हमें अपने बचपन के दिनों के बारे में बताएँ?...


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Juhi Bharathi

Model|Actor|Dancer

0:38

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

चाइल्डहुड मेरा काफी इंटरेस्टिंग था अब मॉडलिंग रोल फिटकरी मैंने काफी किया था और अब डांसर डांसर एंड हॉफ ईयर्स ओल्ड मैदान से आई हूं बॉलीवुड कंटेंपररी स्टाइल एंड डांस आल्सो टीचर्स टू प्ले हारमोनियम

childhood mera kaafi interesting tha ab modelling roll fitkari maine kaafi kiya tha aur ab dancer dancer and half years old maidan se I hoon bollywood contemporary style and dance aalso teachers to play Harmonium

चाइल्डहुड मेरा काफी इंटरेस्टिंग था अब मॉडलिंग रोल फिटकरी मैंने काफी किया था और अब डांसर डा

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है हमें अपने बचपन के दिनों के बारे में बताएं बचपन के दिन तो हमेशा अच्छे होते कभी पूरे नहीं होते जिया बचपन स्कूल आए अच्छा ही गया स्कूल लाइफ कॉलेज लाइफ सबकुछ बचपन की स्कूल लाइफ अच्छी चाहिए बचपन के में स्कूल के दोस्त रहते थे वहां के घर के आस-पास के दोस्त सब अच्छे बन जा सखी सलाई से नहीं एक्टिविटी की हर एक्टिविटी में अच्छे से रहे जो करना था वह किया जो नहीं करना था वह नहीं किया अच्छा रहा हर फेस्टिवल एंजॉय किया और हर जगह घूमे फिरे स्पोर्ट्स में भी उतनी एक्टिविटी की बहुत अच्छा रहा जो करना था वह किया माता-पिता ने कर दिया बहुत अच्छे बहुत अच्छे बचपन भी अच्छा गया स्कूल लाइफ दोस्तों का साथ है तो बेस्ट लाइफ और आंसर की बहुत सारी लोगों की लाइफ पर बेस्ड होगी और जिन लोगों की लाइफ बेस्ट फ्रेंड नहीं रही है पहले वह अपडेट अपने शुभ हो धन्यवाद गुल्लक पर लाइव स्टेटस

aapka prashna hai hamein apne bachpan ke dino ke bare mein bataye bachpan ke din toh hamesha acche hote kabhi poore nahi hote jiya bachpan school aaye accha hi gaya school life college life sabkuch bachpan ki school life achi chahiye bachpan ke mein school ke dost rehte the wahan ke ghar ke aas paas ke dost sab acche ban ja sakhi salai se nahi activity ki har activity mein acche se rahe jo karna tha vaah kiya jo nahi karna tha vaah nahi kiya accha raha har festival enjoy kiya aur har jagah ghume fire sports mein bhi utani activity ki bahut accha raha jo karna tha vaah kiya mata pita ne kar diya bahut acche bahut acche bachpan bhi accha gaya school life doston ka saath hai toh best life aur answer ki bahut saree logo ki life par based hogi aur jin logo ki life best friend nahi rahi hai pehle vaah update apne shubha ho dhanyavad gullak par live status

आपका प्रश्न है हमें अपने बचपन के दिनों के बारे में बताएं बचपन के दिन तो हमेशा अच्छे होते क

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Jasmine Pal

Indian Model | Pageant winner

1:21
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप बचपन के दिन आवंटित बॉयस लड़कों की तरह बर्ताव करती थी ना लड़कों के साथ घूमना 15 अप्रैल में कभी आस्तीन की टीशर्ट माय फेवरेट फ्रूट नाम लिया कि मुझे अभी एक प्रॉपर लड़की बनना है उसकी लोग ना बोले कि यह लड़की है कि लड़का है

aap bachpan ke din avantit bias ladko ki tarah bartaav karti thi na ladko ke saath ghumana 15 april mein kabhi astin ki Tshirt my favourite fruit naam liya ki mujhe abhi ek proper ladki banna hai uski log na bole ki yah ladki hai ki ladka hai

आप बचपन के दिन आवंटित बॉयस लड़कों की तरह बर्ताव करती थी ना लड़कों के साथ घूमना 15 अप्रैल म

