चुनाव में चंदा देने वाले की पहचान छुपाने का क्या मकसद होता है?...


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Liyakat Ali Gazi

Motivational Speaker, Life Coach & Soft Skills Trainer 📲 9956269300

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

चुनाव में चंदा देने वाले व्यक्तियों की पहचान छुपाने का मकसद ही रहता है कि कोई भी पार्टी या नहीं चाहती है कि जिस व्यक्ति ने उसको चंदा दिया है तो उसकी पहचान हो जिससे कि जनता के सामने सच्चाई 530 सच्चाई को छुपाने के लिए कोई भी पार्टी ऐसा नहीं करती है और यह पूरी तरीके से गलत है क्योंकि जो भी व्यक्ति किसी पार्टी को किस क्षेत्र को चंदा देता है तो उसको जो है जनता के सामने लाना चाहिए दिखाना चाहिए कि हर क्षेत्र में जो भी इंसान कोई चंदा देता है तो उसकी पहचान की जाती है तो राजनीति क्षेत्र में चंदा देने वाले व्यक्ति की पहचान क्यों नहीं होनी चाहिए अच्छी बात है इसमें राजनीतिक पार्टियों का कहीं ना कहीं लालच है कुछ ना कुछ मकसद में छुपी हुई है और वो सच्चाई को छुपाना चाहती हैं और अपने आप को बचाना चाहती इसलिए चंदा देने वाले व्यक्ति की पहचान नहीं करते हैं

chunav mein chanda dene waale vyaktiyon ki pehchaan chhupaane ka maksad hi rehta hai ki koi bhi party ya nahi chahti hai ki jis vyakti ne usko chanda diya hai toh uski pehchaan ho jisse ki janta ke saamne sacchai 530 sacchai ko chhupaane ke liye koi bhi party aisa nahi karti hai aur yah puri tarike se galat hai kyonki jo bhi vyakti kisi party ko kis kshetra ko chanda deta hai toh usko jo hai janta ke saamne lana chahiye dikhana chahiye ki har kshetra mein jo bhi insaan koi chanda deta hai toh uski pehchaan ki jaati hai toh raajneeti kshetra mein chanda dene waale vyakti ki pehchaan kyon nahi honi chahiye achi baat hai isme raajnitik partiyon ka kahin na kahin lalach hai kuch na kuch maksad mein chhupee hui hai aur vo sacchai ko chupana chahti hain aur apne aap ko bachaana chahti isliye chanda dene waale vyakti ki pehchaan nahi karte hain

चुनाव में चंदा देने वाले व्यक्तियों की पहचान छुपाने का मकसद ही रहता है कि कोई भी पार्टी या

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Nikhil Ranjan

HoD - NIELIT

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लिखे जैसे कि आज के चर्चा का विषय है कि चुनाव में चंदा देने वाले की पहचान छुपाने का क्या मकसद होता है तो यहां खुद आ जाएंगे की राजनीतिक पार्टियां भले ही कितनी एक दूसरे की विरोधियों लेकिन कुछ बातों में हुए एक दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं और एक दूसरे का समर्थन भी करती हैं बातें जैसे की सैलरी बढ़ने नहीं हो किसी के सांसद एमएलए एमपी किसी की भी सैलरी बढ़नी है तो सारे के सारे एक सुर में एक ही आता जाते हैं और फटाफट ऐसी चीज है मतदान के लिए आती भी हो फटाफट हो जाती है तब कोई वक्त नहीं होता कोई चर्चा नहीं होती कुछ नहीं होता ही तरह अगर कोई चंदे को लेकर जैसी बातचीत है या आईटीआई की बात आती है कि आरटीआई क्रांति पार्टी को पर नहीं लगनी चाहिए सारे के सारे घर में अजी हां जी बिल्कुल नहीं लगनी चाहिए और आरटीआई एक्ट हटा दे ज्यादा राजनीतिक पार्टी पॉलीटिकल पार्टी को पढ़ते इसी तरीके से चंद्र की बात है तो चंदे के बारे में यह है कि किसी की काली कमाई हो सकती है करप्शन करप्शन का पैसा हो सकता है और भी 10 चीजें होती हैं हवाला का पैसा कैसे भी हो लेकिन पर चंदे का दिखाने का अधिकार नहीं अधिकार क्या उन्होंने अपने आप से ही खत्म कर लिया है कि किसी को पता ना चले कि पैसा कहां से आया है कौन उसका उस सूत्रधार है पैसा कौन कर रहा है वह को टायर्स ग्रुप है कौन है उनसे उसको कोई सरकार नहीं है उनको सिर्फ पैसे से मतलब है आपने पार्टी के लिए फंड आ रहा है और सारी राजनीतिक पार्टियां एक नहीं सारे गांधी पार्टी में तो यही मकसद होता है कि चंदा जो पैसा आ रहा है वह छुपा रहे किस से आ रहा है कहां से आ रहा है क्यों आ रहा है यह बातें कभी सामने आई ना पाए जनता के सामने धन्यवाद

