ऐसा क्यूँ होता है की हमारे देश में थीयटर में इतने अच्छे अभिनेता होते हुए भी उन्हें बड़े पर्दे पर चान्स नहीं मिलता?...


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हमारा कहना यह है कि ऐसा क्यों होता है कि हमारे देश में थिएटर में इतने अच्छे अभिनेता होते हुए भी उन्हें बड़े पर्दे पर चांस नहीं मिलता इसका सवाल यह है कि बहुत ही लोग अच्छे अच्छे अभिनेता एकता पड़े हुए हैं लोग जो कि अपने हालात से मजबूर हैं और भोजपुरी हो या चाहे बॉलीवुड हो मतलब मैं सिर्फ अपने देश के बारे में बात कर रहा हूं और बता रहा हूं अपने प्रांत के बारे में बॉलीवुड हो ऐसे भोजपुरी हो अब इन सब में क्या हो गया है ना एक हिंसा एक हिंसा पैदा हो गया है हिंसा मतलब या पैदा हो गया है कि जिसके पास ज्यादा पैसा है जो जिसके पास ज्यादा पैसा है और ज्यादा से ज्यादा खर्च कर सकें और हजार लोगों का पेट पर्दा भी उन प्रड्यूसर से चल सके तो अगर उनके पास 1 दिन भी नहीं आ रहा है तो उनके लड़के को खड़ा कर दे रहे हैं या प्रड्यूसर खुद ही अपने आप में हीरो बन जा रहा है एक्टिंग ना आए तो भी क्योंकि उसका वजन एक पैसा हो गया है पैसा ऐसा चीज है और जिनके पास एक्टिंग से भरपूर होना पड़ा हुआ है हर चीज है वह लगातार वह जहां भी उनको जहां भी पेपर में ऐड आता है या कहीं ऐड आता है तो वहां पर लोग अपना पेपर देने आप अपना वर्क करने और लोगों पर पेपर में पढ़ कर के देख करके फिर जगह फिल्म बनने वाला है आप लोगों का भी फिल्म में आइए प्रमोशन कीजिए आपका एक्टिंग अच्छा लगेगा तो मैं आपको फिल्म में चांस दूंगा और काम दूंगा ऐसे लोग बहुत लोग करने वाले हैं और लोग कर रहे हैं हालांकि प्रमोशन में पेपर में भी निकलवा देते हैं लोग ऐड फेसबुक पर मिलोगे डाल देते हैं नीली मीडिया जो भी नेट सिस्टम है अब मीडिया सिस्टम हेलो उस आधारित से लॉक कर तो लेते हैं मगर बेचारे जितने लोग प्रमोशन करने जाते हैं या प्रमोशन में जाते हैं एक टिकट कला दिखाते हैं उनको भी उनसे भी लोग मेरे जेहन में सुनने में आता है कि उनसे भी लोग बहुत लोग ऐसे हैं कि उनसे लोग पैसे का पैसे का सवाल करते हैं कि आप इतना पैसा दो तो आपको मैं इस फिल्म में चांस दिला दूंगा और फिल्म में काम दिला दूंगा बहुत लोग ऐसे करते हैं और जिनके पास पैसा नहीं है अच्छा हुनर है अच्छा करा है अच्छा मेहनत करते हैं तो वह लोग बेचारे मजबूर हैं कि जब जान जाते हैं कि अच्छा एक तरह के पास हुनर है अच्छा एक्टिंग आ रहा है उनको पैसा क्यों ले जब उनके पास अपनी मेहनत से कला सीखे हैं अपने मेहनत से क्लास दिए हैं अपने मेहनत से हर चीज कर रहे तो पैसा कितना हूं पैसा इंसान के अंदर हो जाए पैसा कितना हूं आपके पास हो जाए या पैसा मेरे पास हो जाए अगर आपके पास हुनर नहीं है मेरे हुनर नहीं है एक्टिंग का तो पैसे से मैं एक्टिव नहीं कर पाऊंगा पैसे से मैं एक पब्लिक का दिल नहीं जीत पाऊंगा नो डाउट ए तो आपको पता ही होगा आप सभी जितने भी भाई लोग सुन रहे होंगे हमारा उनको तो पता ही होगा तो मैं इसीलिए यह चीज कह रहा हूं कि कुछ लोग हालात से मजबूर है कि यह चीज नहीं कर पाते हैं ना जा पाते हैं हालांकि अगर फिल्म लाइन में अगर एक अच्छा मैं फिल्म लिस्ट में एक अच्छा रहा आपको दूं क्रिएटर