राइट टू एजुकेशन: जब दिल्ली सरकार सबसे ज़्यादा ख़र्च बच्चों की पढ़ाई पर करती है तो JNU में फ़ीस को ले कर इतना हंगामा क्यूँ?...


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Suraj Shaw

Entrepreneur, Career Counsellor

1:27
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो फ्रेंड्स देखिए जेएनयू जो है वह सेंट्रल यूनिवर्सिटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी का जो पैसा आता है वह स्टेट गवर्नमेंट नहीं देती वह जो सेंटर की गवर्नमेंट होती है वह देती है उसको मेंटेन करती है तो जेएनयू की पढ़ाई में दिल्ली सरकार का कोई रोल नहीं है पहली बार दूसरी बात कि पूरी दुनिया में जितने भी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज है उन सब की फीस जो है उतनी ही भारत के पीछे अगर जैनियों की फीस बढ़ा दी जाती है तो यह वन ऑफ द कॉस्ट ऑफ कॉस्टली यूनिवर्सिटी बन जाएगी पूरी दुनिया की ठीक है और 300 गुना फीस बढ़ाई जा रही है और सिर्फ ₹10 की बात थी ₹300 की बात की है और भी बहुत सारे ऐसे चीज है जिसको क्या ऐड किया जा रहा है और इतना पैसा कोई भी फैमिली जो अलवर क्लास से बिलॉन्ग करते हैं वह नहीं यह फारवर्ड कर पाएगा और से बच्चों कॉलेज छोड़ना पड़ जाएगा यूनिवर्सिटी सोनीपत जाए और ऐसा नहीं कि वह बच्चे फालतू है वहां पर भु एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने के बाद वापस मिशन लेते तो उन्होंने भी काफी मेहनत करिए और आगे भी करी दे एक अच्छा प्लेटफार्म है जहां पर वह बच्चे भी पढ़ सकते हैं जिनका फाइनैंशल बैकग्राउंड इतना अच्छा नहीं है फीस बढ़ने के बाद शायद बहुत सारे ऐसे बच्चे होंगे जो भी मोटिवेट हो जाए और पढ़ाई करना चाहते हैं लेकिन नहीं पढ़ पाए तो इसीलिए शायद मेरे ख्याल से जनों के बच्चे जब आऊंगा मगर

hello friends dekhiye jnu jo hai vaah central university aur central university ka jo paisa aata hai vaah state government nahi deti vaah jo center ki government hoti hai vaah deti hai usko maintain karti hai toh jnu ki padhai mein delhi sarkar ka koi roll nahi hai pehli baar dusri baat ki puri duniya mein jitne bhi central universities hai un sab ki fees jo hai utani hi bharat ke peeche agar jainiyon ki fees badha di jaati hai toh yah van of the cost of costly university ban jayegi puri duniya ki theek hai aur 300 guna fees badhai ja rahi hai aur sirf Rs ki baat thi Rs ki baat ki hai aur bhi bahut saare aise cheez hai jisko kya aid kiya ja raha hai aur itna paisa koi bhi family jo alwar class se Belong karte hain vaah nahi yah forward kar payega aur se baccho college chhodna pad jaega university sonipat jaaye aur aisa nahi ki vaah bacche faltu hai wahan par bhu entrance exam clear karne ke baad wapas mission lete toh unhone bhi kaafi mehnat kariye aur aage bhi kari de ek accha platform hai jaha par vaah bacche bhi padh sakte hain jinka fainainshal background itna accha nahi hai fees badhne ke baad shayad bahut saare aise bacche honge jo bhi motivate ho jaaye aur padhai karna chahte hain lekin nahi padh paye toh isliye shayad mere khayal se jano ke bacche jab aaunga magar

हेलो फ्रेंड्स देखिए जेएनयू जो है वह सेंट्रल यूनिवर्सिटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी का जो पैसा

