एक आर्मी ऑफ़िसर के रूप में क्या आप कभी अपने मौत की क़रीब आए हैं?...


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Mohommed Ali Shah

Indian theatre and film personality, Motivational Speaker known worldwide for his powerful talks

1:01
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जी आप जब आपने बिल्कुल जो सवाल पूछ रहे हैं यह मैं ही नहीं कोई भी फौजी कि जिसने भी सेवा करी है बॉर्डर पर जम्मू कश्मीर में 9:30 में एक बार नहीं कई बार उसने अपनी जान की जो कम राकेश जान की बाजी लगाकर अपनी जान की परवाह ना कर कर आगे बढ़कर हिम्मत नहीं हारते उसी से गुजरा है ऐसा होता है तो मैं बताऊं आपको कि जो आदमी उस स्थिति से गुजर चुका है तो वहीं बैठकर कैसा महसूस होता है उसको काम करना बंद कर दें घर जाते होते हैं परंतु ऐसा होता है मगर यह दुनिया से चला गया तो मैं अकेले नहीं आऊंगा मैं दुश्मन तो साथ में

ji aap jab aapne bilkul jo sawaal puch rahe hai yah main hi nahi koi bhi fauji ki jisne bhi seva kari hai border par jammu kashmir mein 9 30 mein ek baar nahi kai baar usne apni jaan ki jo kam rakesh jaan ki baazi lagakar apni jaan ki parvaah na kar kar aage badhkar himmat nahi harte usi se gujara hai aisa hota hai toh main bataun aapko ki jo aadmi us sthiti se gujar chuka hai toh wahi baithkar kaisa mehsus hota hai usko kaam karna band kar de ghar jaate hote hai parantu aisa hota hai magar yah duniya se chala gaya toh main akele nahi aaunga main dushman toh saath mein

जी आप जब आपने बिल्कुल जो सवाल पूछ रहे हैं यह मैं ही नहीं कोई भी फौजी कि जिसने भी सेवा करी

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pervs

Tutor

1:32

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हेलो गुड मॉर्निंग एवरीवन यू आपका क्वेश्चन है एक आदमी ऑफिसर के रूप में क्या आप कभी अपनी मौत के करीब आए हैं तो इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए क्योंकि यदि आप आर्मी में जा रहे हैं तो आपको मौत से डरना नहीं चाहिए और जहां भी कभी भी कोई परेशानी होती है आप कहीं भी देखो वाटर प्रॉब्लम होती है प्लान आता है या की कोई कुएं में गिर जाता है याकूब बाढ़ आ जाती है या कुछ पहाड़ गिर जाती है पत्थर घर जाते हैं तो सबसे पहले किस को बुलाया जा तारु वालों को बुलाया जाता है तो इनके हर एक सैकेंड हर एक घंटा रे घंटी हर एक दिन हो 365 * 50 * * 720 जितने भी घंटे काम करते हैं यह अपनी मौत के करीब ही रखें तो यह सूचना तो गलत है कि मौत को करीब आए हैं कि मौत के पास ही रहती है हमेशा जब भी आप देखोगे तो बॉर्डर पर रखते हैं कोई पहाड़ियों पर रहते हैं कोई बर्फीले इलाके में रहती है कोई ऐसे इलाके में रहते हैं जहां पानी भी नहीं है कोई ऐसी इलाके में रखें जहां जंगल ही जंगल है जहां कोई एक चिड़िया का पर भी परिंदा हूं पर पैर नहीं रखता है तो आप समझ सकते हैं कि इनकी जो कंडीशन जो होती है क्या फिर क्रिटिकल होती है काफी बहादुर होती हैं यह तो इनको सलूट है पूरे देश का और पूरा देश उनके साथ रहता है आप जानते हो और थैंक्यू स्कॉरचिंग को पूछने के लिए और लाइक करें कमेंट करें शेयर करें