छोड़िए टीवी सीरियल छोड़िए पर्दा का बात छोड़िए मीडिया में पूरी मीडिया तक बात करना चाहता हूं अगर जिसने अपने इंडस्ट्री लाइन में या भोजपुरी हो या बॉलीवुड हो अगर आशिक सुधर गया ना जो अच्छा काम कर रहा है उसको आगे पहुंचाना बहुत जरूरी है क्योंकि वह बेचारा इतना संघर्ष किया है इतना मेहनत किया है तब इतना परिश्रम से इतना उसके अंदर टैलेंट चीज दिख रहा है उसको आगे चल पाना ही बहुत जरूरी है और उसको पर्दे पर क्या पूरे ऑल इंडिया दिखाना बहुत जरूरी है थिएटर की बात ही नहीं फिर के बाद सूर्य थिएटर में दिख आदमी तो दिखेगा ही देखेगा मगर पूरे ऑल इंडिया भी दिखाना जरूरी होता है उसे यह लोग सपोर्ट नहीं करते हैं और जिनके पास देखते हैं प्रड्यूसर के पास इतना पैसा आए करोड़ों रुपया है उसको सपोर्ट इसलिए करते हैं भले ही उनको एक्टिंग आए या ना आए मगर उनके साथ साथ मुझे ऐसा लगता है कि उनके पैसे से लोग सपोर्ट करते हैं उनको पैसे से वह पैसा देकर थे कि फलाने के पास कितना रुपए है इतना करो रुपए है उस पैसे को लेकर के उल्लू सपोर्ट करते हैं या उस पैसे से लोग यूज़ करते हैं मैं एक बात बोलूं अगर मैं बोलूं कि फिल्म लाइन में क्या है कि एक बहुत ही घर आबाद में घूमने जा रहा हूं आपके बीच में यह बहुत ही फायदा भी चीज है और नुकसानदायक विशेष हैं अगर आपके फिल्म चल गया तो आप रातो रात करोड़ों कमा लेंगे अगर फिल्म नहीं चला तो आप रातों-रात आप जीरो हो जाएंगे मतलब आपका परिवार विश्वनाथ हो जाएगा अपना पैसा वहां खर्च कीजिए जहां आपको दो पैसा निकले आप वहां पैसा अपनाना खर्च कीजिए जहां आपका पैसा आने के लिए सबसे प्लस पॉइंट ही होता है वैसा प्लस कीजिए - ना कीजिए अगर प्लस करना है तो आप अच्छे लोगों के साथ जुड़िए और अच्छा फिल्म बनाई है और आप थिएटर ही नहीं पूरे ऑल इंडिया आपको दिखाएगा मगर हां उसके साथ साथ एक्टिंग जरूर सीखिए अगर एक्टिंग नहीं सीखेंगे तो लोग समाज ही बोला गया रे फिल्म अच्छा नहीं है अच्छा काम नहीं कर पाया अच्छा ही नहीं कर पाया वह काम अच्छा किया है हिरोस अच्छा तो किया है विलेन अच्छा काम किया है तो सब नाम फिल्म लगने के बाद पता चलता है कि कौन अच्छा काम किया कौन अच्छा काम नहीं किया वह समाज बताता है और समाज से बड़ा कोई नहीं है तो इस पर आप ध्यान दीजिए बहुत ही लोग ऐसे इंडस्ट्री लाइन मिली तेरे लोग पड़े हैं कि आपको चुटिया बना करके हमको चुटिया बना करके बुड़बक बना करके बड़ा बड़ा बड़ा बड़ा बड़ा बड़ा चीज बड़ा बड़ा मतलब बहुत बड़ा बड़ा चाहिए हमको और आपको लालच दिखाकर के हमसे और आपसे पैसा ले लेते हैं तो इस चीज पर आप समझदार नहीं होशियार और अच्छे लोग साथ बताइए अच्छे लोगों के साथ आप काम कीजिए सबसे बड़ा समझदारी इसी में है और भलाई इसी में है नहीं तो आप बहुत ही लोग बड़े बड़े ख्वाब दिखाते हैं मैं यह करवा रहा हूं वह करवा रहा हूं मैं उतना कम वादिया उतना कम वादिया तो ख्वाब दिखाने वाले जितने लोग होते हैं ना मुझे 420 लगते हैं देखने बड़े बड़े ख्वाब दिखाने वाले आते हैं इंडस्ट्री लाइन में तो ऐसे लोग इंसान मिले 420 लगते हैं तो इस पर आप थोड़ा सा ध्यान दीजिए धन्यवाद अगर मेरी बात को अच्छा लगे तो आप लोग कमेंट और खा लो जरूर कीजिए फिर मिलते हैं अगले वीडियो में

