क्या भारतीय राजनैतिक पार्टियों के नेतागण निजी स्वार्थो की राजनीती करते हैं सहमत है या असहमत है?...


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आपका प्रश्न है क्या भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेता गण निजी स्वार्थों की राजनीति करते हैं सहमत हैं या असहमत हैं अच्छा प्रश्न है देखिए आपको बताना चाहेंगे भारतीय राजनीति में तारे नेता ऐसे नहीं हैं जो व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए निजी स्वार्थ के लिए राजनीति करते हैं कुछ लोग जरूर है जो अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए राजनीति करते हैं आपकी बातों से मैं बिल्कुल सहमत हूं लेकिन पूर्ण रूप से नहीं क्योंकि सारे नेता ऐसे नहीं है आशा करते हैं आप इस जवान कारी से सहमत होंगे धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

aapka prashna hai kya bharatiya raajnitik partiyon ke neta gan niji swarthon ki raajneeti karte hain sahmat hain ya asahamat hain accha prashna hai dekhiye aapko batana chahenge bharatiya raajneeti me taare neta aise nahi hain jo vyaktigat swarth ke liye niji swarth ke liye raajneeti karte hain kuch log zaroor hai jo apne vyaktigat swarth ke liye raajneeti karte hain aapki baaton se main bilkul sahmat hoon lekin purn roop se nahi kyonki saare neta aise nahi hai asha karte hain aap is jawaan kaari se sahmat honge dhanyavad aapka din shubha ho

आपका प्रश्न है क्या भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेता गण निजी स्वार्थों की राजनीति करते है

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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हाईएस्ट में से पूर्ण तरह सहमत हूं भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की स्थिति निजी स्वार्थों से भरी हुई है व्यक्तिगत स्वार्थों की लड़ाई करते हैं व्यक्तिगत स्वार्थों में लिप्त लोग लालच गमन होटल वादी में सभी में उनके नाम पाएंगे अब हर राजनीतिक पार्टी के नेता डेविड इसको देख लीजिए अपने बेटे बेटियों को विरासत में देना चाहते हैं ऊंचे ऊंचे पदों पर को अपने बेटे बेटियों को लगाना चाहते हैं अनीता की कहानी यही है आप कुछ नेताओं को छोड़ दीजिए जो राष्ट्रीय स्तर के हैं वह बीजेपी की है जैसे अटल बिहारी वाजपेई जी के कोई संतान नहीं थी निगमों में भी किया यह देख लीजिए आप हम को देखिए नरेंद्र मोदी जी को देख लीजिए अमित शाह जी को देख लीजिए उनको देख लीजिए राजनाथ जी को देख लीजिए ऐसी तलामंडी तो देख लीजिए ऐसे राजनीतिज्ञ हैं जिन्होंने राजनीति का लाभ अपने बेटे बेटियों को नहीं पहुंचाना चाहते भारतीयता के भावों से भरे हुए हैं देश की कामना करते हैं देश के लिए संघर्ष करते हैं और देश के लिए उनके सारे प्रयास चल रहे हैं कि राष्ट्रीयता के भागों से भरे हुए हैं जबकि टोटल पार्टीज में आप देखेंगे कांग्रेस हारी किया है इन 70 सालों में केवल अपने घर बने हैं और कांग्रेस के नेताओं ने सरकार बनने के बाद देश के विकास में कोई सहायता नहीं की इसी प्रकार अन्य दसवीं पाएंगे आप

highest mein se purn tarah sahmat hoon bharatiya raajnitik partiyon ke netaon ki sthiti niji swarthon se bhari hui hai vyaktigat swarthon ki ladai karte hain vyaktigat swarthon mein lipt log lalach gaman hotel wadi mein sabhi mein unke naam payenge ab har raajnitik party ke neta devid isko dekh lijiye apne bete betiyon ko virasat mein dena chahte hain unche unche padon par ko apne bete betiyon ko lagana chahte hain anita ki kahani yahi hai aap kuch netaon ko chod dijiye jo rashtriya sthar ke hain vaah bjp ki hai jaise atal bihari vajpayee ji ke koi santan nahi thi nigamon mein bhi kiya yah dekh lijiye aap hum ko dekhiye narendra modi ji ko dekh lijiye amit shah ji ko dekh lijiye unko dekh lijiye rajnath ji ko dekh lijiye aisi talamandi toh dekh lijiye aise rajanitigya hain jinhone raajneeti ka labh apne bete betiyon ko nahi pahunchana chahte bharatiyta ke bhavon se bhare hue hain desh ki kamna karte hain desh ke liye sangharsh karte hain aur desh ke liye unke saare prayas chal rahe hain ki rastriyata ke bhaagon se bhare hue hain jabki total parties mein aap dekhenge congress haari kiya hai in 70 salon mein keval apne ghar bane hain aur congress ke netaon ne sarkar banne ke baad desh ke vikas mein koi sahayta nahi ki isi prakar anya dasavi payenge aap