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

3:11

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राइट टू एजुकेशन जब दिल्ली सरकार सबसे ज्यादा खुश बच्चों की पढ़ाई पर करती है उज्जैन में फीस को लेकर इतना हंगामा थी कि दिल्ली सरकार एजुकेशन पत्थर तो बहुत करती है लेकिन पूरे देश के जो कॉलेजेस हैं जो देश की सिटी उत्सव के ऊपर एलोकेट करती है और जेएनयू के किस पर लेकर इतना हंगामा तो वहां के विद्यार्थियों ने किया है क्योंकि जो हॉस्टल के चीज है उसको भी बढ़ाया गया और जो भोजन की फिक्स है उसको बढ़ाया गया उसको लेकर यह गाना वह ₹10 महीना अगर हॉस्टल फीस होती है तो वह काफी कम लोगों को देना आसान रहता है क्योंकि यह कहा जाता है कि जेल में काफी गरीब और जरूरतमंद अभिभावक के विद्यार्थी मां पर पड़ती इंटरव्यू में हमने देखा था कि जयदेव चैनलों में इंटरव्यू लिया था तब वह विद्यार्थी इस तरह का इंटरव्यू के रहते की फीस बढ़ाई जान को बहुत ही गलत बात है और इसे सपोर्ट नहीं कर पाएंगे बच्चे और उनको यहां से एजुकेशन लेना बंद करना पड़ेगा लेकिन बच्चों की जरूरतें जो है वह ₹50040 तक में दिख रहा था कि जंगल को गलत मैसेज आता है पब्लिक में कि उनके पास अगर इतने पैसे हैं क्यों इतने महंगे मोबाइल रख सकते हैं वह हॉस्टल की फीस क्यों इतना उनको तकलीफ है हालांकि सरकार ने उस में कटौती कर दी है संसद में लेकर गए और अभी तक को असंतोष फैला हुआ है भारत सरकार को राइट टू एजुकेशन के तहत सभी यह मैसेजेस को फायदा पहुंचाना था सभी स्कूल को उन्हें ग्रांट देने की भर्ती है इसलिए वह बराबर मिल सकती है फिर भी असंतोष पागल है जैन में तो कुछ वहां की अलग तरह की प्रॉब्लम होने की संभावना लगती है धन्यवाद

right to education jab delhi sarkar sabse zyada khush baccho ki padhai par karti hai ujjain mein fees ko lekar itna hungama thi ki delhi sarkar education patthar toh bahut karti hai lekin poore desh ke jo colleges hai jo desh ki city utsav ke upar eloket karti hai aur jnu ke kis par lekar itna hungama toh wahan ke vidyarthiyon ne kiya hai kyonki jo hostel ke cheez hai usko bhi badhaya gaya aur jo bhojan ki fix hai usko badhaya gaya usko lekar yah gaana vaah Rs mahina agar hostel fees hoti hai toh vaah kaafi kam logo ko dena aasaan rehta hai kyonki yah kaha jata hai ki jail mein kaafi garib aur jaruratmand abhibhavak ke vidyarthi maa par padti interview mein humne dekha tha ki jaidev channelon mein interview liya tha tab vaah vidyarthi is tarah ka interview ke rehte ki fees badhai jaan ko bahut hi galat baat hai aur ise support nahi kar payenge bacche aur unko yahan se education lena band karna padega lekin baccho ki jaruratein jo hai vaah Rs tak mein dikh raha tha ki jungle ko galat massage aata hai public mein ki unke paas agar itne paise hai kyon itne mehnge mobile rakh sakte hai vaah hostel ki fees kyon itna unko takleef hai halaki sarkar ne us mein katauti kar di hai sansad mein lekar gaye aur abhi tak ko asantosh faila hua hai bharat sarkar ko right to education ke tahat sabhi yah messages ko fayda pahunchana tha sabhi school ko unhe grant dene ki bharti hai isliye vaah barabar mil sakti hai phir bhi asantosh Pagal hai jain mein toh kuch wahan ki alag tarah ki problem hone ki sambhavna lagti hai dhanyavad

राइट टू एजुकेशन जब दिल्ली सरकार सबसे ज्यादा खुश बच्चों की पढ़ाई पर करती है उज्जैन में फीस

