महिलाओं की आज़ादी के लिए घूँघट प्रथा का अंत होना कितना ज़रूरी है?...


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Shubham Saini

Software Engineer

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महिलाओं की आजादी के लिए घूंघट प्रथा का अंत होना कितना जरूरी है देखो जो हमारी कल्चर में पहले से था कि औरतों को घुंघट में रहना चाहिए शादी विवाह के बाद में तुम उसका पालन करते हैं अपनों से बड़ों के सम्मान में रिस्पेक्ट जुड़ा हुआ है यह सब पर अगर यह कोई औरत करती है संस्कारी है उसे संस्कार माना जाता है और वह पुरानी तरीके से यह सोच भी बहुत अच्छी है जो औरतें कुमार में रहती हैं और रही बात आजादी की आज की यह बर्थडे द्वार में एडवांस लोगों के हैं जो अब घूंघट का पता धीरे-धीरे खत्म भी हो रहा है

mahilaon ki azadi ke liye ghunghat pratha ka ant hona kitna zaroori hai dekho jo hamari culture me pehle se tha ki auraton ko ghunghat me rehna chahiye shaadi vivah ke baad me tum uska palan karte hain apnon se badon ke sammaan me respect juda hua hai yah sab par agar yah koi aurat karti hai sanskari hai use sanskar mana jata hai aur vaah purani tarike se yah soch bhi bahut achi hai jo auraten kumar me rehti hain aur rahi baat azadi ki aaj ki yah birthday dwar me advance logo ke hain jo ab ghunghat ka pata dhire dhire khatam bhi ho raha hai

महिलाओं की आजादी के लिए घूंघट प्रथा का अंत होना कितना जरूरी है देखो जो हमारी कल्चर में पहल

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Rahul Agrawal

Career Counsellor

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विकी महिलाओं की आजादी के लिए ना सिर्फ घुंघट प्रथा बल्कि हर वह चीज अंत होनी चाहिए जो कि महिलाओं को दबने के लिए मजबूर करती है ठीक है घूंघट की जो प्रथा एवं पिछले जमाने से चली आ रही है खास करके हरियाणा में अगर आप देखो और हरियाणा में क्या अधिकतर घरों में जब भी ससुर या जेठा थे तो महिलाएं घुंघट रख लेती है तो फेस पैक होता है एक प्रथा चली आ रही है लेकिन मेरे हिसाब से यह प्रथा खत्म होनी चाहिए क्योंकि महिलाएं क्यों रखें बिकॉज़ वह महिला है तो वह घूंघट रखेंगे और वह सामने वाला जो उनका हस्बैंड है वह मरते तो वह घूंघट नहीं करेगा तो यह जो जेंडर इनिक्वालिटी है ना यही खत्म करनी सबसे ज्यादा जरूरी है उसके बाद ही हम बोल सकते हैं कि महिलाओं में थोड़ा सा एंपावरमेंट आएगा अन्यथा ऐसे ही कहानी चलती जाएगी

vicky mahilaon ki azadi ke liye na sirf ghunghat pratha balki har vaah cheez ant honi chahiye jo ki mahilaon ko dabane ke liye majboor karti hai theek hai ghunghat ki jo pratha evam pichhle jamaane se chali aa rahi hai khas karke haryana mein agar aap dekho aur haryana mein kya adhiktar gharon mein jab bhi sasur ya jetha the toh mahilaen ghunghat rakh leti hai toh face pack hota hai ek pratha chali aa rahi hai lekin mere hisab se yah pratha khatam honi chahiye kyonki mahilaen kyon rakhen because vaah mahila hai toh vaah ghunghat rakhenge aur vaah saamne vala jo unka husband hai vaah marte toh vaah ghunghat nahi karega toh yah jo gender inikwaliti hai na yahi khatam karni sabse zyada zaroori hai uske baad hi hum bol sakte hain ki mahilaon mein thoda sa empowerment aayega anyatha aise hi kahani chalti jayegi

विकी महिलाओं की आजादी के लिए ना सिर्फ घुंघट प्रथा बल्कि हर वह चीज अंत होनी चाहिए जो कि महि

