भगवान को मानना क्यों ज़रूरी है?...


user

Medha Rajput

Journalist/Actor/Anchor/Youtuber/Blogger

2:00
Play

Likes  6  Dislikes    views  80
WhatsApp_icon
25 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user

Thaker Nilesh

Financial consultant,Brand Management,Sales & Marketing, Promotional activities

1:39
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ओम नमस्ते भगवान को मानना क्यों जरूरी है भगवान को मानना बिल्कुल जरूरी नहीं है ऐसा कहीं पर भी किसी ने लिखा नहीं है कहा भी नहीं व्यक्ति अपने आप में स्वतंत्र व्यक्ति मनुष्य अपने आप में समझदार है जानकारी और मनुष्य प्रकृति के साथ रहता है प्रकृति के साथ पल्ला बड़ा होता है तो मनुष्य को पता है कि उसको किसको मारना चाहिए क्यों मारना चाहिए कब मानना चाहिए तो अगर ऐसी कोई बात है कि भगवान को मानना जरूरी है तो ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है मनुष्य व्यक्ति खुद आत्मसात होकर अपना गठबंधन बनाकर अपनी प्रकृति को समझकर जान के अगर वह भगवान के प्रति रुचि रखता है रखता है क्या रखता है भगवान को साथ में समझता है भगवान को 136 एक और कुल एलिमेंट समझता है तभी उसको मारना चाहिए कि भगवान है और भगवान को मानने की चेष्टा करनी चाहिए बाकी केवल दिखाने के लिए बताने के लिए या विरोध करने के लिए भगवान को मानना या ना मानना दोनों एक जैसी ही बात है आशा करता हूं आपको उत्तर में थोड़ी मदद मिली होगी जब मैं थोड़ी आसानी रही होगी धन्यवाद थैंक यू वेरी मच

om namaste bhagwan ko manana kyon zaroori hai bhagwan ko manana bilkul zaroori nahi hai aisa kahin par bhi kisi ne likha nahi hai kaha bhi nahi vyakti apne aap me swatantra vyakti manushya apne aap me samajhdar hai jaankari aur manushya prakriti ke saath rehta hai prakriti ke saath palla bada hota hai toh manushya ko pata hai ki usko kisko marna chahiye kyon marna chahiye kab manana chahiye toh agar aisi koi baat hai ki bhagwan ko manana zaroori hai toh aisi koi vyavastha nahi hai manushya vyakti khud aatmsat hokar apna gathbandhan banakar apni prakriti ko samajhkar jaan ke agar vaah bhagwan ke prati ruchi rakhta hai rakhta hai kya rakhta hai bhagwan ko saath me samajhata hai bhagwan ko 136 ek aur kul element samajhata hai tabhi usko marna chahiye ki bhagwan hai aur bhagwan ko manne ki cheshta karni chahiye baki keval dikhane ke liye batane ke liye ya virodh karne ke liye bhagwan ko manana ya na manana dono ek jaisi hi baat hai asha karta hoon aapko uttar me thodi madad mili hogi jab main thodi aasani rahi hogi dhanyavad thank you very match

ओम नमस्ते भगवान को मानना क्यों जरूरी है भगवान को मानना बिल्कुल जरूरी नहीं है ऐसा कहीं पर

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  77
WhatsApp_icon
user

Vict (Apna Timezone)

Yoga Expsrt Writer,freelance journalist 9425350983

7:56
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शुभ प्रभात प्रभात दोस्तों मित्रों सभी लोगों को मेरा नमस्कार हो सकता है किसी को मेरे शब्दार्थ ना करें मैं इस प्रश्न का जवाब देना चाहता हूं क्योंकि जो प्रश्न किया गया है वह अपने हिसाब से किया गया है आपने जो प्रश्न किया है वह अपने हिसाब से जो प्रश्न किया जबकि प्रश्न भी को गलत है भगवान को मानना क्यों जरूरी है यह प्रश्न सरासर गलत है इस प्रश्न को इस तरह से ना करें क्योंकि जिन्होंने में भगवान को माना है उन्होंने केवल भगवान यह ईश्वर की उस पराकाष्ठा को उनके उच्च स्तर को उनकी अभिभूत क्षमता को महा विराट स्वरूप को पहचाना ही नहीं क्योंकि ईश्वर को मानना वहां आवश्यक होता है जहां बस आडंबर दिखाना चाहते हैं और जब इस आडंबर से ऊपर उठते हैं वहां हमें एक सोच हमारी विस्तारित होती है क्या पक होते हैं उसे बोलते हैं ईश्वर को जानना जितने लोगों ने ईश्वर को जाना भाई ईश्वर के हो गए अपने आत्म कोरिया ने मिटाया आत्मा के स्वरूप को जिन्होंने ईश्वर में समाहित कर दिया समा समावेशित करती है स्वामी विवेकानंद नगर से परमहंस यह जीते जाते उदाहरण रहे हैं हमारे इतिहास के जनों ने अपने आपको मीरा का नाम आपने सुना होगा भगवान बुध जो अपने आप को गला दिया ईश्वर भक्ति में और स्वयं भगवान हो गए तो उस ईश्वर को मानना जरूर नहीं है इससे कोई जानना जरूरी है कितने लोगों ने प्रयास किया जितने लोगों ने मारने का प्रयास किया वह केवल अपने कर्म की अगरबत्ती मंदिरों में लगाए हैं मस्जिदों की अजान में लगाए हैं ईश्वर को पाने के लिए प्राण कुछ नहीं कर रहे हैं केवल मानने की वजह से मोमबत्तियां का प्रकाश चला रहे हैं यह तो क्रियाएं हैं रासायनिक क्रिया है कहीं भी हो जाएंगी लेकिन जब मिश्र को जानने की मुहिम जारी होती है उससे भूमिका को बनाने का प्रयास होता है तो वहां पर इंद्र रसायनों का प्रयोग नहीं होता है एक ही प्रयास होता है अपने चित्र को शुद्ध करने का चित्र को शुद्ध कर लेना अहंकार अपने एम भाव को मिटा देना जहां पर हम अपने अहम भाव को मैं मेरा यह सब जहां पर समाप्त हो जाता है वहां मिक्स महान समाधि की पराकाष्ठा पहुंचते हैं जहां पर ईश्वर को जानने का प्रयास शुरू हो जाता है और प्रैक्टिकली कहे तो उसे असीम सकता जो सुपर नेचुरल पावर जहां पर होती है वहां पर एक रत्ती का भी फर्क नहीं पड़ता आप खुद देख लीजिए सूरज से पृथ्वी का जो अंतर है डिस्टेंस ऑफ सन बिटवीन द अर्थ टू मेंटेन बहुत ही मेंटेंड है सूर्य और पृथ्वी का जो अंतर है बहुत ही इतना सटीक अंतर है यदि थोड़े से पास अगर पृथ्वी जाएगी तो यहां पर जल जाएगी वर्ष में और थोड़ी से दूर अगर थोड़ी से पास यदि जाएगी सूरज के तो गल जाएगी अग्नि में भीषण अग्नि में सूर्य से जल जाएगी प्रति और छोड़कर दूर जाती है तो बिल्कुल बर्फ की तह में बिल्कुल दब जाएगी घटी जहां पर जीवन संभव नहीं होगा आप उस वक्त पृथ्वी का जो चक्र है 24 घंटे का जो नियत स्थान है उसको आप कैसे यह संभव है आप अंदाजा लगाइए सूर्य भी जब पृथ्वी से देखते हैं सुबह से अपने हिसाब तक ड्यूटी करता हूं उसके किसी प्रकार की कोई बात नहीं है लेकिन वह भी हिलियम हाइड्रोजन का जो संलयन और विखंडन करता है वह कितने सिस्टमैटिक तरीके से करता है कोई ना कोई सत्ता तो उस पर काम कर रही होगी ईश्वर की बनाई हुई उससे संरचना मनुष्य को देखेंगे कि कितना बार से कितना सुकोमल है अंदर से कितना कट हो रहा है उसके हाथ की बनावट देख लीजिए कि स्पर्श करने पर उसमें टच अंत होता है और जब उसको मारना पड़ता है तो गुस्सा बहुत तेज पड़ता है यह संरचना कैसे किसी व्यक्ति के दिमाग में आ सकते हैं एक कैसे कोशिका की सुंदरता उसने अंदर से बना रखी है वही बाहर से आदमी कितना कुरूप होने पर भी अंदर की कोशिका उतनी उतनी ही तेजी में है जितने कि उसने बनाई है उनका है पैरामीटर है ईश्वर का वह कहीं न कहीं इस सप्ताह को जरूर मेंटेन करता है कहीं ना कहीं उसका स्थित है इसको हमें जानने का प्रयास होना चाहिए मां ने उसे तो बस हमारी आस्तिक था झलकती है हम ना जाने कितने लोग मानने के पीछे हमें भ्रम में डाल देते हैं इसकी जानने से हमें जो आदमी आदमी का विकास होता है आपने अंदर के ईश्वर का झगड़ा होता है आपकी आत्मा का जो एक ही कार होता है और जब परम परमात्मा परम ब्रम्ह वही असली प्रयास है उसको ही जानना जरूरी है तो मित्रों हो सकता है किसी की आस्था को चोट पहुंची हो जो महानायक हुए हैं रामकृष्ण ईसा मसीह इन्होंने अपने आप को भुला दिया था आपने हम को नष्ट कर दिया था उसी परम सत्ता में जहां से वह मोक्ष और मां के बल्ले के स्थान को प्राप्त किया और हमें तो अगर हम जीते जी इस पृथ्वी लोक में अपने आपको खुद को ही जान गए तो समझो कि इस सरकार उद्देश्य आपको प्रति लोगों पहुंचाने का पूर्ण हो गया यही ईश्वर का अस्तित्व है यही उनका एक दर्शन है और इसी को समझने के लिए अपने उद्देश्य की पूर्ति ईश्वर बिल्कुल नहीं चाहता कि मुझे यह चढ़ाव अगरबत्ती लगाओ नारियल फोड़े उसने ईश्वर ने कुछ ऐसे संदेश नहीं दिया है ईश्वर तो नहीं कहता कि मुझे आप बनाकर मंदिरों में पूछो क्योंकि आज हम देखते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में हम जाते हैं तो उनके भगवान आस्ट्रेलिया की तरह उनके जो बनाए हुए स्केच हैं उनकी तरह हैं अफ्रीका में जाएं तो उनके लिए क्या चीज है उनकी जो मांगने की चेहरे हैं वह उनकी तरह है और भारत में आते हैं तो भारत में जो मानने वाले इस पर के चेहरे लगे तो फिर कहते हैं कि ईश्वर अलग अलग कैसे ईश्वर एक है सबका मालिक एक है वह अलग अलग कैसे हो सकते हैं तो आदमी ने अपने हिसाब से धर्मों को बनाया है संप्रदाय को बनाया है इनकी रचनाएं और अपने आपको पूछता है दोस्तों इससे भ्रम से निकलकर और अहम को गलाने की कोशिश करें जहां पर आप की ओरिजिनल टिया की पर्सनल स्केल है आपके पर्सनल काम करने का तरीका है वह आपको ईश्वर के बहुत करीब है जाएगा और अगर हम केवल मान कर चलेंगे तो आपसे उस ईश्वर की भूमिका का भी स्पष्ट नहीं कर पाएंगे जहां से ईश्वर अपने अपने परम सत्ता में विराजित है दोस्तों को थैंक यू सो मच अरे गुड डे

