प्रयोगवादी काव्यधारा की दो प्रमुख विशेषताएं लिखिए?...


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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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अपनी जान प्रयोगवादी काव्यधारा की दो प्रमुख विशेषताएं बताइए उसमें हो या ना हो ठंडी हो या ना हो लेकिन भावों को व्यक्त करने में शब्दों का चयन किया जाता है और कई बार ले होने पर भी शब्दों का चयन होता है और कई बार बिना लेकर भी शब्दों का चयन होता है और निश्चित रूप से यह काम जाना जो प्रभाव कारी होती है क्योंकि यह काव्य धारा का प्रभाव में यह वास्तविक आत्मक देश पर पाए जाते इस युग के कवि इस तरह से कवि जो है वह बहुत स्पष्ट वादी लेकिन हमें तार्किक और कुछ विषयों के ऊपर अपनी चर्चा करते हैं

apni jaan prayogwadi kavyadhara ki do pramukh visheshtayen bataye usme ho ya na ho thandi ho ya na ho lekin bhavon ko vyakt karne mein shabdon ka chayan kiya jata hai aur kai baar le hone par bhi shabdon ka chayan hota hai aur kai baar bina lekar bhi shabdon ka chayan hota hai aur nishchit roop se yah kaam jana jo prabhav kaari hoti hai kyonki yah kavya dhara ka prabhav mein yah vastavik aatmkatha desh par paye jaate is yug ke kavi is tarah se kavi jo hai vaah bahut spasht wadi lekin hamein tarkik aur kuch vishyon ke upar apni charcha karte hain

अपनी जान प्रयोगवादी काव्यधारा की दो प्रमुख विशेषताएं बताइए उसमें हो या ना हो ठंडी हो या ना

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हिंदी साहित्य में प्रगतिवाद और उसके बाद एक नया बाद आया जिसे प्रयोगवाद के नाम से जाना जाता है अजी जी ने और उनके साथी के साथ कवियों ने तार सप्तक निकाले और इनकमिंग जो भी कभी चाहिए कि वह तीन सप्ताहों में निकली तो तार सप्तक की जो कविताएं हैं ज्यादातर प्रयोगवादी है उसके बाद तो प्रयोगवाद का चलन हो गया था कि उसको तोड़ दिया भाषा अलंकार प्रतिबिंब सारे के सारे नए नए प्रयोग होने लगे जैसे कि किसी की सुंदरता के लिए चांद का प्रयोग होता था अलंकार की तौर पर अपनी प्रेमिका को बढ़ावा देकर कहते हैं विषय के तौर पर नई विषय वस्तु है नई भाषा नए शब्द नए प्रतीक ने भीम बने छंद और दूसरा यह कविता विशिष्ट दूसरी है कि वह कविता व्यक्तिवादी होली अपनी व्यक्तिगत बातों को इसमें लिया है और व्यक्तिगत जैसे कि साधारण नगर के साधारण घर में मेरा जन्म हुआ बचपन भी चाहती साधारण काव्य की भाषा के तौर पर और शक्ति कविता के तौर पर

hindi sahitya mein pragatibaad aur uske baad ek naya baad aaya jise prayogavaad ke naam se jana jata hai aji ji ne aur unke sathi ke saath kaviyon ne taar saptak nikale aur incoming jo bhi kabhi chahiye ki vaah teen saptahon mein nikli toh taar saptak ki jo kavitayen hain jyadatar prayogwadi hai uske baad toh prayogavaad ka chalan ho gaya tha ki usko tod diya bhasha alankar pratibimb saare ke saare naye naye prayog hone lage jaise ki kisi ki sundarta ke liye chand ka prayog hota tha alankar ki taur par apni premika ko badhawa dekar kehte hain vishay ke taur par nayi vishay vastu hai nayi bhasha naye shabd naye prateek ne bhim bane chhand aur doosra yah kavita vishisht dusri hai ki vaah kavita vyaktivadi holi apni vyaktigat baaton ko isme liya hai aur vyaktigat jaise ki sadhaaran nagar ke sadhaaran ghar mein mera janam hua bachpan bhi chahti sadhaaran kavya ki bhasha ke taur par aur shakti kavita ke taur par

हिंदी साहित्य में प्रगतिवाद और उसके बाद एक नया बाद आया जिसे प्रयोगवाद के नाम से जाना जाता

