क्या यह बात ठीक लगती है की मनुष्य का कर्त्तव्य है की वह उदास बनने से पूर्व त्यागी बने?...


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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सवाल से आप उदास और त्यागी को दोनों को लिंक कर रहे हैं जोड़ रहे हैं तो असली में यह ऐसा नहीं है इनको लिंक करने का कोई जरूरत नहीं है उदास होना एक आपकी स्थिति है एक व्यवस्था है आपके अंदर जो इस तरीके की हैं फिलहाल एक स्टेटस ऑफ एयर से आपके अंदर ओके यह मोशन से फीलिंग है यह होता है उदास होना लेकिन आप जब उसको त्यागी बनने की बात कहते हैं कि नहीं उदास होने से पहले आप के आगे बने तो इसका कोई लिंक नहीं असल में जो मैं देखा जाए तो अब इंसान की इंसान उदास क्यों होता है इंसान सोचता कुछ है मतलब एक्सपेक्टेशन स्कोर सकता है आकांक्षा है उसकी कुछ होती है और उसको वह सब नहीं मिलता है तो वह जो अंतर होते हैं जो ज्ञान होता है या उसे लगता है कि मैं सफल नहीं हुआ इस प्रयोजन में इसलिए वह उदास हो जाता है राइट मजहब एक्सपेक्टेड जगन मीट नहीं हो रही तो इंसान उदास हो जाते हैं अगर कोई चीज मेरे हिसाब से नहीं हो रही रिजल्ट मेरे हिसाब से नहीं आ रहा तो इंसान उदास हो जाता है यही होता है ना आप जवाब बोलते हैं कि उदास बनने से पूर्व आग के आगे बने अभी त्यागी बन्ना क्या होता है त्यागी यह होता है कि भाई आपने किसी चीज का सैक्रिफाइस कर दिया आपने अपने लिए नहीं रहता किसी और को दे दिया कोई भी चीज होती थी कुछ भी हो सकता है चाहे वह आप की पोजीशन हो सकती है किसी काम पर नहीं मैं चाय आपका गुस्सा मान हो सकता है कुछ भी चीज होता है तो यहां पर विक्रय आपके सवाल में क्यों उदास होने से पहले त्यागी बनो जरूरी नहीं है ना अगर मेरा उदासी का कारण उस त्याग करने से या एवं त्याग का उदासी से अगर कोई लिंक नहीं है इस परिस्थिति में तो इसका कोई तुक नहीं बनता मैं उदास इसलिए हूं कि मेरी किसी से बहस हो गई और वह बहस मुझे और करने के बाद मुझे खुद अच्छे से अच्छा फील नहीं हो रहा यह हमें की बात नहीं कर रहा कि गलत कौन था सही कहा कौन था अगर मान लो मैं सही बेटा लेकिन मेरे को यह भी अच्छा नहीं लग रहा कि मैंने उससे बहस क्योंकि मैं चाहता तो बहस को टाल सकता था और भी उदासी के स्टेट में जहां पर मैं उदास हूं उस बात का चिंतन करके इसमें त्याग का क्या लेना-देना है आप सोचें तो ऐसे करके हम देख सकते हैं कि अब हमें काव्य के समय किस तरीके से परेशान हैं और अलाइव को मैनेज करना है जो उदास होने वाली बात है हमें तो उदास होना नहीं चाहिए अगर हम कुछ कर सकते हैं तो हमें कुछ करना चाहिए उस परिस्थिति में अगर कुछ नहीं कर सकते तो मस्त रहना चाहिए अपने निजी स्कोर पर चैनेलाइज करना चाहिए काम करना चाहिए आगे बढ़ना चाहिए ताकि हमारा ख्याल उस पर अपना जाए जो कि सॉरी जो ख्याल हमें उदास कर दें और राइट और जहां तक हत्या की बातें इसमें अखिल में त्याग त्याग जैसे नहीं देखूंगा जो तुम्हें यह बोलूंगा कि जहां पर जो आपका कर्तव्य उसे आपने पाए