hamara kehna yah hai ki aisa kyon hota hai ki hamare desh mein theater mein itne acche abhineta hote hue bhi unhe bade parde par chance nahi milta iska sawaal yah hai ki bahut hi log acche acche abhineta ekta pade hue hain log jo ki apne haalaat se majboor hain aur bhojpuri ho ya chahen bollywood ho matlab main sirf apne desh ke bare mein baat kar raha hoon aur bata raha hoon apne prant ke bare mein bollywood ho aise bhojpuri ho ab in sab mein kya ho gaya hai na ek hinsa ek hinsa paida ho gaya hai hinsa matlab ya paida ho gaya hai ki jiske paas zyada paisa hai jo jiske paas zyada paisa hai aur zyada se zyada kharch kar sake aur hazaar logo ka pet parda bhi un pradyusar se chal sake toh agar unke paas 1 din bhi nahi aa raha hai toh unke ladke ko khada kar de rahe hain ya pradyusar khud hi apne aap mein hero ban ja raha hai acting na aaye toh bhi kyonki uska wajan ek paisa ho gaya hai paisa aisa cheez hai aur jinke paas acting se bharpur hona pada hua hai har cheez hai vaah lagatar vaah 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batata hai aur samaj se bada koi nahi hai toh is par aap dhyan dijiye bahut hi log aise industry line mili tere log pade hain ki aapko chutiya bana karke hamko chutiya bana karke budabak bana karke bada bada bada bada bada bada cheez bada bada matlab bahut bada bada chahiye hamko aur aapko lalach dikhakar ke humse aur aapse paisa le lete hain toh is cheez par aap samajhdar nahi hoshiyar aur acche log saath bataye acche logo ke saath aap kaam kijiye sabse bada samajhdari isi mein hai aur bhalai isi mein hai nahi toh aap bahut hi log bade bade khwaab dikhate hain main yah karva raha hoon vaah karva raha hoon main utana kam vadiya utana kam vadiya toh khwaab dikhane waale jitne log hote hain na mujhe 420 lagte hain dekhne bade bade khwaab dikhane waale aate hain industry line mein toh aise log insaan mile 420 lagte hain toh is par aap thoda sa dhyan dijiye dhanyavad agar meri baat ko accha lage toh aap log comment aur kha lo zaroor kijiye phir milte hain agle video mein

हमारा कहना यह है कि ऐसा क्यों होता है कि हमारे देश में थिएटर में इतने अच्छे अभिनेता होते ह

