क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है?...


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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

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महोदय आपने पूछा है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है अध्यात्म जगत में साकार और निराकार दो तरह से ईश्वर की आराधना का विधान है जो लोग शुरुआत में पूजा पद्धति में अपने जीवन को लगाते हैं उनके लिए सरकार से ईश्वर की आराधना करना ज्यादा खराब है तो व्यक्ति का स्वभाव है जो सरल होता है उसको वह अपना देता है और इसी वजह से जो मूर्ति की पूजा है वह साकार स्वरूप है और सरकार में आस्था को प्रमाणित करना थोड़ा सरल होता है सरकार के प्रति अपनी आस्था बना लेना थोड़ा सरल हो इसलिए मूर्ति भले ही पत्थर की हो लेकिन उसके प्रति भावना है जल्दी मूर्ति रूप ले लेती है तुम भावनाओं को साकार के साथ एकीकरण करना थोड़ा सरल होता है इसलिए लोग मूर्ति की पूजा करके ईश्वर की आराधना करते हैं इसमें गलत कुछ नहीं है क्योंकि साकार से ही आपकी निराकार की यात्रा संभव है यह तो आपको कोई बहुत पहुंचे हुए सदगुरु मिल जाए और सीधा निराकार में प्रवेश करा दें कि अलग बात है तो यह जो सरकार की आराधना है इसी से निराकार में प्रवेश किया जा सकता है तो मूर्ति पूजा गलत नहीं है मूर्ति पूजा भी ईश्वर को प्राप्त करने का एकमात्र जो लोग साकार में ईश्वर की आराधना करते हैं उनका भी साक्षात्कार होता है वह उन्हें भी ईश्वर मिलता है तो मूर्ति पूजा गलत नहीं है मूर्ति पूजा एक प्रतीक है जिसको भी आप इस्तेमाल पर हैं जिसको भी आप ईश्वर मानते हैं उसकी मूर्ति की पूजा करके आप अपनी समस्त आस्था और विश्वास उनको समर्पित करते हैं और उससे आपको ईश्वर का साक्षात्कार होता है जब आपका अध्यात्म फलित होता है तो इसमें मूर्ति पूजा गलत नहीं है मूर्ति पूजा से ही साकार से ही निराकार का पता चलता है उस मूर्ति पूजा गलत नहीं है मूर्ति पूजा शुरुआत के लिए अच्छी बात है धन्यवाद

mahoday aapne poocha hai kya is duniya me murti puja galat hai ya sahi hai adhyaatm jagat me saakar aur nirakaar do tarah se ishwar ki aradhana ka vidhan hai jo log shuruat me puja paddhatee me apne jeevan ko lagate hain unke liye sarkar se ishwar ki aradhana karna zyada kharab hai toh vyakti ka swabhav hai jo saral hota hai usko vaah apna deta hai aur isi wajah se jo murti ki puja hai vaah saakar swaroop hai aur sarkar me astha ko pramanit karna thoda saral hota hai sarkar ke prati apni astha bana lena thoda saral ho isliye murti bhale hi patthar ki ho lekin uske prati bhavna hai jaldi murti roop le leti hai tum bhavnao ko saakar ke saath ekikaran karna thoda saral hota hai isliye log murti ki puja karke ishwar ki aradhana karte hain isme galat kuch nahi hai kyonki saakar se hi aapki nirakaar ki yatra sambhav hai yah toh aapko koi bahut pahuche hue sadhguru mil jaaye aur seedha nirakaar me pravesh kara de ki alag baat hai toh yah jo sarkar ki aradhana hai isi se nirakaar me pravesh kiya ja sakta hai toh murti puja galat nahi hai murti puja bhi ishwar ko prapt karne ka ekmatra jo log saakar me ishwar ki aradhana karte hain unka bhi sakshatkar hota hai vaah unhe bhi ishwar milta hai toh murti puja galat nahi hai murti puja ek prateek hai jisko bhi aap istemal par hain jisko bhi aap ishwar maante hain uski murti ki puja karke aap apni samast astha aur vishwas unko samarpit karte hain aur usse aapko ishwar ka sakshatkar hota hai jab aapka adhyaatm falit hota hai toh isme murti puja galat nahi hai murti puja se hi saakar se hi nirakaar ka pata chalta hai us murti puja galat nahi hai murti puja shuruat ke liye achi baat hai dhanyavad

महोदय आपने पूछा है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है अध्यात्म जगत में साकार