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Rahul Bharat

राजनैतिक विश्लेषक

2:27
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महिलाओं की आजादी के लिए घूंघट प्रथा का अंत होना बहुत जरूरी है लेकिन है क्या एक तरफ की मांग करते हैं हमारे समाज से घूंघट प्रथा खत्म हो जाना चाहिए और दूसरी तरफ जो आधुनिक रखे फल को लेकर तरह-तरह की वजह से तमाम घटनाएं हो रही हैं ऐसे में इनवर्टर का अंत करना समाज के लिए दो वर्गों में बांटा जाता है समाज का एक बार करता है कि नहीं घूम मत होना चाहिए या पैदा तथा होना चाहिए और दूसरी तरफ आधुनिकता के आईने में हम लोग आगे बढ़ते जा रहे हैं और उसमें घटिया इस तरह की चीजें बिल्कुल नहीं लगती है तो एक तरफ से लगा ना जाए तो समाज के कुछ एक समुदायों में समुदायों में कबीलाई समुदायों में इस तरह की जनजाति समुदाय में ही रह गए हैं से सभी जगहों से घूंघट प्रथा का अंत हो चुका है तथा समाज में सामान्य समाज कहा जा सकता है जिसको उसका नाम बस में कर सकते हैं सामान्य सभा जिसमें वर्षा कहीं रह नहीं गया है उसका एक तरीके से अंत हो ही गया है तो थोड़ी बहुत तरह के लोग बचे हुए हैं वह समाज के निचले तबके या आदिवासी तक के इस तरह के तत्वों से आते हैं समाज में इस तरह के पता है नहीं तो यह तरीके से खत्म ही हो गया है अर्जुन नहीं हुआ है उसका बिछड़ जाना चाहिए यह समाज के लिए बहुत आवश्यक है और प्रथा का अंत

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महिलाओं की आजादी के लिए घूंघट प्रथा का अंत होना बहुत जरूरी है लेकिन है क्या एक तरफ की मांग

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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महिलाओं की आजादी के लिए घुंघट प्रथा का अंत कितना जरूरी है पहले के समय से यह घुंघट प्रथा जैन समुदाय में बुर्का प्रथा के पहले से हमारे इंडिया में सबसे गरीब देशों में और क्या अभी जिसको धर्म से अगर जोड़ दिया गया है कि बुर्का बुर्का बहन नहीं होना चाहिए बुर्का बैन होना चाहिए या घूंघट प्रथा बंद होनी चाहिए यार सबकी अपनी अपनी सोच अपने अपने परिवार के अपने-अपने धर्म के और अपने-अपने शिक्षा के स्तर को अनुसार ही शिक्षा के स्तर के अनुसार और अपनी परंपराओं और प्रथा के अनुसार डिपेंड करता है कि कौन सी प्रथा में अपना नहीं है कौन सी प्रथा को तिलांजलि देनी है वैसे ही जनरल टॉक में अगर बात की जाए तो घूंघट रखने से कोई भी महिला को काफी परेशानी होती है बार-बार माथे पर जो पल्लू रखना उसको घुंघट नहीं करना चाहिए वह तो मर्यादा के रूप में हर एक महिला जो है सिर्फ माता धक्के तो बहुत ठीक है उससे से ज्यादा जी में घूंघट लंबा घूंघट जो है वह महिलाओं के लिए बहुत ही प्रॉब्लम करता है और वह पॉसिबल नहीं है आज के समय में 1 फुट 2 फुट तक को घुंघट निकालना साड़ी निकालना यह तो बिल्कुल विचित्र लगता है हमको तो सिर्फ नाचेगे पल्लू हो तो वही रहता है आजकल सब लोग वहीं नियम पालते हैं बाकी को घुंघट प्रथा का अंत हो चुका है अब किसी से नहीं जोड़ने से लेकिन जो घूंघट में उपरोक्त समय के साथ सब कुछ बदलता है मिलती है और जो आज बोलते हैं और स्वयं सैंडी बदलता है इसलिए जरूरत जैसी होती है उस तरह से लोग अपनी प्रार्थना में चेंज करते हैं और होना जरूरी है समय के साथ चल सकते हैं तो महिलाओं को भी चलना चाहिए और अपने हाथों में घूंघट से मुक्ति देनी चाहिए धन्यवाद

