इंसान कब खुश रह सकता है?...


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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राम जी की आपका प्रस्थान कब खुश रह सकता है तो बताओ इंसान जो है इंसान ऐसा व्यक्ति है उसे जितना मिल जाए और पाने की इच्छा अगर उसकी कम हो जाए और संतुष्टि का जीवन जीने लगे संतुष्टि उसको होगी तो इंसान खत्म नहीं होगी और इसे खत्म नहीं होगी तो वह कभी खुश नहीं रह सकते इसलिए संतोष धन अगर उसके पास होगा तो इंसान खुश रह सकता है और अपने कार्यों में लगे रहें सफलता असफलता दोनों एक दूसरे के पहलू है कभी खुशी भी आती है कभी गम भी आता यह सेना खाना और इंसान जो है वह स्वस्थ रहें आपका दिन शुभ हो

ram ji ki aapka prasthan kab khush reh sakta hai toh batao insaan jo hai insaan aisa vyakti hai use jitna mil jaaye aur paane ki iccha agar uski kam ho jaaye aur santushti ka jeevan jeene lage santushti usko hogi toh insaan khatam nahi hogi aur ise khatam nahi hogi toh vaah kabhi khush nahi reh sakte isliye santosh dhan agar uske paas hoga toh insaan khush reh sakta hai aur apne karyo me lage rahein safalta asafaltaa dono ek dusre ke pahaloo hai kabhi khushi bhi aati hai kabhi gum bhi aata yah sena khana aur insaan jo hai vaah swasth rahein aapka din shubha ho

राम जी की आपका प्रस्थान कब खुश रह सकता है तो बताओ इंसान जो है इंसान ऐसा व्यक्ति है उसे जित

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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आपका प्रश्न है इंसान कब खुश रह सकता इंसान इंसान में जब कुछ अच्छा काम किया हो तब वह खुश रहता है कुछ पॉजिटिव काम किया हो सकारात्मक वाला काम किया हो तब खुश रहता है जी हां उसने किसी की भलाई की हो कभी बुरा ना किया हो तब वह खुश रह सकता है इंसान कुछ किसी के लिए अच्छा सोचता है खुद के लिए दूसरों के लिए सबके लिए अच्छा सोचता है तू खुश रहे उसको सुकून मिलता है और वह रियल वाली स्माइल होती है आपका धन्यवाद

aapka prashna hai insaan kab khush reh sakta insaan insaan mein jab kuch accha kaam kiya ho tab vaah khush rehta hai kuch positive kaam kiya ho sakaratmak vala kaam kiya ho tab khush rehta hai ji haan usne kisi ki bhalai ki ho kabhi bura na kiya ho tab vaah khush reh sakta hai insaan kuch kisi ke liye accha sochta hai khud ke liye dusro ke liye sabke liye accha sochta hai tu khush rahe usko sukoon milta hai aur vaah real wali smile hoti hai aapka dhanyavad

आपका प्रश्न है इंसान कब खुश रह सकता इंसान इंसान में जब कुछ अच्छा काम किया हो तब वह खुश रहत

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Aanchal

Beautician

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नमस्कार सर वाले इंसान कम खुश रह सकता है इंसान कभी खुश रह सकते हैं जब कभी झूठ ना बोले और कभी किसी की बुराई ना करें और कभी किसी से नफरत ना करें और हमेशा सही सोच अपने अंदर रखें धन्यवाद

namaskar sir waale insaan kam khush reh sakta hai insaan kabhi khush reh sakte hain jab kabhi jhuth na bole aur kabhi kisi ki burayi na kare aur kabhi kisi se nafrat na kare aur hamesha sahi soch apne andar rakhen dhanyavad

नमस्कार सर वाले इंसान कम खुश रह सकता है इंसान कभी खुश रह सकते हैं जब कभी झूठ ना बोले और कभ

