क्या आप हमें अपने बचपन के दिनों के बारे में कुछ बता सकते हैं?...


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बचपन की क्या बात करें बचपन को याद आई जाता है बचपन के दिन सबसे अच्छे होते थे जब ना कोई टेंशन होता था ना किसी की चिंता ना किसी की फिकर अपनी भी मस्त खेलो कूदो स्कूल जाओ पढ़ाई लिखाई करो यार दोस्तों के साथ मुझे करो काफी कुछ बचपन में मिलता था सभी का लाभ प्यार प्रेम दुलार ना कोई जवाबदारी ना कोई जिम्मेदारी बस खेलना और खाना पीना अच्छे कपड़े पहनना घूमना फिरना यही बचपन में आनंद होता था सोचा जा मर जाए वहां चले जाओ घूमो फिरो कविता का गया कभी मामा के यहां के बिना ना किया कभी धारदार नानी के यहां कहीं भी घूमो फिरो हर कोई पैसा देता हर कोई लाल गुलाल करता था वह बचपन के दिन तो अब लौट के आ नहीं सकते स्कूल में भी मस्ती के आलम होते हैं यार दोस्तों के को खेलते थे बहुत मजा आता था बचपन का पुनर्जन्म पुनः आगमन तो बुढ़ापे में ही देखने मिलता है बचपन और बुढ़ापा एक समान होता है अतः बचपन की याद बुढ़ापे में आदमी को जरूर आ जाती है

bachpan ki kya baat kare bachpan ko yaad I jata hai bachpan ke din sabse acche hote the jab na koi tension hota tha na kisi ki chinta na kisi ki fikar apni bhi mast khelo kudo school jao padhai likhai karo yaar doston ke saath mujhe karo kaafi kuch bachpan mein milta tha sabhi ka labh pyar prem dular na koi javabdari na koi jimmedari bus khelna aur khana peena acche kapde pahanna ghumana phirna yahi bachpan mein anand hota tha socha ja mar jaaye wahan chale jao ghumo firo kavita ka gaya kabhi mama ke yahan ke bina na kiya kabhi dhardar naani ke yahan kahin bhi ghumo firo har koi paisa deta har koi laal gulal karta tha vaah bachpan ke din toh ab lot ke aa nahi sakte school mein bhi masti ke aalam hote hain yaar doston ke ko khelte the bahut maza aata tha bachpan ka punarjanm punh aagaman toh budhape mein hi dekhne milta hai bachpan aur budhapa ek saman hota hai atah bachpan ki yaad budhape mein aadmi ko zaroor aa jaati hai

बचपन की क्या बात करें बचपन को याद आई जाता है बचपन के दिन सबसे अच्छे होते थे जब ना कोई टेंश

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Dr Ritesh Malik

Founder & CEO, Innov8 co-working space | Fortune India 40Under40 | Forbes Asia 30Under30 | Angel Investor

1:50
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मैं एक छोटा सा गांव में पंजाब में खाना करके और हमारे परिवार में कोई मेरे पूरे परिवार में 55 से 22 मैथिली में पैदा हुआ और पंजाबी में पैदा हुआ तो हमारे यहां पर बहुत ज्यादा तकलीफ से ग्रस्त जिसको बोलते हैं किंतु प्रिंटिंग की वजह से कॉमिक्स इंटरेस्ट अपने परिवार से मतलब और ज्यादा तकलीफ हो जाएगी तो मुरली की और उसकी वजह से ज्यादा अड़े हुए थे डिसीजन

main ek chota sa gaon mein punjab mein khana karke aur hamare parivar mein koi mere poore parivar mein 55 se 22 maithali mein paida hua aur punjabi mein paida hua toh hamare yahan par bahut zyada takleef se grast jisko bolte hain kintu printing ki wajah se comics interest apne parivar se matlab aur zyada takleef ho jayegi toh murli ki aur uski wajah se zyada ade hue the decision

मैं एक छोटा सा गांव में पंजाब में खाना करके और हमारे परिवार में कोई मेरे पूरे परिवार में 5

