अपने आप को तो सभी अच्छा मानते हैं जो बेवकूफ है वह भी अच्छा मानता है चोर है वह भी अपने आपको अच्छा मानता है ऐसा क्यों?...


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Porshia Chawla Ban

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा इसलिए है क्योंकि हर इंसान जो है वह एक समय पर अपने हित में ही सोचता है और एक समय पर उसकी सोच के अनुसार जो उसको उस वक्त की समझ के अनुसार अपने लिए सर्वोत्तम लगता है बेस्ट लगता है वह वही कार्य करता है और वही उसकी सोच रहती है उसके हिसाब से हर चीज उस वकत जस्टिफाइड होती है वह जो भी एक्शन कर रहे हो जस्टिफाइड लगता है उसको और यही रीजन है कि उससे के साथ आगे बढ़ना सोचता है और बढ़ता है तो उसको लगता है कि वह सही है और यह बात आप जो बोल रहे हैं कि सामने वाला बेवकूफ है वह भी खुद को अच्छा मानता चोर है वह भी अच्छा मानता है तो यह हम लेबल्स लगा रहे हैं चोर के पास चोरी करने का भी जस्टिफिकेशन और बुरे इंसान के पास अपनी बुराई का भी जस्टिफिकेशन है ऐसे ही किसी बेवकूफ के पास अपनी बेवकूफी की बात का भी जस्टिफिकेशन है तो हर इंसान गिवन टाइम में जो भी कथित समय है उस समय पर उसकी जो बेस्ट मंचल कैपेबिलिटीज हैं उसके जो मानसिक क्षमताएं हैं और जो उसके हिसाब से उसके विचार हैं और उसके विलीस है वह काम करते हैं और उस हिसाब से वह खुद को सही समझता है कि मैं सही कर रहा हूं यह समय की मांग के सबसे बेस्ट है मेरा एक्शन और वह उसे सबसे कैरी फॉरवर्ड करता है उसको लेकिन आप अगर थर्ड एंगल से देखो कि आप ना फर्स्ट पर्सन होना सेकंड पर्सन थर्ड पर्सन थर्ड पर्सन से जवाब देखोगे तो आपको यह सब एक जैसे लगेंगे मैंने यह सभी लोग सिर्फ अपने ही दायरे से और अपने ही आंखों से अपने चश्मे से देख रहे हैं धन्यवाद

aisa isliye hai kyonki har insaan jo hai vaah ek samay par apne hit mein hi sochta hai aur ek samay par uski soch ke anusaar jo usko us waqt ki samajh ke anusaar apne liye sarvottam lagta hai best lagta hai vaah wahi karya karta hai aur wahi uski soch rehti hai uske hisab se har cheez us waqt justified hoti hai vaah jo bhi action kar rahe ho justified lagta hai usko aur yahi reason hai ki usse ke saath aage badhana sochta hai aur badhta hai toh usko lagta hai ki vaah sahi hai aur yah baat aap jo bol rahe hain ki saamne vala bewakoof hai vaah bhi khud ko accha manata chor hai vaah bhi accha manata hai toh yah hum labels laga rahe hain chor ke paas chori karne ka bhi jastifikeshan aur bure insaan ke paas apni burayi ka bhi jastifikeshan hai aise hi kisi bewakoof ke paas apni bewakoofi ki baat ka bhi jastifikeshan hai toh har insaan given time mein jo bhi kathit samay hai us samay par uski jo best manchal kaipebilitij hain uske jo mansik kshamataen hain aur jo uske hisab se uske vichar hain aur uske vilis hai vaah kaam karte hain aur us hisab se vaah khud ko sahi samajhata hai ki main sahi kar raha hoon yah samay ki maang ke sabse best hai mera action aur vaah use sabse carry forward karta hai usko lekin aap agar third Angle se dekho ki aap na first person hona second person third person third person se jawab dekhoge toh aapko yah sab ek jaise lagenge maine yah sabhi log sirf apne hi daayre se aur apne hi aankho se apne chashme se dekh rahe hain dhanyavad

ऐसा इसलिए है क्योंकि हर इंसान जो है वह एक समय पर अपने हित में ही सोचता है और एक समय पर उसक

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