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Kafeel Jafri

Actor, Bengaluru's only Dastangoi performer

5:50

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यह सवाल जो है राम अपने आप में त्रुटिपूर्ण है अपने आपने प्लॉट है क्योंकि मुझे सवाल इस बात को पहले से ही मान लेता है कि फिल्म जो है वह एक ज्यादा बड़ा जरिया है और ज्यादा बिस्तर पर या 8:00 का एक फैशन देने का या फिर बड़ा आर्टिस्टिक मीडियम फिल्म की रिलीज फिल्म के माध्यम के तौर पर वह सिर्फ एक माध्यम से ज्यादा गर्म करने की बहुत ज्यादा बेहतर माध्यम है दादा प्रणाम आते हैं तो यह कहना सही नहीं होगा कितने लोगों को जानता हूं जो सिर्फ और सिर्फ थिएटर ही करना चाहते हैं उनको बहुत सारे बड़े-बड़े लोगों के ऊपर भी देते हैं लेकिन वह बड़े बड़े प्रोडक्शन हाउस ने उनको ऑफर लेकिन वह मना कर देते तुझे मजा नहीं आता तो जैसे मैं आपको बताऊं दिल्ली में कलाकार महेंद्र मेवाती वर्ल्ड मोस्ट अमेजिंग एक्टर्स इन थियेटर कितनी बार मना किया फिल्म्स के लिए क्या होता है कि जो फिल्म आ गए हैं यह लोग अलग-अलग चेहरे ढूंढते और इसमें जो कला है जो एक्टिंग की कला है सब लोग नहीं बहुत कम लोग सब लोग के लिए बहुत बदल रही हैं अच्छी अच्छी अच्छी कहानियां भी सामने आ रही है अच्छी फिल्में भी बन रही लेकिन मेजॉरिटी ऑफ द फिल्म मेकर्स मेजॉरिटी मदर सों कॉल्ड बॉलीवुड वह अभी भी वही चीजें दिखाना चाहते हैं जो कि उन्हें पता है कि यह हंड्रेड परसेंट उनका पैसा जो है वापस कर देगी उन्हें और थोड़ा फायदा भी रहेगी तो जब मामला 5a का हो व्हाट्सएप टेक्स्ट भेजो कि आज आठवां पीछे रह जाती जबकि थिएटर में फायदा बाद में देखा जाता है बल्कि फायदा देखा ही नहीं जाता कि मुझे यह कहानी सुनानी है मेरे साथ मेरे दर्द साथी क्योंकि हमारी मदद करेंगे यह कहानी सुनाने में कोई लिखेगा कोई स्टेज डिजाइन करेगा कोई लाइट बना देगा कोई भी बता देगा और हम सब मिलके की कहानी सुनाएंगे कहानी सुनाना और वह अपने तरीके से सुनाना बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट उनके लिए ज्यादा मायने रखता अगर आप देखिए तो फिल्म