1857 की क्रांति की असफलता के किन्हीं तीन कारणों को बताएं?...


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Pawan Dwivedi

Career Counsellor

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18 सो 57 की क्रांति के स्थल होने के मुख्य तीन कारण थे पहला उस क्रांति का शुरुआत होने की क्रेडिट सभी लेने की कोशिश कर रहे थे और लोगों दूसरा लोगों में एकता नहीं थी और तीसरा सभी आपस में एक दूसरे से 18 57 की क्रांति

18 so 57 ki kranti ke sthal hone ke mukhya teen karan the pehla us kranti ka shuruat hone ki credit sabhi lene ki koshish kar rahe the aur logo doosra logo me ekta nahi thi aur teesra sabhi aapas me ek dusre se 18 57 ki kranti

18 सो 57 की क्रांति के स्थल होने के मुख्य तीन कारण थे पहला उस क्रांति का शुरुआत होने की क्

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Vikram Sharma

school Principal

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अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति भारत के स्वतंत्रता संग्राम की पहली सीडी थी अब इसलिए मेरी दृष्टि से इस क्रांति को असफल नहीं कह सकते कारण है कि 18 सो 57 की क्रांति के द्वारा जो राष्ट्रभक्ति की भावना लोगों के अंदर जागृत हुई और उसके परिणाम स्वरूप लोगों ने जो आंदोलन चलाए वे 1947 तक चलते रहे हां यह अवश्य है कि 18 सो 57 की क्रांति के उद्देश्यों को लेकर के की गई थी इसमें पूर्ण सफलता नहीं मिली इसके प्रमुख कारण निम्न हो सकते पहला क्रांति का अपने निर्धारित समय से पूर्व प्रारंभ हो जाला सभी ने 31 मई की तारीख तय कर रखी थी लेकिन परिस्थितियों व मंगल पांडे को यह पहले ही प्रारंभ करनी पढ़कर और इस कारण जो योजनाबद्ध तरीके से कार्य होना था वह देशभर में बिखर गया और इस कारण से अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति को अपेक्षित सफलता नहीं मिली दूसरा बड़ा कारण था क्रांति का नेतृत्व किसी योग्य व्यक्ति के हाथों में नहीं था अंतिम समय में बहादुर शाह जफर को इसलिए नेतृत्व सौंप दिया गया कि वह बुजुर्ग सम्राट थे और सभी राजाओं की उम्र में श्रद्धा और आदर और सम्मान का भाव जबकि इसी अवस्था में बहादुर शाह ज़फ़र रणभूमि के अंदर नेतृत्व करने के करने में सक्षम नहीं थे इस कारण से भी क्रांति को अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हुई तीसरा बड़ा कारण यह रहा कि क्रांतिकारी एक जगह पर विजय प्राप्त करते और उस स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर चले जाते थे एक जुलूस के रूप में भी निकलते और एक छावनी से दूर से पानी को पीते हुए आगे चले जाते थे और पीछे वाला छात्र खाली हो जाता था जिसके कारण से अंग्रेज वापस आकर के इंसानो अच्छा मुनियों पर अपना कब्जा कर लेते तो सफलता लंबे समय तक टिक नहीं पाई

attharah sau sattawan ki kranti bharat ke swatantrata sangram ki pehli CD thi ab isliye meri drishti se is kranti ko asafal nahi keh sakte karan hai ki 18 so 57 ki kranti ke dwara jo rashtra bhakti ki bhavna logo ke andar jagrit hui aur uske parinam swaroop logo ne jo andolan chalaye ve 1947 tak chalte rahe haan yah avashya hai ki 18 so 57 ki kranti ke udyeshyon ko lekar ke ki gayi thi isme purn safalta nahi mili iske pramukh karan nimn ho sakte pehla kranti ka apne nirdharit samay se purv prarambh ho jala sabhi ne 31 may ki tarikh tay kar rakhi thi lekin paristhitiyon va mangal pandey ko yah pehle hi prarambh karni padhakar aur is karan jo yojnabadh tarike se karya hona tha vaah deshbhar mein bikhar gaya aur is karan se attharah sau sattawan ki kranti ko apekshit safalta nahi mili doosra bada karan tha kranti ka netritva kisi yogya vyakti ke hathon mein nahi tha antim samay mein bahadur shah jafar ko isliye netritva saunp diya gaya ki vaah bujurg samrat the aur sabhi rajaon ki umr mein shraddha aur aadar aur sammaan ka bhav jabki isi avastha mein bahadur shah zafar ranbhumi ke andar netritva karne ke karne mein saksham nahi the is karan se bhi kranti ko apekshit safalta prapt nahi hui teesra bada karan yah raha ki krantikari ek jagah par vijay prapt karte aur us sthan ko chhodkar dusre sthan par chale jaate the ek jhullus ke roop mein bhi nikalte aur ek chavani se dur se paani ko peete hue aage chale jaate the aur peeche vala chatra khaali ho jata tha jiske karan se angrej wapas aakar ke insano accha muniyon par apna kabza kar lete toh safalta lambe samay tak tick nahi payi

अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति भारत के स्वतंत्रता संग्राम की पहली सीडी थी अब इसलिए मेरी दृष

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के असफलता के कारण यह है कि यह क्रांति सुनियोजित नहीं थी कोई प्लानिंग नहीं बनाई थी नौकरानी की क्रांति के समय से पहले शुरू हो गई थी और तीसरा प्रमुख कारण है कि इससे चैट राजस्थान की क्रांति और सफल होगी

attharah sau sattawan ki kranti ke asafaltaa ke karan yah hai ki yah kranti suniyojit nahi thi koi planning nahi banai thi naukrani ki kranti ke samay se pehle shuru ho gayi thi aur teesra pramukh karan hai ki isse chat rajasthan ki kranti aur safal hogi

अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के असफलता के कारण यह है कि यह क्रांति सुनियोजित नहीं थी कोई

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guest_1AJ5M Dr.Prabhat Kumar Sinha

Assistant Professor, Dept Of History

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अंग्रेजी प्रश्न है 18 57 की क्रांति की असफलता के किन्हीं तीन कारणों को बताए तो आप जानते हैं कि 1857 में ही सर्वप्रथम भारतीयों ने अंग्रेजों को देश से निकालने का सशक्त रूप से प्रयास किया था पहली बार इसलिए इसे हम लोग भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम कहते हैं और इतिहासकारों ने इसे कर 57 की क्रांति के नाम से विभूषित किया है लेकिन भारतीयों को अंग्रेजों को देश से निकालने में सफलता नहीं मिली इसके कहने का अर्थ है कि 18 57 की क्रांति असफल हो गई तो इसके कई कारण थे पहला युग नेतृत्व का अभाव अशोक क्रांति का जिन्होंने नेतृत्व किया वह पूरी तरह से योग्य नहीं थे जिसके कारण असफलता हाथ लगी जैसे 18 57 की क्रांति के नेता नाना साहब वर सिंह लक्ष्मीबाई मुगल शासक बहादुर शाह आदि थे लेकिन इनमें कुशल सैन्य संचालन का पर्याप्त अनुभव नहीं था मुगल बादशाह बहादुर शाह बहुत बुरा हो गए थे और उनसे उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि वे युद्ध भूमि में सेना का संचालन करेंगे लक्ष्मीबाई को भी युद्ध का अनुभव नहीं था बहुत कम था उनका कार्यक्षेत्र भी सीमित था कुंवर सिंह विप काफी बूढ़े हो चुके थे और नाना साहब थे पेशवा तो तू घर बढ़िया थी कि वे लोग एक साथ मिलकर उन्होंने काम नहीं किया इस लड़ाई को अंजाम तक नहीं पहुंचाया और अनुभव के किक अनुभव की कमी के कारण युद्ध का सही ढंग से संचालन नहीं कर पाए वीरता में और सांस में इन नेताओं में किसी में कमी नहीं थी लेकिन युद्ध के लिए और सब को एक साथ लेकर चलने की जो क्षमता होती है वह इन नेताओं में नहीं था दूसरा कारण है एकता संगठन और योजना का भाव क्रांति के नेता में वीरता की कमी नहीं थी वीर थे सहनशील थे लेकिन उनमें एकता संगठन और निश्चित योजना का अभाव था क्योंकि उनमें कोई सहयोग नेता नहीं था जो कि सभी क्रांतिकारियों को राजनीतिक सामाजिक और आर्थिक आदर्श उपस्थित कर सभी को एक झुंड के नीचे क्षेत्रों में क्रांतिकारी दल अपने ढंग से काम कर रहे थे जबकि दूसरी ओर अंग्रेजी संगठन क्रांतिकारियों के संकेत से काफी सशक्त था और उसका नेतृत्व काफी सफलता और तीसरा है यातायात के साधनों का अभाव और अपने आप सैनिक साधन विद्रोही सैनिकों के पास यानी भारतीयों के पास पुराने ढंग के अधिक हथियार थे उनकी बंधु के पुराने थी जिस की गोली दूर तक नहीं जा सकती थी दूसरी और अंग्रेजो के पास आदमी की ढंग के शस्त्र थे जिसकी छोटे गंभीर चूक होती थी उनके हथियार अच्छे और उच्च स्तरीय थे उनके युद्ध का तरीका भी नया और वैज्ञानिक था और क्रांति के जो नेता थे चुकी यातायात और सूचना के वैज्ञानिक साधनों के महत्त्व को उन्होंने नहीं समझा दूसरी और अंग्रेजो के पास रेल डाक तार आदि की सुविधाएं थी तो इनके द्वारा उन्होंने विभिन्न स्थानों की सूचनाओं को पहले पा लिया जिसके अनुसार वे अपने सैनिक कार्यक्रम आयोजित करते थे और क्रांतिकारियों से के पहुंचने से पहले ही पूछ कर उसे मुकाबला करने के लिए तैयार रहते थे तो इस तरह से समुचित साधनों के अभाव और पुराने से निखत पुराने हथियारों से भारतीय न रहे थे जबकि काफी आगे हम से काफी आगे अंग्रेज सैनिक थे और उनका संगठन था इस तरह से 18 57 की क्रांति में भारतीयों को सफलता हाथ लगी

