क्या होता है चुनावी बॉन्ड्स? क्यूँ चर्चा में हैं इलेक्टोरल बॉन्ड्स?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:46

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या होता है चुनावी बम क्यों चर्चा में है इलेक्शन चुनाव के दरमियान की सरकार में इलेक्ट्रॉन के रूप में जो कॉरपोरेट सेक्टर पार्टी चुनाव का जो फंड ले सकती है ऐसे प्रावधान किए थे उस समय कांग्रेस का विरोध नहीं किया अब यह सब हो रहा है क्योंकि सत्ताधारी पार्टी है उसको ज्यादा चुनावी फंड मिलते हैं इलेक्ट्रॉनिक बनते हैं वह सत्ताधारी पार्टी को ज्यादा मिलते हैं और उस समय विरोध नहीं किया तो किया था लेकिन इलेक्ट्रोजोम्स बाहर से बहुत बड़ी बड़ी कंपनी में उपस्थित बीजेपी को कांग्रेस को शव को फंदे से पहले यह होता था कि जो व्यक्ति की जो भी पार्टियों की थी वह जिसको कहते हैं कि काले धन के रूप में वह पार्टियों को चुनावी चंदे देखी थी जिसका कहीं पर भी उल्लेख मिलता था मैं बहुत बड़ा काम करता था किसी भी पार्टी को जिनको उनके चेक लगे उनको ठंड देती हैं और उसका अपने जो वही खाता होता है उनका बुक होती है उसमें इसका एलोकेशन और लॉन्ड्री जाती है अकाउंट में लिखा है कि पार्टी को चंदा इस तरह से सब कुछ ओपन हो गया और जो कि बीजेपी को सबसे ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड की तरफ से कंधा मिला था चुनाव में चुनाव के पहले इसलिए इसका विरोध किया जा रहा है हो सकता है और और मैं कुछ जानने को को सीखने को मिल सकता है धन्यवाद

kya hota hai chunavi bomb kyon charcha mein hai election chunav ke darmiyaan ki sarkar mein electron ke roop mein jo corporate sector party chunav ka jo fund le sakti hai aise pravadhan kiye the us samay congress ka virodh nahi kiya ab yah sab ho raha hai kyonki sattadhari party hai usko zyada chunavi fund milte hain electronic bante hain vaah sattadhari party ko zyada milte hain aur us samay virodh nahi kiya toh kiya tha lekin ilektrojoms bahar se bahut badi badi company mein upasthit bjp ko congress ko shav ko fande se pehle yah hota tha ki jo vyakti ki jo bhi partiyon ki thi vaah jisko kehte hain ki kaale dhan ke roop mein vaah partiyon ko chunavi chande dekhi thi jiska kahin par bhi ullekh milta tha main bahut bada kaam karta tha kisi bhi party ko jinako unke check lage unko thand deti hain aur uska apne jo wahi khaata hota hai unka book hoti hai usme iska elokeshan aur laundry jaati hai account mein likha hai ki party ko chanda is tarah se sab kuch open ho gaya aur jo ki bjp ko sabse zyada electronic board ki taraf se kandha mila tha chunav mein chunav ke pehle isliye iska virodh kiya ja raha hai ho sakta hai aur aur main kuch jaanne ko ko sikhne ko mil sakta hai dhanyavad

क्या होता है चुनावी बम क्यों चर्चा में है इलेक्शन चुनाव के दरमियान की सरकार में इलेक्ट्रॉन