mahilaon ki azadi ke liye ghunghat pratha ka ant kitna zaroori hai pehle ke samay se yah ghunghat pratha jain samuday mein burka pratha ke pehle se hamare india mein sabse garib deshon mein aur kya abhi jisko dharam se agar jod diya gaya hai ki burka burka behen nahi hona chahiye burka ban hona chahiye ya ghunghat pratha band honi chahiye yaar sabki apni apni soch apne apne parivar ke apne apne dharam ke aur apne apne shiksha ke sthar ko anusaar hi shiksha ke sthar ke anusaar aur apni paramparaon aur pratha ke anusaar depend karta hai ki kaun si pratha mein apna nahi hai kaun si pratha ko tilanjali deni hai waise hi general talk mein agar baat ki jaaye toh ghunghat rakhne se koi bhi mahila ko kafi pareshani hoti hai baar baar mathe par jo pallu rakhna usko ghunghat nahi karna chahiye vaah toh maryada ke roop mein har ek mahila jo hai sirf mata dhakke toh bahut theek hai usse se zyada ji mein ghunghat lamba ghunghat jo hai vaah mahilaon ke liye bahut hi problem karta hai aur vaah possible nahi hai aaj ke samay mein 1 foot 2 foot tak ko ghunghat nikalna saree nikalna yah toh bilkul vichitra lagta hai hamko toh sirf nachege pallu ho toh wahi rehta hai aajkal sab log wahin niyam palate hain baki ko ghunghat pratha ka ant ho chuka hai ab kisi se nahi jodne se lekin jo ghunghat mein uparokt samay ke saath sab kuch badalta hai milti hai aur jo aaj bolte hain aur swayam sandy badalta hai isliye zaroorat jaisi hoti hai us tarah se log apni prarthna mein change karte hain aur hona zaroori hai samay ke saath chal sakte hain toh mahilaon ko bhi chalna chahiye aur apne hathon mein ghunghat se mukti deni chahiye dhanyavad

महिलाओं की आजादी के लिए घुंघट प्रथा का अंत कितना जरूरी है पहले के समय से यह घुंघट प्रथा जै