angrezi prashna hai 18 57 ki kranti ki asafaltaa ke kinhi teen karanon ko bataye toh aap jante hain ki 1857 me hi sarvapratham bharatiyon ne angrejo ko desh se nikalne ka sashakt roop se prayas kiya tha pehli baar isliye ise hum log bharatiya swatantrata ka pratham sangram kehte hain aur itihasakaron ne ise kar 57 ki kranti ke naam se vibhushit kiya hai lekin bharatiyon ko angrejo ko desh se nikalne me safalta nahi mili iske kehne ka arth hai ki 18 57 ki kranti asafal ho gayi toh iske kai karan the pehla yug netritva ka abhaav ashok kranti ka jinhone netritva kiya vaah puri tarah se yogya nahi the jiske karan asafaltaa hath lagi jaise 18 57 ki kranti ke neta nana saheb var Singh lakshmibai mughal shasak bahadur shah aadi the lekin inmein kushal sainya sanchalan ka paryapt anubhav nahi tha mughal badshah bahadur shah bahut bura ho gaye the aur unse ummid nahi ki ja sakti thi ki ve yudh bhoomi me sena ka sanchalan karenge lakshmibai ko bhi yudh ka anubhav nahi tha bahut kam tha unka karyakshetra bhi simit tha kunwar Singh weep kaafi budhe ho chuke the aur nana saheb the peshwa toh tu ghar badhiya thi ki ve log ek saath milkar unhone kaam nahi kiya is ladai ko anjaam tak nahi pahunchaya aur anubhav ke kick anubhav ki kami ke karan yudh ka sahi dhang se sanchalan nahi kar paye veerta me aur saans me in netaon me kisi me kami nahi thi lekin yudh ke liye aur sab ko ek saath lekar chalne ki jo kshamta hoti hai vaah in netaon me nahi tha doosra karan hai ekta sangathan aur yojana ka bhav kranti ke neta me veerta ki kami nahi thi veer the sahanashil the lekin unmen ekta sangathan aur nishchit yojana ka abhaav tha kyonki unmen koi sahyog neta nahi tha jo ki sabhi krantikariyon ko raajnitik samajik aur aarthik adarsh upasthit kar sabhi ko ek jhund ke niche kshetro me krantikari dal apne dhang se kaam kar rahe the jabki dusri aur angrezi sangathan krantikariyon ke sanket se kaafi sashakt tha aur uska netritva kaafi safalta aur teesra hai yatayat ke saadhano ka abhaav aur apne aap sainik sadhan vidrohi sainikon ke paas yani bharatiyon ke paas purane dhang ke adhik hathiyar the unki bandhu ke purane thi jis ki goli dur tak nahi ja sakti thi dusri aur angrejo ke paas aadmi ki dhang ke shastra the jiski chote gambhir chuk hoti thi unke hathiyar acche aur ucch stariy the unke yudh ka tarika bhi naya aur vaigyanik tha aur kranti ke jo neta the chuki yatayat aur soochna ke vaigyanik saadhano ke mahatva ko unhone nahi samjha dusri aur angrejo ke paas rail dak taar aadi ki suvidhaen thi toh inke dwara unhone vibhinn sthano ki suchanaon ko pehle paa liya jiske anusaar ve apne sainik karyakram ayojit karte the aur krantikariyon se ke pahuchne se pehle hi puch kar use muqabla karne ke liye taiyar rehte the toh is tarah se samuchit saadhano ke abhaav aur purane se nikhat purane hathiyaron se bharatiya na rahe the jabki kaafi aage hum se kaafi aage angrej sainik the aur unka sangathan tha is tarah se 18 57 ki kranti me bharatiyon ko safalta hath lagi

