शहर के लोग गांव के लोगो की इज़्ज़त क्यों नहीं करते?...


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Masoom

Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सब लोग गांव के लोग इज्जत क्यों नहीं करते थे कि शहर के लोगों की सोच होती है वही सोच की तरह होती है जो सिर्फ जिन्हें मानवता की कमी होती है इसलिए कर सकते क्योंकि सर चलो गांव लोग के लोगों को अजीब नजर से देखते हैं इसलिए उनकी इज्जत नहीं करते

sab log gaon ke log izzat kyon nahi karte the ki shehar ke logo ki soch hoti hai wahi soch ki tarah hoti hai jo sirf jinhen manavta ki kami hoti hai isliye kar sakte kyonki sir chalo gaon log ke logo ko ajib nazar se dekhte hain isliye unki izzat nahi karte

सब लोग गांव के लोग इज्जत क्यों नहीं करते थे कि शहर के लोगों की सोच होती है वही सोच की तरह

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amol

Upsc aspirant and teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा बोलना सही नहीं है कि शहर के लोग गांव के लोगों की इज्जत नहीं करते क्योंकि वास्तव में हर व्यक्ति कहीं न कहीं गांव से जुड़ा हुआ है तो बसारी कल चकिया जाती है किस गांव का कल्चर सेरीकल्चर से बिल्कुल डिफरेंट होता है तो इस वजह से जब कोई शहर का व्यक्ति गांव के व्यक्ति से कम्युनिकेट करता है और गांव का व्यक्ति सर्दी से कम्युनिकेट करता है तो वैचारिक रूप से वह दोनों एक समान स्तर पर बात नहीं कर पाते तो जिससे कहीं ना कहीं यह मैसेज कंफ्यूज हो जाता है कि सर का व्यक्ति काम वाले की इज्जत नहीं कर रहा है बस इतनी सी बात है थैंक यू

aisa bolna sahi nahi hai ki shehar ke log gaon ke logo ki izzat nahi karte kyonki vaastav mein har vyakti kahin na kahin gaon se juda hua hai toh basari kal chakkiyan jaati hai kis gaon ka culture sericulture se bilkul different hota hai toh is wajah se jab koi shehar ka vyakti gaon ke vyakti se kamyuniket karta hai aur gaon ka vyakti sardi se kamyuniket karta hai toh vaicharik roop se vaah dono ek saman sthar par baat nahi kar paate toh jisse kahin na kahin yah massage confuse ho jata hai ki sir ka vyakti kaam waale ki izzat nahi kar raha hai bus itni si baat hai thank you

ऐसा बोलना सही नहीं है कि शहर के लोग गांव के लोगों की इज्जत नहीं करते क्योंकि वास्तव में हर

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Rahul kumar

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसी बात नहीं है कि शहर के लोग हर एक गांव के लोगों की इज्जत नहीं करते देश कुछ लोग हैं जो कि हर जगह पर होते हैं गांव के लोगों सहायक के लोगों में डाली थी अलग-अलग होती है लोग की सोच अलग अलग हो सकती है हमें भी रीजन यह है कि यह शहर का सहज है गांव उसके मुकाबले में त्वचा डेवलप हो चुका होता है ऐसी चीजें वहां पर ज्यादा इसलिए बल्ले बल्ले आती है लोग ज्यादा थोड़ी जो सोच है थोड़ा ज्यादा डिस्टर्ब होता है गांव की सोच मत गांव के लोगों की सोच के अनुसार शायद यह रीजन हो सकता है की इज्जत नहीं करते हो सोच के कारण या तो फिर गांव में इतने पैसे जो है जो के पास बहुत ज्यादा नहीं होता है दिन शहर में मैं थक जाते लोग के पास ₹2000 पैसे होते हैं थोड़े दिन की सभी होती हो सकता है

aisi baat nahi hai ki shehar ke log har ek gaon ke logo ki izzat nahi karte desh kuch log hain jo ki har jagah par hote hain gaon ke logo sahayak ke logo mein dali thi alag alag hoti hai log ki soch alag alag ho sakti hai hamein bhi reason yah hai ki yah shehar ka sehaz hai gaon uske muqable mein twacha develop ho chuka hota hai aisi cheezen wahan par zyada isliye balle balle aati hai log zyada thodi jo soch hai thoda zyada disturb hota hai gaon ki soch mat gaon ke logo ki soch ke anusaar shayad yah reason ho sakta hai ki izzat nahi karte ho soch ke karan ya toh phir gaon mein itne paise jo hai jo ke paas bahut zyada nahi hota hai din shehar mein main thak jaate log ke paas Rs paise hote hain thode din ki sabhi hoti ho sakta hai

ऐसी बात नहीं है कि शहर के लोग हर एक गांव के लोगों की इज्जत नहीं करते देश कुछ लोग हैं जो कि

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