shubha prabhat prabhat doston mitron sabhi logo ko mera namaskar ho sakta hai kisi ko mere shabdarth na kare main is prashna ka jawab dena chahta hoon kyonki jo prashna kiya gaya hai vaah apne hisab se kiya gaya hai aapne jo prashna kiya hai vaah apne hisab se jo prashna kiya jabki prashna bhi ko galat hai bhagwan ko manana kyon zaroori hai yah prashna sarasar galat hai is prashna ko is tarah se na kare kyonki jinhone me bhagwan ko mana hai unhone keval bhagwan yah ishwar ki us parakashtha ko unke ucch sthar ko unki abhibhut kshamta ko maha virat swaroop ko pehchana hi nahi kyonki ishwar ko manana wahan aavashyak hota hai jaha bus aandabar dikhana chahte hain aur jab is aandabar se upar uthte hain wahan hamein ek soch hamari vistarit hoti hai kya pak hote hain use bolte hain ishwar ko janana jitne logo ne ishwar ko jana bhai ishwar ke ho gaye apne aatm korea ne mitaya aatma ke swaroop ko jinhone ishwar me samahit kar diya sama samaveshit karti hai swami vivekananda nagar se paramhans yah jeete jaate udaharan rahe hain hamare itihas ke jano ne apne aapko meera ka naam aapne suna hoga bhagwan buddha jo apne aap ko gala diya ishwar bhakti me aur swayam bhagwan ho gaye toh us ishwar ko manana zaroor nahi hai isse koi janana zaroori hai kitne logo ne prayas kiya jitne logo ne maarne ka prayas kiya vaah keval apne karm ki agarbatti mandiro me lagaye hain masjidon ki ajaan me lagaye hain ishwar ko paane ke liye praan kuch nahi kar rahe hain keval manne ki wajah se momabattiyan ka prakash chala rahe hain yah toh kriyaen hain Rasayanik kriya hai kahin bhi ho jayegi lekin jab mishra ko jaanne ki muhim jaari hoti hai usse bhumika ko banane ka prayas hota hai toh wahan par indra rashayano ka prayog nahi hota hai ek hi prayas hota hai apne chitra ko shudh karne ka chitra ko shudh kar lena ahankar apne M bhav ko mita dena jaha par hum apne aham bhav ko main mera yah sab jaha par samapt ho jata hai wahan mix mahaan samadhi ki parakashtha pahunchate hain jaha par ishwar ko jaanne ka prayas shuru ho jata hai aur practically kahe toh use asim sakta jo super natural power jaha par hoti hai wahan par ek ratti ka bhi fark nahi padta aap khud dekh lijiye suraj se prithvi ka jo antar hai distance of san between the arth to maintain bahut hi mentend hai surya aur prithvi ka jo antar hai bahut hi itna sateek antar hai yadi thode se paas agar prithvi jayegi toh yahan par jal jayegi varsh me aur thodi se dur agar thodi se paas yadi jayegi suraj ke toh gal jayegi agni me bhishan agni me surya se jal jayegi prati aur chhodkar dur jaati hai toh bilkul barf ki tah me bilkul dab jayegi ghati jaha par jeevan sambhav nahi hoga aap us waqt prithvi ka jo chakra hai 24 ghante ka jo niyat sthan hai usko aap kaise yah sambhav hai aap andaja lagaaiye surya bhi jab prithvi se dekhte hain subah se apne hisab tak duty karta hoon uske kisi prakar ki koi baat nahi hai lekin vaah bhi helium hydrogen ka jo sanlayan aur vikhandan karta hai vaah kitne systematic tarike se karta hai koi na koi satta toh us par kaam kar rahi hogi ishwar ki banai hui usse sanrachna manushya ko dekhenge ki kitna baar se kitna sukomal hai andar se kitna cut ho raha hai uske hath ki banawat dekh lijiye ki sparsh karne par usme touch ant hota hai aur jab usko marna padta hai toh gussa bahut tez padta hai yah sanrachna kaise kisi vyakti ke dimag me aa sakte hain ek kaise koshika ki sundarta usne andar se bana rakhi hai wahi bahar se aadmi kitna kurup hone par bhi andar ki koshika utani utani hi teji me hai jitne ki usne banai hai unka hai parameter hai ishwar ka vaah kahin na kahin is saptah ko zaroor maintain karta hai kahin na kahin uska sthit hai isko hamein jaanne ka prayas hona chahiye maa ne use toh bus hamari astik tha jhalkati hai hum na jaane kitne log manne ke peeche hamein bharam me daal dete hain iski jaanne se hamein jo aadmi aadmi ka vikas hota hai aapne andar ke ishwar ka jhagda hota hai aapki aatma ka jo ek hi car hota hai aur jab param paramatma param bramh wahi asli prayas hai usko hi janana zaroori hai toh mitron ho sakta hai kisi ki astha ko chot pahuchi ho jo mahanayak hue hain ramakrishna isa masih inhone apne aap ko bhula diya tha aapne hum ko nasht kar diya tha usi param satta me jaha se vaah moksha aur maa ke balle ke sthan ko prapt kiya aur hamein toh agar hum jeete ji is prithvi lok me apne aapko khud ko hi jaan gaye toh samjho ki is sarkar uddeshya aapko prati logo pahunchane ka purn ho gaya yahi ishwar ka astitva hai yahi unka ek darshan hai aur isi ko samjhne ke liye apne uddeshya ki purti ishwar bilkul nahi chahta ki mujhe yah chadhav agarbatti lagao nariyal phoden usne ishwar ne kuch aise sandesh nahi diya hai ishwar toh nahi kahata ki mujhe aap banakar mandiro me pucho kyonki aaj hum dekhte hain ki austrailia me hum jaate hain toh unke bhagwan Australia ki tarah unke jo banaye hue Sketch hain unki tarah hain africa me jayen toh unke liye kya cheez hai unki jo mangne ki chehre hain vaah unki tarah hai aur bharat me aate hain toh bharat me jo manne waale is par ke chehre lage toh phir kehte hain ki ishwar alag alag kaise ishwar ek hai sabka malik ek hai vaah alag alag kaise ho sakte hain toh aadmi ne apne hisab se dharmon ko banaya hai sampraday ko banaya hai inki rachnaye aur apne aapko poochta hai doston isse bharam se nikalkar aur aham ko galane ki koshish kare jaha par aap ki original tiya ki personal scale hai aapke personal kaam karne ka tarika hai vaah aapko ishwar ke bahut kareeb hai jaega aur agar hum keval maan kar chalenge toh aapse us ishwar ki bhumika ka bhi spasht nahi kar payenge jaha se ishwar apne apne param satta me virajit hai doston ko thank you so match are good day

शुभ प्रभात प्रभात दोस्तों मित्रों सभी लोगों को मेरा नमस्कार हो सकता है किसी को मेरे शब्दार

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  76
WhatsApp_icon
user

Mr. Arihant Jain 9730047488

A Counsellor, Life-coach, Inspirational, Motivational, Spiritual speaker, A Pragmatic Eye-opener

2:28
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान को मानना क्यों जरूरी है कि भगवान जो है हम उसे अनंत ऊर्जा के रूप में देखते हैं एक अपार ऊर्जा के रूप में देखते हैं एयरलिफ्ट ऊर्जा के रूप में देखते हैं जो अनंतानंद है और जब कभी हम किसी परिस्थिति में हमारा मन है किसी किसी और के कारण हमारा मन विचलित होता है यार हम कहीं ना कहीं शक्तिहीन ताकि महसूस करते शक्ति गिनता को तो उस समय हम भगवान को याद करके उस शक्ति को प्राप्त कर पाते हैं उस ऊर्जा को प्राप्त कर पाते हैं और अपने आपको फिर एक पुनर संचार के द्वारा एक ऊर्जा के द्वारा भर के फिर हम अपने आप को आगे बढ़ाते हैं तो इसलिए सम टाइम्स भगवान को madmp3 करके इतनी सारी चीजें करते हैं तो हमें भगवान को कहीं ना कहीं में लगता है कि हम मानते हैं जरूरी है या नहीं है यह आपके ऊपर है कि यदि आपको लगता है कि जरूरी है आपको तो आप आगे बढ़ सकते हैं और यदि आप लगता है कि आपको कोई जरूरत ही नहीं है भगवान से आप खुद और अपनी विल पावर कितना स्टाफ है वैसे भी आगे बढ़ सकते हैं और अब विश्वास मने जबल पावर से या एक इतनी ऊर्जा से हर काम को करते हैं एक वह शांत मन से कुछ पूछा था तो आप स्वयं ही उस भगवान को कहीं ना कहीं मान रहे हो भगवान को कहना कि अपने अंदर रखे हुए आपको जरूरत नहीं है क्या भगवान को माने या उत्तर पूजा पाठ करें या उसका कीर्तन करें भजन करें ऊर्जा ही भगवान है जिसे आप अपने खुद के अंदर उसे भगवान भी कर सकते हो उर्जा भी कह सकते उसे कुछ भी कह सकते हैं लेकिन आपके अंदर है तो आपको भगवान को मानने की कोई जरूरत नहीं प्रभु मुझे कि यदि कहीं ना कहीं कमी होती है अब भगवान को याद कीजिए आप अपना दरबारी है और कार्य को आगे बढ़ाया

bhagwan ko manana kyon zaroori hai ki bhagwan jo hai hum use anant urja ke roop me dekhte hain ek apaar urja ke roop me dekhte hain airlift urja ke roop me dekhte hain jo anantanand hai aur jab kabhi hum kisi paristhiti me hamara man hai kisi kisi aur ke karan hamara man vichalit hota hai yaar hum kahin na kahin shaktihin taki mehsus karte shakti ginta ko toh us samay hum bhagwan ko yaad karke us shakti ko prapt kar paate hain us urja ko prapt kar paate hain aur apne aapko phir ek punar sanchar ke dwara ek urja ke dwara bhar ke phir hum apne aap ko aage badhate hain toh isliye some times bhagwan ko madmp3 karke itni saari cheezen karte hain toh hamein bhagwan ko kahin na kahin me lagta hai ki hum maante hain zaroori hai ya nahi hai yah aapke upar hai ki yadi aapko lagta hai ki zaroori hai aapko toh aap aage badh sakte hain aur yadi aap lagta hai ki aapko koi zarurat hi nahi hai bhagwan se aap khud aur apni will power kitna staff hai waise bhi aage badh sakte hain aur ab vishwas mane jabal power se ya ek itni urja se har kaam ko karte hain ek vaah shaant man se kuch poocha tha toh aap swayam hi us bhagwan ko kahin na kahin maan rahe ho bhagwan ko kehna ki apne andar rakhe hue aapko zarurat nahi hai kya bhagwan ko maane ya uttar puja path kare ya uska kirtan kare bhajan kare urja hi bhagwan hai jise aap apne khud ke andar use bhagwan bhi kar sakte ho urja bhi keh sakte use kuch bhi keh sakte hain lekin aapke andar hai toh aapko bhagwan ko manne ki koi zarurat nahi prabhu mujhe ki yadi kahin na kahin kami hoti hai ab bhagwan ko yaad kijiye aap apna darbari hai aur karya ko aage badhaya

भगवान को मानना क्यों जरूरी है कि भगवान जो है हम उसे अनंत ऊर्जा के रूप में देखते हैं एक अप

Romanized Version
Likes  6  Dislikes    views  100
WhatsApp_icon
user

Pramod Kushwaha

famous Motivational Guru N Painter

0:40
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं मोटिवेशनल गुरु प्रमोद कुशवाहा आपका वो कल मैं स्वागत करता हूं आप ने प्रश्न किया है भगवान को मानना चाहिए भगवान को मानना इसलिए जरूरी है भगवान को मानने से सकारात्मक सोच पैदा होती नेगेटिविटी खत्म होती जब सकारात्मक सोच पैदा होती है तो विश्वास जाता है और आपकी काम बनने लगते धन्यवाद

main Motivational guru pramod kushwaha aapka vo kal main swaagat karta hoon aap ne prashna kiya hai bhagwan ko manana chahiye bhagwan ko manana isliye zaroori hai bhagwan ko manne se sakaratmak soch paida hoti negativity khatam hoti jab sakaratmak soch paida hoti hai toh vishwas jata hai aur aapki kaam banne lagte dhanyavad

मैं मोटिवेशनल गुरु प्रमोद कुशवाहा आपका वो कल मैं स्वागत करता हूं आप ने प्रश्न किया है भगव

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  112
WhatsApp_icon
user
0:34
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान को मानना या ना मानना है खुद के ऊपर डिपेंड करता है इससे पहले हमको खुद के ऊपर विश्वास होना चाहिए जब हम खुद ऊपर विश्वास करेंगे जभी तो हम भगवान के ऊपर विश्वास कर पाएंगे जिससे हम को सुख शांति और सफलता मिलती है और हम अपने हर कार्य में सफलता हासिल करेंगे तो हमको खुशी महसूस होगी और हमारे जीवन में हैप्पीनेस आएगी

bhagwan ko manana ya na manana hai khud ke upar depend karta hai isse pehle hamko khud ke upar vishwas hona chahiye jab hum khud upar vishwas karenge jab bhi toh hum bhagwan ke upar vishwas kar payenge jisse hum ko sukh shanti aur safalta milti hai aur hum apne har karya me safalta hasil karenge toh hamko khushi mehsus hogi aur hamare jeevan me Happiness aayegi

भगवान को मानना या ना मानना है खुद के ऊपर डिपेंड करता है इससे पहले हमको खुद के ऊपर विश्वास

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  96
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न है भगवान को मानना क्यों जरूरी है ऐसा कोई सिद्धांत या कोई नियम नहीं है कि आपको ईश्वर को मां नहीं है जैसा कि हमारे प्राचीन दर्शन में भी आप देखते हैं कि वहां पर आस्तिक और नास्तिक दोनों ही तरह के प्रश्नों का विवरण दिया गया है तो ईश्वर को मानना या ना मानना आपकी अपनी इच्छा है यदि आप ईश्वर में विश्वास करते हैं तो उनको माने और नहीं करते हैं तो कोई आपके ऊपर कोई प्रेशराइज आपको नहीं कर सकता कि आपको ईश्वर को मानना ही पड़ेगा ऐसा हमारे देश में कोई संविधान या कोई कानून लागू नहीं हुआ है धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

namaskar aapka prashna hai bhagwan ko manana kyon zaroori hai aisa koi siddhant ya koi niyam nahi hai ki aapko ishwar ko maa nahi hai jaisa ki hamare prachin darshan mein bhi aap dekhte hai ki wahan par astik aur nastik dono hi tarah ke prashnon ka vivran diya gaya hai toh ishwar ko manana ya na manana aapki apni iccha hai yadi aap ishwar mein vishwas karte hai toh unko maane aur nahi karte hai toh koi aapke upar koi presharaij aapko nahi kar sakta ki aapko ishwar ko manana hi padega aisa hamare desh mein koi samvidhan ya koi kanoon laagu nahi hua hai dhanyavad aapka din shubha ho

नमस्कार आपका प्रश्न है भगवान को मानना क्यों जरूरी है ऐसा कोई सिद्धांत या कोई नियम नहीं है

