ऐसा क्यूँ होता है की हमारे देश में थीयटर में इतने अच्छे अभिनेता होते हुए भी उन्हें बड़े पर्दे पर चान्स नहीं मिलता?...


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Kafeel Jafri

Actor, Bengaluru's only Dastangoi performer

5:50

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह सवाल जो है राम अपने आप में त्रुटिपूर्ण है अपने आपने प्लॉट है क्योंकि मुझे सवाल इस बात को पहले से ही मान लेता है कि फिल्म जो है वह एक ज्यादा बड़ा जरिया है और ज्यादा बिस्तर पर या 8:00 का एक फैशन देने का या फिर बड़ा आर्टिस्टिक मीडियम फिल्म की रिलीज फिल्म के माध्यम के तौर पर वह सिर्फ एक माध्यम से ज्यादा गर्म करने की बहुत ज्यादा बेहतर माध्यम है दादा प्रणाम आते हैं तो यह कहना सही नहीं होगा कितने लोगों को जानता हूं जो सिर्फ और सिर्फ थिएटर ही करना चाहते हैं उनको बहुत सारे बड़े-बड़े लोगों के ऊपर भी देते हैं लेकिन वह बड़े बड़े प्रोडक्शन हाउस ने उनको ऑफर लेकिन वह मना कर देते तुझे मजा नहीं आता तो जैसे मैं आपको बताऊं दिल्ली में कलाकार महेंद्र मेवाती वर्ल्ड मोस्ट अमेजिंग एक्टर्स इन थियेटर कितनी बार मना किया फिल्म्स के लिए क्या होता है कि जो फिल्म आ गए हैं यह लोग अलग-अलग चेहरे ढूंढते और इसमें जो कला है जो एक्टिंग की कला है सब लोग नहीं बहुत कम लोग सब लोग के लिए बहुत बदल रही हैं अच्छी अच्छी अच्छी कहानियां भी सामने आ रही है अच्छी फिल्में भी बन रही लेकिन मेजॉरिटी ऑफ द फिल्म मेकर्स मेजॉरिटी मदर सों कॉल्ड बॉलीवुड वह अभी भी वही चीजें दिखाना चाहते हैं जो कि उन्हें पता है कि यह हंड्रेड परसेंट उनका पैसा जो है वापस कर देगी उन्हें और थोड़ा फायदा भी रहेगी तो जब मामला 5a का हो व्हाट्सएप टेक्स्ट भेजो कि आज आठवां पीछे रह जाती जबकि थिएटर में फायदा बाद में देखा जाता है बल्कि फायदा देखा ही नहीं जाता कि मुझे यह कहानी सुनानी है मेरे साथ मेरे दर्द साथी क्योंकि हमारी मदद करेंगे यह कहानी सुनाने में कोई लिखेगा कोई स्टेज डिजाइन करेगा कोई लाइट बना देगा कोई भी बता देगा और हम सब मिलके की कहानी सुनाएंगे कहानी सुनाना और वह अपने तरीके से सुनाना बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट उनके लिए ज्यादा मायने रखता अगर आप देखिए तो फिल्म आलू ने काफी सारे आते हैं काफी सारे अपने जो सुपरस्टार लिंग हैं या फिर लो अलग-अलग जगहों से नहीं है कभी मॉडलिंग से लिए हैं कभी जान से लिए हैं तो कभी थिएटर चाहिए पार्टी में थी तो एक फॉर्म ही एकमात्र नहीं है जिस समय से थिएटर है जिस तरह से लिटरेचर है जिस तरह से राइटिंग है जिस तरह से जानते हैं जिनके माध्यम जो कि हर चीज को साथ में लेकर चलता है आर्टिस्टिक एक्सप्रेशन कौन कैसे करना चाहता है कि अपना इंजीनियरिंग इकोनॉमिक्स बहुत ही अलग है फिल्म इंडस्ट्री की इसीलिए अक्षर थिएटर आर्टिस्ट अपना को वहां देख भी नहीं पाते जो सच में तीसरा टेस्ट होते हैं ऐसे बहुत से लोग हैं जो सिर्फ इस्तेमाल करके आगे बढ़ जाते हैं तो फिर से चले आते बिना अपने आपको डिस्कवर किए कि मैं कातिल भी हूं और मैं किस तरह करना चाहता हूं और बहुत लोग परेशान होते हैं समाज को तो लेकिन कभी कभी नहीं होते जैसे कि लोग अलग-अलग यूनिट अपना-अपना इंडिविजुअल अपनी-अपनी चॉइस भी है कि मैं तो कहते हैं कहते हैं कि मैं क्रिकेटर करना चाहता हूं जो कहते हैं नासिर फिल्म करना चाहता हूं कुछ लोग दोनों साथ में चलना चाहते तो उसकी बात है लेकिन अच्छी फिल्में दी है तो मैं कर लेता है पूरी कहानी अच्छी है क्योंकि मैं अपनी जताई जा रही है कौन कह रहा है उसने पहले कैसे कहानियां बनाई है क्या सी फिल्में बनाई हैं सब पर ध्यान ना दें चुपचाप लेना कि बदनाम होगा बड़ा चेहरा दिखेगा मेरा वह मेरे साथ नहीं हो पाता मुझे इस बात से बहुत फर्क पड़ता है कि जो कहानी बताई जा रही है वह क्या कहानी है कैसी है मेरी जो अपनी छोटी सी जिंदगी में उसके साथ नहीं है नहीं जो और तू बेवकूफ है जो बिना लाइसेंस के लिए क्या कह रही उसके अगेंस्ट तू नहीं जा रही है फिल्म एनवायरनमेंट के लिए क्या कह रही है इनके बारे में क्या इंटरमीडिएट अप्रैल को मुझे बुलाता है कोई लेटर लिखने को तो भी मिले यही सवाल होते हैं कि जो मेरे अपने उसूल जिंदगी के उसके सुनाओ अगर जा रही है फिल्म सूत्र में तो दोगे तो मैंने अपने हाथ से समझौता कर लिया कैसे किया फिर किस चीज के लिए ना तो मेरे पास अपना काम बना रहा हूं मैं करता जाऊंगा बस इतना सा

