इलेक्टोरल बॉन्ड क्या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं है? आपकी क्या राय है?...


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Manish Bhargava

Trainer/ Mentor in Delhi education deptt.

0:17
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है इलेक्ट्रोल बांड क्या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं हैं इलेक्ट्रोल बांड भी गोपनीय ही रहते हैं ऐसा नहीं करना सबके सामने जारी किया जाता है यही भी गोपनीय ही होते हैं तो ऐसा नहीं मांगा था ताकि पारदर्शिता के खिलाफ है

aapka prashna hai ilektrol bond kya pardarshita ke khilaf nahi hain ilektrol bond bhi gopaniya hi rehte hain aisa nahi karna sabke saamne jaari kiya jata hai yahi bhi gopaniya hi hote hain toh aisa nahi manga tha taki pardarshita ke khilaf hai

आपका प्रश्न है इलेक्ट्रोल बांड क्या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं हैं इलेक्ट्रोल बांड भी गोपनीय

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

1:32

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इलेक्ट्रोल बांड के पार्टी के खिलाफ नहीं आपकी क्या गए थे वह पारदर्शिता के लिए ही किया था ₹2000 कैश तक कोई भी पार्टी चंदा ले सकती है बाकी वह इलेक्ट्रोल बांड के रूप में ले कोई भी पार्टी को बीजेपी और कांग्रेस पार्टी के पास जो फंड आता है जो दान चंदा जो धर्मादाय यह सब जो आता है वह वाइट का हो गया और सब ब्लैक मनी के रूप में चुनाव लड़े जाते थे लोग इस्तेमाल ज्यादा करते चंदे में कैसी देते थे और उसे कहीं अपनी बुक्स में उसके एंट्री नहीं करते थे इसलिए इलेक्ट्रोल बने थे एक तरफ से चुनाव में पारदर्शिता आई है क्योंकि हर एक पार्टी अगर इलेक्टरल बॉन्ड उसके लिए जाते हैं तो फिर बाद में उनको बुक्स डालनी पड़ती है इसलिए पारदर्शिता बरती है पारदर्शिता के खिलाफ नहीं जाता और ₹20000 या ₹40000 इस तरह से बोर्ड और चंदा के रूप में जमा करते हैं धन्यवाद

ilektrol bond ke party ke khilaf nahi aapki kya gaye the vaah pardarshita ke liye hi kiya tha Rs cash tak koi bhi party chanda le sakti hai baki vaah ilektrol bond ke roop mein le koi bhi party ko bjp aur congress party ke paas jo fund aata hai jo daan chanda jo dharmaday yah sab jo aata hai vaah white ka ho gaya aur sab black money ke roop mein chunav lade jaate the log istemal zyada karte chande mein kaisi dete the aur use kahin apni books mein uske entry nahi karte the isliye ilektrol bane the ek taraf se chunav mein pardarshita I hai kyonki har ek party agar electoral Bond uske liye jaate hain toh phir baad mein unko books daalni padti hai isliye pardarshita barti hai pardarshita ke khilaf nahi jata aur Rs ya Rs is tarah se board aur chanda ke roop mein jama karte hain dhanyavad

इलेक्ट्रोल बांड के पार्टी के खिलाफ नहीं आपकी क्या गए थे वह पारदर्शिता के लिए ही किया था ₹