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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राम जी की आपका पास है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही तरह से किसी तरह से पूजा की जाए भले ही पूजा हो यार बिना मंत्र के कितनी अच्छी होती है

ram ji ki aapka paas hai kya is duniya me murti puja galat hai ya sahi tarah se kisi tarah se puja ki jaaye bhale hi puja ho yaar bina mantra ke kitni achi hoti hai

राम जी की आपका पास है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही तरह से किसी तरह से पूजा

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Nikhil Ranjan

HoD - NIELIT

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लिखे जैसे क्या का प्रश्न है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है तो यहां आपको ऐसा करने से पहले कृतांत सुनाना चाहेंगे सिंह एक क्वेश्चन है कि राजा ने स्वामी विवेकानंद से पूछना कि वह मूर्ति पूजा को सही नहीं मानते हैं तो क्या यह करनी चाहिए नहीं करनी चाहिए वहां पर स्वामी विवेकानंद जी ने उनसे कहा कि के महाराज दरबार में थे तो उनका के चित्र किसका लगा हुआ है दरवाजे से पूछा तो उन्होंने कहा कि तुम्हारा आज का चित्र है तो उन्होंने का स्कोर उतारी है जब उचित उतारा गया तो उन्होंने दरवाजों से कब आप चित्रकेतु की है तो सब एकदम से सहम गए किंतु राजा के सामने राजा के चित्र के ऊपर कैसे तोड़ सकते हैं तो वहां पर स्वामी विवेकानंद जी ने कहा कि महाराज आप यह देखिए कि यह जितने भी लोग यहां पर मौजूद है यह सब आपका सम्मान करता है आपसे प्रेम करते हैं आपके दिन की सच्ची भावनाएं है इस कारण इस पर नहीं थोपना चाहते हैं जबकि इस चित्र के अंदर ना तो आप के प्राण है ना आत्मा है ना यह बोल सकती है ना इसमें रक्त बह रहा है कुछ भी नहीं है यह तो सिर्फ कुछ चीजों का संग्रह करके बनाई गई आपकी चित्र है अब यहां पर आप देखें तो आप हैं अभी आप की छाया है क्योंकि आपका शक्ल है उससे यह मिल रही है और आप नहीं भी है क्योंकि जो जीवन के लिए चीजें चाहिए वो उसमें है नहीं तो यहां पर आस्था की बात आती है तो आस्था अगर आपकी करती है कि आप किसी चीज को मैं आस्था रखते हैं तो उसके जैसी दिखने वाली चीजों में भी आप आस्था बनाए रखते हैं आप कहते हैं कि हां अगर एक फोटो भी महाराज की है तो इसके लिए भी मुझे आदर सत्कार करना चाहिए तो वही फीलिंग धर्मों में भी लागू होती है अब आप उसको चाहे पाखंड बोलिए चाहे आप उसको लोकिया खोलिए तो मेरे ख्याल से आपको अपना जवाब मिल गया होगा मैं शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद

likhe jaise kya ka prashna hai kya is duniya mein murti puja galat hai ya sahi hai toh yahan aapko aisa karne se pehle kritant sunana chahenge Singh ek question hai ki raja ne swami vivekananda se poochna ki vaah murti puja ko sahi nahi maante hain toh kya yah karni chahiye nahi karni chahiye wahan par swami vivekananda ji ne unse kaha ki ke maharaj darbaar mein the toh unka ke chitra kiska laga hua hai darwaze se poocha toh unhone kaha ki tumhara aaj ka chitra hai toh unhone ka score utaari hai jab uchit utara gaya toh unhone darvajon se kab aap chitraketu ki hai toh sab ekdam se saham gaye kintu raja ke saamne raja ke chitra ke upar kaise tod sakte hain toh wahan par swami vivekananda ji ne kaha ki maharaj aap yah dekhiye ki yah jitne bhi log yahan par maujud hai yah sab aapka sammaan karta hai aapse prem karte hain aapke din ki sachi bhaavnaye hai is karan is par nahi thopna chahte hain jabki is chitra ke andar na toh aap ke praan hai na aatma hai na yah bol sakti hai na isme rakt wah raha hai kuch bhi nahi hai yah toh sirf kuch chijon ka sangrah karke banai gayi aapki chitra hai ab yahan par aap dekhen toh aap hain abhi aap ki chhaya hai kyonki aapka shakl hai usse yah mil rahi hai aur aap nahi bhi hai kyonki jo jeevan ke liye cheezen chahiye vo usme hai nahi toh yahan par astha ki baat aati hai toh astha agar aapki karti hai ki aap kisi cheez ko main astha rakhte hain toh uske jaisi dikhne wali chijon mein bhi aap astha banaye rakhte hain aap kehte hain ki haan agar ek photo bhi maharaj ki hai toh iske liye bhi mujhe aadar satkar karna chahiye toh wahi feeling dharmon mein bhi laagu hoti hai ab aap usko chahen pakhand bolie chahen aap usko lokiya kholiye toh mere khayal se aapko apna jawab mil gaya hoga main subhkamnaayain aapke saath hain dhanyavad

