इंडिया का कानून अँधा बहरा क्यों है और हमारे संविधान में मर्डर और खून करने वालों को शूट और फांसी देने का आर्डर क्यों नहीं है?...


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इसके अंदर यह भी होता है क्योंकि मर्डर करने वाला खून करने वाला कई बार निर्दोष होता है और उकसावे में आकर के या उसके साथ कुछ ऐसी अप्रिय घटना हो जाती है जिसके कारण कि उसे खून करने की नौबत आ जाती है इसीलिए वह कौन करता है अगर वहां पर जहां पर उसे बड़ी किया जाना चाहिए वहां पर अगर किसी ऐसे इंसान को जो कि एक बहुत ही नेक एवं साहब सभी वाला इंसान हो उसे चूत का उधर करके उसे मार दिया जाता है तो यह समाज की हत्या होती है इसीलिए वहां पर सभी बातों को समझ गए उस सभी बातों को देख कर के ही वहां पर यह निर्णय दिए जाते हैं कि इस व्यक्ति ने कितनी अपराध किए हैं कितना इसके ऊपर संगीन जुर्म कार्य किए गए हैं उसी के हिसाब से ही उसे सजा दी जाती है सीधा शूट करना या मर्डर मर्डर मर्डर को और एकौनी को शुद्ध करना किसी बात का नहीं

iske andar yah bhi hota hai kyonki murder karne vala khoon karne vala kai baar nirdosh hota hai aur ukasave me aakar ke ya uske saath kuch aisi apriya ghatna ho jaati hai jiske karan ki use khoon karne ki naubat aa jaati hai isliye vaah kaun karta hai agar wahan par jaha par use badi kiya jana chahiye wahan par agar kisi aise insaan ko jo ki ek bahut hi neck evam saheb sabhi vala insaan ho use chut ka udhar karke use maar diya jata hai toh yah samaj ki hatya hoti hai isliye wahan par sabhi baaton ko samajh gaye us sabhi baaton ko dekh kar ke hi wahan par yah nirnay diye jaate hain ki is vyakti ne kitni apradh kiye hain kitna iske upar sangeen jurm karya kiye gaye hain usi ke hisab se hi use saza di jaati hai seedha choot karna ya murder murder murder ko aur ekauni ko shudh karna kisi baat ka nahi

इसके अंदर यह भी होता है क्योंकि मर्डर करने वाला खून करने वाला कई बार निर्दोष होता है और उक

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देखिए श्रीमान आपका ज्ञान अंधा है इंडिया का कानून अंधा नहीं है आप अज्ञानता वश ऐसे प्रश्न पूछ रहे हैं इंडिया में डेमोक्रेट डेमोक्रेटिक व्यवस्था लागू है और संविधान है और संविधान में सभी प्रकार के अपराध के कानून की व्यवस्था की गई है तथा भारत एक लोकतांत्रिक देश है और उसकी अपनी एक व्यवस्था है भारत में मर्डर और खून के संबंध में फांसी देने का प्रावधान भी है यह उस मामले के विचारण करने के पश्चात न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य सबूतों के विश्लेषण के आधार पर न्यायालय अपना निर्णय सुनाता है और कई मामलों में न्यायालय ने फांसी की सजा भी सुनाई है और उम्र कैद की सजा सुनाई मर्डर हो खून जैसे मामला संगीन अपराध क्राइम क्राइम के स्तर पर न्यायालय अपना निर्णय करता है कृपया आप ऐसे ब्राह्मण प्रश्न ना पूछो इससे भारत की जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होती है कानून और व्यवस्था के विश्वास कम होता है

dekhiye shriman aapka gyaan andha hai india ka kanoon andha nahi hai aap agyanata vash aise prashna puch rahe hain india me demokret democratic vyavastha laagu hai aur samvidhan hai aur samvidhan me sabhi prakar ke apradh ke kanoon ki vyavastha ki gayi hai tatha bharat ek loktantrik desh hai aur uski apni ek vyavastha hai bharat me murder aur khoon ke sambandh me fansi dene ka pravadhan bhi hai yah us mamle ke vicharan karne ke pashchat nyayalaya ke samaksh prastut sakshya sabuton ke vishleshan ke aadhar par nyayalaya apna nirnay sunata hai aur kai mamlon me nyayalaya ne fansi ki saza bhi sunayi hai aur umar kaid ki saza sunayi murder ho khoon jaise maamla sangeen apradh crime crime ke sthar par nyayalaya apna nirnay karta hai kripya aap aise brahman prashna na pucho isse bharat ki janta me bharam ki sthiti paida hoti hai kanoon aur vyavastha ke vishwas kam hota hai