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विकी यह हमें समझना चाहिए समाज के रूप में सोसायटी के रूप में अगर किसी पर्सन को किसी व्यक्ति को चाहे वह महिला हो या पुरुष अगर उसे विकास करना है उसके व्यक्तित्व को डेवलप करना है तू तू व्यक्तित्व को डिवेलप करने के रास्ते में अगर कोई प्रथा कोई रीति कोई पहनावा कोई मान्यता आती है उसे छोड़ देना ज्यादा अच्छा है क्योंकि इससे उस व्यक्ति की पर्सनालिटी या व्यक्तित्व व्यापक नहीं बन पाता है और उसका व्यक्तित्व बहुत ही सीमित रह जाता है इन विधाओं की वजह से इन छोटी-छोटी जो भी विचार होते हैं मान्यताएं होती उनकी वजह से जो भी किसी की स्वतंत्रता में बाधा बने किसी के विकास में किसी की शिक्षा में उन चीजों को छोड़ देना चाहिए अगर कोई इसे अपना कल्चर का अपनी संस्कृति का हिस्सा मानता है और उस संस्कृति का हिस्सा मानकर वह विकास करना चाहता है और बहुत प्रतिबद्ध है कमेंट है अपनी कल्चर को लेकर तू उसके साथ अगर कर रहा है डेवलपमेंट तो वह भी ठीक है लेकिन अगर यह किसी मायने में अगर बाधा बनता है क्योंकि यह कल्चर नहीं रह जाता लोगों के लिए कुछ लोग इसे अगर महिलाओं की बात की जाए तो कहीं कहीं जहां पुरुष समाज जहां मेल सोसाइटी डोमिनेट करती है वहीं प्रथाओं की आड़ में महिलाओं को 2 मिनट करते हैं महिलाओं के ऊपर अपना वर्चस्व दिखाते हैं और महिलाएं दलित और शोषित हो जाती हैं क्वालिटी होती हैं वह मेन लेडीस तो वह अपना विकास नहीं कर पाती अब वह शिक्षित नहीं हो पाती तो अगर महिलाओं को शिक्षित करना है अगर महिलाएं शिक्षित होना चाहती हैं लड़कियां युक्तियां शिक्षित होना चाहती हैं और अगर उनको लगता है ऐसी कोई भी प्रथा घुंघट प्रथा या बुर्का प्रथा यह सब अगर उनकी शिक्षा में बाधा बनते हैं तो जरूर इनको हटा इन को हटाने में हमें संकोच नहीं करना चाहिए जो चीज हमारी पर्सनालिटी को विकसित करने में हमारी बाधा बने वह चीज हमें नहीं रखनी चाहिए हालांकि चाहे वह पुरुष और 10 महिलाओं से शालीन कपड़ों में रहना चाहिए लेकिन इसका मतलब यह नहीं किया कि बुर्का पहनना जरूरी है या घूंघट उड़ना जरूरी है बस एक जिस तरह के जेंटलमैन होता है उसी तरह से रहे रहे लेकिन यह बहुत ही गलत है कहीं पर अगर किसी भी वर्चस्व वादी समाज द्वारा कोई जहां पर पुरुषों का वर्चस्व है जहां पर पुरुषों मिनट करते हैं वहां पर महिलाओं को इन्हीं प्रथाओं इन्हीं मान्यताओं की आड़ में उनको दबाया जाता है दमित किया जाता है सूचित किया जाता है और डोमेस्टिक वायलेंस घरेलू हिंसा वगैरा-वगैरा चीजें होती रहती है तो वहां पर यह बहुत ही गलत है संस्कृति अपनी-अपनी है अगर कोई चाहता है तो कर सकता है लेकिन इसकी आड़ में किसी का शोषण ना हो किसी महिला का सेक्सी लड़कियों का या किसी भी वर्ग का तो इसीलिए महिलाओं की आजादी में अगर बाधक बन रहा है तो अगर कोई भी महिला शिक्षित होना चाहती है या हमें शिक्षित करना ही चाहिए समाज के रूप में सोचना चाहिए तो सिटी ग्रुप में 2 महिलाओं की आजादी के लिए घूंघट प्रथा या बुर्का प्रथा क्योंकि आज मॉडर्न वर्ल्ड में मॉडर्न एरा में आधुनिक समाज में अगर इनकी इनका कोई भी सांसारिक प्रासंगिकता नहीं रही है रेलीवेंसी नहीं रही है तो नहीं होनी ही चाहिए क्योंकि आज जिस तरह से रहा है जिस तरह का समाज है उसी तरह से जिस तरह से शिक्षा हो सकती है जिस तरह से किसी भी वर्ग का विकास हो सकता है तो वह विकास में जो भी चीजें रोड़ा बने बाधा बने उन चीजों को हमें हटाने पर विचार करना चाहिए इसी तरह से फिर हमारी देश का विकास होगा जब हमारे देश की आधी आबादी जो कि महिलाओं की है वह विकास करेगी तभी हमारा देश विकास करेगा तभी हमारे देश का सामाजिक विकास आर्थिक विकास socio-economic डेवलपमेंट के साथ-साथ अगर महिलाओं का विकास होगा तो फिर उनके आने वाली पीढ़ियां हैं जो बच्चे हैं उनका भी विकास होगा तू बहुत सारे विकास तो इसीलिए अधूरे हैं क्योंकि महिला सशक्तिकरण नहीं हो पाता है तो महिला सशक्तिकरण के लिए यह सारी चीजें पर विचार करना चाहिए

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विकी यह हमें समझना चाहिए समाज के रूप में सोसायटी के रूप में अगर किसी पर्सन को किसी व्यक्ति