अंग्रेजी प्रश्न है 18 57 की क्रांति की असफलता के किन्हीं तीन कारणों को बताए तो आप जानते है

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Shantanu Purohit

Political Analyst, Life Management, Career Counseler

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मोदी की भाषा 2 अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति की असफलता के बारे में आपने पूछा है तो इसके कई कारण रहे कोई एक कारण है सबसे पहले कारण किए थे हम बात करें तो यह जो आंदोलन था उतना सुनियोजित नहीं था वही बात और दूसरी बात यह है कि जो सेना जो जो सैनिकों ने विद्रोह किया था जिन किसानों ने विद्रोह किया था उसे उन सभी के पास उतने आधुनिक हथियार नहीं थी संसाधनों की वृद्धि की बहुत कमी थी उनके उनके पास और अंग्रेजों थे उस मामले में काफी काफी ज्यादा आगे तीसरी बात यह कि देश का एक जो बहुत बड़ा भक्त था जैसे कि जो शिक्षित वर्ग था जो पढ़ा लिखा भरतार ने ज्ञान प्राप्त वर्क था तो उसने उनका साथ नहीं दिया विद्रोहियों का साथ उनका वीडियोकॉन का साथ नहीं मिल पाया और उसके साथ साथ जो बड़े-बड़े जमीदार थे जो कि अंग्रेजों के अंग्रेजों के साथ दे रहे थे अंग्रेजों के कारण उनके हित जो थे सकारात्मक रूप से तो उन जमींदारों ने भी उनका साथ नहीं दिया तो यह 3 बड़े कारण मान सकते हैं कि 18 57 की क्रांति के असफलता के लिए जिम्मेदार रहे धन्यवाद

modi ki bhasha 2 attharah sau sattawan ki kranti ki asafaltaa ke bare me aapne poocha hai toh iske kai karan rahe koi ek karan hai sabse pehle karan kiye the hum baat kare toh yah jo andolan tha utana suniyojit nahi tha wahi baat aur dusri baat yah hai ki jo sena jo jo sainikon ne vidroh kiya tha jin kisano ne vidroh kiya tha use un sabhi ke paas utne aadhunik hathiyar nahi thi sansadhano ki vriddhi ki bahut kami thi unke unke paas aur angrejo the us mamle me kaafi kaafi zyada aage teesri baat yah ki desh ka ek jo bahut bada bhakt tha jaise ki jo shikshit varg tha jo padha likha bhartaar ne gyaan prapt work tha toh usne unka saath nahi diya vidrohiyon ka saath unka videocon ka saath nahi mil paya aur uske saath saath jo bade bade jamidaar the jo ki angrejo ke angrejo ke saath de rahe the angrejo ke karan unke hit jo the sakaratmak roop se toh un zamindaro ne bhi unka saath nahi diya toh yah 3 bade karan maan sakte hain ki 18 57 ki kranti ke asafaltaa ke liye zimmedar rahe dhanyavad

मोदी की भाषा 2 अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति की असफलता के बारे में आपने पूछा है तो इसके कई

