ मुस्लिम के अलावा हिंदुस्तान में जितने भी लोग अगर हमारे देश के प्रकार हिंदुओं की शायरी सीखो और मुस्लिमों के लिए क्योंकि पाकिस्तान में रहते हैं और इसके अलावा भी करते हैं हिंदू की होती है

nagin natak ki koi baat nahi koi baat nahi sirf muslim ke alava Hindustan mein jitne bhi log agar hamare desh ke prakar hinduon ki shaayari sikho aur muslimo ke liye kyonki pakistan mein rehte hain aur iske alava bhi karte hain hindu ki hoti hai

नागिन नाटक की कोई बात नहीं कोई बात नहीं सिर्फ मुस्लिम के अलावा हिंदुस्तान में जितने भी लोग

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Dr. Radha kant Singh

किसान

0:43
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आपने पूछा नागरिकता संशोधन बिल में कहीं भी उद्दीपन अल्पसंख्यक का जिक्र नहीं है जो भी है इसमें जो हमारे धर्म के आधार पर जब देशों का बंटवारा हुआ था उस समय पहली बात तो जब पाकिस्तान या बांग्लादेश जो है मुस्लिम कंट्री बने तो हिंदुस्तान में मुसलमान क्यों रोके गए वहां पर जो अल्पसंख्यक थे उनके हितों की रक्षा क्यों नहीं की गई तो उनके हितों की रक्षा करने के लिए इस बिल को लाया गया है और पाकिस्तान से या बांग्लादेश से अफगानिस्तान से आने वाले मुसलमानों को नागरिकता क्यों मिलती है जबकि बोर्ड एस मेजॉरिटी देश है मुस्लिम देश है वहां पर को अपनी नागरिकता क्यों नहीं रखते हैं

aapne poocha nagarikta sanshodhan bill mein kahin bhi uddipan alpsankhyak ka jikarr nahi hai jo bhi hai isme jo hamare dharm ke aadhaar par jab deshon ka batwara hua tha us samay pehli baat toh jab pakistan ya bangladesh jo hai muslim country bane toh Hindustan mein muslim kyon roke gaye wahan par jo alpsankhyak the unke hiton ki raksha kyon nahi ki gayi toh unke hiton ki raksha karne ke liye is bill ko laya gaya hai aur pakistan se ya bangladesh se afghanistan se aane waale musalmanon ko nagarikta kyon milti hai jabki board s mejariti desh hai muslim desh hai wahan par ko apni nagarikta kyon nahi rakhte hain

आपने पूछा नागरिकता संशोधन बिल में कहीं भी उद्दीपन अल्पसंख्यक का जिक्र नहीं है जो भी है इसम