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Kafeel Jafri

Actor, Bengaluru's only Dastangoi performer

4:45
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किशोर मेरे बचपन में आज सबसे अलग चीज जो मेरे साथ कोई वही है कि मेरे मेरे वालिद साहब ने मेरे अब्बू ने यह सबसे बड़ा एहसान किया मेरे ऊपर और हम भाई-बहनों के ऊपर की अपने घर में टीवी नहीं लाया बिल्कुल भी और जब तक ट्वेल्थ पास नहीं कर लिया तब तक उन्होंने घर में टीवी नहीं आने दिया और घर में भी और मामा और अब्बू और उनके भाई बहन तुरंत माहौल जो था वह थोड़ा कल्चरल और शायराना माहौल था हमेशा से और अब्बू क्योंकि काम करते थे पीआर फॉर पीआर डिपार्टमेंट ऑफ यूपी पावर कॉरपोरेशन में वहां पर काफी सारे ऐड देते थे जिसकी वजह से न्यूज़पेपर बहुत सारे आते थे घर में इंग्लिश हिंदी उर्दू तीनों मिलाकर करीब 20 22 न्यूज़पेपर डेली आते थे और हमारा काम होता था कि जब हम बोर हो रहे हो स्कूल का होमवर्क चुका हो सारे और भी काम खत्म हो चुके हो तो वह हम पढ़े तो यह बहुत होता था और मैं बचपन से बहुत ज्यादा इंट्रोवर्ट मुझे मैं एक भी इंसान का नाम नहीं ले सकता अपने स्कूल के टाइम से जिससे इसके बारे में मैं यह कह सकूं कि हां यही इंसान मेरा बेस्ट फ्रेंड था या थी क्योंकि मेरी आदत है अकेले रहने की अपनी अपनी दुनिया में रहने की थी जो कि आज भी थोड़ी बहुत है लेकिन तू मेरा बचपन था कि जहां पर ज्यादातर अपनी ही दुनिया में खोए हुए हैं आप पता करेंगे अभी छुट्टियां चल रही में चीटियों को देख रहे हैं और किताबें पढ़ रहे हैं और न्यूज़ पेपर पढ़ रहे हैं खासकर हिंदी के न्यूज़पेपर और उर्दू के नीचे फिर भी उस वक्त यह है कि कुछ नाखून नहीं लगती थी आना की बहुत परेशान था बहुत डांट पड़ती थी घरवालों से किस चीज लो वरना बाहर जाओगे तो जाहिल संजय जाओगे कि लखनऊ से औरतों में उर्दू में और जो कि बाद में साबित भी हुआ कि जब मुझे मैंने अभी इंपैक्ट वापस सीखा है और जरूर लिखना और पढ़ना वरना उसको कितनी आती थी वह कुछ नहीं आती थी की कोशिश भी नहीं की तो वह दरिया होता था उस वक्त एंटरटेनमेंट अकेला दरिया कर पढ़ना और वीडियो पर जाने सुनना थोड़े बहुत और जोड़ी की गोट आईटी ऑल इंडिया वीडियो गाना चलता था विविध भारती वगैरा तो उसके चुनते थे जो जो भी प्रोग्राम चाहते थे मुंशी प्रेमचंद जयशंकर प्रसाद रामधारी सिंह दिनकर मैथिली शरण गुप्ता हरिवंश राय बच्चन अल्लामा इकबाल इस्मत चुगताई सादात हसन मंटो इन सब की कहानियां मैं बचपन से करता आया हूं और मुझे टेंशन की गोदान पहली नौकरी की सूजन खत्म किया पहला उपन्यास ऐसा था जो मैंने पढ़ा वह करीब करीब हर उस टाइम पे कितनी बार आता है योगी दादा कुछ समझ में भी नहीं आई लेकिन मजा आया पढ़कर मतलब तो अभी जब मैंने वापस पड़ी तब मुझे याद आया कि अच्छा यह चीज तो मैं उस वक्त नहीं समझा था तो इतना बचपन गुजरा और क्योंकि बचपन में वह सारी चीजें मैंने पढ़ ली और जब बचपन से थोड़ा बाहर निकले जबकि समाज की जिम्मेदारियां समाज की जो समाज के नियम है कि तुम जो है जब बड़े हो जाओ तो सबसे पहले कमाई का जरिया ढूंढो तो उसके नियम और पैसे के लिए तो सर की वजह से हमने हिंदी किया एमबीए करके हम एमबीए करने के लिए बेंगलूर है और यहां पर फिर जॉब करनी शुरू कर दी तो पैसे का जरूरत होती है इंसान की जिंदगी में वह भी पूरी होती चली गई तो अब जो बचपन में जो बीज बोया हुआ था वह भी स्टार्ट होना शुरू हो गया उसने अपना असर दिखाना शुरू किया और धीरे-धीरे में थिएटर से जुड़ा और ट्विटर से जुड़ने के बाद मैंने थोड़े प्लीज किए और उसके बाद आखिर में मैं अब जो वापस आया हूं और जो मैंने समझा है कि जो चीज में सबसे अच्छी तरह कर सकता हूं वह गांगुली और उर्दू स्टोरी टेलिंग पोएट्री इन सब चीज में ज्यादा अच्छी ना कर सकता हूं तो एक साइकिल में आगे जो चीजें मैंने बचपन में मुझे पता नहीं मैंने पढ़ी थी आज मैं वह वापस कैसे करता हूं क्योंकि मुझे तो ज्यादा सुकून देती और फोन करके और क्योंकि सुकून देती हैं इसलिए वालों को देखने वालों को भी वह सुकून हासिल होता है वह मजा आता है तो यह कहानी मेरे बचपन की और आज के नाते की बचपन से