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e27 की क्रांति के असफल होने के कुछ कारण मुझे जो लगते हैं वह इस प्रकार हैं पहला राजनीतिक कारण कि आज क्रांति हुई थी उस शांति के अंदर राजनीतिक कारण इसलिए मैं करना चाहता हूं क्योंकि यह क्रांति ज्यादातर बंगाल बिहार और उत्तर प्रदेश तक ही सीमित रह पाई थी दिल्ली तक चली गई थी इससे ज्यादा दूध ही गई थी कहीं कहीं कहीं कहीं से लखनऊ लखनऊ में युद्ध हो रहा था कानपुर में जो है पेशवा नानासाहेब के नेतृत्व में हुआ था झांसी में युद्ध कर रहे थे दिल्ली में युद्ध हो रहा था मेरठ में हो रहा था बरेली में बरेली में हो रहा था इस तरह से करो के चमचे हो क्या नाम है हम जगतपुर में हो रहा था क्या नाम है कैसे हो रहा था इसके अलावा उसे बंगाल में बैरकपुर में हुआ तो अब चीनी क्या है कि आप भी क्या सकते हो कि यह एक सीमित जमीन पर गिरा हुआ यह तो हो रहा था इसके अलावा भी देखोगे तो अभी पाओगे कि पंजाब पंजाब के ख्वाजा थे उन्होंने दिल्ली में दिल्ली में विद्रोह को दबाने में इसके अलावा झांसी के विद्रोह को दबा लिया में ग्वालियर के राजा माधवराव सिंधिया परिवार ने मदद की थी इसके अलावा आप का एक नाम है बाकी जैसे अनेकों लोगों ने अंग्रेजों की मदद करी थी ताकि वह विद्रोह को दबा सके तो कई जहां पर आप भी दे सकते हो राजनीतिक कारण राजनीतिक कारण कहां पर पाए गए थे इस कारण की गई थी अलावा दूसरा मलिका लगता है मित्र का भाव नेतृत्व का अभाव इसका लग रहा है क्योंकि आपके देखोगे कि इन सब को विजय मिली इन सभी में लखनऊ हुआ आपका कानपुर हुआ झांसी व और क्या नाम है आपका दिल्ली हुआ मेरठ हुआ बरेली वॉइस को आजाद करा लिया था परंतु अब क्या जाने के बाद इनके पास पूरा एक बूंद इश्क का कोई रोकना था इनके पास यह सब अलग-अलग जगह पर अलग-अलग टाइम से लड़ाई लड़ रहे थे तो इनके पास एक संगठित तरीके से युद्ध करने का कोई भी विकल्प नहीं दिखाई दे रहा था तो इसी कारण इन्हें अंग्रेजों को लिए फायदेमंद आहार के अलग-अलग जगह पर लड़ाई हो रही है अलग हो रहा है तो उन्हें अलग-अलग तरह से जो है किया जा रहा था इसके अलावा मुझे यह लगता है तीसरा भाग तीसरा कारण यह है कि देश का भी प्रभाव ना होना देशव्यापी प्रभाव ना होना कम यह कहने का है कि जाता देश वर्थ आईटी विटामिन की दीवार का टाइम शाम था वहां पर युद्ध नहीं हो रहे थे राजपूताना पूरा शाम था दक्षिण में दक्षिणी राज्य तमिलनाडु श्याम था और क्या नाम है वह जो आपका जो नाटक चलती थी वह शांति ओम शांति चाहता था कि वहां पर युद्ध चल रहे थे वहां पर देश में देशव्यापी क्या सकते हो क्या नाम है जेपी आंदोलन की तरह से नहीं उठ पाया यह देश वापी क्रांति के तौर पर यह नोट पाया यह सिर्फ क्षेत्रों में ही खड़ा रहेगा आज लोगों ने उसके खिलाफ हो बहुत से लोगों ने अलग-अलग प्रभाव पड़ा जनता के अंदर भावना गई हो कि यह हमें चाहिए ऐसा कुछ नहीं हुआ था ठीक है