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Hemant rajbale

शिक्षा सेवा, लेखक, विचारक

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प्रयोगवादी काव्य की मुख्य दो विशेषताओं में पहली विशेषताएं नवीन फूलों का प्रयोग और दूसरी विशेषता निराशा ही निराशा बाद के संदर्भ में शमशेर बहादुर सिंह की एक कविता देखें टूटी हुई बिखरी हुई चाय की डली हुई पांव के नीचे पत्तियां मेरी कविता बाल झड़े हुए रुके से मेले गिरे हुए गर्दन से फिर भी चुप के कुछ ऐसी मेरी खाल मुझसे अलग से मिट्टी में मिली थी तो इन पंक्तियों के अंदर निराशावादी झलकता है और नवीन को मानो का प्रयोग भी झलकता है ए दोनों विशेषता इन के अंदर आ गए इसी प्रकार मुक्तिबोध की कविताओं जिंदगी जो है नयापन देखने को मिलता है और नवीन ओपन और निराशा भाग देखने को मिलता है जैसे परिवेश के रमणीय उजाला अब सहा नहीं जाता कि ममता के बादल की मर्डर की कोमलता भीतर बिराती कमजोर और अक्षम हो गई है आत्मा छाती छाती की बबीता वेता डराती हैं बहलाती शहजादी आत्मीयता अब बर्दाश्त नहीं होती कुछ तो खास कविता जो सहर्ष स्वीकारा कविता है उसके अंदर जय हनुमान और निराशा बाद जय मुक्तिबोध की कविता में सांप दिखाई देता है इसके अलावा गजानन माधव मुक्तिबोध रघुवीर सहाय गिरिजाकुमार माथुर माथुर आदि ने भी जो है प्रयोगवाद काबे के अंदर अपना योगदान दिया है तो प्रयोगवादी काव्यधारा की अनेक विशेषताएं जिसमें एक निराशावादी दूसरा नवीन उपयोग दृश्य अति यथार्थ बाद भी इसकी मुख्य विशेषता है अजय जी लिखते हैं की पहाड़ियों से घिरी हुई इस छोटी सी घाटी में यह मूंछों की चुनिया बराबर आ जाती है और सबको मारता है उन्हें सीख देता है कि सबको मुक्त रखें इस प्रकार से इसके अंदर यथार्थवाद जो है घटित होता हुआ दिखाई देता है तो प्रयोगवाद की विशेषताओं के अंदर निराशा व नवीन मानव का प्रयोग आदि विशेषताएं और भी कई विशेषताएं चंदन और नैतिकता और भाषा की स्वच्छंदता भी एक प्रयोगवाद की प्रमुख विशेषताओं में से एक मानी जाती है इस प्रकार से यह प्रयोगवाद की कुछ विशेषताएं धन्यवाद आशा है मेरा उत्तर आपको अच्छा लगा होगा लगा तो लाइक करें शेयर करें कमेंट करें धन्यवाद

prayogwadi kavya ki mukhya do visheshtaon me pehli visheshtayen naveen fulo ka prayog aur dusri visheshata nirasha hi nirasha baad ke sandarbh me shamsher bahadur Singh ki ek kavita dekhen tuti hui bikhri hui chai ki dali hui paav ke niche pattiyan meri kavita baal jhande hue ruke se mele gire hue gardan se phir bhi chup ke kuch aisi meri khaal mujhse alag se mitti me mili thi toh in panktiyon ke andar nirashavaadi jhalkata hai aur naveen ko maano ka prayog bhi jhalkata hai a dono visheshata in ke andar aa gaye isi prakar muktibodh ki kavitao zindagi jo hai nayapan dekhne ko milta hai aur naveen open aur nirasha bhag dekhne ko milta hai jaise parivesh ke ramniya ujaala ab saha nahi jata ki mamata ke badal ki murder ki komalta bheetar birati kamjor aur aksham ho gayi hai aatma chhati chhati ki Babita veta darati hain bahlati shehzadi atmiyata ab bardaasht nahi hoti kuch toh khas kavita jo saharsh swikara kavita hai uske andar jai hanuman aur nirasha baad jai muktibodh ki kavita me saap dikhai deta hai iske alava gajanan madhav muktibodh raghuveer sahaye girijakumar mathur mathur aadi ne bhi jo hai prayogavaad kabe ke andar apna yogdan diya hai toh prayogwadi kavyadhara ki anek visheshtayen jisme ek nirashavaadi doosra naveen upyog drishya ati yatharth baad bhi iski mukhya visheshata hai ajay ji likhte hain ki pahadiyon se ghiri hui is choti si ghati me yah munchon ki chuniya barabar aa jaati hai aur sabko maarta hai unhe seekh deta hai ki sabko mukt rakhen is prakar se iske andar yatharthawad jo hai ghatit hota hua dikhai deta hai toh prayogavaad ki visheshtaon ke andar nirasha va naveen manav ka prayog aadi visheshtayen aur bhi kai visheshtayen chandan aur naitikta aur bhasha ki swacchandata bhi ek prayogavaad ki pramukh visheshtaon me se ek maani jaati hai is prakar se yah prayogavaad ki kuch visheshtayen dhanyavad asha hai mera uttar aapko accha laga hoga laga toh like kare share kare comment kare dhanyavad

प्रयोगवादी काव्य की मुख्य दो विशेषताओं में पहली विशेषताएं नवीन फूलों का प्रयोग और दूसरी वि

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Abhishek

Youtuber

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प्रयोगवादी काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएं अति आर्द्रता विद्रोह का स्वर दो प्रमुख प्रवृत्तियां

prayogwadi kavyadhara ki pramukh visheshtayen ati aardrata vidroh ka swar do pramukh pravrittiyan

प्रयोगवादी काव्यधारा की प्रमुख विशेषताएं अति आर्द्रता विद्रोह का स्वर दो प्रमुख प्रवृत्तिय

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प्रयोगवादी काव्यधारा की विशेषताएं पहला बौद्धिकता की प्रधानता और दूसरा निराशा वाद्वाप लाइन की प्रवृत्ति

prayogwadi kavyadhara ki visheshtayen pehla bauddhikata ki pradhanta aur doosra nirasha vadwap line ki pravritti

प्रयोगवादी काव्यधारा की विशेषताएं पहला बौद्धिकता की प्रधानता और दूसरा निराशा वाद्वाप लाइन

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Anil Kumar Solanki

विध्यार्थी

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प्रयोगवादी काव्यधारा की दो प्रमुख विशेषताएं प्रयोगवादी काव्यधारा में अंधविश्वास से दूर रहकर प्रयोगवादी काव्यधारा होती है वह बिल्कुल सत्य घटना पर आधारित होती हैं

prayogwadi kavyadhara ki do pramukh visheshtayen prayogwadi kavyadhara mein andhavishvas se dur rahkar prayogwadi kavyadhara hoti hai vaah bilkul satya ghatna par aadharit hoti hain

प्रयोगवादी काव्यधारा की दो प्रमुख विशेषताएं प्रयोगवादी काव्यधारा में अंधविश्वास से दूर रहक

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