लिखे जैसे क्या का प्रश्न है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है तो यहां आपको ऐ

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Rasbihari Pandey

लेखन / कविता पाठ

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अगर आप ईश्वर में आस्था रखते हैं तो उसकी मूर्ति के बिना अब उसका ध्यान कैसे करेंगे निराकार ब्रह्म मुझसे लोग की आराधना लोग करते हैं लेकिन निराकार ब्रह्म की साधना बहुत कठिन है उसमें मन के भटक जाने का खतरा होता है इसलिए किसी न किसी देवी देवता की मूर्ति जब तक आपके सामने नहीं होगी तब तक आपका ध्यान केंद्रित नहीं हो पाएगा इस दृष्टि से देखें तो मूर्ति पूजा बिल्कुल उचित है

agar aap ishwar mein astha rakhte hain toh uski murti ke bina ab uska dhyan kaise karenge nirakaar Brahma mujhse log ki aradhana log karte hain lekin nirakaar Brahma ki sadhna bahut kathin hai usme man ke bhatak jaane ka khatra hota hai isliye kisi na kisi devi devta ki murti jab tak aapke saamne nahi hogi tab tak aapka dhyan kendrit nahi ho payega is drishti se dekhen toh murti puja bilkul uchit hai

अगर आप ईश्वर में आस्था रखते हैं तो उसकी मूर्ति के बिना अब उसका ध्यान कैसे करेंगे निराकार ब

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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नई मूर्ति पूजा भी सही है क्योंकि सर के दो रूप होते हैं एक साकार रूप देख मेरा करो निराकार वाले ही सरकी को आकार सिर्फ मानकर उसकी पूजा पूजा करते आराधना करते हैं नमन करते हैं और साकार वादी जो लोग हैं जो लोग ईश्वर का रूप मानकर के रामकृष्ण हनुमान की मूर्ति आदि बना करके पूछते हैं अपने अपने विचार हैं कोई जरूरी नहीं कि किसी आपके मेथड से ही चला जाए जो मैं खड़ा अपने सुख भगवान के लिए जो मचल-मचल से हुई आपकी सर को साले के पास में अनुभव करते हैं ईश्वर के मोती करते हैं मैं तो सभी सही हैं दूसरों की मेथड को गलत कहना हमारी धार्मिक संकीर्णता है हमारी धार्मिक असहिष्णुता है जबकि सभी मित्र सच्चे हैं मुसलमानों की नमाज पढ़ते हैं वह भी सही है हिंदुओं के मंदिर जाते हैं तो वह भी सही है अत्यधिक गुरुद्वारे जाते हैं तो वह भी सही है ईसाई लोग चर्चे जाते हैं वह भी सही है गलत कुछ भी नहीं है गलत सिर्फ यह है मानव के गंदे विचार धार्मिक असहिष्णुता है और मनुष्य का ज्ञान है

nayi murti puja bhi sahi hai kyonki sir ke do roop hote hain ek saakar roop dekh mera karo nirakaar waale hi sarki ko aakaar sirf maankar uski puja puja karte aradhana karte hain naman karte hain aur saakar wadi jo log hain jo log ishwar ka roop maankar ke ramakrishna hanuman ki murti aadi bana karke poochhte hain apne apne vichar hain koi zaroori nahi ki kisi aapke method se hi chala jaaye jo main khada apne sukh bhagwan ke liye jo machal machal se hui aapki sir ko saale ke paas mein anubhav karte hain ishwar ke moti karte hain main toh sabhi sahi hain dusro ki method ko galat kehna hamari dharmik sankirnata hai hamari dharmik asahishnuta hai jabki sabhi mitra sacche hain musalmanon ki namaz padhte hain vaah bhi sahi hai hinduon ke mandir jaate hain toh vaah bhi sahi hai atyadhik gurudware jaate hain toh vaah bhi sahi hai isai log charche jaate hain vaah bhi sahi hai galat kuch bhi nahi hai galat sirf yah hai manav ke gande vichar dharmik asahishnuta hai aur manushya ka gyaan hai