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

1:58
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देखो आपने कहा है कि महिलाओं की आजादी के लिए उनका घुंघट प्रथा को खत्म करना बहुत जरूरी है कितना जरूरी है यह तो आप देख ही रहे हैं उस टाइम की महिलाओं में घूंघट के अंदर बड़े लोगों के लिए लाज शर्म सब रहता था और आज यह सब हंसते ही बहुत ज्यादा तलाक के किस होने लगे हैं शादियां टूटती शुरू हो गई हैं उससे भी डर बना रहता था कि अगर हम ससुराल में जाकर कुछ कहेंगे तो हमारे मां-बाप की बदनामी होगी तो आजकल इस लड़की को नहीं सोचते पुराने जमाने में एक कहावत थी कि औरत का खून बहुत गर्म होता है इसीलिए उसके पैरों में उंगलियों में लिखिए पैरों में पजेब गली में हंस दी बाजू में बाजूबंद हाथों में क्या करते हैं चूड़ियां उंगलियों में अंगूठी कान में टॉप्स और गले में जो नेकलेस होता है यहां रोता है वह सब पहनती थी उससे क्या होता था कि उनके शरीर का जो सरकुलेशन था थोड़ा दबदबे चलता था कहते हैं कि जो औरत का ब्लड होता है काम करने की क्षमता होती है उसे देवी जाती थी और आज यह जो घूंघट प्रथा खत्म हो गई है लड़की लड़कियों में बराबरी आ गई है तू यह मुसीबत बन गई

dekho aapne kaha hai ki mahilaon ki azadi ke liye unka ghunghat pratha ko khatam karna bahut zaroori hai kitna zaroori hai yah toh aap dekh hi rahe hain us time ki mahilaon mein ghunghat ke andar bade logon ke liye laj sharm sab rehta tha aur aaj yah sab hansate hi bahut zyada talak ke kis hone lage hain shadiyan tootati shuru ho gayi hain usse bhi dar bana rehta tha ki agar hum sasural mein jaakar kuch kahenge toh hamare maa baap ki badnami hogi toh aajkal is ladki ko nahi sochte purane jamaane mein ek kahaavat thi ki aurat ka khoon bahut garam hota hai isliye uske pairon mein ungaliyon mein likhiye pairon mein pajeb gali mein hans di baju mein bajuband hathon mein kya karte hain churian ungaliyon mein anguthi kaan mein tops aur gale mein jo necklace hota hai yahan rota hai vaah sab pahanti thi usse kya hota tha ki unke sharir ka jo sarakuleshan tha thoda dabdabe chalta tha kehte hain ki jo aurat ka blood hota hai kaam karne ki kshamta hoti hai use devi jaati thi aur aaj yah jo ghunghat pratha khatam ho gayi hai ladki ladkiyon mein barabari aa gayi hai tu yah musibat ban gayi

देखो आपने कहा है कि महिलाओं की आजादी के लिए उनका घुंघट प्रथा को खत्म करना बहुत जरूरी है क

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बस वाले महिलाओं की आजादी के लिए प्रथा का अंत होना कितना जरूरी तो मैं आपको बताना चाहूंगा का ही कई प्रस्थान है या वह नहीं संस्कार है वह आपने देखे जाते सी लड़कियों के जो घूंघट का प्यार बहुत सी होती है जो नहीं करती उसी पर जोर जबस्ती तो है नहीं क्या भाई चल तू ही घुंघट कार्य तेरा है तेरे भाई मनै वह तो संस्कार है अपनी-अपनी किसी को बढ़िया जानते किसी को नहीं लगती इसलिए भाई

bus waale mahilaon ki azadi ke liye pratha ka ant hona kitna zaroori toh main aapko batana chahunga ka hi kai prasthan hai ya vaah nahi sanskar hai vaah aapne dekhe jaate si ladkiyon ke jo ghunghat ka pyar bahut si hoti hai jo nahi karti usi par jor jabasti toh hai nahi kya bhai chal tu hi ghunghat karya tera hai tere bhai manai vaah toh sanskar hai apni apni kisi ko badhiya jante kisi ko nahi lagti isliye bhai

बस वाले महिलाओं की आजादी के लिए प्रथा का अंत होना कितना जरूरी तो मैं आपको बताना चाहूंगा का