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Abhishek Shekher Gaur

Civil Engineer

2:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए बीच में बीजेपी ने पिछले कार्यकाल में अपने एक रूल लाई थी कि ₹2000 से ज्यादा का कैश कोई किसी पार्टी को डोनेट करेगा तो अपना नाम देना पड़ेगा मतलब बिना नाम डिस्क्लोज किया 2,000 से ज्यादा डोनेट नहीं कर सकते तो लेकिन उन्होंने साथ साथी एक चीज और लाए थे वह यह था कि इलेक्टरल बॉन्ड जो होते हैं उसके जरिए आप बिना डिस्क्लोज किया कितना भी पैसा दे सकते हैं किसी भी पार्टी को और जब यह लोकसभा में पारित हुआ था जब भी लाया गया तो लोकसभा से आराम से पास हो गए लोकसभा बीजेपी को बहुमत है और तो लोगों ने कहा कि हां हां बीजेपी कर रही है लेकिन जब राज्यसभा में क्या तब राजसभा अभी भी नहीं है और तब भी नहीं था लोकसभा में भी बहुमत नहीं था बीजेपी के पास तोरा सभा में बहुमत नहीं था बीजेपी पास तो उस समय मजे की बात यह देखने की राई कि जब यह चीज पहुंची है कि 1 तरीके से देखा जाए तो गलत है ना कि बिना डिस्क्लोज के कितना पैसा दिया जा सकता कोई भी दे सकता है लेकिन तब विपक्ष की तरफ से भी ना कांग्रेस किसी पार्टी की तरफ से कोई विरोध नहीं किया गया था क्योंकि कहीं ना कहीं उनको लग रहा था कि उनको ही फायदा होगा सीधी सी बात है किसी एक पार्टी को थोड़ी ना फायदा होगा अगर डिस्क्लोज नहीं करना होगा कोई भी डिस्कस करके भेजना डिस्प्ले उसके भेज सकता है पैसा उस समय यह दोनों पार्टियों ने पूरा समर्थन किया और आराम से बिल पास हो गया और यह लोगों का हर पार्टी को बिना किसी के डिस्प्ले उसके इलेक्ट्रॉन के तहत कितना ही पैसा दिया जा सकता है लेकिन अब शायद इनको ऐसा लगा होगा कांग्रेस को कि शायद बीजेपी को इससे ज्यादा फायदा हुआ है तो अब अचानक से वह इसका विरोध करने लग गए हैं हालांकि मैं इसको अपरिचित मानता हूं क्योंकि अगर आपको इतना ही विरोध था जब लाया जा रहा था तभी क्यों नहीं विरोध किया गया अगर तभी विरोध कर दिया जाता है अब रोक दिया था तो फिर यह पास ही नहीं होता ना आज यह विरोध करने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन वही है ना कभी-कभी आदमी उस समय अपना फायदा देखता है जब बाद में देखता अपने नुकसान हो रहा है तो उसका विरोध करता है तो अपॉइंटमेंट सेट है और क्या है और कुछ नहीं है राजनीति में सब चलता रहता है कभी आदमी अपना फायदा दिखता है तो दांव खेलते पैसे जब देखता है कि अपना फायदा नहीं हो रहा है तो विरोध करता है थैंक यू

dekhiye beech mein bjp ne pichle karyakal mein apne ek rule lai thi ki Rs se zyada ka cash koi kisi party ko donate karega toh apna naam dena padega matlab bina naam disclose kiya 2 000 se zyada donate nahi kar sakte toh lekin unhone saath sathi ek cheez aur laye the vaah yah tha ki electoral Bond jo hote hai uske jariye aap bina disclose kiya kitna bhi paisa de sakte hai kisi bhi party ko aur jab yah lok sabha mein paarit hua tha jab bhi laya gaya toh lok sabha se aaram se paas ho gaye lok sabha bjp ko bahumat hai aur toh logo ne kaha ki haan haan bjp kar rahi hai lekin jab rajya sabha mein kya tab rajyasabha abhi bhi nahi hai aur tab bhi nahi tha lok sabha mein bhi bahumat nahi tha bjp ke paas tora sabha mein bahumat nahi tha bjp paas toh us samay maje ki baat yah dekhne ki rai ki jab yah cheez pahuchi hai ki 1 tarike se dekha jaaye toh galat hai na ki bina disclose ke kitna paisa diya ja sakta koi bhi de sakta hai lekin tab vipaksh ki taraf se bhi na congress kisi party ki taraf se koi virodh nahi kiya gaya tha kyonki kahin na kahin unko lag raha tha ki unko hi fayda hoga seedhi si baat hai kisi ek party ko thodi na fayda hoga agar disclose nahi karna hoga koi bhi discs karke bhejna display uske bhej sakta hai paisa us samay yah dono partiyon ne pura samarthan kiya aur aaram se bill paas ho gaya aur yah logo ka har party ko bina kisi ke display uske electron ke tahat kitna hi paisa diya ja sakta hai lekin ab shayad inko aisa laga hoga congress ko ki shayad bjp ko isse zyada fayda hua hai toh ab achanak se vaah iska virodh karne lag gaye hai halaki main isko aparichit manata hoon kyonki agar aapko itna hi virodh tha jab laya ja raha tha tabhi kyon nahi virodh kiya gaya agar tabhi virodh kar diya jata hai ab rok diya tha toh phir yah paas hi nahi hota na aaj yah virodh karne ki zarurat nahi padti lekin wahi hai na kabhi kabhi aadmi us samay apna fayda dekhta hai jab baad mein dekhta apne nuksan ho raha hai toh uska virodh karta hai toh appointment set hai aur kya hai aur kuch nahi hai raajneeti mein sab chalta rehta hai kabhi aadmi apna fayda dikhta hai toh dav khelte paise jab dekhta hai ki apna fayda nahi ho raha hai toh virodh karta hai thank you

