क्या आपको एक्सप्रेसो टॉक्स का पहला संस्करण याद है? वह अनुभव कैसा था? इसे आयोजित करते समय आपको किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?...


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Shivani Khetan

Founder of ExpressoTalks and renowned life coach

1:06

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तुझसे पहली मीटिंग बहुत बहुत मतलब मैं वही मतलब और मेरे दिल में बहुत धक धक थी कि पता नहीं और लोग आएंगे नहीं आएंगे क्योंकि मैं किसी को पर्सनल नहीं भेजी मैंने फेसबुक पेज क्रिएट कराओ उसके ऊपर मैंने इवेंट डाली और उसमें से मैंने बोला कि प्लीज मैंने ऐसा प्लेटफॉर्म क्रिएट करें प्लीज आपकी फीलिंग्स शेयर करिए तो मुझे बहुत अंदर से थोड़ा यूनो महसूस हो रहा था कि पता नहीं और लोग एक्सेप्ट करेंगे कहीं चीज दूसरों के सामने अपनी कहानी शेयर करना दूसरों के सामने अपनी अंदर की बात शेयर करना जो अपनी डीपी सीक्रेट जरूरी नहीं है कि हम सबके सामने बोलना चाहते हैं और वह शेयर करना बहुत बहुत बहुत कठिन है पर इवेंट हुई और जब मेरा पहला फिर भी हुआ है तू लोग सामने से आकर इतनी बढ़िया से शेयर करी है उस दिन मैं अपने आप को इतनी तेज थी कि सच्ची में मतलब इसका मतलब लोगों को जरूरत है उनको चाहते हैं कि ऐसी कोई प्लेटफार्म हुए जहां पर वहां के लोगों से कनेक्ट हुए

tujhse pehli meeting bahut bahut matlab main wahi matlab aur mere dil mein bahut dhak dhak thi ki pata nahi aur log aayenge nahi aayenge kyonki main kisi ko personal nahi bheji maine facebook page create karao uske upar maine event dali aur usmein se maine bola ki please maine aisa platform create karen please aapki feelings share kariye toh mujhe bahut andar se thoda uno mahsus ho raha tha ki pata nahi aur log except karenge kahin cheez dusron ke saamne apni kahani share karna dusron ke saamne apni andar ki baat share karna jo apni dipi secret zaroori nahi hai ki hum sabke saamne bolna chahte hain aur vaah share karna bahut bahut bahut kathin hai par event hui aur jab mera pehla phir bhi hua hai tu log saamne se aakar itni badhiya se share kari hai us din main apne aap ko itni tez thi ki sachi mein matlab iska matlab logon ko zaroorat hai unko chahte hain ki aisi koi platform hue jahan par wahan ke logon se connect hue

तुझसे पहली मीटिंग बहुत बहुत मतलब मैं वही मतलब और मेरे दिल में बहुत धक धक थी कि पता नहीं और

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

1:20
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अपने का क्या आपको एक्सपोर्ट्स का पहला संस्करण आगे वैन को कैसा कैसे एडिट करते हैं आपको किन समस्याओं का सामना करना पड़ा लेकिन प्रारंभिक रूप से किसी भी काम को करने के लिए समस्याओं से जूझना पड़ता है कि प्रथम चरण में दो विश्वास नहीं करते और अविश्वास की स्थिति में लोग संपर्क नहीं करते साथ साथ में उनको भारी मात्रा में जुटाना और उनकी प्रतिक्रियाओं को सुनना उसकी पहचान को देखते हुए हमने सामने सुनाना और समझ व्यवस्था करना हर तरह की आर्मी की सिम के साथ तालमेल करना उसके बावजूद सफलता के प्रति आश्वस्त होने आपने बहुत बड़ी गंभीर न्यू सैमसंग की जो कि आपको पक्ष की बात करें या किसी भी क्षेत्र में जहां प्रथम चरण में कोई कदम बढ़ा रहे हैं आप को एनएसजी में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता हमें भी करना पड़ा

apne ka kya aapko exports ka pehla sanskaran aage van ko kaisa kaise edit karte hain aapko kin samasyaon ka samana karna pada lekin prarambhik roop se kisi bhi kaam ko karne ke liye samasyaon se jujhna padta hai ki pratham charan mein do vishwas nahi karte aur avishvaas ki sthiti mein log sampark nahi karte saath saath mein unko bhari matra mein jutana aur unki pratikriyaon ko sunana uski pehchaan ko dekhte hue humne saamne sunana aur samajh vyavastha karna har tarah ki army ki sim ke saath talmel karna uske bawajud safalta ke prati aashvast hone aapne bahut badi gambhir new samsung ki jo ki aapko paksh ki baat karen ya kisi bhi kshetra mein jahan pratham charan mein koi kadam badha rahe hain aap ko nsg mein anek samasyaon ka samana karna padta hamein bhi karna pada

अपने का क्या आपको एक्सपोर्ट्स का पहला संस्करण आगे वैन को कैसा कैसे एडिट करते हैं आपको किन

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