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Vikas Singh

Political Analyst

8:24
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आपका सवाल है कि महिलाओं की आजादी के लिए घूंघट प्रथा का अंत होना कितना जरूरी है देखिए घूंघट प्रथा कोई हमारे देश में हमारे भारतीय संस्कृति में कोई त्रुटि नहीं है यह एक संस्कारों की प्रथा है जो कि गांव में देखने को मिलती है अफसरों से तो घूंघट प्रथा गायब हो गया जब भी महिलाएं बड़ों के सामने आती हैं तो घूंघट में आती हैं तो इसका मतलब यह होता है क्यों बड़ों का सम्मान करते राजस्थान के गांव में आएंगे तो एजुकेटेड लड़कियां होती हैं जिनकी शादी हो जाती है वह जब गांव में जाती हैं तो गांव में सम्मान का ख्याल रखती है आचरण का ख्याल रखती हैं और बड़ों के सम्मान का ख्याल रखते हैं इसलिए वह घुंघट में आती है जो हर को कुछ लोग कुर्ती मानते हैं जो हर भी हमारे समाज में हमारे भारतीय संस्कृति में कोई कुर्ती नहीं थी राजपूत लोग अपने देश की रक्षा के लिए अपने हिंदुत्व की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर देते थे घर की महिलाएं होती थी अपने बच्चों को राजतिलक करके भेजती थी 17 अट्ठारह साल के बच्चों को कि बेटा जाओ अपने देश की रक्षा करो बच्चे भी अपनी जान कुर्बान कर देते थे इस देश के लिए तो महिलाएं अकेली पड़ जाती थी लड़कियां अकेली पड़ जाती थी तो वह महिलाएं जोहर हो जाते थे जो हर इसलिए होती थी ताकि कोई भी मुगल समाज का कोई भी दूसरा व्यक्ति उन्हें छू न पाए इसलिए वह जौहर होते थे तो यह हमारे भारतीय संस्कृति के सम्मान है और सम्मान कभी कुर्ती नहीं होती है गलत विचारों से इन सभी चीजों को प्रस्तुत किया गया है इसीलिए हमारी भारतीय संस्कृति दिन पर दिन खत्म हो रही है हम लोग यूरोपियन कंट्री को अपनाते जा रहे हैं और यूरोपियन कंट्री के जो लोग हैं हमारे भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं जबकि हमें अपनी संस्कृति के ऊपर गर्व होना चाहिए दुनिया का सबसे पहला विश्वविद्यालय हमारे देश में था हमारा देश दुनिया में विश्व गुरु बोला जाता था सोने की चिड़िया बोली जाती थी तो क्या उस टाइम ऐसी कुर्ती थी इसलिए सोने की चिड़िया बोली जाती थी नहीं ना उस टाइम हमारे देश की साक्षरता हंड्रेड परसेंट थी आज कुछ लोग गर्व करते हैं कि केरला की साक्षरता 94% है गर्व करने की जरूरत नहीं है पूरे विश्व में हिंदुस्तान में बड़े-बड़े महापुरुषों ने जन्म लिया है और पूरे देश की लिटरेसी हंड्रेड परसेंट होना बहुत बड़ी बात है यानी हमारे देश में अंधविश्वास नाम का कोई चीज नहीं था लेकिन कुछ जो लालची लेखक थे इन लोगों ने गलत तरीके से हर एक चीज को लिखकर प्रस्तुत किया और उसको हम लोगों को पढ़ाया गया हम लोग पढ़े और हम लोग भ्रमित होकर अपने ही संस्कारों को नष्ट करने का कार्य लोगों ने किया और धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति के ऊपर बहुत बड़ा आज आने लगा राजनीतिक पार्टी अंग्रेज मुगल शासक कांग्रेस पार्टी यह सभी पार्टियां यही चाहती थी हम अरे देश में कि भारतीय संस्कृति को खत्म किया जाए देखिए भारतीय संस्कृति पूरे विश्व में एक मिसाल है जिसकी परंपरा को जिसकी छवि को देखने के लिए पूरा विश्व मन से तैयार होता है सनातन परंपरा की जो छवि है आज भी पूरे विश्व के लोग उसको एक्सेप्ट करते हैं और मानते हैं कि हमारे पूर्वज भी सनातन धर्म से थे तो घुंघट में रहने वाली प्रथा को कभी खत्म नहीं करना चाहिए घुंघट में होनी चाहिए औरतें और कुछ लोग एक साथ पर कहते हैं कि लड़कियां कम कपड़े पहनती हैं इसलिए वह सुंदर दिखाई देती है मैं यह बोलता हूं जिन लोगों के दिमाग में ऐसा सवाल है वो राजस्थान में चले गए वहां पर महिलाएं पूरा कपड़ा अच्छे से पहनते हैं और उनकी सुंदरता आप देखेंगे तो नतमस्तक हो जाएंगे सुंदरता तो पूरे कपड़े में दिखाई देता है पूरा कपड़ा पहनते हो तो आप सुंदर दिखते हो भारतीय संस्कृति को आप प्रस्तुत करते हो तो कहने का मतलब है यूरोपियन कंट्री के विचारधारा को खत्म करना होगा हमारे देश में किसी भी महिला को घूंघट प्रथा से बांधा नहीं जाता है बल्कि अगर महिलाएं एजुकेटेड हैं तो वह हमेशा घुंघट प्रथा का समर्थन करेंगी वह जब भी गांव में जाएंगी घुंघट में रहेंगी घुंघट में नहीं भी रहेंगी तो अपना जो पल्लू होता है उसे सर पर रखेंगी अपने बड़ों के सामने और इससे क्या होगा कि हमारे भारतीय संस्कृति की रक्षा होगी दूसरा यह चीज बहुत इंपॉर्टेंट कि हमें इतिहास को सही तरीके से जानना होगा इतिहास हमारे पाठ्यक्रम में नहीं पढ़ाया जाता है इसके पीछे भी बहुत बड़ी राजनीति हुई है वह इतिहास में नहीं पढ़ाया जाता सिकंदर और अकबर को महान बोला जाता है महाराणा प्रताप को महान नहीं बोला जाता है पृथ्वीराज चौहान को महान नहीं बोला जाता है तो यह सब हम लोगों को भी सर्च करके पढ़ना होगा कि आखिर सच्चाई क्या थी जब सच्चाई को अब जानोगे तो आप कभी भी किसी प्रथा का विरोध नहीं करोगे कोई भी तथा हमारे देश में कभी भी त्रुटि नहीं थी वह सच्ची प्रथा थी जो हर सच्ची प्रथा थी घुंघट सती प्रथा है बड़ों का सम्मान सच्ची प्रथा है छोटों को प्यार सच्ची प्रथा है यह सब सच्ची प्रथा थी अच्छी प्रथा थी इसीलिए तो हिंदुस्तान के लिए ट्रेसी हंड्रेड परसेंट थी आज क्यों नहीं हिंदुस्तान के लिटरेसी हंड्रेड परसेंट है क्योंकि आज के पेट में हमारे देश में गलत कुर्तियां आ गई है यूरोपियन कंट्री की कुर्तियां आ गई हैं हम लोग बर्गर खा रहे हैं बर्गर खा रहे हैं पिज़्ज़ा खा रहे हैं अरे भैया यूरोपियन कंट्री की तो मजबूरी है बर्गर पिज़्ज़ा खाना क्योंकि वहां 12 महीना ठंडी पड़ता है यहां पर तो हर महीने महीने के हिसाब से अलग-अलग खाना है यहां 3 महीना गर्मी पड़ता है 6 महीना 20 महीना ठंडी पड़ता है बरसात पड़ता है यहां के हिसाब से आप खाना पहले लोग खाते थे स्वस्थ रहते थे तो कहने का मतलब है कि अपने भारतीय परंपरा को सबसे पहले जानना जरूरी है पहले लोग दाल चावल रोटी सब्जी खाते थे आज के डेट में लोग पिज़्ज़ा खा कर सो जा रे पिज्जा खाओगे जो 100 दिन का झोपड़ा रोटी होता है तो आपकी बॉडी पर क्या प्रभाव पड़ेगा उसका अंग्रेज खाएंगे उनको उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगा क्योंकि वहां पर मजबूरी है उनको खाना क्योंकि ठंडी पड़ती है वहां पर वह अपना रोटी 100 दिन का रख लेते हैं सेव करके कि आगे मुझे खाना है तो हम लोगों को थोड़ा सा ध्यान देना होगा और अपने भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार करना होगा लोगों को समझाना होगा और सबसे पहले तो खुद समझना होगा और किसी भी प्रथा का विरोध मत करिए विरोध करने से पहले उस प्रथा के गहराई तक जाकर आप उसे समझिए जानिए तभी हमारे भारतीय संस्कृति की रक्षा होगी तभी हमारी संस्कृति पूरे विश्व में एक बार फिर से स्थापित होगी धन्यवाद

