ओवरथिंकिंग कैसे आती है?...


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J.P. Y👌g i

Psychologist

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प्रशन है ओवरथिंकिंग कैसे आते हैं पवन सिंह के तो अपने जो परिणाम होते हैं और वह सिद्धांत में यह लगता है कि पर्टिकुलर हमेशा सत्य है ऑल चाहे वह भर मन भर में शुरू से हो यह हम नहीं मान सकते हैं लेकिन इतना समझ जरूर लेते हैं कि जो कुछ हम महसूस कर रहे हैं और वह यथार्थ बिल्कुल सत्य और ऐसा हो जाना ही है तो यह बात ठीक है कि अपने सोच समझ में अगर ऐसी बातें आ रहे हैं तो वह थिंकिंग आती है लेकिन जब कंपटीशन के माहौल में भी उसका जवाब आगे आगे आता है तो कुछ ना कुछ क्षण है महसूस होता है कि यह और सिंह की के जवाब में कुछ बन पड़ा है तो यही सारी चीजें की और थिंकिंग जब भी आती है जब आदमी ज्यादा कॉन्फिडेंस में आ जाता है अपने आप को तो सब आवर सिंगिंग बनने लगती है और यह अच्छी बात है कि अगर सही निर्णायक स्थिति में वह और चिंकी काम कर रही है तो आप को फायदा ही है और अबे अनवरत रूप से बढ़ता ही रहेगा ऑटोमेटिकली और थिंकिंग अपने जो आपकी मेहनत के सूझबूझ से जो आपकी निर्णायक अवस्था बनती है बन रही है और उसके अंदर ऐसी परिस्थितियों में क्या देख रही है तो आप जाहिर है कि इस समय उसको हम चैलेंज के रूप में उसका प्रचार करते हैं अंतर्निहित यही होता है कि भावना में कि जो मैं कुछ कर रहा हूं देख रहा हूं सोच रहा हूं या समझा रहा हूं वह सटीक होगा और उसका प्रभाव पड़ता रहेगा तो वर्किंग किंग केंद्र जी अच्छी बात है वही हो सकते हैं जो खास एक्सरसाइज में लगे रहते हैं तो उनको फलीभूत परिणामों से ही है और थिंकिंग आती है लेकिन इतना भी हो वरना हो जाए कि हम उस में दूसरों की सूझबूझ और जान को ना समझ पाए तो यहां और थिंकिंग गलत हो जाते क्योंकि भक्ति के बिना काम नहीं होता जहां मांग होती है और जहां उसकी डिमांड है आवश्यकता पड़ रही है तो वहां पर अगर हम कोई अपनी उस चीज को सलाह को दे रहे हैं तो वह ठीक होता है अन्यथा अगर उसमें रुचि नहीं है लोगों की और हम उसको प्रचार मिला रहे हैं तो यह और थिंकिंग हमारे लिए कोई खास मायने नहीं बन पाता है तो आई अपनी व्यक्तिगत समझ और सूझबूझ में रहता है यह लेकिन और चिंकी का मतलब नहीं होता है कि आप उसके गुब्बार में कुछ अलग ही ढंग प्रतिक्रिया जाहिर हो तो ऐसा हो जाता है कि उल्लास के तौर पर हम कुछ अलग से प्रतिक्रिया करते हैं तो वाचिंग किंग का मतलब यही है कि आप उसको सही तरह से सामंजस्य बिठाते हुए आगे शैली में कौन अपनाना चाहिए जो लोकप्रिय हो सके तो बिना कॉन्फिडेंस को और थिंकिंग नहीं आती है और यह गर्व की बात होती है कि अगर आपके अंदर से और चिंगारी तो आपको कुछ प्राप्त हो रहा है लेकिन प्रदर्शन के मामले में आपकी इसमें सामंजस्य बैठाने पड़ेगी तो यह अंत करण का मूल अवधारणा है इसको एक अलग चित्र बनाकर रह सकता यार बाय रूप से जो आपका व्यवहारिक दौर है उसके अंदर उसकी प्रस्तुति अलग हो सकती है तो यही आपकी कुशलता है कि आपको उसके सम्मिश्रण के अंदर अगर कोई प्रस्तुति आ रही है तो वह सही सामंजस्य बैठा देती है और आपकी कुशलता में चार चांद लगा देती है तो यही कहना चाह रहा हूं कि वो सिंगिंग आती है कि कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है और अपने रुझान के अंदर हम उसमें त्रिविता पाते हैं और वह क्षण में भी संभाली नहीं जाती अच्छा लगता है तो इस पर नियंत्रण है क्योंकि से सांभर समान होते हैं और जो शहीद दायित्व और कर्तव्य स्थित होते हो कभी ओवरर्चिंग की में नहीं आते हैं यानी होता है यह है कि प्रदर्शन को मैं उसमें कमांड हो जाता है और कोई विशेष बात नहीं रहती मैं यही कहना चाहता हूं धन्यवाद