Romanized Version
Likes  35  Dislikes    views  870
WhatsApp_icon
user

Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

5:05
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है भगवान को मानना क्यों जरूरी है भगवान को मानना कोई जरूरी नहीं है किसने कहा कि आपको भगवान को माने क्या भगवान को मानेंगे तभी भगवान होगा और भगवान को आप नहीं मानेंगे तो भगवान नहीं होगा आपकी मर्जी है इससे भगवान पर क्या फर्क पड़ता है आकाश में सूरज निकल रहा है उसका काम है प्रकाश देना जीवन ऊर्जा देना वनस्पतियां पैदा करना धूप देना गर्मी देना उसका काम है कर रहा है अब आप करने लगे मैं तो प्रकाश को नहीं मानता मैं तो सूरज को नहीं मानता अरे मेरे भाई मत मानो किसने कहा मानो न मानो तो कौन सा काम रुक जाएगा या प्रकाश सूरज आपको दुख देना बंद कर देगा सूरज आपको प्रकाश देना बंद कर देगा सूरज सूरज आपका भोजन पटाना बंद कर देगा क्या हो जाएगा कुछ नहीं होगा भगवान को मानने की कोई आवश्यकता नहीं आती ना मानने और ना मानने से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता है और मान करके करें करेंगे भी क्या जिसके विषय में कुछ जानते नहीं वह कौन है कहां रहता है कहां निवास है क्या करता है उसका काम क्या है उसके गुण क्या है जब आपको पता ही नहीं है तो क्यों मानेंगे मत मानिए भगवान को मानना कोई जरूरी नहीं है हां यदि भगवान को जानना चाहते हैं उसका अनुभव करना चाहते हैं एक-एक कदम बनना चाहते हैं अगर केवल अगर केवल सुबह उठना खाना खाना ड्यूटी जाना काम पर जाना आ जाना सो जाना फिर सुबह उठना खाना खाना ड्यूटी जाना काम पर आना सो जाना अगर यह पशुपति जिंदगी केवल जीना चाहते हैं तो भगवान को मानने और जानने की कोई आवश्यकता नहीं कोई तलाश की आवश्यकता नहीं है हां यदि मन में रोमांच होता है कभी कभी कभी कभी शांति के चरणों में ऐसा पैदा होता है या कभी कभी किसी की मृत्यु में जाते हैं या इस समय करो ना का माहौल चल रहा है कि पूरे के पूरे पूरा विश्व परेशान है पूरा विश्व परेशान है जरा से वार्निश ने पूरी दुनिया को झूमर क्यों आखिर किसने बनाया है जो बनाने वाला बनाने वाला सृष्टि का विनाश करने वाला है उसको कहते हैं परमात्मा जिसने पूरी कायनात रची है जरा सा छोटा सा करो ना जो आंखों से देख नहीं सकते कोविड-19 कोविड-19 करो ना वायरस जरा चार्जेस कितना शक करो ने ने पूरी दुनिया को झुमा रखा इस समय पूरा माहौल पूरे विश्व का माहौल भय का बना रखा है लाशों के अंबार उसने लगा दिए हैं तो अभी तो परमात्मा बहुत है अभी तो अनंत है यह सूरज चांद सितारे या का टीए डीए आकाशगंगा है यह समुंदर यह पहाड़ अनंत अनंत का विस्तार सब किसका है सब उसी का है तू क्या जान पाओगे उसे उसकी छोटी सी चीज करो ना वायरस पर तुम तुम नहीं समझ पाए उसके अनंत ब्रह्मांड को कौन जान सकता है अब तुम्हारे न मानने और मानने से क्या उस पर कोई फर्क पड़ेगा कोई फर्क नहीं पड़ेगा न मानिए अच्छी बात है क्या करना है आप ही रहे सो रहे हैं खा रहे पी रहे सो रहे मर मर के चले जाएंगे फिर पैदा होंगे खाएंगे पिएंगे सोएंगे मर जाएंगे फिर क्या उस तक छोड़िए हां यदि परमात्मा क्या है कैसे हैं कहां है इसी जिंदगी में उसका अनुभव करना चाहते हैं तो इसके लिए सत्संग और अच्छे ज्ञान की आवश्यकता है यहां तो मैं कुछ इस विषय में चर्चा कर नहीं सकता हूं अगर जिज्ञासा है तो मेरे यूट्यूब चैनल योगी अंतर्ध्यान इंग्लिश के कैपिटल लेटर में लिखिए वाई ओ जी आई ए एन टी ई आर डी एच वाई ए एन योगी अंतर्ध्यान उस चैनल पर जाइए लगातार सुनिए तब आपको समझ में आएगा परमात्मा क्यों कहां कैसे होता है अरे मानने ना मानने वाली बात की है ना मानना पहले समझ तो लो धन्यवाद नमस्कार

aapka prashna hai bhagwan ko manana kyon zaroori hai bhagwan ko manana koi zaroori nahi hai kisne kaha ki aapko bhagwan ko maane kya bhagwan ko manenge tabhi bhagwan hoga aur bhagwan ko aap nahi manenge toh bhagwan nahi hoga aapki marji hai isse bhagwan par kya fark padta hai akash me suraj nikal raha hai uska kaam hai prakash dena jeevan urja dena vanaspatiyan paida karna dhoop dena garmi dena uska kaam hai kar raha hai ab aap karne lage main toh prakash ko nahi maanta main toh suraj ko nahi maanta are mere bhai mat maano kisne kaha maano na maano toh kaun sa kaam ruk jaega ya prakash suraj aapko dukh dena band kar dega suraj aapko prakash dena band kar dega suraj suraj aapka bhojan patana band kar dega kya ho jaega kuch nahi hoga bhagwan ko manne ki koi avashyakta nahi aati na manne aur na manne se us par koi fark nahi padta hai aur maan karke kare karenge bhi kya jiske vishay me kuch jante nahi vaah kaun hai kaha rehta hai kaha niwas hai kya karta hai uska kaam kya hai uske gun kya hai jab aapko pata hi nahi hai toh kyon manenge mat maniye bhagwan ko manana koi zaroori nahi hai haan yadi bhagwan ko janana chahte hain uska anubhav karna chahte hain ek ek kadam banna chahte hain agar keval agar keval subah uthna khana khana duty jana kaam par jana aa jana so jana phir subah uthna khana khana duty jana kaam par aana so jana agar yah pashupati zindagi keval jeena chahte hain toh bhagwan ko manne aur jaanne ki koi avashyakta nahi koi talash ki avashyakta nahi hai haan yadi man me romanch hota hai kabhi kabhi kabhi kabhi shanti ke charno me aisa paida hota hai ya kabhi kabhi kisi ki mrityu me jaate hain ya is samay karo na ka maahaul chal raha hai ki poore ke poore pura vishwa pareshan hai pura vishwa pareshan hai zara se varnish ne puri duniya ko jhumar kyon aakhir kisne banaya hai jo banane vala banane vala shrishti ka vinash karne vala hai usko kehte hain paramatma jisne puri kayanat rachi hai zara sa chota sa karo na jo aakhon se dekh nahi sakte kovid 19 kovid 19 karo na virus zara Charges kitna shak karo ne ne puri duniya ko jhuma rakha is samay pura maahaul poore vishwa ka maahaul bhay ka bana rakha hai lashon ke ambar usne laga diye hain toh abhi toh paramatma bahut hai abhi toh anant hai yah suraj chand sitare ya ka TIAE da akashganga hai yah samundar yah pahad anant anant ka vistaar sab kiska hai sab usi ka hai tu kya jaan paoge use uski choti si cheez karo na virus par tum tum nahi samajh paye uske anant brahmaand ko kaun jaan sakta hai ab tumhare na manne aur manne se kya us par koi fark padega koi fark nahi padega na maniye achi baat hai kya karna hai aap hi rahe so rahe hain kha rahe p rahe so rahe mar mar ke chale jaenge phir paida honge khayenge piyenge soenge mar jaenge phir kya us tak chodiye haan yadi paramatma kya hai kaise hain kaha hai isi zindagi me uska anubhav karna chahte hain toh iske liye satsang aur acche gyaan ki avashyakta hai yahan toh main kuch is vishay me charcha kar nahi sakta hoon agar jigyasa hai toh mere youtube channel yogi antardhyan english ke capital letter me likhiye why O ji I a N T E R d h why a N yogi antardhyan us channel par jaiye lagatar suniye tab aapko samajh me aayega paramatma kyon kaha kaise hota hai are manne na manne wali baat ki hai na manana pehle samajh toh lo dhanyavad namaskar

आपका प्रश्न है भगवान को मानना क्यों जरूरी है भगवान को मानना कोई जरूरी नहीं है किसने कहा क

Romanized Version
Likes  235  Dislikes    views  1848
WhatsApp_icon
user

Sumit Kumar

Digital Marketing Expert | Blogger

0:58
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी किसी को मारना इसलिए जरूरी होता है कि जो उस व्यक्ति में जोश वस्तु में या किसी भी चीज में वह गुण है वह आपके अंदर भी गुण हो जाए यानी उसके बताए हुए रास्तों पर या जिस तरह के गुण उसमें है वह आपके अंदर भी होने चाहिए मान लो आप एक पेड़ की पूजा करते हैं पेड़ को मानते हैं तो आप उसे यह नहीं कि आप उससे कुछ चाहने लगे कि मुझे कुछ दे दे जैसे पेड़ का गुण क्या है पेड़ को को व्यक्ति लगाता है उसे बड़ा करता है वह पेड़ जिंदगी भर उस व्यक्ति को छाया देता है ऑक्सीजन देता है तो आप इस पेड़ की तरह बने जो व्यक्ति आपकी मदद करता है उसकी मदद करें और जिंदगी भर उसके प्रति कृतज्ञ रहे और लोगों की मदद करें तो इसी तरह गुण अपने अंदर प्रवेश करना जिस पर आप आस्था रखते हैं उसके ग्रुप के अंदर होनी चाहिए तो मानने से फायदा होता है वरना भगवान को मार लो और तुम गलत काम किए जाओ तो उससे कोई लाभ नहीं होगा बस इतना समझ लो थैंक यू

dekhi kisi ko marna isliye zaroori hota hai ki jo us vyakti mein josh vastu mein ya kisi bhi cheez mein vaah gun hai vaah aapke andar bhi gun ho jaaye yani uske bataye hue raston par ya jis tarah ke gun usme hai vaah aapke andar bhi hone chahiye maan lo aap ek ped ki puja karte hai ped ko maante hai toh aap use yah nahi ki aap usse kuch chahne lage ki mujhe kuch de de jaise ped ka gun kya hai ped ko ko vyakti lagaata hai use bada karta hai vaah ped zindagi bhar us vyakti ko chhaya deta hai oxygen deta hai toh aap is ped ki tarah bane jo vyakti aapki madad karta hai uski madad kare aur zindagi bhar uske prati kritagya rahe aur logo ki madad kare toh isi tarah gun apne andar pravesh karna jis par aap astha rakhte hai uske group ke andar honi chahiye toh manne se fayda hota hai varna bhagwan ko maar lo aur tum galat kaam kiye jao toh usse koi labh nahi hoga bus itna samajh lo thank you

देखी किसी को मारना इसलिए जरूरी होता है कि जो उस व्यक्ति में जोश वस्तु में या किसी भी चीज म

Romanized Version
Likes  6  Dislikes    views  157
WhatsApp_icon
user

Sunil Kumar Pandey

Editor & Writer

0:48
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार भगवान को मारना क्यों चली है कोई जरूरत नहीं आस्था और विश्वास का प्रश्न निर्माण करता है जितनी भी चीजें हैं इस पर नहीं बनाया है सबको उसके कर्म के अनुसार से सुख दुख का निर्णय देता है

namaskar bhagwan ko marna kyon chali hai koi zarurat nahi astha aur vishwas ka prashna nirmaan karta hai jitni bhi cheezen hain is par nahi banaya hai sabko uske karm ke anusaar se sukh dukh ka nirnay deta hai

नमस्कार भगवान को मारना क्यों चली है कोई जरूरत नहीं आस्था और विश्वास का प्रश्न निर्माण करता