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

3:07
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जेएनयू के छात्र अध्यक्ष में हंगामा करते हैं आप सोचो जेएनयू के छात्रों को सर्वाधिक डोनेशन भारत सरकार देती है किंतु बड़ा दुर्भाग्य का विषय है फिर भी अपने देश विरोधी गतिविधियां संचालित होती है देश विरोधी गति को अंजाम देने वाले छात्र बन रहे हैं जो देश का विरोध कर रहे हैं राष्ट्रीयता के विकास में बाधक बन रहे हैं और राष्ट्रीयता को विरोधी विचार प्रकट करते हैं यह बहुत बड़ी दूर भाग 1 दुर्भाग्य का विषय है जेएनयू पूर्व में अच्छे छात्रों की हो रही है यहां से कई ऐसे महान विद्वान निकले हैं जिन्होंने देश के कई संवैधानिक पदों पर कार्य किया है अधिकारी स्तर पर कार्य किया है किंतु वर्तमान में पता यह समझ में नहीं आ रहा कि आखिर ऐसी क्या कारण है जिनके कारण से देश विरोधी गतिविधियां संचालित हो रही हैं देशद्रोही विचार प्रकट हो रहे हैं यह बड़े दुर्भाग्य का विषय है जबकि सरकार सर्वाधिक डोनेशन जेएनयू को देती है जेएनयू एक अच्छी इन बस्तियों में कभी लेकिन आज हम सब देशवासियों की नजर में हम इसे देश विरोधी मानते हैं देशद्रोही यहां से पैदा हो रहे हैं कि बड़ा दुर्भाग्य से दिल्ली की सरकार बहुत अच्छा कर रही है एजुकेशन के लिए उन्होंने बहुत अच्छा किया है केजरीवाल साहब बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने इतनी अच्छी एजुकेशन व्यवस्था की है सरकारी स्कूलों की जो मॉडल व्यवस्था उन्होंने की है वह तो सारे देश की क्रिकेट सरकारों के लिए एक आदर्श रूप है और उन्हें उस पर ध्यान देना चाहिए किंतु साथ में जेएनयू वालों को भी विचार करना चाहिए कुछ शर्म करना चाहिए कि देश विरोधी गतिविधियां संचालित नहीं होनी चाहिए आप जानते हैं जेएनयू जेएनयू की फीस जो है सभी स्टेट ओके और भारत सरकार की जितनी भी यूनिवर्सिटी हैं उनमें सबसे कम है सर्वाधिक डोनेशन इन को प्राप्त होता है टॉप फैसिलिटी जेएनयू के छात्रों को प्राप्त है किंतु उसका सिला यह मिल रहा है देशवासियों को हमारे दांत से टैक्स हम जो पे करते हैं उसका पैसा हमको जाता है कमीशन के रूप में फिर भी में राष्ट्रीयता की विरोधी विचार रखते हैं ताकि ताकि विरोधी गतिविधियां संचालित करते हैं यह बड़ा दुर्भाग्य का विषय है कासिम को सद्बुद्धि आए और यह भारत के विकास में सहयोगी बने भारत को राष्ट्रीयता के भाव उत्पन्न करने वाले बने राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण हो क्योंकि मेरा मानना यह है कि कोई भी देश का नागरिक यदि देश भक्ति के भाव सहित है वह देश के लिए मरेंगे