sawaal se aap udaas aur tyagi ko dono ko link kar rahe hain jod rahe hain toh asli mein yah aisa nahi hai inko link karne ka koi zarurat nahi hai udaas hona ek aapki sthiti hai ek vyavastha hai aapke andar jo is tarike ki hain filhal ek status of air se aapke andar ok yah motion se feeling hai yah hota hai udaas hona lekin aap jab usko tyagi banne ki baat kehte hain ki nahi udaas hone se pehle aap ke aage bane toh iska koi link nahi asal mein jo main dekha jaaye toh ab insaan ki insaan udaas kyon hota hai insaan sochta kuch hai matlab expectation score sakta hai aakansha hai uski kuch hoti hai aur usko vaah sab nahi milta hai toh vaah jo antar hote hain jo gyaan hota hai ya use lagta hai ki main safal nahi hua is prayojan mein isliye vaah udaas ho jata hai right majhab expected jagan meat nahi ho rahi toh insaan udaas ho jaate hain agar koi cheez mere hisab se nahi ho rahi result mere hisab se nahi aa raha toh insaan udaas ho jata hai yahi hota hai na aap jawab bolte hain ki udaas banne se purv aag ke aage bane abhi tyagi bana kya hota hai tyagi yah hota hai ki bhai aapne kisi cheez ka sacrifice kar diya aapne apne liye nahi rehta kisi aur ko de diya koi bhi cheez hoti thi kuch bhi ho sakta hai chahen vaah aap ki position ho sakti hai kisi kaam par nahi main chai aapka gussa maan ho sakta hai kuch bhi cheez hota hai toh yahan par vikray aapke sawaal mein kyon udaas hone se pehle tyagi bano zaroori nahi hai na agar mera udasi ka karan us tyag karne se ya evam tyag ka udasi se agar koi link nahi hai is paristithi mein toh iska koi tuk nahi baata main udaas isliye hoon ki meri kisi se bahas ho gayi aur vaah bahas mujhe aur karne ke baad mujhe khud acche se accha feel nahi ho raha yah hamein ki baat nahi kar raha ki galat kaun tha sahi kaha kaun tha agar maan lo main sahi beta lekin mere ko yah bhi accha nahi lag raha ki maine usse bahas kyonki main chahta toh bahas ko tal sakta tha aur bhi udasi ke state mein jaha par main udaas hoon us baat ka chintan karke isme tyag ka kya lena dena hai aap sochen toh aise karke hum dekh sakte hain ki ab hamein kavya ke samay kis tarike se pareshan hain aur alive ko manage karna hai jo udaas hone wali baat hai hamein toh udaas hona nahi chahiye agar hum kuch kar sakte hain toh hamein kuch karna chahiye us paristithi mein agar kuch nahi kar sakte toh mast rehna chahiye apne niji score par chainelaij karna chahiye kaam karna chahiye aage badhana chahiye taki hamara khayal us par apna jaaye jo ki sorry jo khayal hamein udaas kar de aur right aur jaha tak hatya ki batein isme akhil mein tyag tyag jaise nahi dekhunga jo tumhe yah boloonga ki jaha par jo aapka kartavya use aapne paye

सवाल से आप उदास और त्यागी को दोनों को लिंक कर रहे हैं जोड़ रहे हैं तो असली में यह ऐसा नहीं

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Dr. Swatantra Jain

Psychotherapist, Family & Career Counsellor and Parenting & Life Coach

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आपका प्रश्न है कि क्या यह बात ठीक लगती है कि मनुष्य का कर्तव्य है कि मैं उदास बनने से पूर्व श्याम के बने देखी मिस्ट्री जो भी आप हैं आप प्रश्न लिखने से पहले या प्रश्न बोलने से पहले पूछने से पहले उसको एडिट कर लिया करो लिख कर देख लिया करो प्रश्न की भाषा क्या है आप क्या कहना चाहते हो कोई प्रश्न ही नहीं बन रहा कि कर्तव्य मनुष्य का कर्तव्य उदास बनने से पूर्व के आगे बने मैं तो इसका जवाब मैं तो क्या कोई भी इसका जवाब नहीं दे सकता कि क्या प्रश्न है इसको आप लैंग्वेज ठीक करके दोबारा डालिए