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Dr Asha B Jain

Dip in Naturopathy, Yoga therapist Pranic healer, Counselor

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इंसान कब खुश रह सकता है इंसान हर पल हर क्षण खुश रह सकता है अगर वह चाहे तो क्योंकि एक एक क्षण जो भी हमें जिंदगी मिली है कि हम इंजॉय कर सकते हैं और इंजॉय करना भी चाहिए क्योंकि यह जिंदगी हमें बहुत अच्छे कर्म करें हमने तब हमें मिली है और हमें बुद्धि भी मिली हिसाब से तो मैं हर पल को इंजॉय करना चाहिए हर चीज में हमें खुशी नजर आने चाहिए यह हमारा नेचर डायलॉग कर लेना चाहिए हमें क्योंकि कई लोग खुशियां पैसों में ढूंढते हैं तो चीजों में ढूंढते हैं जैसे हमारे घर की जो वस्तुएं हैं उन चीजों में मटेरियल चीजों में ढूंढते हैं जबकि उसमें ख़ुशी नहीं है हमारे जो नेचर है उसमें खुशी लाइए इन इंटरनल खुशी लाइए अंदर से खुशी लाएंगे तो आपको छोटी से छोटी बात में भी खुशी नजर आएगी तो हर तरीके से संतुष्ट होने पर ही वह खुश रह सकता है कि जिस भी कंडीशन में मैं हूं मैं अच्छा हूं और मैं खुश हूं तो संतुष्टि खुशी का सबसे बड़ा रीजन बनती है लाइफ में धन्यवाद

insaan kab khush reh sakta hai insaan har pal har kshan khush reh sakta hai agar vaah chahen toh kyonki ek ek kshan jo bhi hamein zindagi mili hai ki hum enjoy kar sakte hain aur enjoy karna bhi chahiye kyonki yah zindagi hamein bahut acche karm kare humne tab hamein mili hai aur hamein buddhi bhi mili hisab se toh main har pal ko enjoy karna chahiye har cheez mein hamein khushi nazar aane chahiye yah hamara nature dialogue kar lena chahiye hamein kyonki kai log khushiya paison mein dhoondhate hain toh chijon mein dhoondhate hain jaise hamare ghar ki jo vastuyen hain un chijon mein material chijon mein dhoondhate hain jabki usme khushi nahi hai hamare jo nature hai usme khushi laiye in internal khushi laiye andar se khushi layenge toh aapko choti se choti baat mein bhi khushi nazar aayegi toh har tarike se santusht hone par hi vaah khush reh sakta hai ki jis bhi condition mein main hoon main accha hoon aur main khush hoon toh santushti khushi ka sabse bada reason banti hai life mein dhanyavad

इंसान कब खुश रह सकता है इंसान हर पल हर क्षण खुश रह सकता है अगर वह चाहे तो क्योंकि एक एक क्

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इंसान तभी खुशी रह सकता वो इंसान नहीं अपितु धरातल पर जितने भी जीव पाए जाते हैं उन सभी के लिए अगर हम अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर दें तो हम प्रसन्न रह सकते हैं अगर उदाहरण के तौर पर देखना चाहते तो देख ले डेढ़ लाख की सैलरी पाने वाला व्यक्ति भी उतना खुशी नहीं होता है और जो ₹1000 ढाई से रुपए कमाता है वह प्रसन्न रहता है इसका यही कारण है कि उसकी आवश्यकता है अनंत बढ़ती जाती है और जो गरीब पर तो होते हैं अपनी आवश्यकताओं को नीचे निम्न स्तर पर रखकर के अथक होती रहती हैं इसके लिए आवश्यक है कि हम अपनी आवश्यकताओं को अगर सीमित कर दी तो वही व्यक्ति पूर्णता खुशी होता है

insaan tabhi khushi reh sakta vo insaan nahi apitu dharatal par jitne bhi jeev paye jaate hain un sabhi ke liye agar hum apni avashayaktaon ko simit kar de toh hum prasann reh sakte hain agar udaharan ke taur par dekhna chahte toh dekh le dedh lakh ki salary paane vala vyakti bhi utana khushi nahi hota hai aur jo Rs dhai se rupaye kamata hai vaah prasann rehta hai iska yahi karan hai ki uski avashyakta hai anant badhti jaati hai aur jo garib par toh hote hain apni avashayaktaon ko niche nimn sthar par rakhakar ke athak hoti rehti hain iske liye aavashyak hai ki hum apni avashayaktaon ko agar simit kar di toh wahi vyakti purnata khushi hota hai

इंसान तभी खुशी रह सकता वो इंसान नहीं अपितु धरातल पर जितने भी जीव पाए जाते हैं उन सभी के लि