Romanized Version
Likes  148  Dislikes    views  1309
WhatsApp_icon
user

Harish Sharma

Yog Acharya

2:07
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कितने काम को भगवान को मानना है मत मानो भगवान को मानने कोई जरूरी नहीं है मन्ना कोई जरूरी नहीं है तो सिर्फ इसलिए बनाया गया है यह हमारी प्रताप मारी ऋषि-मुनियों ने हमारे साधु-संतों ने जो आदिकाल से शिक्षित से बहुत शिक्षित से ज्ञानवान थे उन्होंने मनुष्य की साइकोलॉजि मनोविज्ञान को देखा समझा तब उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को एक ताकत मिलने के लिए एक ताकत देने के लिए व्यक्ति को मजबूत बनाने के लिए व्यक्ति को आशावादी बनाने के लिए और निराश हो जाए तो उसकी निराशा को समाप्त करने के लिए मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे बनाए गए अभी वहां जाकर आदमी को हौसला मिले उसको लगे कि मैं जो प्रार्थना कर रहा हूं वह प्रार्थना पहुंचेगी और मैं मेरे कि जो अटके हुए काम है पूरे होंगे हौसला होगा मैं ताकतवर बनूंगा निराशा से आशा में निराशा आशा में तब्दील हो जाएगी इसमें भगवान को मानना आवश्यक है बाकी भगवान को मानना नहीं है रियल्टी तो यह है कि भगवान को मानना नहीं है भगवान को जानना है भगवान से मिलना है भगवान को प्राप्त करने के साधन अपनाने हैं टच टू गॉड होना है मानना तो केवल और केवल अलौकिक बात है और केवल और केवल शरीर की बात है केवल और केवल अलौकिक परिस्थितियों से निपटने का एक तरीका है परंतु आलोकिता में भगवान को जानना है भगवान को पहचानना है भगवान से मिलना है भगवान को ढूंढने का प्रयास करने हैं और जब उसके ढूंढ लो उनको किनी किनी माध्यमों से शॉर्टेस्ट टू गॉड हो जाना है ओम

kitne kaam ko bhagwan ko manana hai mat maano bhagwan ko manne koi zaroori nahi hai manna koi zaroori nahi hai toh sirf isliye banaya gaya hai yah hamari pratap mari rishi muniyon ne hamare sadhu santo ne jo aadikaal se shikshit se bahut shikshit se gyaanvaan the unhone manushya ki psycology manovigyan ko dekha samjha tab unhone kaha ki har vyakti ko ek takat milne ke liye ek takat dene ke liye vyakti ko majboot banane ke liye vyakti ko aashavadi banane ke liye aur nirash ho jaaye toh uski nirasha ko samapt karne ke liye mandir masjid gurudware banaye gaye abhi wahan jaakar aadmi ko hausla mile usko lage ki main jo prarthna kar raha hoon vaah prarthna pahunchegi aur main mere ki jo atake hue kaam hai poore honge hausla hoga main takatwar banunga nirasha se asha me nirasha asha me tabdil ho jayegi isme bhagwan ko manana aavashyak hai baki bhagwan ko manana nahi hai realty toh yah hai ki bhagwan ko manana nahi hai bhagwan ko janana hai bhagwan se milna hai bhagwan ko prapt karne ke sadhan apnane hain touch to god hona hai manana toh keval aur keval alaukik baat hai aur keval aur keval sharir ki baat hai keval aur keval alaukik paristhitiyon se nipatane ka ek tarika hai parantu alokita me bhagwan ko janana hai bhagwan ko pahachanana hai bhagwan se milna hai bhagwan ko dhundhne ka prayas karne hain aur jab uske dhundh lo unko kinny kinny maadhyamon se shortest to god ho jana hai om

कितने काम को भगवान को मानना है मत मानो भगवान को मानने कोई जरूरी नहीं है मन्ना कोई जरूरी

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  108
WhatsApp_icon
user

Anshu Sarkar

Founder & Director, Sarkar Yog Academy

1:21
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

छत पर आप को मेरा नमस्कार आप का सवाल है भगवान को मानना क्यों जरूरी है किसने कहा कि भगवान को मानना जरूरी है यह तो आपका पर निर्भर कर रहा आपका सोच कंपनी पकड़ा प्राथमिकता भगवान को मानेंगे या नहीं अगर आपको अंतरात्मा जवाब है तब आप भगवान को मांगे और भगवान को मारने का जरूरत नहीं है अगर आप खुद ने खुद को अपने आप को मानते हैं तो आप सच में भगवान को मानने क्योंकि आपका अंतरात्मा में जो खतरा दिल आत्मा भगवान अगर अपने आप पर विश्वास है आपने की रास्ता में चल रहे हैं आप माता-पिता का सम्मान कर रहे हैं उनका भरण-पोषण कर रहे हैं उनका चरणों में अपना अनुभव महसूस कर रहे हैं जरूरतमंदों को आप सेवा दे रहे हैं भूखा को खाना खिला रहे प्यासे को पानी पिला रहे हैं दूसरों को खुशी में खुशी हो रहे हैं दूसरों का दुख देखकर अपने आपको दुख महसूस कर रहे हैं यही तो अगर आप ऐसा सोच है ऐसा मानसिकता है ऐसा चिंता धारा है उसके अंदर भगवान है चाहते हैं अपने आपको मानी अपने पर विश्वास कीजिए दिखेगा धन्यवाद

chhat par aap ko mera namaskar aap ka sawaal hai bhagwan ko manana kyon zaroori hai kisne kaha ki bhagwan ko manana zaroori hai yah toh aapka par nirbhar kar raha aapka soch company pakada prathamikta bhagwan ko manenge ya nahi agar aapko antaraatma jawab hai tab aap bhagwan ko mange aur bhagwan ko maarne ka zarurat nahi hai agar aap khud ne khud ko apne aap ko maante hain toh aap sach me bhagwan ko manne kyonki aapka antaraatma me jo khatra dil aatma bhagwan agar apne aap par vishwas hai aapne ki rasta me chal rahe hain aap mata pita ka sammaan kar rahe hain unka bharan poshan kar rahe hain unka charno me apna anubhav mehsus kar rahe hain jarooratmandon ko aap seva de rahe hain bhukha ko khana khila rahe pyaase ko paani pila rahe hain dusro ko khushi me khushi ho rahe hain dusro ka dukh dekhkar apne aapko dukh mehsus kar rahe hain yahi toh agar aap aisa soch hai aisa mansikta hai aisa chinta dhara hai uske andar bhagwan hai chahte hain apne aapko maani apne par vishwas kijiye dikhega dhanyavad

छत पर आप को मेरा नमस्कार आप का सवाल है भगवान को मानना क्यों जरूरी है किसने कहा कि भगवान को

Romanized Version
Likes  280  Dislikes    views  1953
WhatsApp_icon
user

Ridhaan Panwar

Entrepreneur

2:54
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्वेश्चन है कि भगवान को मानना क्यों जरूरी है तो फ्रेंड पहले तुम्हें एक चीज क्लियर कर दूं कि यह कहीं नहीं लिखा हुआ कि भगवान को मारना जरूरी है यह कहीं आप पर थोपा नहीं गया है कि आपको भगवान को मानना ही मानना है नहीं मानेंगे तो ऐसा हो जाएगा नहीं मांगे तो आपको चेंज हो जाएगी यह कुछ हो जाएगा यह टोटली आफ इंडिपेंडेंट है कि आपको भगवान को मानना है या मान नहीं मानना है यह आपके ऊपर डिपेंड करता है आपकी सोच पर डिपेंड करता है अब क्वेश्चन आता है कि भगवान को मानना क्यों जरूरी जरूरी नहीं बोलूंगा कि मैं तो बोलूंगा कि भगवान को मारने का आपके लाइफ में क्या फायदे हैं क्या आपको इसके क्या फल मिल सकते हैं तो सबसे पहले तो फ्रेंड धरा बहुत अधिक ज्ञानी है या आपको किसी के सहारे की जरूरत नहीं है आपके अंदर इतना ज्ञान भरा पड़ा है तो आपको भगवान को मारने की कोई जरूरत बीएफ आपको तो अपने लिए भगवान से खुद को भगवान समझ कर अपनी लाइफ को लेट कर सकते हैं अगर इतनी अधिक ज्ञानी जैसे कि कितने कि खुद भगवान होते हैं सेकेंडरी अगर आप भगवान को मानते हैं तो आपकी लाइफ में एक से एक सुपीरियर पावर हमेशा आपके साथ रहती है वह कोई भी आपके लाइफ में कोई बुरी सिचुएशन साथ ही नहीं तो आप हमेशा पाते हैं कि वह मेरे साथ कंपनी का असली रूप दिलीप होता है विश्वास होता है श्रद्धा होती है कि मेरे भगवान मेरा साथ देंगे और मुझे एक मजबूत साल बनाएगी मेरे प्रॉब्लम से प्रॉब्लम साल करवाएंगे मेरे से और इसका कुछ न कुछ सलूशन मुझे देंगे विश्वास होता है जो एक भगवान की तरह काम करता है कि हां यह मेरा भगवान फ्रेंड्स वही जो बिलीफ होता है अपने भगवान का आराध्य का तो वही मेरे कल सुबह ही जादू करता है आपकी लाइफ में और आपको खुशियां देता है आपके आपको आपकी लाइफ को इतना जान की लाइट कम होता है तो कोई ज्यादा टेंशन नहीं लेने की जरूरत है क्योंकि भगवान आपके साथ होता है यह सब मान्यताएं लेकर आप चलते हैं रांची फ्लाइट को बहुत हल्के हल्के मां के आराम से मस्ती महिला इसको जीते

question hai ki bhagwan ko manana kyon zaroori hai toh friend pehle tumhe ek cheez clear kar doon ki yah kahin nahi likha hua ki bhagwan ko marna zaroori hai yah kahin aap par thopa nahi gaya hai ki aapko bhagwan ko manana hi manana hai nahi manenge toh aisa ho jaega nahi mange toh aapko change ho jayegi yah kuch ho jaega yah totally of independent hai ki aapko bhagwan ko manana hai ya maan nahi manana hai yah aapke upar depend karta hai aapki soch par depend karta hai ab question aata hai ki bhagwan ko manana kyon zaroori zaroori nahi boloonga ki main toh boloonga ki bhagwan ko maarne ka aapke life me kya fayde hain kya aapko iske kya fal mil sakte hain toh sabse pehle toh friend dhara bahut adhik gyani hai ya aapko kisi ke sahare ki zarurat nahi hai aapke andar itna gyaan bhara pada hai toh aapko bhagwan ko maarne ki koi zarurat bf aapko toh apne liye bhagwan se khud ko bhagwan samajh kar apni life ko late kar sakte hain agar itni adhik gyani jaise ki kitne ki khud bhagwan hote hain secondary agar aap bhagwan ko maante hain toh aapki life me ek se ek Superior power hamesha aapke saath rehti hai vaah koi bhi aapke life me koi buri situation saath hi nahi toh aap hamesha paate hain ki vaah mere saath company ka asli roop dilip hota hai vishwas hota hai shraddha hoti hai ki mere bhagwan mera saath denge aur mujhe ek majboot saal banayegi mere problem se problem saal karavaenge mere se aur iska kuch na kuch salution mujhe denge vishwas hota hai jo ek bhagwan ki tarah kaam karta hai ki haan yah mera bhagwan friends wahi jo belief hota hai apne bhagwan ka aradhya ka toh wahi mere kal subah hi jadu karta hai aapki life me aur aapko khushiya deta hai aapke aapko aapki life ko itna jaan ki light kam hota hai toh koi zyada tension nahi lene ki zarurat hai kyonki bhagwan aapke saath hota hai yah sab manyatae lekar aap chalte hain ranchi flight ko bahut halke halke maa ke aaram se masti mahila isko jeete

क्वेश्चन है कि भगवान को मानना क्यों जरूरी है तो फ्रेंड पहले तुम्हें एक चीज क्लियर कर दूं क