aapka sawaal hai ki mahilaon ki azadi ke liye ghunghat pratha ka ant hona kitna zaroori hai dekhiye ghunghat pratha koi hamare desh mein hamare bharatiya sanskriti mein koi truti nahi hai yah ek sanskaron ki pratha hai jo ki gaon mein dekhne ko milti hai afsaron se toh ghunghat pratha gayab ho gaya jab bhi mahilaen badon ke saamne aati hain toh ghunghat mein aati hain toh iska matlab yah hota hai kyon badon ka sammaan karte rajasthan ke gaon mein aayenge toh educated ladkiyan hoti hain jinki shadi ho jaati hai vaah jab gaon mein jaati hain toh gaon mein sammaan ka khayal rakhti hai aacharan ka khayal rakhti hain aur badon ke sammaan ka khayal rakhte hain isliye vaah ghunghat mein aati hai jo har ko kuch log kurtee maante hain jo har bhi hamare samaaj mein hamare bharatiya sanskriti mein koi kurtee nahi thi rajput log apne desh ki raksha ke liye apne hindutv ki raksha ke liye apni jaan kurban kar dete the ghar ki mahilaen hoti thi apne bacchon ko rajtilak karke bhejti thi 17 attharah 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आपका सवाल है कि महिलाओं की आजादी के लिए घूंघट प्रथा का अंत होना कितना जरूरी है देखिए घूंघट