आलू ने काफी सारे आते हैं काफी सारे अपने जो सुपरस्टार लिंग हैं या फिर लो अलग-अलग जगहों से नहीं है कभी मॉडलिंग से लिए हैं कभी जान से लिए हैं तो कभी थिएटर चाहिए पार्टी में थी तो एक फॉर्म ही एकमात्र नहीं है जिस समय से थिएटर है जिस तरह से लिटरेचर है जिस तरह से राइटिंग है जिस तरह से जानते हैं जिनके माध्यम जो कि हर चीज को साथ में लेकर चलता है आर्टिस्टिक एक्सप्रेशन कौन कैसे करना चाहता है कि अपना इंजीनियरिंग इकोनॉमिक्स बहुत ही अलग है फिल्म इंडस्ट्री की इसीलिए अक्षर थिएटर आर्टिस्ट अपना को वहां देख भी नहीं पाते जो सच में तीसरा टेस्ट होते हैं ऐसे बहुत से लोग हैं जो सिर्फ इस्तेमाल करके आगे बढ़ जाते हैं तो फिर से चले आते बिना अपने आपको डिस्कवर किए कि मैं कातिल भी हूं और मैं किस तरह करना चाहता हूं और बहुत लोग परेशान होते हैं समाज को तो लेकिन कभी कभी नहीं होते जैसे कि लोग अलग-अलग यूनिट अपना-अपना इंडिविजुअल अपनी-अपनी चॉइस भी है कि मैं तो कहते हैं कहते हैं कि मैं क्रिकेटर करना चाहता हूं जो कहते हैं नासिर फिल्म करना चाहता हूं कुछ लोग दोनों साथ में चलना चाहते तो उसकी बात है लेकिन अच्छी फिल्में दी है तो मैं कर लेता है पूरी कहानी अच्छी है क्योंकि मैं अपनी जताई जा रही है कौन कह रहा है उसने पहले कैसे कहानियां बनाई है क्या सी फिल्में बनाई हैं सब पर ध्यान ना दें चुपचाप लेना कि बदनाम होगा बड़ा चेहरा दिखेगा मेरा वह मेरे साथ नहीं हो पाता मुझे इस बात से बहुत फर्क पड़ता है कि जो कहानी बताई जा रही है वह क्या कहानी है कैसी है मेरी जो अपनी छोटी सी जिंदगी में उसके साथ नहीं है नहीं जो और तू बेवकूफ है जो बिना लाइसेंस के लिए क्या कह रही उसके अगेंस्ट तू नहीं जा रही है फिल्म एनवायरनमेंट के लिए क्या कह रही है इनके बारे में क्या इंटरमीडिएट अप्रैल को मुझे बुलाता है कोई लेटर लिखने को तो भी मिले यही सवाल होते हैं कि जो मेरे अपने उसूल जिंदगी के उसके सुनाओ अगर जा रही है फिल्म सूत्र में तो दोगे तो मैंने अपने हाथ से समझौता कर लिया कैसे किया फिर किस चीज के लिए ना तो मेरे पास अपना काम बना रहा हूं मैं करता जाऊंगा बस इतना सा