हाईएस्ट में से पूर्ण तरह सहमत हूं भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की स्थिति निजी स्वार

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Vedachary Pathak Singrauli

सनातन सुरक्षा परिषद् संस्थापक

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क्या भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेता गण निजी स्वार्थों की राजनीति करते हैं क्या आप सहमत हैं या असहमत हां बिल्कुल आपकी बात से सहमत हैं कि भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेता गण बिल्कुल अपने स्वार्थ के लिए ही राजनीति में जाना चाहते हैं देश की का विकास उनका बाद में होता है पहला उनका स्वार्थ होता है धन्यवाद

kya bharatiya raajnitik partiyon ke neta gan niji swarthon ki raajneeti karte kya aap sahmat hain ya asahamat haan bilkul aapki baat se sahmat hain ki bharatiya raajnitik partiyon ke neta gan bilkul apne swarth ke liye hi raajneeti mein jana chahte hain desh ki ka vikas unka baad mein hota hai pehla unka swarth hota hai dhanyavad

क्या भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेता गण निजी स्वार्थों की राजनीति करते हैं क्या आप सहमत

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राजनैतिक पार्टियां पार्टियों के लिए तागण निजी स्वार्थों की राजनीति अक्सर किया करते हैं इस बात से मैं काफी कुछ सहमत हूं

rajnaitik partyian partiyon ke liye tagan niji swarthon ki raajneeti aksar kiya karte hain is baat se main kaafi kuch sahmat hoon

राजनैतिक पार्टियां पार्टियों के लिए तागण निजी स्वार्थों की राजनीति अक्सर किया करते हैं इस

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आप ने सवाल पूछा है कि क्या भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेता जो है वह निजी स्वार्थों की राजनीति करते हैं क्या आप सहमत हैं क्या आप सहमत हैं देखिए मैं आपकी इस बात से बिल्कुल सहमत हूं कि भारतीय राजनीतिक पार्टियों के जो राजनेता है वह निजी स्वार्थों की राजनीति करते हैं वह निजी हितों की राजनीति करते हैं क्योंकि कोई भी आज के दौर में भारतीय राजनीति में आता है तो उसका सबसे पहला जो लक्ष्य होता है वह अपनी निस तो कोई साथ ना होता है कि आज की दौर में हमारी देश में राष्ट्रीय की कैसेट भी बन चुकी है कुछ राजनेताओं के बीच में कि जहां उन्हें राजनीति पैसा कमाने का जरिया लगती है यह रिप्रेजेंटेशन का तरीका कम लगता है और उन्हें लगता है कि इतने गरीब अपनी जेब मजबूत कर सकते हैं और समय-समय पर नेता दबंग घोटालों और भ्रष्टाचार के जरिए तेजी भी करते आए हैं और इनकी कोई नैतिक सिद्धांतों से कोई मूल नहीं होते बल्कि जो मूल्यों वाले राजनेता है जो नैतिक सिद्धांत वाले राजनेता हैं वह धीरे-धीरे इस देश की राजनीति से सटे जा रहे हैं और अभी एसिड नेताओं से बढ़ता जा रहा है जिनकी कोई विचारधारा नहीं है कोई ऑडियो ही नहीं है बिल्कुल वह एक ऐसी भी प्रकार से लोगों की तरह हो चुके हैं जो मौका परस्त नेता है और एग्जांपल उदाहरण के लिए आप भी कीजिए एक टाइम पर जो नेता देश की आज पता था कि पार्टी बीजेपी को बार-बार केदारिया दिया करते थे नारायण आने जैसे नेताओं के सामाजिक नेताओं या फिर मुकुल रोहतगी जैसे नेताओं और भी बहुत सारी पॉलीटिकल पार्टी देता है वह बीजेपी में जा कर बैठे हुए हैं और बीजेपी पर क्या तिवारी भोजपुरी चीनी इतनी अच्छी से मनाते लालकृष्ण आडवाणी जी के साथ मिलकर इन दोनों नेताओं की बात को ताक पर रखते हुए उन्होंने बीजेपी ने इन सभी नेताओं को अपना लिया है और अब सोच ऐसे नेता आज भारतीय राजनीति में भरे पड़े जिनके ऊपर बड़े से बड़े आरोप लगे पड़े हैं लेकिन इनका विरोध नहीं करता है किसी भी पॉलिटिकल पार्टी में भी आराम से जा कर बैठ जाते हैं और कोई यकीन नहीं करता आप पहले की राजनीति में जो हमारे देश के नेता थे वह फिर भी एक टिटनेस के साथ चला करते थे उनकी भी कानून अधिनियम हुआ करते थे उनकी पॉलीटिकल पार्टीज के नियम आज के दौर में कोई नियम नहीं है कोई कानून नहीं है कोई सोचने की है बिल्कुल जिस पार्टी को फायदा हो रहा है या जिस व्यक्ति को किसी राजनीतिक पार्टी से फायदा हो रहा है दिल बदल कर वह नेता को ही चला जाता है और हमारी जनता जो है आज भी इस बात को समझ नहीं पा रही है तो बिल्कुल निजी हितों और निजी स्वार्थ को साधने के लिए ही हमारे देश की राजनीति आज रह गई है आदेश के लिए राष्ट्र के लिए इनकी कोई विचारधारा नहीं है कि कोई मूल्य नहीं है राष्ट्रवाद और राष्ट्र हित की बात आती है तो फिर यह लोग पता नहीं कहां खो जाते हैं कहां गायब हो जाते हैं और कोई इनकी सोच नहीं है धन्यवाद