jnu ke chatra adhyaksh mein hungama karte hai aap socho jnu ke chhatro ko sarvadhik donation bharat sarkar deti hai kintu bada durbhagya ka vishay hai phir bhi apne desh virodhi gatividhiyan sanchalit hoti hai desh virodhi gati ko anjaam dene waale chatra ban rahe hai jo desh ka virodh kar rahe hai rastriyata ke vikas mein badhak ban rahe hai aur rastriyata ko virodhi vichar prakat karte hai yah bahut baadi dur bhag 1 durbhagya ka vishay hai jnu purv mein acche chhatro ki ho rahi hai yahan se kai aise mahaan vidhwaan nikle hai jinhone desh ke kai samvaidhanik padon par karya kiya hai adhikari sthar par karya kiya hai kintu vartaman mein pata yah samajh mein nahi aa raha ki aakhir aisi kya karan hai jinke karan se desh virodhi gatividhiyan sanchalit ho rahi hai deshdrohi vichar prakat ho rahe hai yah bade durbhagya ka vishay hai jabki sarkar sarvadhik donation jnu ko deti hai jnu ek achi in bastiyon mein kabhi lekin aaj hum sab deshvasiyon ki nazar mein hum ise desh virodhi maante hai deshdrohi yahan se paida ho rahe hai ki bada durbhagya se delhi ki sarkar bahut accha kar rahi hai education ke liye unhone bahut accha kiya hai kejriwal saheb badhai ke patra hai ki unhone itni achi education vyavastha ki hai sarkari schoolon ki jo model vyavastha unhone ki hai vaah toh saare desh ki cricket sarkaro ke liye ek adarsh roop hai aur unhe us par dhyan dena chahiye kintu saath mein jnu walon ko bhi vichar karna chahiye kuch sharm karna chahiye ki desh virodhi gatividhiyan sanchalit nahi honi chahiye aap jante hai jnu jnu ki fees jo hai sabhi state ok aur bharat sarkar ki jitni bhi university hai unmen sabse kam hai sarvadhik donation in ko prapt hota hai top facility jnu ke chhatro ko prapt hai kintu uska sila yah mil raha hai deshvasiyon ko hamare dant se tax hum jo pe karte hai uska paisa hamko jata hai commision ke roop mein phir bhi mein rastriyata ki virodhi vichar rakhte hai taki taki virodhi gatividhiyan sanchalit karte hai yah bada durbhagya ka vishay hai kashim ko sadbuddhi aaye aur yah bharat ke vikas mein sahyogi bane bharat ko rastriyata ke bhav utpann karne waale bane rashtra bhakti se paripurna ho kyonki mera manana yah hai ki koi bhi desh ka nagarik yadi desh bhakti ke bhav sahit hai vaah desh ke liye marenge

जेएनयू के छात्र अध्यक्ष में हंगामा करते हैं आप सोचो जेएनयू के छात्रों को सर्वाधिक डोनेशन भ

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Tutor

3:11
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो एक और से जो पूछा है और काफी अच्छा क्वेश्चन है और इंटरेस्टिंग क्वेश्चन है राइट टू एजुकेशन तक दिल्ली की सरकार सबसे ज्यादा खर्च बच्चों की पढ़ाई पर करती है तो जेल में फीस को लेकर इतना हंगामा क्यों तो आपको बता दूं कि दिल और जेएनयू यूनिवर्सिटी है चमन लाल नेहरू यूनिवर्सिटी यह दिल्ली सरकार के अंडर में नहीं आती है आइए जो आती क्यों केंद्र सरकार के अंडर में आती है जिससे राष्ट्रपति चलाते हैं और कुछ यूनिवर्सिटी ऐसी होती हैं जिन्हें राष्ट्रपति राष्ट्रपति जलाते हैं जैसे कि आपकी यानी हो गई और डीयू हो गई और आप भी ज्ञानी हो गई बीएचयू हो गया तो इनको केंद्र सरकार देखती है ओके सरकार इनका बजट पास करती कितना मतलब यूनिवर्सिटी ओं को जाएगा बात 10 या फिर ₹20 की नहीं है या ₹300 की नहीं है बात और पढ़ाई की है कि वहां पर जो जेएनयू के बच्चे पढ़ते हैं वह गरीब तबकों के पढ़ती हैं कोई कुछ यूनिवर्सिटी की बच्ची है जिसमें बच्चे पढ़ सकते हैं लगी बाकी तो चार-पांच सस्ते में बच्चों को पढ़ाई की जाती है जाती है अच्छी फैसिलिटी है बाकी और यूनिवर्सिटी में कोई फैसिलिटी नहीं है प्रॉब्लम यह है कि फीस को लेकर यह विवाद है कि जो छोटे लोग हैं गरीब लोग किसान की लोग जूते चलने वाले का बच्चा है या ड्राइवर का बच्चा है आप यह संचय तो वह इतना भी सपोर्ट नहीं कर पाएगा क्यों नहीं कर पाया क्योंकि अगर मान के चलो जिसकी आए एक लड़की बीच में है तो ₹70000 1 साल में कोई नहीं कर पाएगा तो बाकी के जो बच्ची है जो गरीब बच्चे हैं या फिर माइनॉरिटी में आती हैं वह नहीं पढ़ पाएंगे तो कुछ हद तक तो हमारा समाज में पीछे रह जाएगा इसी वर्ष 30 को ले करके इतना विवाद है फिर सरकारी केपी कि यहां पर केवल एंटीनेटल पढ़ते हैं या पर आतंकवाद पर पढ़ते हैं सियासी करती हैं या फिर इतने साल तक पड़ेगा तो यह तो सिर्फ बेकार की बातें तो फिर मैं तो कह रहा हूं सभी यूनिवर्सिटी में बिल्कुल फ्री कर देना चाहिए जो बच्चे पढ़ रहे हैं क्योंकि हमारे देश में मात्र तीन परसेंट तो भी और चोरी बैचलर एजुकेशन करते हैं मात्र 1% मास्टरजी कृष्ण करते हैं और एक बटे 10 परसेंट सियाचिन पहुंचती है और पहुंचते-पहुंचते उसको ड्रॉप भी कर देते हो की जॉब लगी या कुछ हो जाता है कुछ प्रॉब्लम हो जाती है तो ब्लॉक कर देते हो शिक्षा को लेकर हम को जागरूक होना चाहिए और सजा करना चाहिए और चाहिए जिससे कि हम किसी से क्वेश्चन पूछता क्योंकि हमारी कौन में के बारे में समाज के बारे में प्रदेश के बारे में यातायात व्यवस्था के बारे में क्वेश्चन नहीं पढ़ेंगे तो उसकी स्थिति पूछ सकती हो कि नहीं उसके बारे में क्या जाने कि हमारा संविधान करके 30 को खत्म करने के लिए धन्यवाद इस क्वेश्चन को शेयर जरूर करें और लाइक करें कमेंट करें और वह कल पर फॉलो जरूर करें