नई मूर्ति पूजा भी सही है क्योंकि सर के दो रूप होते हैं एक साकार रूप देख मेरा करो निराकार व

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दुनिया अगर भगवान है इस सृष्टि में इस सृष्टि में भगवान है ऐसा मानती है तो पूजा भी अनिवार्य है उनकी पूजा करना भी निभा रहे प्रत्येक देश-विदेश संसार के लिए किसी भी वेशभूषा किसी भी रूप दर्शन में आप भगवान की पूजा कर सकते हैं धन्यवाद

duniya agar bhagwan hai is shrishti mein is shrishti mein bhagwan hai aisa maanati hai toh puja bhi anivarya hai unki puja karna bhi nibha rahe pratyek desh videsh sansar ke liye kisi bhi veshbhusha kisi bhi roop darshan mein aap bhagwan ki puja kar sakte hain dhanyavad

दुनिया अगर भगवान है इस सृष्टि में इस सृष्टि में भगवान है ऐसा मानती है तो पूजा भी अनिवार्

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Dr Kanahaiya

Dr Kanahaiya Reki Grand Masstr Apt .Sujok .Homyopathy .

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नमस्कार दोस्तों आपका प्रश्न है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है पहले आप जानिए की पूजा कितने प्रकार की दो प्रकार की एक साकार रूप में एक मानसिक रूप में जो पहले के ऋषि मुनि होते थे वह मानसिक पूजा करते थे मानसिक पूजा में बीएफ नेपाल पूजो कुछ चढ़ाना है वह चढ़ाकर के मानसिक पूजा करती थी पर लोगों को यह बताया गया कि आप अनापूर्णेश्वरी राम का ध्यान कि यह किसने का ध्यान कीजिए काली का ध्यान कीजिए तो आपको कैसे करोगे जान आपने कभी देखा है काली को देखा है किस प्रकार की होती है काली तो आपने बताया कि काल इस प्रकार की होती है उनके चार हाथ होती है दो हाथ होते जैसे भी यह सब को बताया है वह ऐसे से अस्त्र शस्त्र ले होती है तो उनकी कल्पना करके एक मूर्ति का रूप दिया गया कि वह इस प्रकार की काली होती है पहचानोगे कैसे तुझे पहचानने के लिए बताया गया कि इस प्रकार की काली होती अगर आप ध्यान करोगे तो आपके सामने आ जाएगी तब तक पहचान जाओगे खाली हो तो ध्यान करो तो प्रकट होगी इसलिए मूर्ति पूजा अलग बात है और मानसिक पूजा अलग बात है मूर्ति पूजा में मैंने जितना अभी तक अध्ययन किया है तुम मूर्ति पूजा में जो शिवलिंग है उसकी पूजा जरूरी है क्योंकि उसकी मानसिक पूजा नहीं की जा सकती उसके शिवलिंग या तो मूर्ति बनाकर ही की जा सकती है वह शिवलिंग पूजा क्यों जरूरी है यहां पर मैं आपको बता नहीं सकता इसलिए अपनी अपनी जगह दोनों सही है कि पूजा भी सही है और जो मूर्ति पूजा नहीं करते वह भी सही है आप कीजिए जिस जिस प्रकार का ज्ञान हो आप उस प्रकार की पूजा करें धन्यवाद