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शुभ संध्या सभी को मेरी तरफ से जी आपका प्रश्न सन इंसान तब खुश रह सकता है यह आपने बहुत अच्छा पोस्ट किया है और यह सवाल तो सभी के दिमाग में होता है कि इंसान कब खुश रह सकता है और मेरे ना अपने दिल का गाना जब इंसान तभी कुछ कर सकता है उसे आने वाली टेंशन का कोई परवाह नहीं रहेगा जब वह जिस टाइम मेरे को जी रहा है उसको बहुत अच्छी तरह से जिएगा खुलकर जाइएगा मस्ती टाइम को मैसेज टाइम की तरफ जाने वाली ट्रेन के बारे में सोच सोच के हम लोग टेंशन में रहेंगे तो वह कभी खुश नहीं रह सकता इसलिए जिस टाइम में हम लोग जी रहे हैं जिस टाइम में हम लोग जी रहे बस अभी के बारे में सोचें तभी हम खुश रह सकते हैं इसलिए इंसान दिल किसने बनाई बहुत खुश रहेगा

shubha sandhya sabhi ko meri taraf se ji aapka prashna san insaan tab khush reh sakta hai yah aapne bahut accha post kiya hai aur yah sawaal toh sabhi ke dimag mein hota hai ki insaan kab khush reh sakta hai aur mere na apne dil ka gaana jab insaan tabhi kuch kar sakta hai use aane wali tension ka koi parvaah nahi rahega jab vaah jis time mere ko ji raha hai usko bahut achi tarah se dijiyega khulkar jaiega masti time ko massage time ki taraf jaane wali train ke bare mein soch soch ke hum log tension mein rahenge toh vaah kabhi khush nahi reh sakta isliye jis time mein hum log ji rahe hain jis time mein hum log ji rahe bus abhi ke bare mein sochen tabhi hum khush reh sakte hain isliye insaan dil kisne banai bahut khush rahega

शुभ संध्या सभी को मेरी तरफ से जी आपका प्रश्न सन इंसान तब खुश रह सकता है यह आपने बहुत अच्छा

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Tapendra

Career Counsellor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इंसान तभी खुश रह सकता है जब वह अपनी वर्तमान परिस्थितियों को स्वीकार कर ले जब तक आप अपनी वर्तमान परिस्थितियां आप जहां भी है जैसे भी हैं आप में कोई कमी है आप में कोई बुराई है आप किसी चीज के योग्य नहीं है कि इन सब चीजों के होने के बावजूद भी आप जो भी आपके पास है उसे खुले दिल से स्वीकार करते हैं और अपने आप को स्वीकार करते हैं दुनिया आपको स्वीकार करें ना करें और आप खुद जवाब अपने आप को स्वीकार कर लेते हैं तब आप खुश रहने लगते हैं तो सबसे पहले आप अपने आप को स्वीकार कीजिए आप जैसे भी हैं आप में कोई कमी है उसको स्वीकार कीजिए आप किसी चीज में बुरे हैं उस चीज को शिकार कीजिए खुद में अच्छाइयां देखना शुरू कीजिए जरूरी नहीं कि आप में सारी चीजें बुराई है आपको कुछ अच्छाइयां भी होगी अच्छाइयां देखना क्योंकि आप अपने आप खुश रहने लगेंगे

insaan tabhi khush reh sakta hai jab vaah apni vartaman paristhitiyon ko sweekar kar le jab tak aap apni vartaman paristhiyaann aap jaha bhi hai jaise bhi hain aap mein koi kami hai aap mein koi burayi hai aap kisi cheez ke yogya nahi hai ki in sab chijon ke hone ke bawajud bhi aap jo bhi aapke paas hai use khule dil se sweekar karte hain aur apne aap ko sweekar karte hain duniya aapko sweekar kare na kare aur aap khud jawab apne aap ko sweekar kar lete hain tab aap khush rehne lagte hain toh sabse pehle aap apne aap ko sweekar kijiye aap jaise bhi hain aap mein koi kami hai usko sweekar kijiye aap kisi cheez mein bure hain us cheez ko shikaar kijiye khud mein achaiya dekhna shuru kijiye zaroori nahi ki aap mein saree cheezen burayi hai aapko kuch achaiya bhi hogi achaiya dekhna kyonki aap apne aap khush rehne lagenge

इंसान तभी खुश रह सकता है जब वह अपनी वर्तमान परिस्थितियों को स्वीकार कर ले जब तक आप अपनी वर