likhe jaise ki aaj ke charcha ka vishay hai ki chunav mein chanda dene waale ki pehchaan chhupaane ka kya maksad hota hai toh yahan khud aa jaenge ki raajnitik partyian bhale hi kitni ek dusre ki virodhiyon lekin kuch baaton mein hue ek dusre ke saath kandhe se kandha milakar chalte hain aur ek dusre ka samarthan bhi karti hain batein jaise ki salary badhne nahi ho kisi ke saansad mla mp kisi ki bhi salary badhani hai toh saare ke saare ek sur mein ek hi aata jaate hain aur phataphat aisi cheez hai matdan ke liye aati bhi ho phataphat ho jaati hai tab koi waqt nahi hota koi charcha nahi hoti kuch nahi hota hi tarah agar koi chande ko lekar jaisi batchit hai ya iti ki baat aati hai ki rti kranti party ko par nahi lagani chahiye saare ke saare ghar mein aji haan ji bilkul nahi lagani chahiye aur rti act hata de zyada raajnitik party political party ko padhte isi tarike se chandra ki baat hai toh chande ke bare mein yah hai ki kisi ki kali kamai ho sakti hai corruption corruption ka paisa ho sakta hai aur bhi 10 cheezen hoti hain hawala ka paisa kaise bhi ho lekin par chande ka dikhane ka adhikaar nahi adhikaar kya unhone apne aap se hi khatam kar liya hai ki kisi ko pata na chale ki paisa kahaan se aaya hai kaun uska us sutradhar hai paisa kaun kar raha hai vaah ko tires group hai kaun hai unse usko koi sarkar nahi hai unko sirf paise se matlab hai aapne party ke liye fund aa raha hai aur saree raajnitik partyian ek nahi saare gandhi party mein toh yahi maksad hota hai ki chanda jo paisa aa raha hai vaah chhupa rahe kis se aa raha hai kahaan se aa raha hai kyon aa raha hai yah batein kabhi saamne I na paye janta ke saamne dhanyavad

लिखे जैसे कि आज के चर्चा का विषय है कि चुनाव में चंदा देने वाले की पहचान छुपाने का क्या मक

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Abhay Pratap

Advocate | Social Welfare Activist

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चुनाव में चंदा देने वाले का पहचान छुपाने का मकसद होता है अपराध को बढ़ावा देना और भ्रष्टाचारी करेंसी धन का दुरुपयोग कर चुनाव में समस्या उत्पन्न कर एक मुख्य पहलू तो यह है और दूसरा मुख्य पहले यह होता है कुछ अच्छे लोग राष्ट्र के निर्माण के लिए चुनावी पार्टियों को भी खुशी से और सही चंदा देते हैं जो यह नहीं चाहते कि उनके विचारों को लोग जाने तू उनके लिए छुपाना भी एक न्यायसंगत होगा बाकी किसी भी प्रश्नों का उत्तर होता है या सभी लोग जान भी कोई भी प्रश्न उनके लिए जो हां हो सकता है वहीं दूसरे के लिए ना भी हो सकता है

chunav mein chanda dene waale ka pehchaan chhupaane ka maksad hota hai apradh ko badhawa dena aur bhrashtachaari currency dhan ka durupyog kar chunav mein samasya utpann kar ek mukhya pahaloo toh yah hai aur doosra mukhya pehle yah hota hai kuch acche log rashtra ke nirmaan ke liye chunavi partiyon ko bhi khushi se aur sahi chanda dete hain jo yah nahi chahte ki unke vicharon ko log jaane tu unke liye chupana bhi ek nyayasangat hoga baki kisi bhi prashnon ka uttar hota hai ya sabhi log jaan bhi koi bhi prashna unke liye jo haan ho sakta hai wahin dusre ke liye na bhi ho sakta hai