hello good morning everyone you aapka question hai ek aadmi officer ke roop mein kya aap kabhi apni maut ke kareeb aaye hain toh isme koi shak nahi hona chahiye kyonki yadi aap army mein ja rahe hain toh aapko maut se darna nahi chahiye aur jaha bhi kabhi bhi koi pareshani hoti hai aap kahin bhi dekho water problem hoti hai plan aata hai ya ki koi kuen mein gir jata hai yakub baadh aa jaati hai ya kuch pahad gir jaati hai patthar ghar jaate hain toh sabse pehle kis ko bulaya ja taru walon ko bulaya jata hai toh inke har ek second har ek ghanta ray ghanti har ek din ho 365 50 720 jitne bhi ghante kaam karte hain yah apni maut ke kareeb hi rakhen toh yah soochna toh galat hai ki maut ko kareeb aaye hain ki maut ke paas hi rehti hai hamesha jab bhi aap dekhoge toh border par rakhte hain koi pahadiyon par rehte hain koi barfile ilaake mein rehti hai koi aise ilaake mein rehte hain jaha paani bhi nahi hai koi aisi ilaake mein rakhen jaha jungle hi jungle hai jaha koi ek chidiya ka par bhi parinda hoon par pair nahi rakhta hai toh aap samajh sakte hain ki inki jo condition jo hoti hai kya phir critical hoti hai kaafi bahadur hoti hain yah toh inko Salute hai poore desh ka aur pura desh unke saath rehta hai aap jante ho aur thainkyu skaraching ko poochne ke liye aur like kare comment kare share karen

हेलो गुड मॉर्निंग एवरीवन यू आपका क्वेश्चन है एक आदमी ऑफिसर के रूप में क्या आप कभी अपनी मौत

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

3:00
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आपने जाए एक आर्मी ऑफिसर के रूप में क्या आप कभी अपनी मां के करीब आए आर्मी ऑफिसर के रूप में तेरी मौका नहीं मिला लेकिन आ एक इंसान के रूप में पर एक मौका मेरी जिंदगी में जो बाढ़ आया है 1 उन्नीस सौ चौरासी के दंगों में आया था जबकि तुम्हें कैसे घर में घुसा आंखों का था मैं कॉलेज में लेक्चरर था और उस समय उचित निर्णय दरवाजा फोन के उनके घर में घुसा तो उसने दरवाजा खोला मेरी शक्ल देखकर उन्होंने मुझे जाकर लिया 1:00 बजे मेरा मन संका में डूब गया लेकिन मन के कोने में था कि जब मृत्यु निश्चित है तो क्या घर के बाहर हो क्या घर के अंदर वर्ष में उन्होंने घर में प्रवेश कराया और मेरे को एक शांत स्थान पर अपने धन में शरण जी और उन्होंने मेरे से ऑस्ट्रेलिया पूछा और शाम तक आर्मी आ गई तब उन्होंने मुझे आर्मी के हवाले किया और आर्मी ने मुझे घर तक पहुंचाया तो नहीं नहीं कहूंगा कि इंसानी दुनिया में मर गई है सिक्के दंगों में सीखने ही मेरी प्राण बचाए मेरी जीवन रक्षा की तो मैं उनसे को हार्दिक दिल से हार्दिक कामनाएं करता हूं दुआएं देता हूं इसी तरह जम्मू-कश्मीर में एक बार में परीक्षा के काम से गया हुआ था कि दंगे फसाद हो गए थे और दंगे फसाद में मेरे को जिस होटल में ठहरा हुआ था वह होटल एक मुस्लिम समुदाय का था उस मुस्लिम समुदाय ने के मालिक ने मुझे सुरक्षा प्रदान की इसलिए नहीं क्योंकि वह में होटल मुसलमानों का था बल्कि उसने मुझे इसलिए सुरक्षा पर इंसानियत का परिचय देते हुए देखिए भाई इस होटल में मुस्लिम भी ठहरे हुए वह कब भड़क जाएं बेहतर है क्या हमारे घर में होटल जिओ कनेक्ट डाटा आप वहां चले जाएं और मेरा रूम खाली करके उन्होंने अपने घर में मुझे शरण जी बिल्कुल मुझे एक तरह से अपने परिवार की तरह मुझे शरण दी और जब मामला शांत हुआ तो मुझे वहां से उन्होंने पोर्टल के माध्यम से बाहर बाहर मेरे को बोली शराब आप जा सकते हैं कोई घबराने की बात नहीं है और निश्चित रूप से तो मैं नहीं कहूंगा इस दुनिया में सभी लोग खराब हैं हां कुछ लोग खराब हैं लेकिन अगर हम अच्छे हैं तो दुनिया अच्छी है तो एक विलेन के रूप में मौत का सामना हुआ और उसके बाद जीवन में उन्हीं लोगों ने हमें सुरक्षा जीवन भी प्रदान किया