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  129
WhatsApp_icon
user

Babin Mukherjee Arup Kumar Mukherjee

Artist (Vocal Music) And IT professional

7:49
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार मैं अनूप कुमार मुखर्जी और बॉबी मुखर्जी पश्चिम बंगाल दुर्गापुर से बोल रहा हूं इंडिया से बोल रहा हूं लिखिए जब यह सृष्टि हुई उसके बहुत तह तक जाना होगा जब सृष्टि हुई यह बिग बम ब्लास्ट हुआ 30 पॉइंट बिलीयन ईयर्स एगो उसके बाद हमारा यह मिल्की वे बना मिल्की वे के पड़ोसी गैलेक्सी है एंड्रोमेडा और रंग गुलाल अभी तक हेमंत कैमरा हम लोग कहीं तक की खोज कर पाई है अभी बहुत कुछ जानना है सीखना है हम लोग का विज्ञान अभी उतना उतना उन्नत नहीं हुआ कि किसी और दुनिया का पता लगा सके हम लोग का भी अपने सौरमंडल सोलर सिस्टम के बारे में ही जानकारी अपना मिल्की वे जो हमारा गैलेक्सी है इसका एक ब्लैकहोल है उसके बारे में हम लोग कुछ नहीं जानते हैं इसका गुरुत्वाकर्षण बहुत अधिक होता है इसमें जो समझता है वह वापस नहीं आता है तो हम लोग एक ब्लैक होल की तरफ बढ़ रहे हैं जिंदगी जो आगे बढ़ रही है 16 की तरफ बढ़ रही है भगवान को मानना अस्तर पर डिपेंड करता है चाहे वह किसी भी धर्म से हो आप क्या हिंदू हो मुस्लिम हो सिख हो इसाई हो एक जीवन पद्धति है अपने ऊपर कोई तो है जो हमारे अगर हम सुपर ईयर हो जाए तो वह सब मैं किसी को शिकायत करूंगा अगर कुछ गलत होता है अपने ऊपर से भगवान तो है हम लोग आसानी से ऊपर वाला देखेगा ऊपर है ऊपर वाला मर्डर आसपास से 7.5 बिलियन में ईश्वर का वास करता है ह्यूमन बीइंग में और कई जिलों में हर तरह का जीवन में भगवान का बात करता है देखिए भगवान का मूल तत्व है प्यार और उसका जीवन के साथ उसका जो रिक्वायरमेंट है जीने के लिए जो चीज चाहिए भोजन पानी कपड़ा रोटी कपड़ा मकान यह मिल जाए यही बहुत है भगवान हर जगह हर व्यक्ति सर्वव्यापी भगवान है पृथ्वी के कण-कण में भगवान है उनके बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता है तो जिस भी आप धर्म से बिलॉन्ग करते हो उस आस्था को अपने निष्ठा से पूरा कीजिए और किसी को दुख मत दीजिए किसी को हानि मत कीजिए किसी को हानि करने से वह तो शायद अभिशाप नहीं देगा लेकिन उसका जो हाय लगेगा वह आपके जीवन में प्रभाव पड़ेगा लिखिए बुरा चीज को सिखाना नहीं पड़ता है ऊपर से नीचे की कोई भी चीज गिरने में समय नहीं लगता है लेकिन नीचे से ऊपर जाने में बहुत समय लगता है क्योंकि उसको ग्रेविटी के अगेंस्ट में जाना पड़ता है ग्रेविटी पत्ते ग्रह में प्रत्येक प्लेनेट में डिफरेंट होता है अगर पृथ्वी में आपका वजन 80 किलो है तो सामने 20 किलो होगा क्योंकि उसकी ग्रेविटी कम है उसी प्रकार बृहस्पति में यूपीटेट में आपका वजन और भी ज्यादा होगा यह तो बहुत बड़ी बात है यह बहुत ही फास्ट विषय है हमारा विषय है भगवान को मानना कुछ भी हो सुख में सुमिरन सब करे दुख में करे न कोई जो सुख में सुमिरन करे उसको खुद दुख क्यों हो हमेशा अपने ऊपर वालों को अपने गार्जियन को अपना सृष्टिकर्ता को अपने मां बाप को अपना जीवन जिसके अपना फैमिली को जिन्होंने यह जीवन दिया है आप जिंदा हो इसका कोई कारण है कि लोग के वजह से आप जिंदा हो तो इन लोगों का जितना हो सके सेवा कीजिए इन लोगों को सेवा कीजिए मतलब ऊपर से नहीं दिल से दिल से प्यार कीजिए को क्या जरूरत है क्या चाहिए उसके अनुसार से उनको कष्ट नहीं हो और हम लोग कोई भी दुख होता है तो भगवान को याद कर भगवान मुझे क्यों दुख दिया कभी सुख होता है भगवान को थैंक्यू बोलते हैं भगवान ने मुझे यह दिया वह दिया है सुख हमेशा सुख की खोज में रहना चाहिए सुख दो प्रकार के होते हैं वास्तव में खुशी एक होता है प्लेजर कुछ क्षण के लिए पेयजल होता है वह टेंपो रेडी होता है प्लेजर अरे होता है सुख अशोक हम लोग हम लोग चाहकर भी नहीं कर पाते हैं कि हर एक इंसान में शुभ सकती है अगर सूख सकती है एक शैतान है एक भगवान है हमेशा इन दोनों तत्वों में द्वंद चलता रहता है हम लोगों को हमेशा अपना शुभ शक्ति को पॉजिटिव एनर्जी को बढ़ाना चाहिए अशुभ एनर्जी को नेगेटिव एनर्जी को 2 मिनट करना चाहिए - चाहिए वह शुभ शक्ति ही भगवान है उस उस शक्ति हम लोग को मार्गदर्शन करता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है भगवान सबको सुख रखे इस विपत्ति की घड़ी में जब यह इतने लोग भाई भवनों को हम लोग मैंने खो दिया है हम लोगों ने करीब ढाई लाख विश्व भर में भारत में भी करीब डेढ़ हजार भाई बहनों को हम लोग ने खो दिया है इस कोविड-19 बीमारी के कारण अब तो यह इंक्वायरी की बात से कि यह मैन मेड डिजास्टर है वेयर प्राकृतिक कारण है तो अलग बात है बट जी बंद किसी को जीवन देना किसी को भूखे को रोटी देना अगर आपके समर्थ में हो कितने भी हो एक कविता हम लोगों ने पड़े 335 द ग्रेट धन गोल सिंपैथी किसी को एक भूखे को एक रोटी दे दो और उसको एक सोने का सिक्का दोष में बहुत फर्क होता है तो क्या करेगा सुना का सिक्का लेके जीवन के लिए ऑक्सीजन चाहिए पुराण चाहिए सांप चाहिए पानी चाहिए यही भगवान है और इसको और भी बनना चाहिए हम लोग कोई पंडित नहीं है हम लोग एक्सिडेंट है सीख रहे हैं जीवन के विक्रेता निबंध की जो एक्सपीरियंस है कोई हम लोग को यह शिक्षा दे रही है सीख लेना चाहिए शिक्षा देना चाहिए और उसको जीवन में एम्प्लीमेंट करना चाहिए किताबों में तो बहुत कुछ लिखा हुआ है कहां तक हम लोग इंप्लीमेंट किए हैं बड़ी बात है नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका जय हिंद जय भारत

namaskar main anup kumar mukherjee aur bobby mukherjee paschim bengal durgapur se bol raha hoon india se bol raha hoon likhiye jab yah shrishti hui uske bahut tah tak jana hoga jab shrishti hui yah big bomb blast hua 30 point biliyan years ego uske baad hamara yah milki ve bana milki ve ke padosi galaxy hai andromeda aur rang gulal abhi tak hemant camera hum log kahin tak ki khoj kar payi hai abhi bahut kuch janana hai sikhna hai hum log ka vigyan abhi utana utana unnat nahi hua ki kisi aur duniya ka pata laga sake hum log ka bhi apne saurmandal solar system ke bare me hi jaankari apna milki ve jo hamara galaxy hai iska ek black hole hai uske bare me hum log kuch nahi jante hain iska gurutvaakarshan bahut adhik hota hai isme jo samajhata hai vaah wapas nahi aata hai toh hum log ek black hole ki taraf badh rahe hain zindagi jo aage badh rahi hai 16 ki taraf badh rahi hai bhagwan ko manana aster par depend karta hai chahen vaah kisi bhi dharm se ho aap kya hindu ho muslim ho sikh ho isai ho ek jeevan paddhatee hai apne upar koi toh hai jo hamare agar hum super year ho jaaye toh vaah sab main kisi ko shikayat karunga agar kuch galat hota hai apne upar se bhagwan toh hai hum log aasani se upar vala dekhega upar hai upar vala murder aaspass se 7 5 billion me ishwar ka was karta hai human being me aur kai jilon me har tarah ka jeevan me bhagwan ka baat karta hai dekhiye bhagwan ka mul tatva hai pyar aur uska jeevan ke saath uska jo requirement hai jeene ke liye jo cheez chahiye bhojan paani kapda roti kapda makan yah mil jaaye yahi bahut hai bhagwan har jagah har vyakti sarvavyapi bhagwan hai prithvi ke kan kan me bhagwan hai unke bagair ek patta bhi nahi hilata hai toh jis bhi aap dharm se Belong karte ho us astha ko apne nishtha se pura kijiye aur kisi ko dukh mat dijiye kisi ko hani mat kijiye kisi ko hani karne se vaah toh shayad abhishap nahi dega lekin uska jo hi lagega vaah aapke jeevan me prabhav padega likhiye bura cheez ko sikhaana nahi padta hai upar se niche ki koi bhi cheez girne me samay nahi lagta hai lekin niche se upar jaane me bahut samay lagta hai kyonki usko gravity ke against me jana padta hai gravity patte grah me pratyek planet me different hota hai agar prithvi me aapka wajan 80 kilo hai toh saamne 20 kilo hoga kyonki uski gravity kam hai usi prakar brihaspati me UPTET me aapka wajan aur bhi zyada hoga yah toh bahut badi baat hai yah bahut hi fast vishay hai hamara vishay hai bhagwan ko manana kuch bhi ho sukh me sumiran sab kare dukh me kare na koi jo sukh me sumiran kare usko khud dukh kyon ho hamesha apne upar walon ko apne guardian ko apna srishtikarta ko apne maa baap ko apna jeevan jiske apna family ko jinhone yah jeevan diya hai aap zinda ho iska koi karan hai ki log ke wajah se aap zinda ho toh in logo ka jitna ho sake seva kijiye in logo ko seva kijiye matlab upar se nahi dil se dil se pyar kijiye ko kya zarurat hai kya chahiye uske anusaar se unko kasht nahi ho aur hum log koi bhi dukh hota hai toh bhagwan ko yaad kar bhagwan mujhe kyon dukh diya kabhi sukh hota hai bhagwan ko thainkyu bolte hain bhagwan ne mujhe yah diya vaah diya hai sukh hamesha sukh ki khoj me rehna chahiye sukh do prakar ke hote hain vaastav me khushi ek hota hai pleasure kuch kshan ke liye paijaal hota hai vaah tempo ready hota hai pleasure are hota hai sukh ashok hum log hum log chahkar bhi nahi kar paate hain ki har ek insaan me shubha sakti hai agar sukh sakti hai ek shaitaan hai ek bhagwan hai hamesha in dono tatvon me dwand chalta rehta hai hum logo ko hamesha apna shubha shakti ko positive energy ko badhana chahiye ashubh energy ko Negative energy ko 2 minute karna chahiye chahiye vaah shubha shakti hi bhagwan hai us us shakti hum log ko margdarshan karta hai aur aage badhne ki prerna deta hai bhagwan sabko sukh rakhe is vipatti ki ghadi me jab yah itne log bhai bhavano ko hum log maine kho diya hai hum logo ne kareeb dhai lakh vishwa bhar me bharat me bhi kareeb dedh hazaar bhai bahnon ko hum log ne kho diya hai is kovid 19 bimari ke karan ab toh yah enquiry ki baat se ki yah man made disaster hai where prakirtik karan hai toh alag baat hai but ji band kisi ko jeevan dena kisi ko bhukhe ko roti dena agar aapke samarth me ho kitne bhi ho ek kavita hum logo ne pade 335 the great dhan gol simpaithi kisi ko ek bhukhe ko ek roti de do aur usko ek sone ka sikka dosh me bahut fark hota hai toh kya karega suna ka sikka leke jeevan ke liye oxygen chahiye puran chahiye saap chahiye paani chahiye yahi bhagwan hai aur isko aur bhi banna chahiye hum log koi pandit nahi hai hum log eksident hai seekh rahe hain jeevan ke vikreta nibandh ki jo experience hai koi hum log ko yah shiksha de rahi hai seekh lena chahiye shiksha dena chahiye aur usko jeevan me empliment karna chahiye kitabon me toh bahut kuch likha hua hai kaha tak hum log implement kiye hain badi baat hai namaskar bahut dhanyavad aapka jai hind jai bharat

नमस्कार मैं अनूप कुमार मुखर्जी और बॉबी मुखर्जी पश्चिम बंगाल दुर्गापुर से बोल रहा हूं इंडिय

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  67
WhatsApp_icon
user

Mahesh Kumar

Engineeing Draughtsman

0:27
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान को माना इसलिए जरूरी है क्योंकि कहा गया कि कण-कण में भगवान है आप में भी भगवान है हर वस्तु में भगवान है आप हर एक पशु पक्षी मनुष्य सभी में भगवान है इसलिए भगवान को मानना चाहिए

bhagwan ko mana isliye zaroori hai kyonki kaha gaya ki kan kan me bhagwan hai aap me bhi bhagwan hai har vastu me bhagwan hai aap har ek pashu pakshi manushya sabhi me bhagwan hai isliye bhagwan ko manana chahiye

भगवान को माना इसलिए जरूरी है क्योंकि कहा गया कि कण-कण में भगवान है आप में भी भगवान है हर व

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  110
WhatsApp_icon
user

Aditya Dubey

Motivation Speaker/ Physiologist Expert

1:34
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है क्या भगवान को मानना जरूरी है कौन कहता है कि आप भगवान को मांगी है भगवान खुद नहीं कहते कि आप मुझे मांगी है भगवान ने आपको धरती पर जिस काम के लिए भेजा है भगवान तेरे को वह चाहता है आप चक्कर में करिए आप अपने माता-पिता का सम्मान करिए उनके चरणों में सिर झुका यह उनकी उनकी उन्हें अपनी पलकों पर बिठा कर रखी है हमेशा दीन दुखियों के तहत आ करिए भूखों को खाना खिलाया जानवरों से प्यार करिए निर्धनों की मदद करिए हमेशा अच्छे कर्म करिए यही सबसे बड़ी सेवा होगी यही भगवान यही चाहता इसलिए आपको धरती पर भेजा है ना कि भगवान खुद आपसे कहता है कि आप भगवान को बानी है आप अपनी अंतरात्मा कुमारी आप अपनी अंतरात्मा पर जब तक भरोसा नहीं करेंगे तब तक आप भगवान को नहीं मानते हैं कि आप अपनी आता पर भरोसा करते हैं हम पर भरोसा करते हैं अपने कर्मों को भरोसा करते हैं तो बिल्कुल आप भगवान को भी मानते हैं फिर भले आप रोज मंदिर जाकर माथा नाटेकर भगवान को मारने का अर्थ यह नहीं होता कि आप रोज मंदिर जा रहे माथा टेक रहे यदि कोई व्यक्ति रोज मंदिर नहीं जा रहा है तू क्या आप नास्तिक नहीं कह सकते लेकिन हां यदि वह व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति निष्ठावान है अपने माता पिता के प्रति कर्तव्य वन है तो बिल्कुल वह व्यक्ति मंदिर ना चाहते हुए भी भगवान को मानता है

aapka sawaal hai kya bhagwan ko manana zaroori hai kaun kahata hai ki aap bhagwan ko maangi hai bhagwan khud nahi kehte ki aap mujhe maangi hai bhagwan ne aapko dharti par jis kaam ke liye bheja hai bhagwan tere ko vaah chahta hai aap chakkar me kariye aap apne mata pita ka sammaan kariye unke charno me sir jhuka yah unki unki unhe apni palakon par bitha kar rakhi hai hamesha din dukhiyon ke tahat aa kariye bhukhon ko khana khilaya jaanvaro se pyar kariye nirdhanon ki madad kariye hamesha acche karm kariye yahi sabse badi seva hogi yahi bhagwan yahi chahta isliye aapko dharti par bheja hai na ki bhagwan khud aapse kahata hai ki aap bhagwan ko bani hai aap apni antaraatma kumari aap apni antaraatma par jab tak bharosa nahi karenge tab tak aap bhagwan ko nahi maante hain ki aap apni aata par bharosa karte hain hum par bharosa karte hain apne karmon ko bharosa karte hain toh bilkul aap bhagwan ko bhi maante hain phir bhale aap roj mandir jaakar matha natekar bhagwan ko maarne ka arth yah nahi hota ki aap roj mandir ja rahe matha take rahe yadi koi vyakti roj mandir nahi ja raha hai tu kya aap nastik nahi keh sakte lekin haan yadi vaah vyakti apne karmon ke prati nisthawan hai apne mata pita ke prati kartavya van hai toh bilkul vaah vyakti mandir na chahte hue bhi bhagwan ko maanta hai