चुनाव में चंदा देने वाले का पहचान छुपाने का मकसद होता है अपराध को बढ़ावा देना और भ्रष्टाचा

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चुनाव में चंदा लेते हैं लेकिन अपनी पहचान छुपाते उसके पीछे मत करो कि कोई भी व्यापारी राजनेताओं में पढ़ना नहीं चाहता किसी राजनीतिक पार्टी से रामा करने का समर्थन करने का मूड नहीं लगाना चाहता है इसलिए चुनाव में चंदा लेने वालों की पहचान छुपाई जाती है वही दूसरा खंड वीरेंद्र एक बार किसी को मालूम पड़ जाएगा तो दूसरी पार्टी वाले भी उससे चंदे की मांग ली मान कर सकते हैं इस मकसद से भी उनकी पहचान छुपाई जाती है

chunav mein chanda lete hain lekin apni pehchaan chhupaate uske peeche mat karo ki koi bhi vyapaari rajnetao mein padhna nahi chahta kisi raajnitik party se rama karne ka samarthan karne ka mood nahi lagana chahta hai isliye chunav mein chanda lene walon ki pehchaan chupai jaati hai wahi doosra khand virendra ek baar kisi ko maloom pad jaega toh dusri party waale bhi usse chande ki maang li maan kar sakte hain is maksad se bhi unki pehchaan chupai jaati hai

चुनाव में चंदा लेते हैं लेकिन अपनी पहचान छुपाते उसके पीछे मत करो कि कोई भी व्यापारी राजनेत

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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चुनाव में चंदा देने वाले की पहचान छुपाने का क्या मतलब होता है लेकिन चुनाव में चंदा देने वाले की पहचान इसमें छुपाई जाती है ताकि वह किस पार्टी का सपोर्ट कौन है और कौन किस पार्टी को चंदा देकर सपोर्ट कर रहा है इसलिए पहचान समझ लीजिए कि किसी ने प्रपोज किया और चंदा दिया जो पार्टी चुनाव हार गई और दूसरी पार्टी जब उसके ऊपर कुछ न कुछ गलत कर रहा है देख कर सकती है और इसका कारण यह होता है कि जो चंदा दिया और वह चंदा जो डिक्लेअर हुआ है किस पार्टी ने किसको दिया तो फिर बाद में दूसरी पार्टियों को उसके पास पहुंच जाती हैं चंदा लेने उसके चंदा का पूजन जो है वह लोग का लिमिटेड होता है क्योंकि वह सब पार्टियों को गए चंदा देंगे तो भी पॉसिबल नहीं भी हो सकता है जैसे कि टाटा ने अब बीजेपी को चंदा दिया था और बीजेपी चुनाव जीते थे रिंग टाटा जो है वह बिल्कुल एक तरह से कहा जाए देशभक्त कंपनी का ग्रुप है और इसलिए उनके ऊपर तो कोई कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन और भी लोग होते हैं और अपना पहचान जरूर छुपाते हैं ताकि भविष्य में चुनाव के बाद उनके ऊपर किसी तरह की तकलीफ का सामना ना करना पड़े धन्यवाद

chunav mein chanda dene waale ki pehchaan chhupaane ka kya matlab hota hai lekin chunav mein chanda dene waale ki pehchaan isme chupai jaati hai taki vaah kis party ka support kaun hai aur kaun kis party ko chanda dekar support kar raha hai isliye pehchaan samajh lijiye ki kisi ne propose kiya aur chanda diya jo party chunav haar gayi aur dusri party jab uske upar kuch na kuch galat kar raha hai dekh kar sakti hai aur iska karan yah hota hai ki jo chanda diya aur vaah chanda jo declare hua hai kis party ne kisko diya toh phir baad mein dusri partiyon ko uske paas pahunch jaati hain chanda lene uske chanda ka pujan jo hai vaah log ka limited hota hai kyonki vaah sab partiyon ko gaye chanda denge toh bhi possible nahi bhi ho sakta hai jaise ki tata ne ab bjp ko chanda diya tha aur bjp chunav jeete the ring tata jo hai vaah bilkul ek tarah se kaha jaaye deshbhakt company ka group hai aur isliye unke upar toh koi kuch nahi kaha ja sakta lekin aur bhi log hote hain aur apna pehchaan zaroor chhupaate hain taki bhavishya mein chunav ke baad unke upar kisi tarah ki takleef ka samana na karna pade dhanyavad