hello ek aur se jo poocha hai aur kaafi accha question hai aur interesting question hai right to education tak delhi ki sarkar sabse zyada kharch baccho ki padhai par karti hai toh jail mein fees ko lekar itna hungama kyon toh aapko bata doon ki dil aur jnu university hai chaman laal nehru university yah delhi sarkar ke under mein nahi aati hai aaiye jo aati kyon kendra sarkar ke under mein aati hai jisse rashtrapati chalte hain aur kuch university aisi hoti hain jinhen rashtrapati rashtrapati jalte hain jaise ki aapki yani ho gayi aur DU ho gayi aur aap bhi gyani ho gayi bhu ho gaya toh inko kendra sarkar dekhti hai ok sarkar inka budget paas karti kitna matlab university on ko jaega baat 10 ya phir Rs ki nahi hai ya Rs ki nahi hai baat aur padhai ki hai ki wahan par jo jnu ke bacche padhte hain vaah garib tabkon ke padhati hain koi kuch university ki bachi hai jisme bacche padh sakte hain lagi baki toh char paanch saste mein baccho ko padhai ki jaati hai jaati hai achi facility hai baki aur university mein koi facility nahi hai problem yah hai ki fees ko lekar yah vivaad hai ki jo chote log hain garib log kisan ki log joote chalne waale ka baccha hai ya driver ka baccha hai aap yah sanchaya toh vaah itna bhi support nahi kar payega kyon nahi kar paya kyonki agar maan ke chalo jiski aaye ek ladki beech mein hai toh Rs 1 saal mein koi nahi kar payega toh baki ke jo bachi hai jo garib bacche hain ya phir minority mein aati hain vaah nahi padh payenge toh kuch had tak toh hamara samaj mein peeche reh jaega isi varsh 30 ko le karke itna vivaad hai phir sarkari KP ki yahan par keval entinetal padhte hain ya par aatankwad par padhte hain siyasi karti hain ya phir itne saal tak padega toh yah toh sirf bekar ki batein toh phir main toh keh raha hoon sabhi university mein bilkul free kar dena chahiye jo bacche padh rahe hain kyonki hamare desh mein matra teen percent toh bhi aur chori bachelor education karte hain matra 1 masterji krishna karte hain aur ek bate 10 percent siachen pohchti hai aur pahunchate pahunchate usko drop bhi kar dete ho ki job lagi ya kuch ho jata hai kuch problem ho jaati hai toh block kar dete ho shiksha ko lekar hum ko jagruk hona chahiye aur saza karna chahiye aur chahiye jisse ki hum kisi se question poochta kyonki hamari kaun mein ke bare mein samaj ke bare mein pradesh ke bare mein yatayat vyavastha ke bare mein question nahi padhenge toh uski sthiti puch sakti ho ki nahi uske bare mein kya jaane ki hamara samvidhan karke 30 ko khatam karne ke liye dhanyavad is question ko share zaroor kare aur like kare comment kare aur vaah kal par follow zaroor karen