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vedprakash singh

Psychologist

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आपका सवाल इंसान कब खुश रह सकता तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि इंसान की एक नाखुश होने का सबसे बड़ी वजह है कि उनकी जो सोच है यह है उसकी सोच पॉजिटिव हो जाएगी हम खुश है ना खुश नहीं है तो ना खुश मैं भी खुश ही हो सकता है दूसरा कारण यह है कि हम कोई काम करते इसलिए है ताकि उनको सफलता मिली यदि उसे इन कामों में सफलता हो जाए तो खुश होता देखते होंगे कोई आदमी बीच में अच्छा कर जाता है उससे तुरंत चिल्ला उठता है कि और एक वह इस तरह के बाद तो खुश हो जाते इससे ज्यादा खुशी ना मिली ऐसा नहीं कर पाता वह दुखी हो जाता है कभी-कभी कोई 10 दिन 20 दिन 1 महीने के बाद भी खुश होता है किसी को जॉब होती तो खुशी होता है यही वजह है लेकिन फिर भी इंसान सुख और दुख खुद से होता है क्योंकि दुनिया में ना तो कोई खुशी को सुखी कर सकता ना दुखी कर सकता है तीसरी बात यह है सूखने के सुखी होने के की इच्छा और कामना जितनी कम होगी हमारा उतनी हम सुखी हो सकते क्योंकि इच्छा कामना भी इतनी भरे रखे हुए एरोप्लेन हो जाए एरोप्लेन हो जाए तो मेक राज्यमंत्री हो जाए मंत्री हो जाए तो यह हो जाए यह मुझे विदेश मंत्री हो जाए संयुक्त राष्ट्र के मंत्री हो जा मतलब बहुत सारी ऐसी सोच है जो बहुत बड़ी है अब हम हैं जिस लेवल के वैसे ही हमारी सोच भी होनी चाहिए जो नहीं कर सकते हो सोच बनाकर फायदा है क्या इसलिए इंसान को एक छोटी सी सोच होनी चाहिए जो कि उसके लिए सीमित हो फिर आगे भी व्हाट्सएप टाइम सोचता तो नहीं भी आप देखते होंगे बाबा लोग क्या दूसरे लोग क्यों सोचें क्योंकि इसकी इच्छा कामना कम है जिसकी इच्छा कामना जितनी कम है वह इतना ज्यादा खुश रहते हैं इसीलिए मैं सोचना चाहिए कि जिंदगी में इच्छा कामनाओं का थोड़ा कम पिया कर के आगे बढ़ा जा सकता है जो चौथा तरीका है हमें लाल पीपल होता है लालची एक पाली लोग होते हैं इनके कारण लोग खुश नहीं होते क्योंकि आजकल प्रेम भी लोग नहीं करते लोग रहते हैं लोग भी नहीं करते हैं मतलब क्या किसी को यह देंगे तो यह मिलेगा मतलब एक बिजनेस तक की बात हो जाती है यह मैं नहीं बोलता बस नहीं होना चाहिए लेकिन फिर भी हर समय दीन अच्छी बात नहीं है पांचवा जो बात है वह इंसान के अंदर यह है कि गलतियां वह खुद करता है किसी और का नाम बोलते कोई गलती कर रहा हम देखते हैं बोलते उसी को उल्टा गलत था रात है हमें यह बोलना चाहिए कि यह जो कर रहा है इसकी गलती नहीं गलती मेरी है जो मैं देख रहा हूं जिस दिन यह भाग हमारे दिमाग में आ गए उस दिन हम सुधार नहीं लेंगे क्योंकि धर्म का जन्म तभी होता जहां अपने आप को गलत बताते हैं यह मैं क्या देख रहा हूं फिर आकर ठीक नहीं मैं क्या सुनो मेरा काम नहीं मेरा समय ठीक नहीं है जो मैं सुनना तुम्हारी गलती कुछ नहीं है तुमने जो भी किया वो सही किया इस तरीके की बात को नहीं चाहिए तो इंसान खुश रह सकते हैं