देखिए श्रीमान आपका ज्ञान अंधा है इंडिया का कानून अंधा नहीं है आप अज्ञानता वश ऐसे प्रश्न प

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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इंडिया का कानून अंधा बहरा क्यों हमारे संविधान में मर्डर करने वालों की को सूट और फांसी देने का आदेश जो भारतीय जो कानून और संविधान से निकला हुआ और संविधान में हर तरह के कानून का उल्लेख अंधा बहरा गूंगा कोई सबूत सबूत के अभाव में बहुत से अपराधी बच निकलते हैं सबूत का भाव क्यों रहता है क्योंकि अपराधियों का बोलबाला रहता है उनके लोग डरते हैं इसलिए उनके विपक्ष में खड़े होकर कोई बोलते नहीं एक अपराध होते हैं जो आतंकवादी होते हैं या गुंडे लंबे होते हैं और एक अपराधी हमारे राजनेता होते हैं जिनकी ने तंगता के आगे भी जनता डरती है और चीनी रिजल्ट क्या होता है यह लोग बच निकलते हैं और आपने कहा कि खून करने वालों मर्डर करने वालों को फांसी देने की सजा क्यों ली फांसी देने का प्रावधान हमारे देश में है लेकिन गलत जाना मिल जाए इसलिए कानून की पूरी छानबीन करता है सबूतों के आधार पर प्रमाणिकता करता है और उसके बाद जो है उसे सजा मिलती है मैं एक बात स्पष्ट करना चाहूंगा कानून को दोष नहीं देना चाहिए कानून को तोड़ने वालों को दोष देना चाहिए और जो काम के नाम पर धोखा देते कानून के नाम पर देखो बनाते हैं कानून का दुरुपयोग करते हैं उन्हें सजा मिलनी चाहिए ऑस्ट्रेलिया हाथी देखकर तो आप उसका अंत कर देंगे ऐसी सजा दी जाए क्यों नहीं एहसासों की किसी का मत है कि जिंदगी किसी की भविष्य खेलने का परिणाम क्या होता है

india ka kanoon andha behra kyon hamare samvidhan mein murder karne walon ki ko suit aur fansi dene ka aadesh jo bharatiya jo kanoon aur samvidhan se nikala hua aur samvidhan mein har tarah ke kanoon ka ullekh andha behra gunga koi sabut sabut ke abhaav mein bahut se apradhi bach nikalte hain sabut ka bhav kyon rehta hai kyonki apradhiyon ka bolbala rehta hai unke log darte hain isliye unke vipaksh mein khade hokar koi bolte nahi ek apradh hote hain jo aatankwadi hote hain ya gunde lambe hote hain aur ek apradhi hamare raajneta hote hain jinki ne tangata ke aage bhi janta darti hai aur chini result kya hota hai yah log bach nikalte hain aur aapne kaha ki khoon karne walon murder karne walon ko fansi dene ki saza kyon li fansi dene ka pravadhan hamare desh mein hai lekin galat jana mil jaaye isliye kanoon ki puri chanbin karta hai sabuton ke aadhar par pramanikata karta hai aur uske baad jo hai use saza milti hai ek baat spasht karna chahunga kanoon ko dosh nahi dena chahiye kanoon ko todne walon ko dosh dena chahiye aur jo kaam ke naam par dhokha dete kanoon ke naam par dekho banate hain kanoon ka durupyog karte hain unhe saza milani chahiye austrailia haathi dekhkar toh aap uska ant kar denge aisi saza di jaaye kyon nahi ehasason ki kisi ka mat hai ki zindagi kisi ki bhavishya khelne ka parinam kya hota hai

इंडिया का कानून अंधा बहरा क्यों हमारे संविधान में मर्डर करने वालों की को सूट और फांसी देने