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं इससे सहमत हूं के इलेक्टरल बॉन्ड एक राजनीतिक षड्यंत्र आजादी के बाद से जो चुनाव कम खर्चे में हुआ करते थे बदली हुई परिस्थिति में उसमें इतने खर्चे बढ़ गए किसी भी प्रत्याशी का जितना न केवल दुबर हो गया बल्कि इस प्रकार के हथकंडे अपनाए जाने लगे जिससे कि जनप्रतिनिधि जो जीत के जाता है वह चुनाव में खर्च की गई राशि को वसूलने की जुगत में रहता है इसीलिए आपने देखा होगा विधानसभाओं में जो लोग निर्वाचित होकर जाते हैं मेले के रूप में और सत्ता के बैलेंस बनाने में आ गए अगर उनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है तो खरीद फरोख्त एमएलओ की चालू हो जाती है संसद में भी निर्वाचित सांसद यदि इसी प्रकार की निर्णायक भूमिका में होते हैं तो उनकी भी खरीद फरोख्त चालू हो जाती है नैतिकता के सारे मापदंड खत्म होते गए और राजनीतिक दलों ने भी षड्यंत्र करके उसमें कांग्रेश भी शामिल है उसमें भारतीय जनता पार्टी में शामिल है उसमें समाजवादी पार्टी आदि शामिल हैं उसमें लोकल प्रदेश में जो राजनीतिक पार्टियां हैं वह भी शामिल हैं सब पूंजीपतियों से राजनीतिक चंदा लेने लगी ताकि उनकी सरकार बनने पर पूंजीपतियों के हित साधक के रूप में पुणे मनापा क्या फायदा पहुंचाते रहे इस प्रकार की नीतियां बनाए जिससे फुल पतियों को फायदा यहां मैं उल्लेख के साथ यह भी कहना चाहूंगा कि सिर्फ हिंदुस्तान में कम्युनिस्ट पार्टियां ही ऐसी पार्टियां हैं जो किसी प्रकार के किसी का नहीं करती और यदि कभी कोई चढ़ा देता भी है तो उसका हिसाब जनता के सामने रखने की माता भी रखती आपने देखा होगा कि डॉ कन्हैया कुमार मैं अभी जो चुनाव लड़ा था बिहार से उसमें उन्होंने एक नया नारा दिया था क्राउडफंडिंग का और उनकी पॉपुलर की इतनी थी कि चार रोज में क्राउडफंडिंग के नाम पर मैक्सिमम खर्च करने वाली राशि ₹7000000 उनके बैंक अकाउंट में लोगों ने हिंदुस्तान भर के कोने-कोने से उनके लिए पैसे की सहायता की गई उतर आओ जीतेगा नहीं जीतेगा अलग बात है लेकिन क्राउडफंडिंग ही एक तरीका हो सकता है जिसके माध्यम से हम चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को कुछ सहायता कर सकते हैं क्या हम अपनी जेब से निकला हुआ ₹10 दे ₹20 दे यह क्राउडफंडिंग क्राउडफंडिंग से जो खर्चे लगते हैं उसको मिटा उठ करने का एक तरीका हो सकता है लेकिन यदि आपने किसी पूंजीपति से एक अरब रुपया ले लिया या ₹500000000 ले लिए तो फिर आपकी मजबूरी होती है कि आपको उस पूंजीपति के व्यापार के हितों के अनुसार नीतियों में शिथिलता लानी पड़ेगी जब आप नीतियों में सफलता लाएंगे और पूंजीपतियों की तरफदारी करेंगे तो जनता के हितों के अनुसार आप काम नहीं कर सकते तो इलेक्टरल बॉन्ड भी इसी प्रकार का एक तरीका है जिसमें कि पैसा तो ले लेते हैं लेकिन चुके इलेक्ट्रोल बांड कहां जा रहा है वह किसको दे रहे हैं इसको गोपनी बनाने की चाल है षड्यंत्र मैं समझता हूं कि यह राजनीतिक भ्रष्टाचार हैं यह वह सामूहिक वस्था जा रहा है जिसमें बिहार पार्टी लालायित हो कर पैसे लेती है रज्जो पार्टियां इलेक्ट्रोल बांड के रूप में पैसा लेती है उसे भारतीय जनता पार्टी ने भरपूर पैसा लिया इतना लिया कि जो उन्होंने इलेक्शन में खर्च किया उससे ज्यादा राशि उन्होंने एकत्रित कर राजसत्ता का फायदा है यह जो राजनीतिक भ्रष्टाचार है चाहे वह कांग्रेश करें चाहे वो भारतीय जनता पार्टी करें या कोई भी दक्षिणपंथी मिजाज का दल करें एवं समाजवादी लोग भी जो है साफ-सुथरे नहीं है बीएसपी भी कोई साफ-सुथरी नहीं है जब जिसको अवसर मिलता है और सत्ता की संभावना होती है कि सत्ता इनके पास आ सकती है सत्ता में निर्णायक भूमिका का निर्वाह करेंगे तो लोग पूंजीपतियों को आर्थिक सहायता देते हैं और यह करेक्शन की बहुत बड़ी दूरी है बड़ा केंद्र है मैं समझता हूं कि मेरी बात आप तक स्पष्ट गई होगी धन्यवाद

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मैं इससे सहमत हूं के इलेक्टरल बॉन्ड एक राजनीतिक षड्यंत्र आजादी के बाद से जो चुनाव कम ख

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S. K. Jani

Social Activist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इलेक्टोरल बांड क्या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं है आपकी क्या राय मेरे हिसाब से इलेक्टरल बॉन्ड है वह कहीं ना कहीं पारदर्शिता के खिलाफ है क्योंकि उसमें जो बम से खरीदेंगे ऑन बिजनेसमैन के नाम और किस-किस को उन्होंने वह डोनेट किए यह नहीं बताया जाएगा कि एक प्रकार से देश के साथ मत लो मेरा मानना है कि फ्रॉड है क्योंकि एक तरफ तो सरकार है वह मोबाइल डाटा के ऊपर भी मतलब अपनी जो है पकड़ रखना चाहती है या नहीं लोगों की निजता परसेंट मार रही है जबकि इलेक्ट्रोल बांड देते समय यह वक्तव्य देती है कि इससे लोगों की या उद्योगपति उद्योग पतियों की निजता का हनन होता है तो मेरे हिसाब से इलेक्ट्रॉन में जो भी है शेयर खरीदते हैं उनको उनकी पहचान जनता के सामने जाहिर होनी चाहिए यदि आप मोबाइल जैसे डिवाइस में भी यदि आप जनता की पूरी मतलब एक्टिविटी नोट करना चाहते हैं तो फिर उनको इतनी निजता क्यों और जनता की सहन जनता की क्या नहीं पता नहीं है

electrol bond kya pardarshita ke khilaf nahi hai aapki kya rai mere hisab se electoral Bond hai vaah kahin na kahin pardarshita ke khilaf hai kyonki usme jo bomb se khareedenge on bussinessmen ke naam aur kis kis ko unhone vaah donate kiye yah nahi bataya jaega ki ek prakar se desh ke saath mat lo mera manana hai ki fraud hai kyonki ek taraf toh sarkar hai vaah mobile data ke upar bhi matlab apni jo hai pakad rakhna chahti hai ya nahi logo ki nijata percent maar rahi hai jabki ilektrol bond dete samay yah vaktavya deti hai ki isse logo ki ya udyogpati udyog patiyon ki nijata ka hanan hota hai toh mere hisab se electron mein jo bhi hai share kharidte hain unko unki pehchaan janta ke saamne jaahir honi chahiye yadi aap mobile jaise device mein bhi yadi aap janta ki puri matlab activity note karna chahte hain toh phir unko itni nijata kyon aur janta ki sahan janta ki kya nahi pata nahi hai

इलेक्टोरल बांड क्या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं है आपकी क्या राय मेरे हिसाब से इलेक्टरल बॉन्ड

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