मंज़िल तो मिल ही जायेगी भटक कर ही सही, गुमराह तो वह है जो घर से निकला ही नहीं करते हैं, क्या यह ठीक बात है?...


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डाॅ. देवेन्द्र जोशी उज्जैन म प्र

पत्रकार, साहित्यकार शिक्षाविद

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बेशक जो एक बार अपना लक्ष्य तय करके कमर कस कर घर से निकल गया वह अपनी मंजिल को प्राप्त करें और उनकी है जो सोचते रह गए विचार करते रह गए हिम्मत नहीं कर पाए और अपने धरती बने रहे लोगों को जिंदगी में हमेशा भटकाव का सामना करना पड़ेगा परेशानी उन्हीं की है तो केवल भक्तों का उनको ही नहीं होता है जो बाहर निकलकर भटक जाते हैं जो पथ पर निकल पड़े हैं तो पूछते पूछते भी अपनी मंज़िल को पाए जाते हैं लेकिन जो निकल ही नहीं पाते हैं जो केवल सोचते ही रह जाते हैं जो कदम नहीं उठा पाते हैं उनके मन मस्तिष्क में होने वाला है उससे ज्यादा बढ़ा घटा होता है इसलिए कोशिश यह होना चाहिए कि हर मनुष्य अपना लक्ष्य तय करें और उस लक्ष्य को पाने के लिए जैसे भी हो वह निकल लक्ष्य को पाने के लिए जो लोग निकल पड़ते हैं वह सद्गुरु को तलाशते तलाशते एक दिन अपने मार्ग तक पहुंच जाते हैं इसलिए उठिए जागीय कदम उठाइए स्वामी विवेकानंद ने भी यही कहा है उठो जागो और तब तक चुप मत बैठो जब तक तुम अपनी मंजिल को प्राप्त करना था इसलिए कहने वाले ने ठीक कहा है कि मंजिल तो मिल ही जाएगी भटकते ही सही लेकिन गोबराहा वह होते हैं जो घर से निकले ही नहीं हमें इस शेर को झूठा साबित करना है और हमें मंजिल पाने वालों की होड़ में मंजिल के निकल पढ़ने वालों की होड़ में शामिल होना है हमें घर पर बैठकर गुमराह होने वालों में शामिल नहीं

beshak jo ek baar apna lakshya tay karke kamar cas kar ghar se nikal gaya vaah apni manjil ko prapt kare aur unki hai jo sochte reh gaye vichar karte reh gaye himmat nahi kar paye aur apne dharti bane rahe logo ko zindagi me hamesha bhatkaav ka samana karna padega pareshani unhi ki hai toh keval bhakton ka unko hi nahi hota hai jo bahar nikalkar bhatak jaate hain jo path par nikal pade hain toh poochhte poochhte bhi apni manzil ko paye jaate hain lekin jo nikal hi nahi paate hain jo keval sochte hi reh jaate hain jo kadam nahi utha paate hain unke man mastishk me hone vala hai usse zyada badha ghata hota hai isliye koshish yah hona chahiye ki har manushya apna lakshya tay kare aur us lakshya ko paane ke liye jaise bhi ho vaah nikal lakshya ko paane ke liye jo log nikal padate hain vaah sadguru ko talashate talashate ek din apne marg tak pohch jaate hain isliye uthiye jagiya kadam uthaiye swami vivekananda ne bhi yahi kaha hai utho jaago aur tab tak chup mat baitho jab tak tum apni manjil ko prapt karna tha isliye kehne waale ne theek kaha hai ki manjil toh mil hi jayegi bhatakte hi sahi lekin gobraha vaah hote hain jo ghar se nikle hi nahi hamein is sher ko jhutha saabit karna hai aur hamein manjil paane walon ki hod me manjil ke nikal padhne walon ki hod me shaamil hona hai hamein ghar par baithkar gumrah hone walon me shaamil nahi

बेशक जो एक बार अपना लक्ष्य तय करके कमर कस कर घर से निकल गया वह अपनी मंजिल को प्राप्त करें

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