aap ne sawaal poocha hai ki kya bharatiya raajnitik partiyon ke neta jo hai vaah niji swarthon ki raajneeti karte kya aap sahmat kya aap sahmat hain dekhiye main aapki is baat se bilkul sahmat hoon ki bharatiya raajnitik partiyon ke jo raajneta hai vaah niji swarthon ki raajneeti karte hain vaah niji hiton ki raajneeti karte hain kyonki koi bhi aaj ke daur mein bharatiya raajneeti mein aata hai toh uska sabse pehla jo lakshya hota hai vaah apni nis toh koi saath na hota hai ki aaj ki daur mein hamari desh mein rashtriya ki kaiset bhi ban chuki hai kuch rajnetao ke beech mein ki jaha unhe raajneeti paisa kamane ka zariya lagti hai yah riprejenteshan ka tarika kam lagta hai aur unhe lagta hai ki itne garib apni jeb majboot kar sakte hain aur samay samay par neta dabang ghotalo aur bhrashtachar ke jariye teji bhi karte aaye hain aur inki koi naitik siddhanto se koi mul nahi hote balki jo mulyon waale raajneta hai jo naitik siddhant waale raajneta hain vaah dhire dhire is desh ki raajneeti se sate ja rahe hain aur abhi acid netaon se badhta ja raha hai jinki koi vichardhara nahi hai koi audio hi nahi hai bilkul vaah ek aisi bhi prakar se logo ki tarah ho chuke hain jo mauka parast neta hai aur example udaharan ke liye aap bhi kijiye ek time par jo neta desh ki aaj pata tha ki party bjp ko baar baar kedariya diya karte the narayan aane jaise netaon ke samajik netaon ya phir mukul rohtagi jaise netaon aur bhi bahut saree political party deta hai vaah bjp mein ja kar baithe hue hain aur bjp par kya tiwari bhojpuri chini itni achi se manate lalkrishna advani ji ke saath milkar in dono netaon ki baat ko tak par rakhte hue unhone bjp ne in sabhi netaon ko apna liya hai aur ab soch aise neta aaj bharatiya raajneeti mein bhare pade jinke upar bade se bade aarop lage pade hain lekin inka virodh nahi karta hai kisi bhi political party mein bhi aaram se ja kar baith jaate hain aur koi yakin nahi karta aap pehle ki raajneeti mein jo hamare desh ke neta the vaah phir bhi ek tetanus ke saath chala karte the unki bhi kanoon adhiniyam hua karte the unki political parties ke niyam aaj ke daur mein koi niyam nahi hai koi kanoon nahi hai koi sochne ki hai bilkul jis party ko fayda ho raha hai ya jis vyakti ko kisi raajnitik party se fayda ho raha hai dil badal kar vaah neta ko hi chala jata hai aur hamari janta jo hai aaj bhi is baat ko samajh nahi paa rahi hai toh bilkul niji hiton aur niji swarth ko sadhane ke liye hi hamare desh ki raajneeti aaj reh gayi hai aadesh ke liye rashtra ke liye inki koi vichardhara nahi hai ki koi mulya nahi hai rashtravad aur rashtra hit ki baat aati hai toh phir yah log pata nahi kahaan kho jaate hain kahaan gayab ho jaate hain aur koi inki soch nahi hai dhanyavad

आप ने सवाल पूछा है कि क्या भारतीय राजनीतिक पार्टियों के नेता जो है वह निजी स्वार्थों की रा

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