आपका सवाल है क्या भगवान को मानना जरूरी है कौन कहता है कि आप भगवान को मांगी है भगवान खुद नह

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  70
WhatsApp_icon
user
3:37
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान को मानना क्यों जरूरी है मित्र भगवान को मानना इसलिए जरूरी है क्योंकि हम को अपने ऊपर अगर विश्वास करना है अगर अपने को जीवित मानना है तो भगवान को मानना पड़ेगा क्योंकि परमात्मा तो कण-कण में व्याप्त साल के रूप में उस ईश्वर के स्वरूप को हम विभिन्न रूपों मानते हैं और शायद भगवान को मानने चाहे संबल मिलता आधार मिलता है दुनिया में सारे आधार खत्म हो जाए किसी का सहारा व्यक्ति का सहा खत्म हो जाए भगवान का सहारा अगर विश्वास के साथ आप करते हैं ईश्वर को अपना साथी मान लेते हैं माता-पिता मान लेते हैं अपना भाई माल लेते हैं सट्टा मान लेते हैं क्योंकि कहा भी गया तो मैं माता च पिता को मोटे मनुष्य खत में क्यों दर्द होता है भगवान तुम सब कुछ हो तुम विद्या रूप में हो तो धन के रूप में हो माता पिता के रूप में हो ईश्वर को मानना इसलिए जरूरी है कि हम आपको एक संबल मिलता है ईश्वर के अस्तित्व को मारना जरूरी है ना कि मूर्तियों को मारना जरूरी है ना कि उनके स्वरूप भगवान ना जरूरी आईसर है पर मैं वह प्राण के रूप में सब जगह आपकी दो संसार में प्राणी जीवित हैं वनस्पतियां हरी हैं और प्रशिक्षित हैं कहते हैं कि निश्चित रूप से वह ईश्वर विद्यमान है नहीं तो जिस दिन ईश्वर का अस्तित्व खत्म हो जाएगा तो सारी दुनिया सारा ब्रह्मांड अपने आप मिट जाएगा सारा संरक्षण हमारे अंदर से वह परमात्मा निकल जाता है वहां हमारी निकल जाती है तो हम भी मृत समान हो जाते हैं और फिर शुरू हो जाता है इसलिए भाई विश्वास करके भगवान को मानिए आस्तिक बनी है इससे आपके अंदर शब्दाचा रहेगा और आपका कल्याण होगा आप अच्छे रास्ते को करेंगे अपने को आगे बढ़ाएंगे अपने बच्चों को आगे बढ़ाएंगे अपने परिवार को आगे बढ़ाएं भगवान के पुत्र को न करना अच्छी बात नहीं है भगवान हमेशा आपके साथ है यह गाढवाचे भगवान को मारना

bhagwan ko manana kyon zaroori hai mitra bhagwan ko manana isliye zaroori hai kyonki hum ko apne upar agar vishwas karna hai agar apne ko jeevit manana hai toh bhagwan ko manana padega kyonki paramatma toh kan kan me vyapt saal ke roop me us ishwar ke swaroop ko hum vibhinn roopon maante hain aur shayad bhagwan ko manne chahen sambal milta aadhar milta hai duniya me saare aadhar khatam ho jaaye kisi ka sahara vyakti ka saha khatam ho jaaye bhagwan ka sahara agar vishwas ke saath aap karte hain ishwar ko apna sathi maan lete hain mata pita maan lete hain apna bhai maal lete hain satta maan lete hain kyonki kaha bhi gaya toh main mata ch pita ko mote manushya khat me kyon dard hota hai bhagwan tum sab kuch ho tum vidya roop me ho toh dhan ke roop me ho mata pita ke roop me ho ishwar ko manana isliye zaroori hai ki hum aapko ek sambal milta hai ishwar ke astitva ko marna zaroori hai na ki murtiyon ko marna zaroori hai na ki unke swaroop bhagwan na zaroori aisar hai par main vaah praan ke roop me sab jagah aapki do sansar me prani jeevit hain vanaspatiyan hari hain aur prashikshit hain kehte hain ki nishchit roop se vaah ishwar vidyaman hai nahi toh jis din ishwar ka astitva khatam ho jaega toh saari duniya saara brahmaand apne aap mit jaega saara sanrakshan hamare andar se vaah paramatma nikal jata hai wahan hamari nikal jaati hai toh hum bhi mrit saman ho jaate hain aur phir shuru ho jata hai isliye bhai vishwas karke bhagwan ko maniye astik bani hai isse aapke andar shabdacha rahega aur aapka kalyan hoga aap acche raste ko karenge apne ko aage badhaenge apne baccho ko aage badhaenge apne parivar ko aage badhaye bhagwan ke putra ko na karna achi baat nahi hai bhagwan hamesha aapke saath hai yah gadhvache bhagwan ko marna

भगवान को मानना क्यों जरूरी है मित्र भगवान को मानना इसलिए जरूरी है क्योंकि हम को अपने ऊपर अ

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  127
WhatsApp_icon
user

Shipra Ranjan

Life Coach

1:00
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नापतोल के भगवान को मानना क्यों जरूरी है आपको बता दें कि ऐसा कोई भी कानून नहीं है कोई भी ऐसा नियम नहीं है कि आप को मजबूर किया जाए क्या को भगवान को मानना ही है आस्था है आपकी कि आप अपनी ईश्वर को मानते हैं उनकी पूजा करते हैं उनको जाकर के मंदिरों में मस्जिदों में सब जगह चेक करके घूमते हैं यह मात्र आस्था होती है इंसान की जान इंसान दुखी होता है परेशान होता है तो सबसे पहले से ही सोच ही याद आती है लेकिन अगर आप इन सब चीजों में नहीं मानते हैं अगर आप विश्वास ईश्वर में नहीं है भगवान को भी पूछते हैं तो बिल्कुल आपको कोई पोस्ट नहीं कर सकता है कि आप उस चीज को माने आस्था है अगर आपकी आस्था है तो अच्छी बात है नहीं है तो भी कोई बात नहीं है लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि संसार में से बहुत सारे लोग हैं जो ईश्वर में आस्था नहीं रखते हैं और ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जो ईश्वर में आस्था रखते हैं तो यह आपके ऊपर डिपेंड करता है कि भगवान को मानना है या नहीं मानना है आपका दिन शुभ रहे धन्यवाद

naptol ke bhagwan ko manana kyon zaroori hai aapko bata de ki aisa koi bhi kanoon nahi hai koi bhi aisa niyam nahi hai ki aap ko majboor kiya jaaye kya ko bhagwan ko manana hi hai astha hai aapki ki aap apni ishwar ko maante hain unki puja karte hain unko jaakar ke mandiro mein masjidon mein sab jagah check karke ghumte hain yah matra astha hoti hai insaan ki jaan insaan dukhi hota hai pareshan hota hai toh sabse pehle se hi soch hi yaad aati hai lekin agar aap in sab chijon mein nahi maante hain agar aap vishwas ishwar mein nahi hai bhagwan ko bhi poochhte hain toh bilkul aapko koi post nahi kar sakta hai ki aap us cheez ko maane astha hai agar aapki astha hai toh achi baat hai nahi hai toh bhi koi baat nahi hai lekin aapko yah pata hona chahiye ki sansar mein se bahut saare log hain jo ishwar mein astha nahi rakhte hain aur aise bhi bahut saare log hain jo ishwar mein astha rakhte hain toh yah aapke upar depend karta hai ki bhagwan ko manana hai ya nahi manana hai aapka din shubha rahe dhanyavad

नापतोल के भगवान को मानना क्यों जरूरी है आपको बता दें कि ऐसा कोई भी कानून नहीं है कोई भी ऐस

Romanized Version
Likes  223  Dislikes    views  2785
WhatsApp_icon

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान को मानना इसलिए जरूरी है कि भगवान हमारे हमें आत्मबल प्रदान करते हैं उनका कोई विकल्प नहीं है वह हमारी आत्मा में बसे हैं हमें ज्ञान देते हैं हमें स्वास्थ्य प्रदान करते हैं हमें चेतना शक्ति देते हैं हमें परिस्थितियों से निपटने के लिए साहस देते हैं इसलिए भगवान को माननीय और भगवान को जब श्रद्धा और भक्ति शब्द मानेंगे तो आपका संभल मजबूत रहेगा और कभी आप हार का मुंह में देखें नेट माता-पिता आपके बिल्कुल सापेक्ष भगवान हैं और यह भगवान जो आपकी आत्मा में बसे हैं या आपको श्वास लेते हैं चेतना शक्ति देते हैं बढ़ने का साहस देते हैं और संसार को समझने का मौका देते हैं इसलिए मानवता की सेवा कीजिए और जीवन में सुख का आनंद कीजिए अध्यात्म कीजिए योगा कीजिए प्राणायाम कीजिए मेडिटेशन कीजिए यह सब सारी चीजें जो है यह भगवान को प्राप्ति का एक साधन है अध्यात्म बहुत अच्छी चीजें गीता पढ़िए इन सब चीजों से थोड़ा सम्मान मस्तिष्क में आपके प्रखरता आएगी और भगवान पर भरोसा अच्छा मतलब आपका जमेला भगवान का कोई विकल्प नहीं भगवान तो केवल विश्वास पर हैं जिस प्रकार से सूक्ष्म शरीर होता है उसी प्रकार से भगवान स्वच्छता की चीज है जैसे हवन करते हैं तो उसके धूप में खुश रहते हैं दूध के रहते हैं शुभ हो जान लेते हैं आपकी आत्मा में रहते हैं

bhagwan ko manana isliye zaroori hai ki bhagwan hamare hamein atmabal pradan karte hain unka koi vikalp nahi hai vaah hamari aatma me base hain hamein gyaan dete hain hamein swasthya pradan karte hain hamein chetna shakti dete hain hamein paristhitiyon se nipatane ke liye saahas dete hain isliye bhagwan ko mananiya aur bhagwan ko jab shraddha aur bhakti shabd manenge toh aapka sambhal majboot rahega aur kabhi aap haar ka mooh me dekhen net mata pita aapke bilkul sapeksh bhagwan hain aur yah bhagwan jo aapki aatma me base hain ya aapko swas lete hain chetna shakti dete hain badhne ka saahas dete hain aur sansar ko samjhne ka mauka dete hain isliye manavta ki seva kijiye aur jeevan me sukh ka anand kijiye adhyaatm kijiye yoga kijiye pranayaam kijiye meditation kijiye yah sab saari cheezen jo hai yah bhagwan ko prapti ka ek sadhan hai adhyaatm bahut achi cheezen geeta padhiye in sab chijon se thoda sammaan mastishk me aapke prakharata aayegi aur bhagwan par bharosa accha matlab aapka jamela bhagwan ka koi vikalp nahi bhagwan toh keval vishwas par hain jis prakar se sukshm sharir hota hai usi prakar se bhagwan swachhta ki cheez hai jaise hawan karte hain toh uske dhoop me khush rehte hain doodh ke rehte hain shubha ho jaan lete hain aapki aatma me rehte hain

भगवान को मानना इसलिए जरूरी है कि भगवान हमारे हमें आत्मबल प्रदान करते हैं उनका कोई विकल्प न