हेलो एक और से जो पूछा है और काफी अच्छा क्वेश्चन है और इंटरेस्टिंग क्वेश्चन है राइट टू एजुक

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राइट टू एजुकेशन इसका सीधा तात्पर्य यह है कि शिक्षा सभी के लिए अनिवार्य है अधिकार है परंतु जो हमारा एजुकेशन सिस्टम है और फीस को लेकर जेएनयू में जो बवाल है वह इसलिए नहीं है कि एजुकेशन में फीस की बढ़ोतरी हुई है या कोई और कारण है जब शिक्षा की अनिवार्यता है शिक्षा अनिवार्य है और अधिकार भी है तू वहां शुल्क का प्रावधान होना ही नहीं चाहिए सिस्टम की विसंगतियों के कारण यह समस्याएं उत्पन्न होती हैं जैसा कि पहले भी हमने अपने वक्तव्य में कहा था कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में मूल चूल आधारभूत ढांचे में परिवर्तन नहीं होगा तब तक यह विसंगतियां इसी प्रकार से होती रहेंगी इसी प्रकार से समझाएं बनी रहेंगी इसी प्रकार से यहां पर लड़ाई झगड़ा होता रहेगा और इसमें जब तक एजुकेशन सिस्टम में धार्मिक शिक्षा को हटाया नहीं जाएगा चाहे वह किसी भी वर्ग की हो शिक्षा व्यवस्था एक रूप में एक धागे में एक सुर में नहीं होगी तब तक ऐसा ही होता रहेगा एजुकेशन फॉर ऑल राइट टू एजुकेशन शिक्षा को अधिकार देती है जो प्रत्येक के लिए अनिवार्य है इसमें सरकार को हाथ में शिक्षा होना चाहिए प्राइवेटाइजेशन रास्ता ठीक नहीं है प्राइवेटाइजेशन में इसमें धन दौलत वाले लोग आर्थिक रूप से संपन्न लोग उसको प्राप्त कर लेंगे और उनके लिए शिक्षा सुलभ हो जाएगी एक सामान्य के लिए शिक्षा बहुत ही दूर की अवस्था मानी जाएगी इसलिए शिक्षा सदैव सरकार के हाथ में होनी चाहिए सरकार द्वारा धवन होनी चाहिए और सबके लिए होनी चाहिए धन्यवाद

right to education iska seedha tatparya yah hai ki shiksha sabhi ke liye anivarya hai adhikaar hai parantu jo hamara education system hai aur fees ko lekar jnu me jo bawaal hai vaah isliye nahi hai ki education me fees ki badhotari hui hai ya koi aur karan hai jab shiksha ki aniwaryaata hai shiksha anivarya hai aur adhikaar bhi hai tu wahan shulk ka pravadhan hona hi nahi chahiye system ki visangatiyon ke karan yah samasyaen utpann hoti hain jaisa ki pehle bhi humne apne vaktavya me kaha tha ki jab tak shiksha vyavastha me mul chula adharbhut dhanche me parivartan nahi hoga tab tak yah visangatiyan isi prakar se hoti rahegi isi prakar se samjhaye bani rahegi isi prakar se yahan par ladai jhagda hota rahega aur isme jab tak education system me dharmik shiksha ko hataya nahi jaega chahen vaah kisi bhi varg ki ho shiksha vyavastha ek roop me ek dhaage me ek sur me nahi hogi tab tak aisa hi hota rahega education for all right to education shiksha ko adhikaar deti hai jo pratyek ke liye anivarya hai isme sarkar ko hath me shiksha hona chahiye privatisation rasta theek nahi hai privatisation me isme dhan daulat waale log aarthik roop se sampann log usko prapt kar lenge aur unke liye shiksha sulabh ho jayegi ek samanya ke liye shiksha bahut hi dur ki avastha maani jayegi isliye shiksha sadaiv sarkar ke hath me honi chahiye sarkar dwara dhawana honi chahiye aur sabke liye honi chahiye dhanyavad

राइट टू एजुकेशन इसका सीधा तात्पर्य यह है कि शिक्षा सभी के लिए अनिवार्य है अधिकार है परंतु

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