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656 Mangal Singh Thakur

Teacher/Operator

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मेरी मां बाप का सबसे बड़ा लड़का छोटी बहन कुमारी की हार्दिक ब्लू पिक्चरों के परिवार के साथ आर्थिक स्थिति के परिवर्तन उसकी बच्ची मारी मां फुल एचडी इलाहाबाद से कांटेक्ट किया हमारे परिवार परिवार परिवार को सुप्रभात रखने के लिए हमें हर तरह से पढ़ाई लिखाई खेलकूद के लिए समय निकालो हम बताते बताते हैं जो हमारी सारी बात अपने बचपन की फोटो हमारा बचपन में लड़ना झगड़ना जो हमारी हमारे परिवार में सब कुछ भी करते हैं मराठवाडा

meri maa baap ka sabse bada ladka choti behen kumari ki hardik blue pikcharon ke parivar ke saath aarthik sthiti ke parivartan uski bachi mari maa full hd allahabad se Contact kiya hamare parivar parivar parivar ko suprabhat rakhne ke liye hamein har tarah se padhai likhai khelkud ke liye samay nikalo hum batatey batatey hain jo hamari saree baat apne bachpan ki photo hamara bachpan mein ladana jhagdana jo hamari hamare parivar mein sab kuch bhi karte hain marathvada

मेरी मां बाप का सबसे बड़ा लड़का छोटी बहन कुमारी की हार्दिक ब्लू पिक्चरों के परिवार के साथ

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नमस्ते मेरा नाम है नीरज कुमार और मेरा जन्म इटावा में हुआ था आपने पूछा है बचपन के बारे में बताइए क्योंकि मेरा बचपन बहुत ही कठिनाइयों से गुजरा हुआ है जब मैं 8 साल का 9 साल का था तो मेरी मां गुजर चुकी थी उसके मां गुजरने के बाद एक्सपायर होने के बाद बहुत जीवन कस्टमर बीता मेरे फादर फोटोग्राफी करते थे और मैं तीन भाई एक सिस्टर और मौत कच्ची गिरस्ती में हम लोग पहले हुए हैं मैंने तो अपनी जिंदगी को छाता 12 साल की उम्र से बाहर निकालना शुरू कर दिया हमने बहुत कष्ट झेला प्राइवेट कुछ पढ़े-लिखे फिर उसके बाद में काम भी किया पढ़ते रहे काम करते रहे उसके बाद में जो भी मुझे काम मिला मैंने काम किया यहां तक कि अगर किसी ने कहा कि तुमको यह काम करना है तो हमने कभी मना नहीं संघर्ष की घड़ियां बहुत आती है ही और मुसीबत भी आती रही थोड़ा घर का भी सहारा देते रहे जो भी मुझे पैसा मिला और मैं बराबर अपने घर एक दो महीने में अति महीने में चक्कर मारता रहा मुझे ऑफिस मेरी सिंगिंग और एक्टिंग की थी क्योंकि वह करने के लिए मैं एक बार मम्मी भी गया और सफल भी हो गया लेकिन मुझे रहने के लिए जगह नहीं मिली और मैं बीमार हो गया मैंने 15 दिन तक खाना भी नहीं खाया और मेरे पास ऐसे समय आ गया कि मेरे पास मेरी जेब में पैसे नहीं रहे मैं 30 किलोमीटर रोज चलकर जाता था शाम को आता था एक चौकीदार एक बिल्डिंग बन रही थी उसमें मैं रात में चुपचाप जाकर रुकता था उसने में बहुत सपोर्ट किया उसके बाद मुझे तबीयत खराब हो गई मैं फिर बेटा अपने घर आ गया उसके बाद मैं दिल्ली चला गया कुछ साल दिल्ली में काम किया फिर मैंने स्कूल सर्टिफिकेट कोकिंग का आईएचएमसी कोर्स किया कोर्स करने के बाद मैंने फिर कुकिंग का काम सीखा धीरे-धीरे स्थिति को अपने बना डाला फिर मुझे एक बैग मिला फिर मैं इलाहाबाद में अनाथ बच्चे की सेवा करने लगा जो मेंटल बच्चों का हॉस्पिटल होता है मैं उनका सेवा करने लगा मैंने 3:30 सालों सेवा की उसके बाद में कुछ कारणों से कोई अफसर था उनसे चर्चा में में हुई थी ऑप्शन में उनकी खुन्नस निकालने के चक्कर में हम को निकाल दिया हस्तक में उसी से जूझ रहा हूं केस चल रहा है का फाइनल होता है और आज भी मैं संघर्ष ही कर रहा हूं क्योंकि संघर्ष ही जीवन है अगर आपको सुख मिल जाएगा तो कभी आपको महसूस नहीं होगा दुख क्या होता है दुखी सबसे अच्छा होता है सुख अशोक में यही है और फिर मेरी शादी भी उस समय महाकुंभ चल रहा था पर था 2019 फरवरी में हुई 14 फरवरी को तो बचपन जो है बहुत ही कठिनाइयों से गुजरा है मैंने हर काम किया यहां तक कि बर्तन भी मारना पड़ा और भी कभी-कभी झाड़ू भी लगाना पड़ा ऐसा नहीं कि कुछ बचपन में खेलने कूदने का दिन होते हैं पढ़ने के दिन होते हैं मैंने काम करते समय पड़ा मेरे आंखों में नींद भरी रहती थी चलता रहता था रोड पर कहीं बस निकल ले कभी कुछ निकलना मैंने लेकिन कभी हार नहीं माननी है और आज भी मैं कर ही रहा हूं जब तक मेरा जीवन है हार नहीं मानूंगा अब मैं इस समय 25 साल का हो चुका हूं लेकिन सोचता हूं क्या करूं जिंदगी है करना ही पड़ता है फादर कितनी कमाई नहीं है जो फादर कर सकें इतना हम पर बनाए उन्होंने कैसा घर बनाया अब लोगों की जिम्मेदारी है मेरी बस यही कहानी है आप लोगों को अच्छा लगे तो लाइक कीजिएगा