Romanized Version
Likes  187  Dislikes    views  1630
WhatsApp_icon
user

Dr Pradeep Singh Shaktawat

Asst. Prof. (CS) | Alternative Healing Therapiest

0:40
Play

Likes  5  Dislikes    views  88
WhatsApp_icon
user

अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

2:16
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मानना उसे पड़ता है जिसे हम जानते नहीं हैं आप जरा आंख बंद करके बैठे हैं आप क्यों जिंदा है क्योंकि आपको ऑक्सीजन बाहर से आ रहा है और आपके शरीर में एक सिस्टम बना हुआ है उस ऑक्सीजन को लेकर आपके सभी सेल्स में जाकर वहां से कार्बन को क्लीन कर कि वह बाहर गया और आप सो ही रहे हैं आप जाग रहे हैं वह अपना काम नॉनस्टॉप करते रहती है आपका हृदय आपका फेफड़ा निरंतर प्रतिपल आप सोए रहे हैं आप जागे हैं निरंतर क्रियाशील है और जो जिस दिन आपको यह जिंदगी अलविदा कहने लगती है तो आपको इस जिंदगी से कितना प्यार आता है जो जिंदगी जो शक्ति आपको जीवन में जन्म दिया जिसने जो आपको प्रतिपल संभाल रही है श्वास देकर आप गुस्सा अब उसको गाली बकती फिर देखेंगे भगवान को तो वह आपको प्रतिपल अपनी उर्जा भीतर दे रहा है और उर्जा से आपके जीवन को सुंदर उपवन बगिया को इस संसार को देखने का मौका दे रहा है इसलिए वह महसूस हो रहा है आपके भीतर आ रही मानने की क्या जरूरत है अपनी श्वास को ही अपने भगवान की तरह देखना सिर्फ स्वास्थ्य की तराई भगवान आया भगवान से शब्द है भाग मने होता है योनि जहां से जन्म होता है मारा तो परमात्मा जन्म देने वाला है भगवान है इसलिए चीजों के अर्थ को शब्दों के अर्थ को समझिए भगवान कोई व्यक्ति नहीं बैठा हूं भगवान उस परम शक्ति का इशारा है जो हमें जन्म देती है संभालती है और जब हम पुराने हो जाते हैं तो हमें रूपांतरित कर के नए जीवन की ओर ले जाती है आशा है कि आपको इन बातों से थोड़ा सा इशारा मिलेगा और आप भगवान को जानने की शुरुआत करेंगे वही धड़क रहा है आपके भीतर में इतना भाजपा स्नेहा

manana use padta hai jise hum jante nahi hain aap zara aankh band karke baithe hain aap kyon zinda hai kyonki aapko oxygen bahar se aa raha hai aur aapke sharir me ek system bana hua hai us oxygen ko lekar aapke sabhi sales me jaakar wahan se carbon ko clean kar ki vaah bahar gaya aur aap so hi rahe hain aap jag rahe hain vaah apna kaam nonstop karte rehti hai aapka hriday aapka fefda nirantar pratipal aap soye rahe hain aap jago hain nirantar kriyasheel hai aur jo jis din aapko yah zindagi alvida kehne lagti hai toh aapko is zindagi se kitna pyar aata hai jo zindagi jo shakti aapko jeevan me janam diya jisne jo aapko pratipal sambhaal rahi hai swas dekar aap gussa ab usko gaali bakati phir dekhenge bhagwan ko toh vaah aapko pratipal apni urja bheetar de raha hai aur urja se aapke jeevan ko sundar upwan BAGIYA ko is sansar ko dekhne ka mauka de raha hai isliye vaah mehsus ho raha hai aapke bheetar aa rahi manne ki kya zarurat hai apni swas ko hi apne bhagwan ki tarah dekhna sirf swasthya ki tarai bhagwan aaya bhagwan se shabd hai bhag mane hota hai yoni jaha se janam hota hai mara toh paramatma janam dene vala hai bhagwan hai isliye chijon ke arth ko shabdon ke arth ko samjhiye bhagwan koi vyakti nahi baitha hoon bhagwan us param shakti ka ishara hai jo hamein janam deti hai sambhaalati hai aur jab hum purane ho jaate hain toh hamein rupantarit kar ke naye jeevan ki aur le jaati hai asha hai ki aapko in baaton se thoda sa ishara milega aur aap bhagwan ko jaanne ki shuruat karenge wahi dhadak raha hai aapke bheetar me itna bhajpa sneha

मानना उसे पड़ता है जिसे हम जानते नहीं हैं आप जरा आंख बंद करके बैठे हैं आप क्यों जिंदा है क

Romanized Version
Likes  7  Dislikes    views  165
WhatsApp_icon
user

मीनाक्षी शर्मा

Enterpreneur, Author, Teacher, Motivational Speaker, Career Counsellor.

0:22
Play

Likes  7  Dislikes    views  115
WhatsApp_icon
user

Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

1:07
Play

Likes  261  Dislikes    views  2861
WhatsApp_icon
user

J.P. Y👌g i

Psychologist

9:40
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान को मानना क्यों जरूरी है प्रश्न है तो यह है कि भगवान को मानना जरूरी है या नहीं है लेकिन जब तक कोई संभावित ऐसी परिकल्पना हमारी इच्छा बनती है क्योंकि यह एक समाज का विषय होता है और इसके प्रति हमारा मत ललित हो जाते हैं कि ईश्वर नाम की कोई सतरा है जो कि सुप्रीम है और उसकी चाहत के अंदर दर्द जब हम पढ़ते हैं तो कोई कुछ न कुछ उपलब्धि होती है तो मैं एक दूसरे तरीके से समझाना चाह रहा हूं कि जिस प्रकार एक हम सिद्धांत बनाते हैं टोपी को मारने के लिए भी की परिकल्पना का था हम कर डालते हैं और और यही भगवान का एक रूप है कि हम भगवान को मानने से पहले अपने आपको जानने की जरूरत होती है और क्योंकि यह एक ऐसा सब्जेक्ट है कि इस का आस्वादन सिर्फ अंत करण और अपने विकास कर्म की ओर नियुक्ति की जाती हैं क्योंकि यह एक जैसे मैंने पूर्व में कहा है कि एक सॉल्व करने के लिए भी की परिकल्पना करी जाती है और बाद में एक ही वजह बता आवश्यकता नहीं होती है तो यह आधार बनता है कि अगर हम ऐसा विकल्प रखते हैं कि ईश्वर है तो मानने का तो प्रयोजन अपने अपने दिमाग से कई तरह का हो सकता है के बाद संतरे के लाभ होते और कॉन्फिडेंस बड़ा रहता है और दूसरी बात हम अपने आप को किसी सत्ता से जुड़े हुए होते हैं तो उसमें हमारे कोई यह दामन प्रभाव बना रहता है कि हमारा कोई साक्षी करना या किसी आधार पर हम अपने आप को चांस बनाते हैं और जो काम साक्षी करण उसके आधार पर रख देते हैं कि अगर हम अपने अंतरात्मा में कोई काम कर रहे हैं तो उसके साक्षी के लिए ईश्वर है और हम उसमें अपने आपको निर्दोष अवस्था में स्थापित रख रहे हैं और सृष्टि की कुछ ऐसी व्यवस्था प्रणाली होती है जिसने हमें संतुष्टि मिलती है शांति भी मिलती है क्योंकि हम उसके आश्रित रह करके अपने आप आपके धैर्य को बना लेते हैं तो देवता भी हमें इसी कारण से मिलता है कि कोई न कोई हमारी संरक्षित भावनाएं होती है तो भगवान को मानना यही जरूरी है कि अगर अगर हमें ऐसा ऑप्शन मानकर कहीं उसमें अपने आप की अवधारणा बना लेते हैं तो वह हमारे लिए फायदे ही रूप में होता है इसमें कोई घाटा नहीं होता लेकिन अब जब हम कभी-कभी हॉपलेस हो जाते हैं लाइफ में लोग डिप्रेशन में जाते हैं तो उनको कोई सहारा गतिविधि नहीं मिलता तो यह का श्रेय करके चमन जाता है लेकिन रही बात दूसरी चीज है कि भगवान को साथ एक साक्षात्कार करना यह एक दूसरी विधि बनती है फिलहाल हमें इतना देकर भरोसे पर आ जाते हैं कि कोई ना कोई ऐसी व्यवस्था में है जो न्याय के सूत्रों में जगत को बांधे हुए हैं और और कर्म परिणामों को सतावे देगा क्योंकि आजकल के रूप लिस्ट पैसे से लोग होते हैं जो अपनी मनमानी ढंग से उत्पीड़न करते हैं और निर्दोषों के प्रचार होता रहता है तो ऐसे लोग जिनको कोई सहारा नहीं मिलता है ओवैसी सारे के द्वारा अपने को संतोष पाते हैं तो ईश्वर की सत्ता है लेकिन उसके बीच में बहुत ही सृष्टि में आई है जो उत्पीड़न को खत्म करती और कभी-कभी अकस्मात उनके अंदर कुछ दिव्या ऐसी घटनाएं घट फ्री है या उसे दया धारक ऋतिक दिव्यता है हैं जो संकलन होकर उनका निर्माण करने में सहयोग देते हैं तो ऐसी बात नहीं है कि जहां कुछ नहीं है वहां वहां कुछ भी नहीं है सिर्फ एक अपनी अवधारणा के ऊपर बात है मानसिकता के प्रभात है तो मानसिकता की परिधि में अपने आप को जिद आकाश के अंतिम छोर तक जो जो जानते हैं वह विषय वासना और अपने भटकाव से रहित हो जाते उन्नत की दशा में जाते हैं तो कई लोग अपने समूह जीवन की विवेचना में सोचते हैं विचार मनन करते हैं कि मैं हूं क्या और मेरे अंदर आज तक का सुख क्या है और मैं क्या ईश्वर में हूं तो वह जैसा ध्यान करते हैं तो उन को कुछ दिन के अंदर ऐसी चीजें आती हैं जो बहुत कबाड़ की तरह रहता है और अपने विचलित हो जाते कि वास्तव में जीवन एक नरक की भांति रहा है और वह वहीं स्वरूप को बार-बार उनके चित्र में प्रकाशित होने लगता है कि मैं यह हूं तो यह सब तोड़ने के लिए बहुत जरूरी होता है क्या यह अनिश्चित को तोड़ेंगे यानी योग्य पद्धति है योग चित्त वृत्ति निरोध है मतलब ऐसी भावनाएं जो हमारे अंदर आदित हो करके हमें अवधारणा में निश्चित करती हैं जो गलत होती है तुझको हम भेजते हैं तो बजने का मतलब भगवान के भाव में उसका बार-बार दिव्य अनुज शर्मा स्मरण के अंदर बार बार जब हम आरतियां प्रेषित करते हैं तो हमारे को भाव की उद्दीपन होती है क्योंकि दुनिया के अंदर यही है कि जो भावनाएं होती हैं वहीं उनके अंदर भाव की संवेदना जागृत होती है तो उन सुविधाओं से यूं ही स्थिति बना रखता है अगर हमें दिव्यता की कोई अनुभूति स्तर बनाना है तो ऐसी चीजों की जरूरत होती है जो भगवान के नाम से माना गया है और यही चीज है कि हर धर्म के अंदर उस विशेष प्रधान संत जो ईश्वर गॉड और इत्यादि नामों से विभिन्न रूप से माने गए हैं तो इन चीजों का नियोजन होता है तो इसमें और उनके नाम के अंदर भी एक बहुत बड़ा असर होता है क्योंकि देश भाषा में अभिनेता आती है तो लेकिन जो हमारे इंडिकेट होता है वह उसी परम तत्व के ऊपर जाता है कि जो एक एक ग्रुप में मतलब शृष्टि में अपनाना प्रभुत्व बनाया हुआ है वह बीवी भी भेजना मंडल है जिसको हम ईश्वर बोलते हैं और यह शहर के बारे में यह भी होते जहां मनुष्य की एबिलिटी खत्म हो जाती है क्षमता खत्म हो जाती है दिमाग की परिधि अपने आप में संकुचित हो जाती है तो हम ऐसे भी सुधार की और भंजन करने के लिए सामान मिलता है ईश्वरी तत्व के ऊपर जो काल देश दिशा से भी परीक्षण नहीं तो ऐसी विवेचना के आधार पर हम अपने आप को विवाह व्यापकता के रूप में निर्धारित करते हैं और हमारा सलाम बिगड़ जाता है ईश्वर को मानना बहुत ही है अच्छा होता है उधर आम होता है क्योंकि उसके अंदर छुपे मिर्चिया नहीं रह जाती तो वह एक विकास क्रम में विराट भर्तियों में इंसान अपने आप को सहयोग करता है तो उसकी जो भी भेजना है बढ़ जाती है तो अपने आप को डायल अप में जाने विकास करने के लिए आवश्यक होती है कि हम किसी ना किसी चीज का अनुकरण करते हैं तो इसे जब ऐसी दीवाना की सुप्रीम भावना कि हम अपने हृदय में अनुकरण व्यवस्था बनाते हैं तो सूत्र स्वता ही प्राप्त होने लग दिया जब हम इस मार्ग में चलते हैं और जो आत्मबल है वह हमें जरूरी प्राप्त होता रहता है जिसके कारण हम सामान्य गतिविधियों से थोड़ा विशेष करके हमारे अंदर समर्थ की व्यापक रहती है और उसी के कारण से हम एक आदर्श बड़े और अंकुर ने भी बन सकते हैं क्योंकि समाज में देखा देखी कहीं ज्यादा असर होता है तो अच्छे भाव में अच्छे विचारों में अच्छी चीजों में अगर हम कोई भावनाएं संप्रेषित में लीन होते हैं तो इसके लिए कोई अनुचित बात नहीं है यह अच्छा है पहले ही चाहिए कि भगवान को मानना जरूरी है वह हमारे लिए की स्पीच और बुद्धि के दायरे को बढ़ाता है और सामंत को बढ़ाता है और रही बात तो विवेचना में अगर हम इसके कोई अभी तक बगैरा गया का वह विमर्श करेंगे तो इसमें फिर उलझन बनती है तो इससे हिरदेपुर में सौहार्द की भूमि के अंदर अपने आप को ऐसी परम सत्ता के लिए अनुप्रिया बनना चाहिए और जिससे कि हमारा बल और हमारा आत्म संतोष विकासशील आकाश में निर्माण होगा यह सारी चीजें हैं भगवान को मानना जरूरी इसलिए होता है कि जब मनुष्य जीवात्मा सुनने में होती असहाय दशा में होती है तो कहीं ना कहीं वह ऐसे आश्रय की तलाश करती है तो जिसमें और लेडी जीवन में हरियाली अवधारणाएं बनी हुई है और उसमें परिपक्व हो चुके हैं तो वह निर्भय जगत में जीते हैं और सत मार्ग में अपने जीवात्मा के उद्धार के लिए निर्वाह करते हैं और यही सर्व श्रेष्ठ और उत्तम होता है प्लीज भगवान को मानना जरूरी है इतने इसी के साथ अन्य अपने-अपने विचार प्रसूति को समापन करता हूं धन्यवाद आपको प्रिय लगे तो मेरे को बहुत ही खुशी मिलेगी आप सबको बहुत बहुत बहुत शुभकामनाएं