yah sawaal jo hai ram apne aap mein trutipurn hai apne aapne plot hai kyonki mujhe sawaal is baat ko pehle se hi maan leta hai ki film jo hai vaah ek zyada bada zariya hai aur zyada bistar par ya 8 00 ka ek fashion dene ka ya phir bada artistic medium film ki release film ke madhyam ke taur par vaah sirf ek madhyam se zyada garam karne ki bahut zyada behtar madhyam hai dada pranam aate hain toh yah kehna sahi nahi hoga kitne logo ko jaanta hoon jo sirf aur sirf theater hi karna chahte hain unko bahut saare bade bade logo ke upar bhi dete hain lekin vaah bade bade production house ne unko offer lekin vaah mana kar dete tujhe maza nahi aata toh jaise main aapko bataun delhi mein kalakar mahendra mevati world most amazing actors in theater kitni baar mana kiya films ke liye kya hota hai ki jo film aa gaye hain yah log alag alag chehre dhoondhate aur isme jo kala hai jo acting ki kala hai sab log nahi bahut kam log sab log ke liye bahut badal rahi hain achi achi achi kahaniya bhi saamne aa rahi hai achi filme bhi ban rahi lekin mejariti of the film makers mejariti mother son called bollywood vaah abhi bhi wahi cheezen dikhana chahte hain jo ki unhe pata hai ki yah hundred percent unka paisa jo hai wapas kar degi unhe aur thoda fayda bhi rahegi toh jab maamla 5a ka ho whatsapp text bhejo ki aaj aathwan peeche reh jaati jabki theater mein fayda baad mein dekha jata hai balki fayda dekha hi nahi jata ki mujhe yah kahani sunani hai mere saath mere dard sathi kyonki hamari madad karenge yah kahani sunaane mein koi likhega koi stage design karega koi light bana dega koi bhi bata dega aur hum sab milke ki kahani sunaenge kahani sunana aur vaah apne tarike se sunana bahut zyada important unke liye zyada maayne rakhta agar aap dekhiye toh film aalu ne kaafi saare aate hain kaafi saare apne jo superstar ling hain ya phir lo alag alag jagaho se nahi hai kabhi modelling se liye hain kabhi jaan se liye hain toh kabhi theater chahiye party mein thi toh ek form hi ekmatra nahi hai jis samay se theater hai jis tarah se literature hai jis tarah se writing hai jis tarah se jante hain jinke madhyam jo ki har cheez ko saath mein lekar chalta hai artistic expression kaun kaise karna chahta hai ki apna Engineering economics bahut hi alag hai film industry ki isliye akshar theater artist apna ko wahan dekh bhi nahi paate jo sach mein teesra test hote hain aise bahut se log hain jo sirf istemal karke aage badh jaate hain toh phir se chale aate bina apne aapko discover kiye ki main kaatil bhi hoon aur main kis tarah karna chahta hoon aur bahut log pareshan hote hain samaj ko toh lekin kabhi kabhi nahi hote jaise ki log alag alag unit apna apna individual apni apni choice bhi hai ki main toh kehte hain kehte hain ki main cricketer karna chahta hoon jo kehte hain nasira film karna chahta hoon kuch log dono saath mein chalna chahte toh uski baat hai lekin achi filme di hai toh main kar leta hai puri kahani achi hai kyonki main apni jatai ja rahi hai kaun keh raha hai usne pehle kaise kahaniya banai hai kya si filme banai hain sab par dhyan na de chupchap lena ki badnaam hoga bada chehra dikhega mera vaah mere saath nahi ho pata mujhe is baat se bahut fark padta hai ki jo kahani batai ja rahi hai vaah kya kahani hai kaisi hai meri jo apni choti si zindagi mein uske saath nahi hai nahi jo aur tu bewakoof hai jo bina license ke liye kya keh rahi uske against tu nahi ja rahi hai film environment ke liye kya keh rahi hai inke bare mein kya intermediate april ko mujhe bulata hai koi letter likhne ko toh bhi mile yahi sawaal hote hain ki jo mere apne usul zindagi ke uske sunao agar ja rahi hai film sutra mein toh doge toh maine apne hath se samjhauta kar liya kaise kiya phir kis cheez ke liye na toh mere paas apna kaam bana raha hoon main karta jaunga bus itna sa

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