aapka sawaal insaan kab khush reh sakta toh main aapko bataana chahta hoon ki insaan ki ek nakhush hone ka sabse baadi wajah hai ki unki jo soch hai yah hai uski soch positive ho jayegi hum khush hai na khush nahi hai toh na khush main bhi khush hi ho sakta hai doosra karan yah hai ki hum koi kaam karte isliye hai taki unko safalta mili yadi use in kaamo mein safalta ho jaaye toh khush hota dekhte honge koi aadmi beech mein accha kar jata hai usse turant chilla uthata hai ki aur ek vaah is tarah ke baad toh khush ho jaate isse zyada khushi na mili aisa nahi kar pata vaah dukhi ho jata hai kabhi kabhi koi 10 din 20 din 1 mahine ke baad bhi khush hota hai kisi ko job hoti toh khushi hota hai yahi wajah hai lekin phir bhi insaan sukh aur dukh khud se hota hai kyonki duniya mein na toh koi khushi ko sukhi kar sakta na dukhi kar sakta hai teesri baat yah hai sukhne ke sukhi hone ke ki iccha aur kamna jitni kam hogi hamara utani hum sukhi ho sakte kyonki iccha kamna bhi itni bhare rakhe hue aeroplane ho jaaye aeroplane ho jaaye toh make rajyamantri ho jaaye mantri ho jaaye toh yah ho jaaye yah mujhe videsh mantri ho jaaye sanyukt rashtra ke mantri ho ja matlab bahut saree aisi soch hai jo bahut baadi hai ab hum hai jis level ke waise hi hamari soch bhi honi chahiye jo nahi kar sakte ho soch banakar fayda hai kya isliye insaan ko ek choti si soch honi chahiye jo ki uske liye simit ho phir aage bhi whatsapp time sochta toh nahi bhi aap dekhte honge baba log kya dusre log kyon sochen kyonki iski iccha kamna kam hai jiski iccha kamna jitni kam hai vaah itna zyada khush rehte hai isliye main sochna chahiye ki zindagi mein iccha kamanaon ka thoda kam piya kar ke aage badha ja sakta hai jo chautha tarika hai hamein laal pipal hota hai lalchi ek paali log hote hai inke karan log khush nahi hote kyonki aajkal prem bhi log nahi karte log rehte hai log bhi nahi karte hai matlab kya kisi ko yah denge toh yah milega matlab ek business tak ki baat ho jaati hai yah main nahi bolta bus nahi hona chahiye lekin phir bhi har samay din achi baat nahi hai panchava jo baat hai vaah insaan ke andar yah hai ki galtiya vaah khud karta hai kisi aur ka naam bolte koi galti kar raha hum dekhte hai bolte usi ko ulta galat tha raat hai hamein yah bolna chahiye ki yah jo kar raha hai iski galti nahi galti meri hai jo main dekh raha hoon jis din yah bhag hamare dimag mein aa gaye us din hum sudhaar nahi lenge kyonki dharm ka janam tabhi hota jaha apne aap ko galat batatey hai yah main kya dekh raha hoon phir aakar theek nahi main kya suno mera kaam nahi mera samay theek nahi hai jo main sunana tumhari galti kuch nahi hai tumne jo bhi kiya vo sahi kiya is tarike ki baat ko nahi chahiye toh insaan khush reh sakte hain

आपका सवाल इंसान कब खुश रह सकता तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि इंसान की एक नाखुश होने का सब

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देखें इंसान तो इंसान को खुश रखने के लिए बहुत सारे से साधन है लेकिन इंसान तभी खुश रहता जब उनके पास हर तरह के चीज सामान जीव जंतु हर तरह की जो उनके चॉइस होते हैं उनके पास उनके दिल के करीबी आदमी हर तरह के आदमी इंसान या कोई भी उनके पास अपने आप को बहुत ही अच्छी फील करता है

dekhen insaan toh insaan ko khush rakhne ke liye bahut saare se sadhan hai lekin insaan tabhi khush rehta jab unke paas har tarah ke cheez saamaan jeev jantu har tarah ki jo unke choice hote hain unke paas unke dil ke karibi aadmi har tarah ke aadmi insaan ya koi bhi unke paas apne aap ko bahut hi achi feel karta hai

देखें इंसान तो इंसान को खुश रखने के लिए बहुत सारे से साधन है लेकिन इंसान तभी खुश रहता जब उ

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इंसान जब खुश रहता है उसके पास सब कुछ है उसकी मनोकामना पूरी होती है उसके पास पैसा है ऐसा सब कुछ और सब आराम से कुछ भी मारी मारी ना हो सके इंसान खुश रह सकता है

insaan jab khush rehta hai uske paas sab kuch hai uski manokamana puri hoti hai uske paas paisa hai aisa sab kuch aur sab aaram se kuch bhi mari mari na ho sake insaan khush reh sakta hai

इंसान जब खुश रहता है उसके पास सब कुछ है उसकी मनोकामना पूरी होती है उसके पास पैसा है ऐसा सब

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