bhagwan ko manana kyon zaroori hai prashna hai toh yah hai ki bhagwan ko manana zaroori hai ya nahi hai lekin jab tak koi sambhavit aisi parikalpana hamari iccha banti hai kyonki yah ek samaj ka vishay hota hai aur iske prati hamara mat lalit ho jaate hai ki ishwar naam ki koi satara hai jo ki supreme hai aur uski chahat ke andar dard jab hum padhte hai toh koi kuch na kuch upalabdhi hoti hai toh main ek dusre tarike se samajhana chah raha hoon ki jis prakar ek hum siddhant banate hai topi ko maarne ke liye bhi ki parikalpana ka tha hum kar daalte hai aur aur yahi bhagwan ka ek roop hai ki hum bhagwan ko manne se pehle apne aapko jaanne ki zarurat hoti hai aur kyonki yah ek aisa subject hai ki is ka aswadan sirf ant karan aur apne vikas karm ki aur niyukti ki jaati hai kyonki yah ek jaise maine purv mein kaha hai ki ek solve karne ke liye bhi ki parikalpana kari jaati hai aur baad mein ek hi wajah bata avashyakta nahi hoti hai toh yah aadhaar baata hai ki agar hum aisa vikalp rakhte hai ki ishwar hai toh manne ka toh prayojan apne apne dimag se kai tarah ka ho sakta hai ke baad santre ke labh hote aur confidence bada rehta hai aur dusri baat hum apne aap ko kisi satta se jude hue hote hai toh usme hamare koi yah daman prabhav bana rehta hai ki hamara koi sakshi karna ya kisi aadhaar par hum apne aap ko chance banate hai aur jo kaam sakshi karan uske aadhaar par rakh dete hai ki agar hum apne antaraatma mein koi kaam kar rahe hai toh uske sakshi ke liye ishwar hai aur hum usme apne aapko nirdosh avastha mein sthapit rakh rahe hai aur shrishti ki kuch aisi vyavastha pranali hoti hai jisne hamein santushti milti hai shanti bhi milti hai kyonki hum uske aashrit reh karke apne aap aapke dhairya ko bana lete hai toh devta bhi hamein isi karan se milta hai ki koi na koi hamari sanrakshit bhaavnaye hoti hai toh bhagwan ko manana yahi zaroori hai ki agar agar hamein aisa option maankar kahin usme apne aap ki avdharna bana lete hai toh vaah hamare liye fayde hi roop mein hota hai isme koi ghata nahi hota lekin ab jab hum kabhi kabhi hopeless ho jaate hai life mein log depression mein jaate hai toh unko koi sahara gatividhi nahi milta toh yah ka shrey karke chaman jata hai lekin rahi baat dusri cheez hai ki bhagwan ko saath ek sakshatkar karna yah ek dusri vidhi banti hai filhal hamein itna dekar bharose par aa jaate hai ki koi na koi aisi vyavastha mein hai jo nyay ke sootron mein jagat ko bandhe hue hai aur aur karm parinamon ko satve dega kyonki aajkal ke roop list paise se log hote hai jo apni manmani dhang se utpidan karte hai aur nirdoshon ke prachar hota rehta hai toh aise log jinako koi sahara nahi milta hai owaisi saare ke dwara apne ko santosh paate hai toh ishwar ki satta hai lekin uske beech mein bahut hi shrishti mein I hai jo utpidan ko khatam karti aur kabhi kabhi akasmat unke andar kuch divya aisi ghatnaye ghat free hai ya use daya dharak ritik divyata hai hai jo sankalan hokar unka nirmaan karne mein sahyog dete hai toh aisi baat nahi hai ki jaha kuch nahi hai wahan wahan kuch bhi nahi hai sirf ek apni avdharna ke upar baat hai mansikta ke prabhat hai toh mansikta ki paridhi mein apne aap ko jid akash ke antim chhor tak jo jo jante hai vaah vishay vasana aur apne bhatkaav se rahit ho jaate unnat ki dasha mein jaate hai toh kai log apne samuh jeevan ki vivechna mein sochte hai vichar manan karte hai ki main hoon kya aur mere andar aaj tak ka sukh kya hai aur main kya ishwar mein hoon toh vaah jaisa dhyan karte hai toh un ko kuch din ke andar aisi cheezen aati hai jo bahut kabad ki tarah rehta hai aur apne vichalit ho jaate ki vaastav mein jeevan ek narak ki bhanti raha hai aur vaah wahi swaroop ko baar baar unke chitra mein prakashit hone lagta hai ki main yah hoon toh yah sab todne ke liye bahut zaroori hota hai kya yah anischit ko todenge yani yogya paddhatee hai yog chitt vriti nirodh hai matlab aisi bhaavnaye jo hamare andar adit ho karke hamein avdharna mein nishchit karti hai jo galat hoti hai tujhko hum bhejate hai toh bajne ka matlab bhagwan ke bhav mein uska baar baar divya anuj sharma smaran ke andar baar baar jab hum aratiyan preshit karte hai toh hamare ko bhav ki uddipan hoti hai kyonki duniya ke andar yahi hai ki jo bhaavnaye hoti hai wahi unke andar bhav ki samvedana jagrit hoti hai toh un suvidhaon se yun hi sthiti bana rakhta hai agar hamein divyata ki koi anubhuti sthar banana hai toh aisi chijon ki zarurat hoti hai jo bhagwan ke naam se mana gaya hai aur yahi cheez hai ki har dharm ke andar us vishesh pradhan sant jo ishwar god aur ityadi namon se vibhinn roop se maane gaye hai toh in chijon ka niyojan hota hai toh isme aur unke naam ke andar bhi ek bahut bada asar hota hai kyonki desh bhasha mein abhineta aati hai toh lekin jo hamare indicate hota hai vaah usi param tatva ke upar jata hai ki jo ek ek group mein matlab shrishti mein apnana parbhutwa banaya hua hai vaah biwi bhi bhejna mandal hai jisko hum ishwar bolte hai aur yah shehar ke bare mein yah bhi hote jaha manushya ki ability khatam ho jaati hai kshamta khatam ho jaati hai dimag ki paridhi apne aap mein sankuchit ho jaati hai toh hum aise bhi sudhaar ki aur bhanjana karne ke liye saamaan milta hai ISHWARI tatva ke upar jo kaal desh disha se bhi parikshan nahi toh aisi vivechna ke aadhaar par hum apne aap ko vivah vyapakata ke roop mein nirdharit karte hai aur hamara salaam bigad jata hai ishwar ko manana bahut hi hai accha hota hai udhar aam hota hai kyonki uske andar chhupe mirchiya nahi reh jaati toh vaah ek vikas kram mein virat bhartiyo mein insaan apne aap ko sahyog karta hai toh uski jo bhi bhejna hai badh jaati hai toh apne aap ko dial up mein jaane vikas karne ke liye aavashyak hoti hai ki hum kisi na kisi cheez ka anukaran karte hai toh ise jab aisi deewana ki supreme bhavna ki hum apne hriday mein anukaran vyavastha banate hai toh sutra swata hi prapt hone lag diya jab hum is marg mein chalte hai aur jo atmabal hai vaah hamein zaroori prapt hota rehta hai jiske karan hum samanya gatividhiyon se thoda vishesh karke hamare andar samarth ki vyapak rehti hai aur usi ke karan se hum ek adarsh bade aur ankur ne bhi ban sakte hai kyonki samaj mein dekha dekhi kahin zyada asar hota hai toh acche bhav mein acche vicharon mein achi chijon mein agar hum koi bhaavnaye sampreshit mein Lean hote hai toh iske liye koi anuchit baat nahi hai yah accha hai pehle hi chahiye ki bhagwan ko manana zaroori hai vaah hamare liye ki speech aur buddhi ke daayre ko badhata hai aur samant ko badhata hai aur rahi baat toh vivechna mein agar hum iske koi abhi tak bagaira gaya ka vaah vimarsh karenge toh isme phir uljhan banti hai toh isse hirdepur mein sauhaard ki bhoomi ke andar apne aap ko aisi param satta ke liye anupriya banna chahiye aur jisse ki hamara bal aur hamara aatm santosh vikasshil akash mein nirmaan hoga yah saree cheezen hai bhagwan ko manana zaroori isliye hota hai ki jab manushya jivaatma sunne mein hoti asahay dasha mein hoti hai toh kahin na kahin vaah aise asray ki talash karti hai toh jisme aur lady jeevan mein hariyali avdharnaen bani hui hai aur usme paripakva ho chuke hai toh vaah nirbhay jagat mein jeete hai aur sat marg mein apne jivaatma ke uddhar ke liye nirvah karte hai aur yahi surv shreshtha aur uttam hota hai please bhagwan ko manana zaroori hai itne isi ke saath anya apne apne vichar prastuti ko samapan karta hoon dhanyavad aapko priya lage toh mere ko bahut hi khushi milegi aap sabko bahut bahut bahut subhkamnaayain

भगवान को मानना क्यों जरूरी है प्रश्न है तो यह है कि भगवान को मानना जरूरी है या नहीं है लेक

Romanized Version
Likes  51  Dislikes    views  996
WhatsApp_icon
user

Shashikant Mani Tripathi

Yoga Expert | Life Coach

1:58
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भगवान को मानना अपने होने के लिए जरूरी है क्योंकि हम उसी के अनुसार आप विचार करें कि आपके अंदर जो चेतना है उसे इतना कि कारण ही आपके शरीर की जो स्थिति है वह बनी हुई है शरीर में होने वाले परिवर्तन भी उसी चेतना के कारण हैं जिस दिन चेतना से या ईश्वर की उससे आपका संबंध टूटता है उस दिन शरीर के सारे अंग पर तिल होने के बाद भी शरीर किसी काम के योग्य नहीं होती और जिन पांच तत्वों से शरीर का निर्माण हुआ है वही पांच तत्व जो ईश्वर से शरीर के जोड़ने तक आपका पोषण करते थे अब वही पांच तत्व शरीर को पांच तत्वों में मिलाने के लिए मिटाने के लिए सक्रिय हो जाते हैं तो ईश्वर का होना हमारे होने के लिए जरूरी है इसलिए ईश्वर को मानना चाहिए ईश्वर एक परम सकता है सर्वशक्तिमान है तो ऐसे में हम लोग उससे शक्ति अर्जित करते हैं जीवन में जब कभी असंतुलन आता है या फिर हमको ऐसा लगता है कि जीवन हमारे अनुसार नहीं चल रहा है तो ऐसे में परमात्मा को याद करके हम पुनः अपने जीवन को अपने अनुकूल बनाने के लिए कार्यरत हो जाते हैं तो ईश्वर एक शक्तिपुंज है और हम उसी के अंश हैं इसके साथ हम अपने जीवन के विचारों को जीवन की विपरीत परिस्थितियों को और अपने अनुकूल जीवन को बनाने का प्रयास करते हैं विभिन्न परिस्थितियों को हम कंट्रोल करते हैं हम विचलित नहीं होते मन के वितरण को दूर करते हैं और विचलन से जो हमारे अंदर विश्वास की कमी हुई है जो शक्ति का ह्रास हुआ है वह ईश्वर से जुड़कर ईश्वर को याद करके हम पुनः फिर कार्य करने के योग्य हो जाते हैं धन्यवाद

bhagwan ko manana apne hone ke liye zaroori hai kyonki hum usi ke anusaar aap vichar kare ki aapke andar jo chetna hai use itna ki karan hi aapke sharir ki jo sthiti hai vaah bani hui hai sharir mein hone waale parivartan bhi usi chetna ke karan hain jis din chetna se ya ishwar ki usse aapka sambandh tootata hai us din sharir ke saare ang par til hone ke baad bhi sharir kisi kaam ke yogya nahi hoti aur jin paanch tatvon se sharir ka nirmaan hua hai wahi paanch tatva jo ishwar se sharir ke jodne tak aapka poshan karte the ab wahi paanch tatva sharir ko paanch tatvon mein milaane ke liye mitne ke liye sakriy ho jaate hain toh ishwar ka hona hamare hone ke liye zaroori hai isliye ishwar ko manana chahiye ishwar ek param sakta hai sarvshaktimaan hai toh aise mein hum log usse shakti arjit karte hain jeevan mein jab kabhi asantulan aata hai ya phir hamko aisa lagta hai ki jeevan hamare anusaar nahi chal raha hai toh aise mein paramatma ko yaad karke hum punh apne jeevan ko apne anukul banane ke liye karyarat ho jaate hain toh ishwar ek shaktipunj hai aur hum usi ke ansh hain iske saath hum apne jeevan ke vicharon ko jeevan ki viprit paristhitiyon ko aur apne anukul jeevan ko banane ka prayas karte hain vibhinn paristhitiyon ko hum control karte hain hum vichalit nahi hote man ke vitaran ko dur karte hain aur vichalan se jo hamare andar vishwas ki kami hui hai jo shakti ka hras hua hai vaah ishwar se judakar ishwar ko yaad karke hum punh phir karya karne ke yogya ho jaate hain dhanyavad

भगवान को मानना अपने होने के लिए जरूरी है क्योंकि हम उसी के अनुसार आप विचार करें कि आपके अं

Romanized Version
Likes  129  Dislikes    views  1688
WhatsApp_icon
qIcon
ask

This Question Also Answers:

QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!