aapne jaaye ek army officer ke roop mein kya aap kabhi apni maa ke kareeb aaye army officer ke roop mein teri mauka nahi mila lekin aa ek insaan ke roop mein par ek mauka meri zindagi mein jo baadh aaya hai 1 unnis sau Chaurasi ke dango mein aaya tha jabki tumhe kaise ghar mein ghusa aankho ka tha main college mein Lecturer tha aur us samay uchit nirnay darwaja phone ke unke ghar mein ghusa toh usne darwaja khola meri shakl dekhkar unhone mujhe jaakar liya 1 00 baje mera man sanka mein doob gaya lekin man ke kone mein tha ki jab mrityu nishchit hai toh kya ghar ke bahar ho kya ghar ke andar varsh mein unhone ghar mein pravesh karaya aur mere ko ek shaant sthan par apne dhan mein sharan ji aur unhone mere se austrailia poocha aur shaam tak army aa gayi tab unhone mujhe army ke hawale kiya aur army ne mujhe ghar tak pahunchaya toh nahi nahi kahunga ki insani duniya mein mar gayi hai sikke dango mein sikhne hi meri praan bachaye meri jeevan raksha ki toh main unse ko hardik dil se hardik kamanaen karta hoon duaen deta hoon isi tarah jammu kashmir mein ek baar mein pariksha ke kaam se gaya hua tha ki dange fasad ho gaye the aur dange fasad mein mere ko jis hotel mein thahara hua tha vaah hotel ek muslim samuday ka tha us muslim samuday ne ke malik ne mujhe suraksha pradan ki isliye nahi kyonki vaah mein hotel musalmanon ka tha balki usne mujhe isliye suraksha par insaniyat ka parichay dete hue dekhiye bhai is hotel mein muslim bhi thahare hue vaah kab bhadak jayen behtar hai kya hamare ghar mein hotel jio connect data aap wahan chale jayen aur mera room khaali karke unhone apne ghar mein mujhe sharan ji bilkul mujhe ek tarah se apne parivar ki tarah mujhe sharan di aur jab maamla shaant hua toh mujhe wahan se unhone portal ke madhyam se bahar bahar mere ko boli sharab aap ja sakte hain koi ghabrane ki baat nahi hai aur nishchit roop se toh main nahi kahunga is duniya mein sabhi log kharab hain haan kuch log kharab hain lekin agar hum acche hain toh duniya achi hai toh ek villain ke roop mein maut ka samana hua aur uske baad jeevan mein unhi logo ne hamein suraksha jeevan bhi pradan kiya

आपने जाए एक आर्मी ऑफिसर के रूप में क्या आप कभी अपनी मां के करीब आए आर्मी ऑफिसर के रूप में

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Sneha Dubey

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आर्मी ऑफिसर के रूप में कभी मौत सामने तो नहीं आई क्योंकि मैं आर्मी में नहीं हूं मैं एग्जामिनेशन लेकिन उनकी मौत को महसूस जरूर किया है वो अपने परिवार से दूर रहकर सिर्फ देश की हिफाजत के लिए तैनात रहते हैं कुछ लोग कहते हैं कि उनका फर्ज है उनकी ड्यूटी है इसके लिए सरकार उन्हें पैसे देती है बात बिल्कुल सही है लेकिन क्या पैसों के लिए आप अपनी जान जोखिम में डाल सकते हैं फौज में जाने के लिए अच्छे पैसे कमाने की चाहत के साथ ही एक जज्बा भी होना चाहिए देश के प्रति जो हमारे भारतीय सैनिकों में है और उन्हें यह पता होता है कि उनकी जान कभी भी जा सकती है फिर भी वे हंसते-हंसते ड्यूटी देते हैं और हमेशा खुश रहते हैं यही उनकी काबिले तारीफ है

army officer ke roop mein kabhi maut saamne toh nahi I kyonki main army mein nahi hoon main examination lekin unki maut ko mehsus zaroor kiya hai vo apne parivar se dur rahkar sirf desh ki hifajat ke liye tainat rehte hain kuch log kehte hain ki unka farz hai unki duty hai iske liye sarkar unhe paise deti hai baat bilkul sahi hai lekin kya paison ke liye aap apni jaan jokhim mein daal sakte hain fauj mein jaane ke liye acche paise kamane ki chahat ke saath hi ek jajba bhi hona chahiye desh ke prati jo hamare bharatiya sainikon mein hai aur unhe yah pata hota hai ki unki jaan kabhi bhi ja sakti hai phir bhi ve hansate hansate duty dete hain aur hamesha khush rehte hain yahi unki kabile tareef hai

आर्मी ऑफिसर के रूप में कभी मौत सामने तो नहीं आई क्योंकि मैं आर्मी में नहीं हूं मैं एग्जामि

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