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Aliya

Career Counsellor

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इंडिया का कानून अंधा क्या कानून और कानून अंधा ही होता है उसको सबूत की जरूरत होती है जिसको जो उसके सामने सबूत मिल जाते हैं उसके आधार पर वह अपने फैसला सुनाती है तो रे पतरकी कहने का कि मेट्रो खून करने वालों को सूट पर फांसी क्यों क्या डर क्यों नहीं है तो बिल्कुल नहीं है मगर और फोन करने वाले को और कोई भी बड़ी सजा करने वाले को अर्जुन करने वाले को फांसी की सजा लिखी गई है हमारे संविधान में भी लिखित है अगर आप राधिका राधिका अपराध साबित हो जाता है तो उसे सजा-ए-मौत यानी फांसी दी जाती है उसका अपराध साबित नहीं होता है तो वह छोड़ा था सकता है या नहीं उसका अवैध हो जाती है उसका अपराध साबित न होने पर तो बहुत सारा पैसा होता है दूसरा भी होते हैं लंकापरा साबित नहीं हो पाता जिसकी वजह से वह अखाड़ा का तैयारी देर हो जाती है और जो अपराधी नहीं होते हैं उन पर किसी तरह से सबूत हो जाने पर यानी उनका प्रार्थना स्थापित हो जाता है तो उनको अपराधी ना होने पर भी उनको औषधि जाती है

india ka kanoon andha kya kanoon aur kanoon andha hi hota hai usko sabut ki zarurat hoti hai jisko jo uske saamne sabut mil jaate hain uske aadhar par vaah apne faisla sunati hai toh ray patraki kehne ka ki metro khoon karne walon ko suit par fansi kyon kya dar kyon nahi hai toh bilkul nahi hai magar aur phone karne waale ko aur koi bhi badi saza karne waale ko arjun karne waale ko fansi ki saza likhi gayi hai hamare samvidhan mein bhi likhit hai agar aap radhika radhika apradh saabit ho jata hai toh use saza a maut yani fansi di jaati hai uska apradh saabit nahi hota hai toh vaah choda tha sakta hai ya nahi uska awaidh ho jaati hai uska apradh saabit na hone par toh bahut saara paisa hota hai doosra bhi hote hain lankapara saabit nahi ho pata jiski wajah se vaah akhada ka taiyari der ho jaati hai aur jo apradhi nahi hote hain un par kisi tarah se sabut ho jaane par yani unka prarthna sthapit ho jata hai toh unko apradhi na hone par bhi unko aushadhi jaati hai

इंडिया का कानून अंधा क्या कानून और कानून अंधा ही होता है उसको सबूत की जरूरत होती है जिसको

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हमारा कानून अंधा बहरा नहीं है हमारा कानून लचीला और कठोर नहीं है इसे लचीला है क्योंकि इसमें ऐसे नियम है जो कि लकी ने हैं कठोर कोई व्यवस्था नहीं है कानून में अंधा बहरा हम इतने कहते हैं इसमें की क्योंकि सबूतों के आधार पर चलता है चाहे सबूत सही हूं या गलत हूं उन्हीं को मानकर चलता है यह गलत धारणा है जो कि कानून अंधा है अंधा नहीं है कानून सबूतों के राह पर चलता है और मर्डर और फोन करने वालों को सूट और फांसी देने का आर्डर है इसलिए नहीं है क्योंकि हमारे देश का कानून लचीला है कठोर नहीं है

hamara kanoon andha behra nahi hai hamara kanoon lachila aur kathor nahi hai ise lachila hai kyonki isme aise niyam hai jo ki lucky ne hain kathor koi vyavastha nahi hai kanoon mein andha behra hum itne kehte hain isme ki kyonki sabuton ke aadhar par chalta hai chahen sabut sahi hoon ya galat hoon unhi ko maankar chalta hai yah galat dharana hai jo ki kanoon andha hai andha nahi hai kanoon sabuton ke raah par chalta hai aur murder aur phone karne walon ko suit aur fansi dene ka order hai isliye nahi hai kyonki hamare desh ka kanoon lachila hai kathor nahi hai

हमारा कानून अंधा बहरा नहीं है हमारा कानून लचीला और कठोर नहीं है इसे लचीला है क्योंकि इसमें

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