चुनाव में चंदा देने वाले की पहचान छुपाने का क्या मतलब होता है लेकिन चुनाव में चंदा देने वा

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आपने कहा एक चुनाव में चंदा देने वाली की पहचान छुपाने का क्या मतलब होता है स्पष्ट इसमें भी यह प्रश्न देने का नहीं है कि मकसद क्या है देखिए हम और पर चंदा देते हैं किसी जागरण वाले को या किसी धर्मार्थ वाले को तो से रसीद लेते हैं किसी स्कूल में चंदा देते हैं तो उसे हम सेक्शन 80G के अंतर्गत हम रिसीव देते हैं और क्या पार्टियों को करोड़ों रुपए का झंडा दिया जाए और उसे छुपाया जाए तो फिर काला धन कहां कटेगा जोधन नंबर 2 से कमाया गया है जोधन सरकार ने चंदा देने वाली उद्योगपतियों को दिया है हां मैं स्पष्ट केंद्र सरकार ने विभिन्न तकनीक अपनाते हुए उद्योगपतियों तक दौलत पहुंचाई है और उनका काम निकालना है और ऐसा काम निकाला है कि यह दौलत हजम कर लो कोई पूछने वाला नहीं है जब तक हम हैं हां इसका एक शेयर हमें जरूर चंदे के रूप में देना क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई अन्यथा चंदा देने वाले ने जो इमानदारी से चंदा दिया है तो उसे उद्घोषणा करने में क्या एतराज है क्यों अपना नाम छुपाना चाह रहा है क्या उसे डर है कि उसने इस पार्टी को चंदा दिया है अगर दूसरी पार्टी सत्ता में आ गई तो उसका खेल बिगड़ जाएगा या उसे यह डर है कि सरकार बदलने में इस उद्योगपति का हाथ है या उसी यह डर है कि जो टैक्स की चोरी कर रहा है वह या जनता के साथ जो खेल खेल रहा है वह उसका असली रूप उजागर हो जाएगा फिर डर किस बात का क्या मकसद है छुपाने का दोनों को चंदा लेने वाली पार्टी को चंदा देने वाली संस्था का संस्था या व्यक्ति को स्पष्ट करिए कि भाई यह चंदा इस व्यक्ति ने इतने रुपए का इस मकसद से इस पार्टी को दिया है कुछ चंदा देना है वह किसी एक पार्टी को क्यों क्योंकि पूरे देश में विभिन्न पार्टियां हैं आप को चंदा देने डोनेशन करना है तो क्या एक ही पार्टी ने ठेकेदारी ले रखी है बाकी पार्टियां सारी भ्रष्टाचारी चोर है सारी निकम्मी है सरकार बंटी को पार्टी ईमानदार हो जाती है और सरकार बजट को पार्टी व्यस्त हो तो रोड़ा की इसके पीछे मकसद क्या है स्पष्ट मकसद है सरकार बनाना सरकार गिराना डस्टर कार किसी भ्रष्ट की दृष्टि करंट से उभर नहीं पाती तो सरकार क्या करती है उससे पिंड छुड़ाना चाहती है मैं थोड़ा कड़वा सब भूल गया हूं इसलिए सरकार उसके पीछे विभिन्न एजेंसियां लगा देती है और जब सरकार कोई खतरा होता है कि हमारी राज की बातें खुलने वाली है तो भी उसके पीछे एजेंसी लगा दिया थी और तू अनुभवी व्यक्ति है जिसे जो इन खेलों का खिलाड़ी है चाहे वह किसी भी पार्टी का हो उस खिलाड़ी से क्योंकि दुश्मनों का दुश्मन होता है वह दो दुश्मनों का दोस्त बन जाता है दुश्मन इंसान शरीर से नहीं होते राजनीतिक गुटों से होते हैं राजनीतिक जानू से होता है और यह राजनीति को भी दोस्त बना देती है और दोस्तों को भी दुश्मन बना देती है अब तो सबक सीख लेना चाहिए तो आप खुद सोचिए क्या मकसद है एक छोटा सा किसान जो बैंक से ऋण डेटा विन नहीं चुका पाता तो उसकी खेत खलियान नीलाम कर दिया ते बैंक कुर्की कांग्रेसियों किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाता है कैमरा का कानून क्यों कर दी नहीं आती तो खाना तो पड़ेगा हम समर्थक हैं कि कर्ज चुकाना पड़ेगा और ईमानदारी से चुकाना चाहिए और चुकाना पड़ेगा उनको इतना प्रताड़ित करना कि वह सुसाइड करने को मजबूर हो जाए लोग कहते हैं कि किसान कर देना नहीं चाहते तो जवान अपनी जवानी को देश के लिए क्यों दें वह अपनी जवानी को देश को समर्पित कर देते हैं किसान अपनी किसानों को देश को समर्पित कर देते हैं यह राजनेता क्या समर्पित करते हैं जो दूसरों से चंदा छुपा कर लेते हैं और अपने साथियों को व उनका होते अगर भारत में करप्शन की बात करते हैं मैं कह रहा हूं दूध के धुले हूं बुरा ना मानना तो सादगी का वातावरण दूर से नजर आएगा किसान एक धोती में अपना साल गुजार देता है और रोज रोज नई जैकेट रोज रोज नए कपड़े नहीं पहनता कीमती बहुमूल्य कपड़े नहीं पेंट अपनी कमाई से पहन के दिखाओ यह तो जनता की कमाई है कि दो करोड़ की गाड़ी और 50 लाख का शो अध्यक्ष लाख की घड़ी एक रात की टांग की तरह गुजार के दिखाओ एक रात जवान की तरह गुड आरके दिखाओ मजदूर की तरह तपती धूप धूप में गुजार के दिखाओ अगर तुम सच्चे राजनेता हो तो दारु पकड़कर झाड़ू लगाना समुद्र के तट से कागज मीना यह फोटो बाजी है तो देवेंद्र जी मैं बात कहना चाहूंगा मैं शायद आपका नाम गलत लिख गया था ना मान जाऊंगा अपनी बात को रखने के पीछे मीन क्वेश्चन पेपर टकराव लेकिन नहीं इसके पीछे भी बहुत कुछ मकसद है और वह मकसद क्या है सही समय पर सही रूप में प्रस्तुत करना जो स्पष्ट हो गया कि चंदा छुपाने के पीछे कारण क्या है