देखिए बीच में बीजेपी ने पिछले कार्यकाल में अपने एक रूल लाई थी कि ₹2000 से ज्यादा का कैश को

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

1:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

चुनावी ब्रांच के सभी आज का प्रचलन चला है कि उन मूर्ख लोगों के लिए है जो राजनीति के बारे में कुछ नहीं जानते हैं केवल धर्म जाति क्षेत्र ताकि राजनीतिक जानते हैं औरतें मुक्ता के नाम पर मूर्खता के कारण से दसवीं चुनावी प्रांशु की बातों में आकर जुड़ते बातों में बहते हुए वोट देते हैं भारतीय नागरिकों को भारतीय संविधान के दौरान हुआ देवगन सर्वाधिक मूल्यवान अधिकार है वोट देना लेकिन वह लोग उसका प्रयोग धर्म के कारण जाति के कारण अच्छे पिता के कारण करते हैं ऐसे चुनावी वादों का जन्म होता है बाकी समझदार लोग पार्टी के संविधान देखते हैं उसका मैन्युफैक्चरिंग देखते हैं उसकी विचारधारा देखते हैं और जिस व्यक्ति को आप वोट देने जाना पुकारी देखें उसकी रजिस्ट्री देखें और उसके समाज और देश के लिए किए गए कार्यों को ध्यान में रखकर कीबोर्ड करें यह बुद्धिमान लोगों का कार्य होता है लेकिन आज का प्रश्न मौत अधिकांश लोग धर्म जाति क्षेत्र दा से प्रभावित होकर के वोट करते हैं ऐसे चुनावी वादों को स्थान मिल जाता है

chunavi branch ke sabhi aaj ka prachalan chala hai ki un murkh logo ke liye hai jo raajneeti ke bare mein kuch nahi jante hain keval dharm jati kshetra taki raajnitik jante hain auraten mukta ke naam par murkhta ke karan se dasavi chunavi pranshu ki baaton mein aakar judte baaton mein bahte hue vote dete hain bharatiya nagriko ko bharatiya samvidhan ke dauran hua devgan sarvadhik mulyavan adhikaar hai vote dena lekin vaah log uska prayog dharm ke karan jati ke karan acche pita ke karan karte hain aise chunavi vaado ka janam hota hai baki samajhdar log party ke samvidhan dekhte hain uska manufacturing dekhte hain uski vichardhara dekhte hain aur jis vyakti ko aap vote dene jana pukari dekhen uski registry dekhen aur uske samaj aur desh ke liye kiye gaye karyo ko dhyan mein rakhakar keyboard kare yah buddhiman logo ka karya hota hai lekin aaj ka prashna maut adhikaansh log dharm jati kshetra the se prabhavit hokar ke vote karte hain aise chunavi vaado ko sthan mil jata hai

चुनावी ब्रांच के सभी आज का प्रचलन चला है कि उन मूर्ख लोगों के लिए है जो राजनीति के बारे मे

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Danish

Journalist

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