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देखिए यह सिटीजन बिल है इसमें अमेंडमेंट किया जा रहा है और यह बिल बुक 1955 एक्ट का जो सज्जन बिल है नागरिक बिल है उसी में ही संशोधन अमेंडमेंट किया जा रहा है तो इसमें जो संशोधन है उसमें तो उसमें यह कहा गया है कि जो हमारे पड़ोसी देश हैं जिसमें पाकिस्तान बांग्लादेश अफगानिस्तान के अल्सर आज संसद जो माइनारटीज हैं हमारी नेबरिंग कंट्री में वहां के मानवता है तो उनको वहां पर पर्सीक्यूशन रिलीजियस प्रशिक्षण यानी धार्मिक उत्पीड़न होता है तो उसकी वजह से वह हमारे यहां वहां से भागकर यहां पर शरण लेते हैं रिफ्यूजी की तौर पर यहां पर आते हैं या अभय दा जाते हैं तो उनके उत्पीड़न से निपटने की और इस बिल को मतलब लाया गया जिससे कि उनको नागरिकता दी जा सके और उसकी कट ऑफ डेट जो है 2014 फिक्स की गई है 31 दिसंबर 2014 डेट तक जो भी आ गए हैं वह 2019 में नागरिकता प्राप्त कर लेंगे भारत की बिना किसी डॉक्यूमेंट या को मांगे हुए तो इसमें इसमें दलील यह दी जा रही है कि यह पार्टीशन की समस्या को समाधान करेगा यह बिल पार्टीशन एनी की जो 1947 में पाकिस्तान और इंडिया के बीच पार्टीशन हुआ है उसमें उसमें जो बहुत सारे जो जो बहुत सारे जो यहां वहां के पाकिस्तान के हिंदू व सिख जैन बौद्ध थे वहीं पर रह गए थे और वह उन्होंने अपना पाकिस्तान में वहां पर थे तो उनकी संख्या आज घटकर बहुत कम हो गई उनके ऊपर बहुत ज्यादा रिलीजियस पर्सीक्यूशन यानी उत्पीड़न होता है अत्याचार होता है जिसकी वजह से वहां पर या तो वह कन्वर्ज उनका कन्वर्जन हो गया धर्मांतरण हो गया या वहां पर उनके ऊपर उद्यम दर्जे के नागरिक बनकर रहते हैं और और इसी तरह बांग्लादेश भी जब 1971 में आजाद हो गया तो वहां भी यही स्थिति है यह कहा जा रहा है तो इसमें दूसरी दलील भी दी जा रही है कि भाई जो पाकिस्तान है बांग्लादेश है या पाकिस्तान है इनका स्टेट रिलीजन जो वहां का स्टेट रीजन है वह इस्लाम है या मुस्लिम है तो वहां पर वहां पर सेकुलर कंट्री नहीं हो तो वहां का जब रिलीजन ही नाम है तो बात बाकी की रिलीजन को वह प्राथमिकता नहीं दी जाती है बादल की धर्म को जो कि इसीलिए वहां उत्पीड़न होता है तो बात बस यही बस यही एक दिया गया है इस बिल के लिए तो इन तीनों कंट्री में यह बात कही गई है तो जो जो भी मानती है बहुत सारे मांगती वहां पर उत्पीड़न की वजह से वह भारत में रिफ्यूजी बनकर साथी बन कर आ जाते हैं आ गए हैं बहुत लोग आ चुके हैं तो उसी उसी जो पार्टीशन की वजह से ही समझो हुआ था उसका समाधान निकालने के लिए यह मतलब दिल ऐसा बताया भी क्या खिलाया गया है जिससे कि जो वहां पर उत्पीड़न होगा हिंदुओं पर वार्षिक जैन पारसी ईसाई पर उनको रोका जा सके और मुस्लिमों को इसलिए नहीं शामिल किया गया है क्योंकि पड़ोसी देश हैं यह दलील है कि वह उनका जो स्पीडली जने को मुस्लिम है इस्लाम में तो मुस्लिमों का उत्पीड़न नहीं हो रहा है तो वह तो उनका तो वह रिलीजन है तो वहां पर अपना रह सकते हैं लेकिन जो मैंने वहां के अल्पसंख्यक हैं सीखे हिंदू हैं जैन बौद्ध पारसी है वहां पर नहीं रह सकते उनका उत्पीड़न होगा तो उन्हें यहां पर शरण देकर उन्हें नागरिकता मिल जाएगी ड कट ऑफ डेट 31 दिसंबर 2014 रखी गई है तो यह मतलब एक कारण है हालांकि इसमें यह मतलब कारण दिया गया तो यह एक हद तक उचित भी लगता है कि यह पार्टीशन वजह से बहुत लोग पर वहां अत्याचार हुए वह सेकुलर कंट्री ना होकर अपने अपना एक अलग रिलीजन उन्होंने बना लिया अपने अपने दो साधिका अपने देश का तो एक ही कारण है और विरोध भी हो रहा है इसका काफी एक कई भागों में हो सकता है इसका जैसे कि कांग्रेस विरोध कर रही है या अदर पार्टियां तो उनका अपना अपना दलील है वह कह रही है तो उसमें बीजेपी बीजेपी का विरोध हो रहा है कि कि आपने इसमें पाकिस्तान अफगानिस्तान में बांग्लादेश को मिलाया तो फिर श्रीलंका को क्यों नहीं मिला है और जो चाइना की मुसलमान है जो सॉरी चाइना की जो जो अलार्म सेट हैं मुसलमान हैं और जो श्रीलंका के तमिल है या मेहमान में जो अल्प संख्या के उनको क्यों नहीं मिला है नेपाल में भी कुछ मधेसी वगैरह तो उनको क्यों नहीं बिल में शामिल किया तो यह इस बात पर विरोध हुआ संसद ने हालांकि हीरोज लफ्ज़ लोकसभा और राज्यसभा में पास हो चुका है और यह बिल का रूप ले चुका है बस राष्ट्रपति के सहायक होगा तो यहां पर तो उन्होंने दलील दिया बीजेपी की यह जो है बिल पार्टीशन की समस्या का समाधान है इसीलिए पाकिस्तान और बांग्लादेश अफगानिस्तान को शामिल किया अदर कंट्री को शामिल नहीं किया तो वैसे भी पास तो हो ही रहेगा राजसभा में भी तो यह बिल के रूप में संशोधन हो चुका है और भी कई और चीजों का विरोध भी हो रहा था कि भाई यह संविधान के आर्टिकल होती हैं उसमें उसका भी उल्लंघन है लेकिन इसमें यह भी तर्क दिया गया है जो क्लासिफिकेशन हुआ है वह सही क्लासिफिकेशन हुआ है आर्टिकल फॉर दिन के अंतर्गत जो वर्गीकरण होना चाहिए इसका हेमराज के शूटिंग में रायपुर क्वालिटी में कि अगर सही है तो यह बिल सही माना जाता है कि ठंडा मंडल के संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ ना जाए तो क्लासिफिकेशन का एक रीजनेबल आधार होना चाहिए एक तार्किक आधार होना चाहिए जो की दलील दी जा रही है कि तार्किक आधार यही है कि वहां पर उत्पीड़न हुआ है उन धार्मिक उन हिंदुओं सिखों का वार्षिक आईसाई का इसीलिए यह तार्किक आधार किया था इसमें शामिल नहीं है यही सबसे बड़े विरोध की वजह है