namaste mera naam hai Neeraj kumar aur mera janam itawa me hua tha aapne poocha hai bachpan ke bare me bataiye kyonki mera bachpan bahut hi kathinaiyon se gujara hua hai jab main 8 saal ka 9 saal ka tha toh meri maa gujar chuki thi uske maa guzarne ke baad expire hone ke baad bahut jeevan customer bita mere father photography karte the aur main teen bhai ek sister aur maut kachhi girasti me hum log pehle hue hain maine toh apni zindagi ko chhata 12 saal ki umar se bahar nikalna shuru kar diya humne bahut kasht jhela private kuch padhe likhe phir uske baad me kaam bhi kiya padhte rahe kaam karte rahe uske baad me jo bhi mujhe kaam mila maine kaam kiya yahan tak ki agar kisi ne kaha ki tumko yah kaam karna hai toh humne kabhi mana nahi sangharsh ki ghadiyan bahut aati hai hi aur musibat bhi aati rahi thoda ghar ka bhi sahara dete rahe jo bhi mujhe paisa mila aur main barabar apne ghar ek do mahine me ati mahine me chakkar maarta raha mujhe office meri singing aur acting ki thi kyonki vaah karne ke liye main ek baar mummy bhi gaya aur safal bhi ho gaya lekin mujhe rehne ke liye jagah nahi mili aur main bimar ho gaya maine 15 din tak khana bhi nahi khaya aur mere paas aise samay aa gaya ki mere paas meri jeb me paise nahi rahe main 30 kilometre roj chalkar jata tha shaam ko aata tha ek chaukidaar ek building ban rahi thi usme main raat me chupchap jaakar rukata tha usne me bahut support kiya uske baad mujhe tabiyat kharab ho gayi main phir beta apne ghar aa gaya uske baad main delhi chala gaya kuch saal delhi me kaam kiya phir maine school certificate cocking ka IHMC course kiya course karne ke baad maine phir coocking ka kaam seekha dhire dhire sthiti ko apne bana dala phir mujhe ek bag mila phir main allahabad me anath bacche ki seva karne laga jo mental baccho ka hospital hota hai main unka seva karne laga maine 3 30 salon seva ki uske baad me kuch karanon se koi officer tha unse charcha me me hui thi option me unki khunnas nikalne ke chakkar me hum ko nikaal diya hastak me usi se joojh raha hoon case chal raha hai ka final hota hai aur aaj bhi main sangharsh hi kar raha hoon kyonki sangharsh hi jeevan hai agar aapko sukh mil jaega toh kabhi aapko mehsus nahi hoga dukh kya hota hai dukhi sabse accha hota hai sukh ashok me yahi hai aur phir meri shaadi bhi us samay mahakumbh chal raha tha par tha 2019 february me hui 14 february ko toh bachpan jo hai bahut hi kathinaiyon se gujara hai maine har kaam kiya yahan tak ki bartan bhi marna pada aur bhi kabhi kabhi jhadu bhi lagana pada aisa nahi ki kuch bachpan me khelne koodne ka din hote hain padhne ke din hote hain maine kaam karte samay pada mere aakhon me neend bhari rehti thi chalta rehta tha road par kahin bus nikal le kabhi kuch nikalna maine lekin kabhi haar nahi maanani hai aur aaj bhi main kar hi raha hoon jab tak mera jeevan hai haar nahi manunga ab main is samay 25 saal ka ho chuka hoon lekin sochta hoon kya karu zindagi hai karna hi padta hai father kitni kamai nahi hai jo father kar sake itna hum par banaye unhone kaisa ghar banaya ab logo ki jimmedari hai meri bus yahi kahani hai aap logo ko accha lage toh like kijiega

नमस्ते मेरा नाम है नीरज कुमार और मेरा जन्म इटावा में हुआ था आपने पूछा है बचपन के बारे में

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