aapka prashna hai ki kya yah baat theek lagti hai ki manushya ka kartavya hai ki main udaas banne se purv shyam ke bane dekhi mystery jo bhi aap hain aap prashna likhne se pehle ya prashna bolne se pehle poochne se pehle usko edit kar liya karo likh kar dekh liya karo prashna ki bhasha kya hai aap kya kehna chahte ho koi prashna hi nahi ban raha ki kartavya manushya ka kartavya udaas banne se purv ke aage bane main toh iska jawab main toh kya koi bhi iska jawab nahi de sakta ki kya prashna hai isko aap language theek karke dobara daaliye

आपका प्रश्न है कि क्या यह बात ठीक लगती है कि मनुष्य का कर्तव्य है कि मैं उदास बनने से पूर्

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केवट ठीक लगती कि मनुष्य कर्तव्य की उदास बनने से प्रत्याशी बने वार्षिक भारतीय व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति उदास बने कोई कार्य करने के प्रति अपना मुंह कम करें और कर्तव्य के प्रति अपना दायित्व बनता है उसे निरवाना करें तो उसके पहले चाबी बनाएं और हत्या करने कि उसे प्रवती होना चाहिए कोई भी कार्य के प्रति अपने लगान होना चाहिए कोई के प्रति भी अपना इसने होना चाहिए अपने कार्य के प्रति पूरी जुझारू पर्वती गिरना चाहिए अपने दायित्वों के प्रति निर्माण करने की प्रवृत्ति होना चाहिए केवल अपने कर्तव्य से मुख मोड़ के जुहू जाना यह ज्यादा उचित चाहिए कर्तव्य के प्रति जो भी बनता है हमारे से करना चाहिए तभी जाकर हम श्रेष्ठता प्राप्त करते हैं अन्यथा लोगों के परीक्षा में बहुत पीछे रह जाते हैं कि अपने अधिकार के लिए तो लड़ाई लड़ता है पल दो पल करते के प्रति निष्ठावान नहीं उठता है और यह निष्ठावान होना अति आवश्यक है जब जाकर की श्रेष्ठता आती है धन्यवाद

kevat theek lagti ki manushya kartavya ki udaas banne se pratyashi bane vaarshik bharatiya vyakti apne kartavyon ke prati udaas bane koi karya karne ke prati apna mooh kam kare aur kartavya ke prati apna dayitva banta hai use nirvana kare toh uske pehle chabi banaye aur hatya karne ki use pravati hona chahiye koi bhi karya ke prati apne lagaan hona chahiye koi ke prati bhi apna isne hona chahiye apne karya ke prati puri jujharu parvati girna chahiye apne dayitvo ke prati nirmaan karne ki pravritti hona chahiye keval apne kartavya se mukh mod ke juhoo jana yah zyada uchit chahiye kartavya ke prati jo bhi banta hai hamare se karna chahiye tabhi jaakar hum shreshthata prapt karte hain anyatha logo ke pariksha mein bahut peeche reh jaate hain ki apne adhikaar ke liye toh ladai ladata hai pal do pal karte ke prati nisthawan nahi uthata hai aur yah nisthawan hona ati aavashyak hai jab jaakar ki shreshthata aati hai dhanyavad

केवट ठीक लगती कि मनुष्य कर्तव्य की उदास बनने से प्रत्याशी बने वार्षिक भारतीय व्यक्ति अपने

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Gunjan

Junior Volunteer

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अगर बात करें कि आने से क्या कहता है कि वह दास मैंने से पूछा कि मैं ठीक होती है क्योंकि अगर आपको परेशान करने से पहले जागीर बने ताकि आप अपने जो जीवन है उसका अधिकारी कैसे छुपाए

agar baat kare ki aane se kya kahata hai ki vaah das maine se poocha ki main theek hoti hai kyonki agar aapko pareshan karne se pehle jagir bane taki aap apne jo jeevan hai uska adhikari kaise chupaye

अगर बात करें कि आने से क्या कहता है कि वह दास मैंने से पूछा कि मैं ठीक होती है क्योंकि अगर

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