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में शिक्षा के कारण भाषण बताएं हैं न घूंघट प्रथा भी एक श्लोक का पता भी एक है और बहुत सारे अंधविश्वास में सभी जातियों में सभी धर्मों में है तो महिलाओं की आजादी के लिए घूंघट प्रथा का अंत होना चाहिए बहुत आवश्यक है मैं भी बात का पक्षधर हूं लेकिन कभी यह सोचो एवं पिटाई कैसे मुगलों के कारण मुसलमानों के कारण आई थी राजस्थान सोना मत आप

bharat mein shiksha ke karan bhashan batayen hain na ghunghat pratha bhi ek shlok ka pata bhi ek hai aur bahut saare andhavishvas mein sabhi jaatiyo mein sabhi dharmon mein hai toh mahilaon ki azadi ke liye ghunghat pratha ka ant hona chahiye bahut aavashyak hai main bhi baat ka pakshadhar hoon lekin kabhi yah socho evam pitai kaise mugalon ke karan musalmanon ke karan I thi rajasthan sona mat aap

भारत में शिक्षा के कारण भाषण बताएं हैं न घूंघट प्रथा भी एक श्लोक का पता भी एक है और बहुत स

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गूंगा कोई प्रथा नहीं है पुराने जमाने में क्या होता था कि जैसे किसी महिला की आंख में थोड़ी खराबी है या चेहरा ग्रुप है या थोड़ी सांवली हैं तो इसलिए वो अपन से बड़े बूढ़ों के सामने अपना चेहरा ढक लेती थी और आज के जमाने में क्या है कहे बहू और बेटियों को बिल्कुल एक ही नजर से देखते हैं और इसकी कोई जरूरत भी नहीं है और लगभग लगाइए खत्म भी हो चुकी है और कुछ ही ग्रामीण इलाकों में थोड़ा-बहुत अभी देखने को मिलता है और भविष्य में यह बंद हो जाना चाहिए धन्यवाद

gunga koi pratha nahi hai purane jamaane mein kya hota tha ki jaise kisi mahila ki aankh mein thodi kharabi hai ya chehra group hai ya thodi sawli hain toh isliye vo apan se bade boodhon ke saamne apna chehra dhak leti thi aur aaj ke jamaane mein kya hai kahe bahu aur betiyon ko bilkul ek hi nazar se dekhte hain aur iski koi zaroorat bhi nahi hai aur lagbhag lagaaiye khatam bhi ho chuki hai aur kuch hi gramin ilakon mein thoda bahut abhi dekhne ko milta hai aur bhavishya mein yah band ho jana chahiye dhanyavad

गूंगा कोई प्रथा नहीं है पुराने जमाने में क्या होता था कि जैसे किसी महिला की आंख में थोड़ी

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