prashan hai overthinking kaise aate hai pawan Singh ke toh apne jo parinam hote hai aur vaah siddhant mein yah lagta hai ki particular hamesha satya hai all chahen vaah bhar man bhar mein shuru se ho yah hum nahi maan sakte hai lekin itna samajh zaroor lete hai ki jo kuch hum mehsus kar rahe hai aur vaah yatharth bilkul satya aur aisa ho jana hi hai toh yah BA at theek hai ki apne soch samajh mein agar aisi BA tein aa rahe hai toh vaah thinking aati hai lekin jab competition ke maahaul mein bhi uska jawab aage aage aata hai toh kuch na kuch kshan hai mehsus hota hai ki yah aur Singh ki ke jawab mein kuch BA n pada hai toh yahi saree cheezen ki aur thinking jab bhi aati hai jab aadmi zyada confidence mein aa jata hai apne aap ko toh sab hour singing BA nne lagti hai aur yah achi BA at hai ki agar sahi niranayak sthiti mein vaah aur chinki kaam kar rahi hai toh aap ko fayda hi hai aur abe anvarat roop se BA dhta hi rahega atometikli aur thinking apne jo aapki mehnat ke sujhbujh se jo aapki niranayak avastha BA nti hai BA n rahi hai aur uske andar aisi paristhitiyon mein kya dekh rahi hai toh aap jaahir hai ki is samay usko hum challenge ke roop mein uska prachar karte hai antarnihit yahi hota hai ki bhavna mein ki jo main kuch kar raha hoon dekh raha hoon soch raha hoon ya samjha raha hoon vaah sateek hoga aur uska prabhav padta rahega toh working king kendra ji achi BA at hai wahi ho sakte hai jo khaas exercise mein lage rehte hai toh unko falibhut parinamon se hi hai aur thinking aati hai lekin itna bhi ho varna ho jaaye ki hum us mein dusro ki sujhbujh aur jaan ko na samajh paye toh yahan aur thinking galat ho jaate kyonki bhakti ke bina kaam nahi hota jaha maang hoti hai aur jaha uski demand hai avashyakta pad rahi hai toh wahan par agar hum koi apni us cheez ko salah ko de rahe hai toh vaah theek hota hai anyatha agar usme ruchi nahi hai logo ki aur hum usko prachar mila rahe hai toh yah aur thinking hamare liye koi khaas maayne nahi BA n pata hai toh I apni vyaktigat samajh aur sujhbujh mein rehta hai yah lekin aur chinki ka matlab nahi hota hai ki aap uske gubbar mein kuch alag hi dhang pratikriya jaahir ho toh aisa ho jata hai ki ullas ke taur par hum kuch alag se pratikriya karte hai toh vaching king ka matlab yahi hai ki aap usko sahi tarah se samanjasya bithate hue aage shaili mein kaun apnana chahiye jo lokpriya ho sake toh bina confidence ko aur thinking nahi aati hai aur yah garv ki BA at hoti hai ki agar aapke andar se aur chingaari toh aapko kuch prapt ho raha hai lekin pradarshan ke mamle mein aapki isme samanjasya BA ithne padegi toh yah ant karan ka mul avdharna hai isko ek alag chitra BA nakar reh sakta yaar bye roop se jo aapka vyavaharik daur hai uske andar uski prastuti alag ho sakti hai toh yahi aapki kushalata hai ki aapko uske sammishran ke andar agar koi prastuti aa rahi hai toh vaah sahi samanjasya BA itha deti hai aur aapki kushalata mein char chand laga deti hai toh yahi kehna chah raha hoon ki vo singing aati hai ki confidence BA dh jata hai aur apne rujhan ke andar hum usme trivita paate hai aur vaah kshan mein bhi sambhali nahi jaati accha lagta hai toh is par niyantran hai kyonki se saambhar saman hote hai aur jo shaheed dayitva aur kartavya sthit hote ho kabhi ovararching ki mein nahi aate hai yani hota hai yah hai ki pradarshan ko main usme command ho jata hai aur koi vishesh BA at nahi rehti main yahi kehna chahta hoon dhanyavad

प्रशन है ओवरथिंकिंग कैसे आते हैं पवन सिंह के तो अपने जो परिणाम होते हैं और वह सिद्धांत मे

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