dekhiye yah citizen bill hai isme Amendment kiya ja raha hai aur yah bill book 1955 act ka jo sajjan bill hai nagarik bill hai usi mein hi sanshodhan Amendment kiya ja raha hai toh isme jo sanshodhan hai usme toh usme yah kaha gaya hai ki jo hamare padosi desh hai jisme pakistan bangladesh afghanistan ke Ulcer aaj sansad jo mainartij hai hamari neighbouring country mein wahan ke manavta hai toh unko wahan par parsikyushan rilijiyas prashikshan yani dharmik utpidan hota hai toh uski wajah se vaah hamare yahan wahan se bhagkar yahan par sharan lete hai rifyuji ki taur par yahan par aate hai ya abhay the jaate hai toh unke utpidan se nipatane ki aur is bill ko matlab laya gaya jisse ki unko nagarikta di ja sake aur uski cut of date jo hai 2014 fix ki gayi hai 31 december 2014 date tak jo bhi aa gaye hai vaah 2019 mein nagarikta prapt kar lenge bharat ki bina kisi document ya ko mange hue toh isme isme dalil yah di ja rahi hai ki yah partition ki samasya ko samadhan karega yah bill partition any ki jo 1947 mein pakistan aur india ke beech partition hua hai usme usmein jo bahut saare jo jo bahut saare jo yahan wahan ke pakistan ke hindu va sikh jain Baudh the wahi par reh gaye the aur vaah unhone apna pakistan mein wahan par the toh unki sankhya aaj ghatakar bahut kam ho gayi unke upar bahut zyada rilijiyas parsikyushan yani utpidan hota hai atyachar hota hai jiski wajah se wahan par ya toh vaah converge unka conversion ho gaya dharmanataran ho gaya ya wahan par unke upar udyam darje ke nagarik bankar rehte hai aur aur isi tarah bangladesh bhi jab 1971 mein azad ho gaya toh wahan bhi yahi sthiti hai yah kaha ja raha hai toh isme dusri dalil bhi di ja rahi hai ki bhai jo pakistan hai bangladesh hai ya pakistan hai inka state religion jo wahan ka state reason hai vaah islam hai ya muslim hai toh wahan par wahan par secular country nahi ho toh wahan ka jab religion hi naam hai toh baat baki ki religion ko vaah prathamikta nahi di jaati hai badal ki dharm ko jo ki 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roop le chuka hai bus rashtrapati ke sahayak hoga toh yahan par toh unhone dalil diya bjp ki yah jo hai bill partition ki samasya ka samadhan hai isliye pakistan aur bangladesh afghanistan ko shaamil kiya other country ko shaamil nahi kiya toh waise bhi paas toh ho hi rahega rajyasabha mein bhi toh yah bill ke roop mein sanshodhan ho chuka hai aur bhi kai aur chijon ka virodh bhi ho raha tha ki bhai yah samvidhan ke article hoti hai usme uska bhi ullanghan hai lekin isme yah bhi tark diya gaya hai jo Classification hua hai vaah sahi Classification hua hai article for din ke antargat jo vargikaran hona chahiye iska hemraj ke shooting mein raipur quality mein ki agar sahi hai toh yah bill sahi mana jata hai ki thanda mandal ke samvidhan ke basic structure ke khilaf na jaaye toh Classification ka ek reasonable aadhaar hona chahiye ek tarkik aadhaar hona chahiye jo ki dalil di ja rahi hai ki tarkik aadhaar yahi hai ki wahan par utpidan hua hai un dharmik un hinduon Sikhon ka vaarshik aisai ka isliye yah tarkik aadhaar kiya tha isme shaamil nahi hai yahi sabse bade virodh ki wajah hai