namaskar doston aapka prashna hai kya is duniya mein murti puja galat hai ya sahi hai pehle aap janiye ki puja kitne prakar ki do prakar ki ek saakar roop mein ek mansik roop mein jo pehle ke rishi muni hote the vaah mansik puja karte the mansik puja mein bf nepal pujo kuch chadhana hai vaah chadhakar ke mansik puja karti thi par logo ko yah bataya gaya ki aap anapurneshwari ram ka dhyan ki yah kisne ka dhyan kijiye kali ka dhyan kijiye toh aapko kaise karoge jaan aapne kabhi dekha hai kali ko dekha hai kis prakar ki hoti hai kali toh aapne bataya ki kaal is prakar ki hoti hai unke char hath hoti hai do hath hote jaise bhi yah sab ko bataya hai vaah aise se astra shastra le hoti hai toh unki kalpana karke ek murti ka roop diya gaya ki vaah is prakar ki kali hoti hai pahachanoge kaise tujhe pahachanne ke liye bataya gaya ki is prakar ki kali hoti agar aap dhyan karoge toh aapke saamne aa jayegi tab tak pehchaan jaoge khaali ho toh dhyan karo toh prakat hogi isliye murti puja alag baat hai aur mansik puja alag baat hai murti puja mein maine jitna abhi tak adhyayan kiya hai tum murti puja mein jo shivling hai uski puja zaroori hai kyonki uski mansik puja nahi ki ja sakti uske shivling ya toh murti banakar hi ki ja sakti hai vaah shivling puja kyon zaroori hai yahan par main aapko bata nahi sakta isliye apni apni jagah dono sahi hai ki puja bhi sahi hai aur jo murti puja nahi karte vaah bhi sahi hai aap kijiye jis jis prakar ka gyaan ho aap us prakar ki puja kare dhanyavad

नमस्कार दोस्तों आपका प्रश्न है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है पहले आप जा

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Kavita Panyam

Certified Award Winning Counseling Psychologist

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आपका सवाल है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है देखिए आपको जो अच्छा लगता है वह कीजिए अगर आपको मूर्तियां पसंद है पैसे हैं तो खरीदी अगर आपको मूर्ति को देख सुकून मिलता है आपकी पूजा अच्छी होती है दिल को आराम मिलता है और आपकी जो विश्वास है वह पूरी होती है तो बस आपको उतना ही सोचना चाहिए कौन से गुरु ने क्या बोला है कौन से पिक में क्या लिखा है या फिर उस वेद में क्या लिखा है उससे आपका कोई लेना-देना नहीं है इस दुनिया में जो आपके लिए काम करता है वही आपका सब कुछ है तो आपको अगर मूर्तियां पसंद है और आपको अच्छा फील करवाती है आपकी पूजा अच्छी हो रही है दिल में खुशी है मूर्तियों को देखकर आपको अच्छा लग रहा है सुकून है शांति है और प्रस्तुति भी है तरक्की भी है तू मूर्ति रखने में कोई गलत नहीं है तो उनको मैं वॉटर से आपको क्या अच्छा लगता है आप वही कीजिए भी कुछ अगर आप खुश रहेंगे आपकी तरक्की हो रही है तो आप दूसरों की भी मदद कर पाएंगे और दूसरों के लिए भी कुछ कर पाएंगे कंट्रीब्यूट भी कर अबाउट हाउ इट मेक यू फील फॉर कंसीलिंग प्लीज कनेक्ट ऑन कविता पानी M.Com

aapka sawaal hai kya is duniya mein murti puja galat hai ya sahi hai dekhiye aapko jo accha lagta hai vaah kijiye agar aapko murtiya pasand hai paise hain toh kharidi agar aapko murti ko dekh sukoon milta hai aapki puja achi hoti hai dil ko aaram milta hai aur aapki jo vishwas hai vaah puri hoti hai toh bus aapko utana hi sochna chahiye kaun se guru ne kya bola hai kaun se pic mein kya likha hai ya phir us ved mein kya likha hai usse aapka koi lena dena nahi hai is duniya mein jo aapke liye kaam karta hai wahi aapka sab kuch hai toh aapko agar murtiya pasand hai aur aapko accha feel karwati hai aapki puja achi ho rahi hai dil mein khushi hai murtiyon ko dekhkar aapko accha lag raha hai sukoon hai shanti hai aur prastuti bhi hai tarakki bhi hai tu murti rakhne mein koi galat nahi hai toh unko main water se aapko kya accha lagta hai aap wahi kijiye bhi kuch agar aap khush rahenge aapki tarakki ho rahi hai toh aap dusro ki bhi madad kar payenge aur dusro ke liye bhi kuch kar payenge kantribyut bhi kar about how it make you feel for kansiling please connect on kavita paani M Com

आपका सवाल है क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है देखिए आपको जो अच्छा लगता है व