yah sawaal jo hai ram apne aap mein trutipurn hai apne aapne plot hai kyonki mujhe sawaal is baat ko pehle se hi maan leta hai ki film jo hai vaah ek zyada bada zariya hai aur zyada bistar par ya 8 00 ka ek fashion dene ka ya phir bada artistic medium film ki release film ke madhyam ke taur par vaah sirf ek madhyam se zyada garam karne ki bahut zyada behtar madhyam hai dada pranam aate hain toh yah kehna sahi nahi hoga kitne logo ko jaanta hoon jo sirf aur sirf theater hi karna chahte hain unko bahut saare bade bade logo ke upar bhi dete hain lekin vaah bade bade production house ne unko offer lekin vaah mana kar dete tujhe maza nahi aata toh jaise main aapko bataun delhi mein kalakar mahendra mevati world most amazing actors in theater kitni baar mana kiya films ke liye kya hota hai ki jo film aa gaye hain yah log alag alag chehre dhoondhate aur isme jo kala hai jo acting ki kala hai sab log nahi bahut kam log sab log ke liye bahut badal rahi hain achi achi achi kahaniya bhi saamne aa rahi hai achi filme bhi ban rahi lekin mejariti of the film makers mejariti mother son called bollywood vaah abhi bhi wahi cheezen dikhana chahte hain jo ki unhe pata hai ki yah hundred percent unka paisa jo hai wapas kar degi unhe aur thoda fayda bhi rahegi toh jab maamla 5a ka ho whatsapp text bhejo ki aaj aathwan peeche reh jaati jabki theater mein fayda baad mein dekha jata hai balki fayda dekha hi nahi jata ki mujhe yah kahani sunani hai mere saath mere dard sathi kyonki hamari madad karenge yah kahani sunaane mein koi likhega koi stage design karega koi light bana dega koi bhi bata dega aur hum sab milke ki kahani sunaenge kahani sunana aur vaah apne tarike se sunana bahut zyada important unke liye zyada maayne rakhta agar aap dekhiye toh film aalu ne kaafi saare aate hain kaafi saare apne jo superstar ling hain ya phir lo alag alag jagaho se nahi hai kabhi modelling se liye hain kabhi jaan se liye hain toh kabhi theater chahiye party mein thi toh ek form hi ekmatra nahi hai jis samay se theater hai jis tarah se literature hai jis tarah se writing hai jis tarah se jante hain jinke madhyam jo ki har cheez ko saath mein lekar chalta hai artistic expression kaun kaise karna chahta hai ki apna Engineering economics bahut hi alag hai film industry ki isliye akshar theater artist apna ko wahan dekh bhi nahi paate jo sach mein teesra test hote hain aise bahut se log hain jo sirf istemal karke aage badh jaate hain toh phir se chale aate bina apne aapko discover kiye ki main kaatil bhi hoon aur main kis tarah karna chahta hoon aur bahut log pareshan hote hain samaj ko toh lekin kabhi kabhi nahi hote jaise ki log alag alag unit apna apna individual apni apni choice bhi hai ki main toh kehte hain kehte hain ki main cricketer karna chahta hoon jo kehte hain nasira film karna chahta hoon kuch log dono saath mein chalna chahte toh uski baat hai lekin achi filme di hai toh main kar leta hai puri kahani achi hai kyonki main apni jatai ja rahi hai kaun keh raha hai usne pehle kaise kahaniya banai hai kya si filme banai hain sab par dhyan na de chupchap lena ki badnaam hoga bada chehra dikhega mera vaah mere saath nahi ho pata mujhe is baat se bahut fark padta hai ki jo kahani batai ja rahi hai vaah kya kahani hai kaisi hai meri jo apni choti si zindagi mein uske saath nahi hai nahi jo aur tu bewakoof hai jo bina license ke liye kya keh rahi uske against tu nahi ja rahi hai film environment ke liye kya keh rahi hai inke bare mein kya intermediate april ko mujhe bulata hai koi letter likhne ko toh bhi mile yahi sawaal hote hain ki jo mere apne usul zindagi ke uske sunao agar ja rahi hai film sutra mein toh doge toh maine apne hath se samjhauta kar liya kaise kiya phir kis cheez ke liye na toh mere paas apna kaam bana raha hoon main karta jaunga bus itna sa

