क्या भारत का संविधान फिर से बन नहीं सकता है?...


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जी भारत का जो संविधान है वह फिर से नहीं बन सकता यह बिल्कुल क्लियर कट है आपको बता दें कि संविधान जो बनाने के लिए संविधान जो बनाने का जो अधिकार होता है वह संवैधानिक समिति को होता है संविधान समिति को होता है ठीक है हमारे देश में जो जब संविधान बन रहा था तो संविधान समिति एक समिति गठित की गई थी और समिति गठित की गई थी उसका जो फर्स्ट जो अधिवेशन है वह 9 दिसंबर 1946 को हुआ था और उसमें जो डॉक्टरी जो सच्चिदानंद सच्चिदानंद सिन्हा है उनको अस्थाई अध्यक्ष बनाया गया था फिर उसके बाद मुझे स्थाई अध्यक्ष है उनको डॉ राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया था और जो अंबेडकर जी हैं वह मुख्य एक तरफ से जो संविधान का जो फ्रेमवर्क है उसको तैयार करने में मुख्य भूमिका होने की थी तो यह संविधान सभा ने बनाया था और यह सर्वसम्मति से था कि वही जैसे कोई पार्टी है मान लो कोई व्यक्ति सोशलिस्ट है कोई व्यक्ति पूंजीवादी है कोई व्यक्ति मार्ग मार्क्सवादी विचारधारा को फॉलो करता है कोई कांग्रेसी है अलग अलग विचारधारा के लोग जाति के लोग इसमें रहता है कि सभी लोगों को ध्यान में रखकर के यह हमारा जो संविधान है यह बनाया गया ठीक अब अगर मान लीजिए कि अगर किसी ऐसे संसद के द्वारा अगर यह कानून बनाया जाता संसद के द्वारा संसद आपको पता है लोकसभा और राज्यसभा संसद अगर कोई कानून बनाती है ठीक है तो फिर यह रहता है कि जैसे कोई दूसरी पार्टी का है यह दूसरी पार्टी के लोग हैं या फिर दूसरी पार्टी की भी नहीं है और जो बाकी कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको दिक्कत हो सकती है कि भाई हमारे खिलाफ आपने यह बना दिया है ठीक है हम जब हमारी सरकारें आएंगी तो देख लेंगे आपको हम इस संविधान को पलट देंगे ठीक है तो इस तरीके का था तो हमारे देश के जो नेता थे जो नेहरू जी थे महात्मा गांधी थे सरदार वल्लभभाई पटेल थे अंबेडकर जी थे डॉ राजेंद्र प्रसाद थे और बहुत सारे नाम थे बड़े-बड़े विद्वान थे उन्होंने बहुत ही अच्छा यह तरीका निकाला कि संविधान जो है वह संवैधानिक समिति के द्वारा बनाया जाएगा ना की किसी संसद नहीं बना सकते संसद को पावर नहीं है संविधान बनाने की कविता संविधान इक समिति बनाएगी और इस पर कोई संवैधानिक समिति है नहीं ना आगे होगी तो हमारा जो संविधान है उसमें बारी बारी अमेंडमेंट होते जाएंगे जैसे-जैसे त्रुटियां हैं या कोई कानून जैसे मान लो लगता है कि किसी आर्टिकल की अब जरूरत नहीं है समय-समय पर चेंज हुए हैं 104 संविधान संशोधन हो चुका है हमारे देश में इस तरीके से संशोधन होगा इसमें लेकिन बना नहीं सकता क्योंकि बनाने का तो पावर है वह संसद को कोई पावर नहीं है संसद उसमें संशोधन कर सकती है और वह भी संविधान का जो मूल ढांचा है उसको ध्यान में रखते हुए उसमें कोई बदलाव नहीं कर सकती मैं आपको अच्छे से समझा पाया हूं आशा करता हूं कि आपको समझ में आया होगा थैंक यू

ji bharat ka jo samvidhan hai vaah phir se nahi ban sakta yah bilkul clear cut hai aapko bata de ki samvidhan jo banane ke liye samvidhan jo banane ka jo adhikaar hota hai vaah samvaidhanik samiti ko hota hai samvidhan samiti ko hota hai theek hai hamare desh me jo jab samvidhan ban raha tha toh samvidhan samiti ek samiti gathit ki gayi thi aur samiti gathit ki gayi thi uska jo first jo adhiveshan hai vaah 9 december 1946 ko hua tha aur usme jo doctari jo sacchidanand sacchidanand sinha hai unko asthai adhyaksh banaya gaya tha phir uske baad mujhe sthai adhyaksh hai unko Dr. rajendra prasad ko banaya gaya tha aur jo ambedkar ji hain vaah mukhya ek taraf se jo samvidhan ka jo framework hai usko taiyar karne me mukhya bhumika hone ki thi toh yah samvidhan sabha ne banaya tha aur yah sarwasammati se tha ki wahi jaise koi party hai maan lo koi vyakti socialist hai koi vyakti punjiwadi hai koi vyakti marg markswadi vichardhara ko follow karta hai koi congressi hai alag alag vichardhara ke log jati ke log isme rehta hai ki sabhi logo ko dhyan me rakhakar ke yah hamara jo samvidhan hai yah banaya gaya theek ab agar maan lijiye ki agar kisi aise sansad ke dwara agar yah kanoon banaya jata sansad ke dwara sansad aapko pata hai lok sabha aur rajya sabha sansad agar koi kanoon banati hai theek hai toh phir yah rehta hai ki jaise koi dusri party ka hai yah dusri party ke log hain ya phir dusri party ki bhi nahi hai aur jo baki kuch log aise hote hain jinako dikkat ho sakti hai ki bhai hamare khilaf aapne yah bana diya hai theek hai hum jab hamari sarkaren aayengi toh dekh lenge aapko hum is samvidhan ko palat denge theek hai toh is tarike ka tha toh hamare desh ke jo neta the jo nehru ji the mahatma gandhi the sardar vallabhbhai patel the ambedkar ji the Dr. rajendra prasad the aur bahut saare naam the bade bade vidhwaan the unhone bahut hi accha yah tarika nikaala ki samvidhan jo hai vaah samvaidhanik samiti ke dwara banaya jaega na ki kisi sansad nahi bana sakte sansad ko power nahi hai samvidhan banane ki kavita samvidhan ek samiti banayegi aur is par koi samvaidhanik samiti hai nahi na aage hogi toh hamara jo samvidhan hai usme baari baari Amendment hote jaenge jaise jaise trutiyaan hain ya koi kanoon jaise maan lo lagta hai ki kisi article ki ab zarurat nahi hai samay samay par change hue hain 104 samvidhan sanshodhan ho chuka hai hamare desh me is tarike se sanshodhan hoga isme lekin bana nahi sakta kyonki banane ka toh power hai vaah sansad ko koi power nahi hai sansad usme sanshodhan kar sakti hai aur vaah bhi samvidhan ka jo mul dhancha hai usko dhyan me rakhte hue usme koi badlav nahi kar sakti main aapko acche se samjha paya hoon asha karta hoon ki aapko samajh me aaya hoga thank you

जी भारत का जो संविधान है वह फिर से नहीं बन सकता यह बिल्कुल क्लियर कट है आपको बता दें कि सं

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