e27 ki kranti ke asafal hone ke kuch karan mujhe jo lagte hain vaah is prakar hain pehla raajnitik karan ki aaj kranti hui thi us shanti ke andar raajnitik karan isliye main karna chahta hoon kyonki yah kranti jyadatar bengal bihar aur uttar pradesh tak hi simit reh payi thi delhi tak chali gayi thi isse zyada doodh hi gayi thi kahin kahin kahin kahin se lucknow lucknow me yudh ho raha tha kanpur me jo hai peshwa nanasaheb ke netritva me hua tha jhansi me yudh kar rahe the delhi me yudh ho raha tha meerut me ho raha tha bareilly me bareilly me ho raha tha is tarah se karo ke chamchen ho kya naam hai hum jagatpur me ho raha tha kya naam hai kaise ho raha tha iske alava use bengal me bairakapur me hua toh ab chini kya hai ki aap bhi kya sakte ho ki yah ek simit jameen par gira hua yah toh ho raha tha iske alava bhi dekhoge toh abhi paoge ki punjab punjab ke khwaja the unhone delhi me delhi me vidroh ko dabane me iske alava jhansi ke vidroh ko daba liya me gwalior ke raja madhavrao sindhiya parivar ne madad ki thi iske alava aap ka ek naam hai baki jaise anekon logo ne angrejo ki madad kari thi taki vaah vidroh ko daba sake toh kai jaha par aap bhi de sakte ho raajnitik karan raajnitik karan kaha par paye gaye the is karan ki gayi thi alava doosra malika lagta hai mitra ka bhav netritva ka abhaav iska lag raha hai kyonki aapke dekhoge ki in sab ko vijay mili in sabhi me lucknow hua aapka kanpur hua jhansi va aur kya naam hai aapka delhi hua meerut hua bareilly voice ko azad kara liya tha parantu ab kya jaane ke baad inke paas pura ek boond ishq ka koi rokna tha inke paas yah sab alag alag jagah par alag alag time se ladai lad rahe the toh inke paas ek sangathit tarike se yudh karne ka koi bhi vikalp nahi dikhai de raha tha toh isi karan inhen angrejo ko liye faydemand aahaar ke alag alag jagah par ladai ho rahi hai alag ho raha hai toh unhe alag alag tarah se jo hai kiya ja raha tha iske alava mujhe yah lagta hai teesra bhag teesra karan yah hai ki desh ka bhi prabhav na hona deshavyapi prabhav na hona kam yah kehne ka hai ki jata desh worth it vitamin ki deewaar ka time shaam tha wahan par yudh nahi ho rahe the rajpootana pura shaam tha dakshin me dakshini rajya tamil nadu shyam tha aur kya naam hai vaah jo aapka jo natak chalti thi vaah shanti om shanti chahta tha ki wahan par yudh chal rahe the wahan par desh me deshavyapi kya sakte ho kya naam hai jp andolan ki tarah se nahi uth paya yah desh vaapee kranti ke taur par yah note paya yah sirf kshetro me hi khada rahega aaj logo ne uske khilaf ho bahut se logo ne alag alag prabhav pada janta ke andar bhavna gayi ho ki yah hamein chahiye aisa kuch nahi hua tha theek hai

e27 की क्रांति के असफल होने के कुछ कारण मुझे जो लगते हैं वह इस प्रकार हैं पहला राजनीतिक का

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18 सो 57 के निम्नलिखित क्रांति से जिसमें मेरे पास सैनिक उत्तर नहीं थे और मेरे पास कार दूसरी काम से और मेरे पास जो थे बंदूक थे वह बंदूक थे वह गाय के चाभी से बना होता था जिससे हमारे सैनिक ने उसे चलाने से इनकार कर दिया था इससे

18 so 57 ke nimnlikhit kranti se jisme mere paas sainik uttar nahi the aur mere paas car dusri kaam se aur mere paas jo the bandook the vaah bandook the vaah gaay ke chabhi se bana hota tha jisse hamare sainik ne use chalane se inkar kar diya tha isse

18 सो 57 के निम्नलिखित क्रांति से जिसमें मेरे पास सैनिक उत्तर नहीं थे और मेरे पास कार दूसर

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18 सो 57 की क्रांति का असफलता का कारण यह है कि देश छोटे-छोटे रियासतों में बंटा हुआ था आपस में एकता की कमी थी तथा एक कुशल नेतृत्व नहीं था जो पूरे देश को एक साथ लेकर चल सके जिसके कारण अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति असफल

18 so 57 ki kranti ka asafaltaa ka karan yah hai ki desh chhote chhote riyasato mein bata hua tha aapas mein ekta ki kami thi tatha ek kushal netritva nahi tha jo poore desh ko ek saath lekar chal sake jiske karan attharah sau sattawan ki kranti asafal

18 सो 57 की क्रांति का असफलता का कारण यह है कि देश छोटे-छोटे रियासतों में बंटा हुआ था आपस