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देखिए क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है हम दुनिया से पहले अपने देश में चलते हैं यदि हम अपने अपने देश में ही है जी यह ज्यादातर विदेश में आप ऐसा नहीं कर सकते बहुत कुछ बहुत अच्छा अपने देश में चलेंगे अब मूर्ति पूजा गलत है या नहीं यह विश्वास की बात है और आपको श्रद्धा विश्वास है तो आप मूर्ति पूजा भी करते हैं आपको नहीं लगता तो आप नहीं करता लेकिन जहां तक मैं समझता हूं मेरी आकर आप राय पूछेंगे क्या करना चाहिए या नहीं करना चाहिए देखिए अगर परमात्मा है तो वह हर व्यक्ति में कण-कण में विद्यमान है ठीक है आप उसे अपने अंदर भी महसूस कर सकते हैं आप देखते होंगे कई बार कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती है तो आपको तुरंत अपने अंदर से एक महसूस होना ताकि हां यार उसने पूछा है यार मेरे साथ कोई ना कोई है तो आप मूर्ति पूजा करो या ना करो कन कन में भगवान है सबके अंदर है तो फिर अब लगा लो आप इसमें गलत है या नहीं है भाई मैं तो यही कहूंगा कि मूर्ति पूजा ना करते हुए इंसान को दया भाव रखना चाहिए और सभी की सहायता करते हुए आगे बढ़ना चाहिए

dekhiye kya is duniya mein murti puja galat hai ya sahi hai hum duniya se pehle apne desh mein chalte hain yadi hum apne apne desh mein hi hai ji yah jyadatar videsh mein aap aisa nahi kar sakte bahut kuch bahut accha apne desh mein chalenge ab murti puja galat hai ya nahi yah vishwas ki baat hai aur aapko shraddha vishwas hai toh aap murti puja bhi karte hain aapko nahi lagta toh aap nahi karta lekin jaha tak main samajhata hoon meri aakar aap rai puchenge kya karna chahiye ya nahi karna chahiye dekhiye agar paramatma hai toh vaah har vyakti mein kan kan mein vidyaman hai theek hai aap use apne andar bhi mehsus kar sakte hain aap dekhte honge kai baar kuch aisi ghatnaye ho jaati hai toh aapko turant apne andar se ek mehsus hona taki haan yaar usne poocha hai yaar mere saath koi na koi hai toh aap murti puja karo ya na karo kan kan mein bhagwan hai sabke andar hai toh phir ab laga lo aap isme galat hai ya nahi hai bhai main toh yahi kahunga ki murti puja na karte hue insaan ko daya bhav rakhna chahiye aur sabhi ki sahayta karte hue aage badhana chahiye

देखिए क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही है हम दुनिया से पहले अपने देश में चलते

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Mohitg

Student & Shopkeeper

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क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही समय को देखते हुए कहा जा सकता है कि नहीं मिलेगा कि विशेष स्थान पर जाकर आपस में मूर्ति पूजा से कोई दिक्कत नहीं है ओसिया मंदिर के कारण धर्म का इतना प्रचार प्रसार ना करना आज के युग के सबसे कहीं गलत नहीं है

kya is duniya mein murti puja galat hai ya sahi samay ko dekhte hue kaha ja sakta hai ki nahi milega ki vishesh sthan par jaakar aapas mein murti puja se koi dikkat nahi hai osia mandir ke karan dharm ka itna prachar prasaar na karna aaj ke yug ke sabse kahin galat nahi hai

क्या इस दुनिया में मूर्ति पूजा गलत है या सही समय को देखते हुए कहा जा सकता है कि नहीं मिलेग

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Prem Kumar

Fashion Expert

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द्वापर युग में मूर्ति पूजा हुआ करती थी अब यह कलयुग चल रहा है और कलयुग में मूर्ति पूजा का कोई महत्व नहीं है यह युग सिर्फ नाम से मर कर ही ईश्वर से हम पार हो सकते हैं

dwapar yug mein murti puja hua karti thi ab yah kalyug chal raha hai aur kalyug mein murti puja ka koi mahatva nahi hai yah yug sirf naam se mar kar hi ishwar se hum par ho sakte hain

द्वापर युग में मूर्ति पूजा हुआ करती थी अब यह कलयुग चल रहा है और कलयुग में मूर्ति पूजा का क

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दुनिया में मूर्ति पूजा सही है क्योंकि मूर्ति पूजा कर सकती अभी लोग बहुत लोगों को नहीं पता है पर पूर्वजों में यह बात सही थी

duniya mein murti puja sahi hai kyonki murti puja kar sakti abhi log bahut logo ko nahi pata hai par purvajon mein yah baat sahi thi

दुनिया में मूर्ति पूजा सही है क्योंकि मूर्ति पूजा कर सकती अभी लोग बहुत लोगों को नहीं पता ह

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