यह सवाल जो है राम अपने आप में त्रुटिपूर्ण है अपने आपने प्लॉट है क्योंकि मुझे सवाल इस बात क

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बॉलीवुड में जो पहले से जमे जमाए हैं उनके उनके अंदर के जो असुरक्षा की भावना है उसकी वजह से आता हो ऐसा होता है क्योंकि गए थे मेरे को वाले को मौका देते जाएंगे तो वहां जो पहले का सब्जियों से आ रहे हो तब चाय का मजा है जितना चाहते हैं कि वह थोड़ी ना है हम लोग जमा ही राज करते रहे

bollywood mein jo pehle se jame jamaye hain unke unke andar ke jo asuraksha ki bhavna hai uski wajah se aata ho aisa hota hai kyonki gaye the mere ko waale ko mauka dete jaenge toh wahan jo pehle ka sabjiyon se aa rahe ho tab chai ka maza hai jitna chahte hain ki vaah thodi na hai hum log jama hi raj karte rahe

बॉलीवुड में जो पहले से जमे जमाए हैं उनके उनके अंदर के जो असुरक्षा की भावना है उसकी वजह से

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यह सब होता है कभी-कभी आप अगर जितना भी अच्छा कलाकार ना हो आपको चांस नहीं मिलता है कभी ऐसा होता है कि जो ऑफ फिल्म इंडस्ट्री है वहां पर रिक्वायरमेंट नाउ ठीक है जो भी उन मूवी बना रहा है फिल्म बना रहे उसके कोटिंग हो कलाकार ना हो तो एबी डिपेंड होता है और डिपेंड होता है बारिश के ऊपर भी यदि आपका एक्टर बहुत ब्लॉकबस्टर देने वाला है और आपका बहुत कम है तो अगर एक्टर ने मना कर दिया तो उसके हिसाब से भी हो सकता है ठीक है और डायरेक्टर भी सही होना चाहिए अगर डायरेक्टर सही एक्टर को सुनकर उसका लगा तो वह ज्यादा फायदा रहता के डायरेक्टर के लिए जो फिल्म है हमेशा एक मैसेज टाइप का होना चाहिए समाज के लिए तो मुझे लगता है हर कलाकार को मतलब ऑल डाउन टाइप का होना चाहिए उनको डांस एक्टिंग और और रोमांस इस अवसर आना चाहिए और आजकल जो होता है ऑल राउंड डेवलपमेंट होता है बॉलीवुड में तो उस हिसाब से हर किसी को एक पहले से तैयारी करना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए थैंक यू

yah sab hota hai kabhi kabhi aap agar jitna bhi accha kalakar na ho aapko chance nahi milta hai kabhi aisa hota hai ki jo of film industry hai wahan par requirement now theek hai jo bhi un movie bana raha hai film bana rahe uske coating ho kalakar na ho toh ab depend hota hai aur depend hota hai barish ke upar bhi yadi aapka actor bahut blockbuster dene vala hai aur aapka bahut kam hai toh agar actor ne mana kar diya toh uske hisab se bhi ho sakta hai theek hai aur director bhi sahi hona chahiye agar director sahi actor ko sunkar uska laga toh vaah zyada fayda rehta ke director ke liye jo film hai hamesha ek massage type ka hona chahiye samaj ke liye toh mujhe lagta hai har kalakar ko matlab all down type ka hona chahiye unko dance acting aur aur romance is avsar aana chahiye aur aajkal jo hota hai all round development hota hai bollywood mein toh us hisab se har kisi ko ek pehle se taiyari karna chahiye aur aage badhte rehna chahiye thank you

यह सब होता है कभी-कभी आप अगर जितना भी अच्छा कलाकार ना हो आपको चांस नहीं मिलता है कभी ऐसा ह

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Mohommed Ali Shah

Indian theatre and film personality, Motivational Speaker known worldwide for his powerful talks

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कैसी है कि ब्रेट ली और बोली ढूंढते कम को अच्छी कलाकार चाहिए चलती है इसकी अच्छी तालुकात हैं इसके अच्छे कनेक्शन हैं कौन फिल्मी फैमिली से आपको बात करता हूं क्योंकि मैं अपने आप कर लूंगा लेकिन अच्छी कलाकार है उनको चांद किस लिए नहीं मिलता है क्योंकि इन लोगों को अच्छी तरह का चाहिए जो देखते हैं कुछ तमाशा बाजी ही कुछ हुआ कुछ हो रहा है कुछ चंचल लेकर हैं अच्छे कलाकारों को नहीं करते बहुत सिंपल सी है कि यह लोग अपनी कला पर विश्वास करते हैं और यह मतलब नहीं है कि हम तालुकात बनाना बनाना बनाना अच्छे कलाकार

kaisi hai ki brett li aur boli dhoondhate kam ko achi kalakar chahiye chalti hai iski achi talukat hain iske acche connection hain kaun filmy family se aapko baat karta hoon kyonki main apne aap kar lunga lekin achi kalakar hai unko chand kis liye nahi milta hai kyonki in logo ko achi tarah ka chahiye jo dekhte hain kuch tamasha baazi hi kuch hua kuch ho raha hai kuch chanchal lekar hain acche kalakaron ko nahi karte bahut simple si hai ki yah log apni kala par vishwas karte hain aur yah matlab nahi hai ki hum talukat banana banana banana acche kalakar

कैसी है कि ब्रेट ली और बोली ढूंढते कम को अच्छी कलाकार चाहिए चलती है इसकी अच्छी तालुकात हैं

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