देखिए यह सिटीजन बिल है इसमें अमेंडमेंट किया जा रहा है और यह बिल बुक 1955 एक्ट का जो सज्जन

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Minhaj Ahmed

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भैया सिर्फ इलेक्शन का चुनाव प्रचार और कुछ धर्म के लोग सब राजनीति से प्रेरित लोग उनके राजनीतिक फायदा चाहिए उनको कितना है सिर्फ इसलिए यह मुस्लिम सिख ईसाई और मुसलमान नहीं होगा

bhaiya sirf election ka chunav prachar aur kuch dharm ke log sab raajneeti se prerit log unke raajnitik fayda chahiye unko kitna hai sirf isliye yah muslim sikh isai aur musalman nahi hoga

भैया सिर्फ इलेक्शन का चुनाव प्रचार और कुछ धर्म के लोग सब राजनीति से प्रेरित लोग उनके राजनी

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Sunil Kumar

Online Business ,Newtork Marketing & You Tuber

0:44
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सबसे पहली बात है कि यह नागरिकता संशोधन बिल की आखिरी जरूरत क्या थी आज इंडिया में क्या इसके कारण इंडिया में बहुत ज्यादा प्रॉब्लम हो रही थी क्या यह लोगों की मांग थी ऐसा कुछ भी नहीं है जहां तक मुझे लगता है कि जब से राम मंदिर अयोध्या का फैसला आया है उसके बाद से बीजेपी के पास कोई ऐसा मुद्दा बचा नहीं था जिससे लोगों का ध्यान रखा जा सके और यह बिल जो है कि सिर्फ और सिर्फ ध्यान भटकाने का है ताकि फिर से देश में हिंदू-मुस्लिम मंदिर-मस्जिद अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक अगड़े पिछड़े की राजनीति शुरू हो जाए और फिर से अपना रोटी सेक सके और कुछ भी नहीं है

sabse pehli baat hai ki yah nagarikta sanshodhan bill ki aakhiri zarurat kya thi aaj india mein kya iske karan india mein bahut zyada problem ho rahi thi kya yah logo ki maang thi aisa kuch bhi nahi hai jaha tak mujhe lagta hai ki jab se ram mandir ayodhya ka faisla aaya hai uske baad se bjp ke paas koi aisa mudda bacha nahi tha jisse logo ka dhyan rakha ja sake aur yah bill jo hai ki sirf aur sirf dhyan bhatkane ka hai taki phir se desh mein hindu muslim mandir masjid alpsankhyak aur bahusankhyak agade pichade ki raajneeti shuru ho jaaye aur phir se apna roti sake sake aur kuch bhi nahi hai

सबसे पहली बात है कि यह नागरिकता संशोधन बिल की आखिरी जरूरत क्या थी आज इंडिया में क्या इसके

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