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Sk.gurjar

Student

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हाय फ्रेंड शास्त्र हमारे इतिहास का बहुत अच्छा क्वेश्चन है मैंने भी महसूस किया कि 18 57 की क्रांति की असफलता के किन्हीं तीन कारणों को बताइए तो देखिए तीन कारण फर्स्ट करण सबसे महत्वपूर्ण कारण था कि एकता का भाव उन्होंने एकता का भाव था जो महत्वपूर्ण और हमेशा से हमारी कमी रही है और दूसरा है कि नेतृत्व क्षमता में नेतृत्व क्षमता का भाव था और तीसरा कारण था कि भावी योजना का भाव वह रणनीति नहीं बनाई बनाई थी कि उन्होंने आगे की योजना नहीं बनाई कि यदि 18 57 में हमें सफलता मिल जाए तो आगे हमारी क्या योजना रहेगी कौन सा कौन सी शासन प्रणाली पद्धति रहेगी ऐसी कोई योजना निश्चित योजना नहीं थी यह तीन प्रमुख कारण थे 18 सो 57 की क्रांति के

hi friend shastra hamare itihas ka bahut accha question hai maine bhi mehsus kiya ki 18 57 ki kranti ki asafaltaa ke kinhi teen karanon ko bataiye toh dekhiye teen karan first karan sabse mahatvapurna karan tha ki ekta ka bhav unhone ekta ka bhav tha jo mahatvapurna aur hamesha se hamari kami rahi hai aur doosra hai ki netritva kshamta me netritva kshamta ka bhav tha aur teesra karan tha ki bhave yojana ka bhav vaah rananiti nahi banai banai thi ki unhone aage ki yojana nahi banai ki yadi 18 57 me hamein safalta mil jaaye toh aage hamari kya yojana rahegi kaun sa kaun si shasan pranali paddhatee rahegi aisi koi yojana nishchit yojana nahi thi yah teen pramukh karan the 18 so 57 ki kranti ke

हाय फ्रेंड शास्त्र हमारे इतिहास का बहुत अच्छा क्वेश्चन है मैंने भी महसूस किया कि 18 57 की

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अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति फैन तो हम इसे बिल्कुल भी नहीं खेल सकते अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति पूरी तरीके से इसलिए सफल नहीं हो पाई क्योंकि 18 सो 57 के अंदर जो क्रांति होनी थी उसको शुरू होना था 31 मई को लेकिन वह 10 मई को ही शुरू हो गई उस समय में टेलीविजन फोन तो और अखबार में काम इतना ज्यादा चलन नहीं था जिससे यह मैसेज जो हर जगह पहुंचाया जा सके की क्रांति 29 मई की जगह 10 मई को शुरू हो गई नेता अगर वह अपने निश्चित दिन सफल होती तो इसे कोई भी झुठला नहीं सकता कि भारत से अंग्रेजों का सफाया बिल्कुल पूरी तरीके से हो जाता और हमारे विनायक दामोदर सावरकर और भी हमारे हजारों शहीद हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस को तो हम सिंगुलर नहीं सकते और गांधी जी इतने लोगों को अपना बलिदान नहीं देना पड़ता और यही एक मेन कारण तो इसका यही था और बाकी तो हम जैसे कि कई कई गलतियां निकाल सकते हैं और भारत को कमजोर कर दिया हमने इनकम टैक्स में 1960 में तो कई ऐसे कारण है अगर आपको मेरा जवाब सही लगा हो तो मुझे फॉलो और जवाब को शेयर और लाइक जरूर कीजिएगा फोन जरूर कीजिएगा

attharah sau sattawan ki kranti fan toh hum ise bilkul bhi nahi khel sakte attharah sau sattawan ki kranti puri tarike se isliye safal nahi ho payi kyonki 18 so 57 ke andar jo kranti honi thi usko shuru hona tha 31 may ko lekin vaah 10 may ko hi shuru ho gayi us samay mein television phone toh aur akhbaar mein kaam itna zyada chalan nahi tha jisse yah massage jo har jagah pahunchaya ja sake ki kranti 29 may ki jagah 10 may ko shuru ho gayi neta agar vaah apne nishchit din safal hoti toh ise koi bhi jhuthla nahi sakta ki bharat se angrejo ka safaya bilkul puri tarike se ho jata aur hamare vinayak damodar savarkar aur bhi hamare hazaro shaheed hue netaji subhash chandra bose ko toh hum singular nahi sakte aur gandhi ji itne logo ko apna balidaan nahi dena padta aur yahi ek main karan toh iska yahi tha aur baki toh hum jaise ki kai kai galtiya nikaal sakte hain aur bharat ko kamjor kar diya humne income tax mein 1960 mein toh kai aise karan hai agar aapko mera jawab sahi laga ho toh mujhe follow aur jawab ko share aur like zaroor kijiega phone zaroor kijiega

अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति फैन तो हम इसे बिल्कुल भी नहीं खेल सकते अट्ठारह सौ सत्तावन की

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आपका क्वेश्चन है कि तो संतान की क्रांति की असफलता के तीन कारण बताइए पहला कारण तो यह है कि क्रांति समय से पूर्व चालू हो गई थी इस कारण व व्यापक रूप धारण न कर पाई दा सीमित रह कर ही समाप्त हो गई दूसरा कारण यह है कि क्रांतिकारी भिन्न-भिन्न क्षेत्रों से तथा उनके संपर्क भाषा में संपर्क भाषा का अभाव था इसका एक दूसरे से संपर्क न कर पाने का न समझ पाने कांति कांति सीमित तक ही रह गई और तीसरा कारण है संचार प्रणाली का भाव उसको समय संचार और डाक सेवा कितनी सीटें आई थी जिसके कारण संदेशों का आदान-प्रदान बहुत कम होता था जिसके कारण यह कांति असफल रही है

aapka question hai ki toh santan ki kranti ki asafaltaa ke teen karan bataiye pehla karan toh yah hai ki kranti samay se purv chaalu ho gayi thi is karan va vyapak roop dharan na kar payi the simit reh kar hi samapt ho gayi doosra karan yah hai ki krantikari bhinn bhinn kshetro se tatha unke sampark bhasha me sampark bhasha ka abhaav tha iska ek dusre se sampark na kar paane ka na samajh paane kanti kanti simit tak hi reh gayi aur teesra karan hai sanchar pranali ka bhav usko samay sanchar aur dak seva kitni seaten I thi jiske karan sandeshon ka aadaan pradan bahut kam hota tha jiske karan yah kanti asafal rahi hai

आपका क्वेश्चन है कि तो संतान की क्रांति की असफलता के तीन कारण बताइए पहला कारण तो यह है कि

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18 सो 57 की क्रांति का असफल होने का तीन कारण है राजनीतिक कारण आर्थिक कारण सैनिक आर्थिक कारण

18 so 57 ki kranti ka asafal hone ka teen karan hai raajnitik karan aarthik karan sainik aarthik karan

18 सो 57 की क्रांति का असफल होने का तीन कारण है राजनीतिक कारण आर्थिक कारण सैनिक आर्थिक कार

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18 सो 57 की क्रांति का समय 31 मई 5857 को रखा गया था जबकि यह विद्रोह 5857 एसबीको 21 मार्च 28 तारीख को ही प्रारंभ हो गया इसके असफलता की यही कारण है नंबर 2 युद्ध के बारे में अधिक लोगों को 9:00 जानकारी प्राप्त होना नंबर 3 सभी शासकों को यह नहीं पता था कि अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति होने वाली है

18 so 57 ki kranti ka samay 31 may 5857 ko rakha gaya tha jabki yah vidroh 5857 esabiko 21 march 28 tarikh ko hi prarambh ho gaya iske asafaltaa ki yahi karan hai number 2 yudh ke bare mein adhik logo ko 9 00 jaankari prapt hona number 3 sabhi shaasakon ko yah nahi pata tha ki attharah sau sattawan ki kranti hone wali hai

18 सो 57 की क्रांति का समय 31 मई 5857 को रखा गया था जबकि यह विद्रोह 5857 एसबीको 21 मार्च 2

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18 सो 57 की क्रांति कितना सफलता है पहला भाग दूसरा अंग्रेजों के ऑपरेशन भारत का सबसे अच्छा हथियार रहे थे तीसरा और अंग्रेज झूठ मिलकर कार्य करते थे

18 so 57 ki kranti kitna safalta hai pehla bhag doosra angrejo ke operation bharat ka sabse accha hathiyar rahe the teesra aur angrej jhuth milkar karya karte the

18 सो 57 की क्रांति कितना सफलता है पहला भाग दूसरा अंग्रेजों के ऑपरेशन भारत का सबसे अच्छा ह

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