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आपने कहा एक चुनाव में चंदा देने वाली की पहचान छुपाने का क्या मतलब होता है स्पष्ट इसमें भी

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Sachin Sinha

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सुनामी चंदा देने वालों की पहचान इस देश में पाई जाती है क्योंकि वह पैसा लाखों करोड़ों अरबों का होता है और जब कोई चुनाव जीतकर के आता है उसी पैसे से तो वह तो इनको लाखों करोड़ों गुना कमाने के लिए छोड़ा जाता है अगर उनका नाम सामने आ जाएगा तो एक दम तक काला धन चंदा देने वालों का नाम छुपाया जाता है और जब कोई चंदा देकर के चुनाव जीतो आता है यह समझ जाइए उससे उतना पैसा को चार-पांच दिन के अंदर ही कमा लेता से ज्यादा और 5 साल में उसका खड़ा हुआ गुना कमा करके छोड़ता जितना वह चंदा दिया रहता चुनाव जिताने के लिए किसी भी राजनीतिक दल के

tsunami chanda dene walon ki pehchaan is desh mein payi jaati hai kyonki vaah paisa laakhon karodo araboon ka hota hai aur jab koi chunav jeetkar ke aata hai usi paise se toh vaah toh inko laakhon karodo guna kamane ke liye choda jata hai agar unka naam saamne aa jaega toh ek dum tak kaala dhan chanda dene walon ka naam chupaya jata hai aur jab koi chanda dekar ke chunav jito aata hai yah samajh jaiye usse utana paisa ko char paanch din ke andar hi kama leta se zyada aur 5 saal mein uska khada hua guna kama karke chodta jitna vaah chanda diya rehta chunav jitaane ke liye kisi bhi raajnitik dal ke

सुनामी चंदा देने वालों की पहचान इस देश में पाई जाती है क्योंकि वह पैसा लाखों करोड़ों अरबों

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