kishore mere bachpan mein aaj sabse alag cheez jo mere saath koi wahi hai ki mere mere valid saheb ne mere abbu ne yah sabse bada ehsaan kiya mere upar aur hum bhai bahnon ke upar ki apne ghar mein TV nahi laya bilkul bhi aur jab tak twelfth paas nahi kar liya tab tak unhone ghar mein TV nahi aane diya aur ghar mein bhi aur mama aur abbu aur unke bhai behen turant maahaul jo tha vaah thoda cultural aur shayrana maahaul tha hamesha se aur abbu kyonki kaam karte the PR for PR department of up power corporation mein wahan par kaafi saare aid dete the jiski wajah se Newspaper bahut saare aate the ghar mein english hindi urdu tatvo milakar kareeb 20 22 Newspaper daily aate the aur hamara kaam hota tha ki jab hum bore ho rahe ho school ka homework chuka ho saare aur bhi kaam khatam ho chuke ho toh vaah hum padhe toh yah bahut hota tha aur main bachpan se bahut zyada introvert mujhe main ek bhi insaan ka naam nahi le sakta apne school ke time se jisse iske bare mein main yah keh saku ki haan yahi insaan mera best friend tha ya thi kyonki meri aadat hai akele rehne ki apni apni duniya mein rehne ki thi jo ki aaj bhi thodi bahut hai lekin tu mera bachpan tha ki jaha par jyadatar apni hi duniya mein khoe hue hai aap pata karenge abhi chhutiyan chal rahi mein chitiyon ko dekh rahe hai aur kitaben padh rahe hai aur news paper padh rahe hai khaskar hindi ke Newspaper aur urdu ke niche phir bhi us waqt yah hai ki kuch nakhun nahi lagti thi aana ki bahut pareshan tha bahut dant padti thi gharwaalon se kis cheez lo varna bahar jaoge toh jaahil sanjay jaoge ki lucknow se auraton mein urdu mein aur jo ki baad mein saabit bhi hua ki jab mujhe maine abhi impact wapas seekha hai aur zaroor likhna aur padhna varna usko kitni aati thi vaah kuch nahi aati thi ki koshish bhi nahi ki toh vaah dariya hota tha us waqt Entertainment akela dariya kar padhna aur video par jaane sunana thode bahut aur jodi ki goat it all india video gaana chalta tha vividh bharati vagera toh uske chunte the jo jo bhi program chahte the munshi Premchand jaishankar prasad ramdhari Singh dinkar maithali sharan gupta harivansh rai bachchan allama iqbal ismat chugtai sadat hasan manto in sab ki kahaniya main bachpan se karta aaya hoon aur mujhe tension ki Godan pehli naukri ki sujan khatam kiya pehla upanyas aisa tha jo maine padha vaah kareeb kareeb har us time pe kitni baar aata hai yogi dada kuch samajh mein bhi nahi I lekin maza aaya padhakar matlab toh abhi jab maine wapas padi tab mujhe yaad aaya ki accha yah cheez toh main us waqt nahi samjha tha toh itna bachpan gujara aur kyonki bachpan mein vaah saree cheezen maine padh li aur jab bachpan se thoda bahar nikle jabki samaj ki zimmedariyan samaj ki jo samaj ke niyam hai ki tum jo hai jab bade ho jao toh sabse pehle kamai ka zariya dhundho toh uske niyam aur paise ke liye toh sir ki wajah se humne hindi kiya mba karke hum mba karne ke liye bangalore hai aur yahan par phir job karni shuru kar di toh paise ka zarurat hoti hai insaan ki zindagi mein vaah bhi puri hoti chali gayi toh ab jo bachpan mein jo beej boya hua tha vaah bhi start hona shuru ho gaya usne apna asar dikhana shuru kiya aur dhire dhire mein theater se jinko aur twitter se judne ke baad maine thode please kiye aur uske baad aakhir mein main ab jo wapas aaya hoon aur jo maine samjha hai ki jo cheez mein sabse achi tarah kar sakta hoon vaah ganguly aur urdu story telling poetry in sab cheez mein zyada achi na kar sakta hoon toh ek cycle mein aage jo cheezen maine bachpan mein mujhe pata nahi maine padhi thi aaj main vaah wapas kaise karta hoon kyonki mujhe toh zyada sukoon deti aur phone karke aur kyonki sukoon deti hai isliye walon ko dekhne walon ko bhi vaah sukoon hasil hota hai vaah maza aata hai toh yah kahani mere bachpan ki aur aaj ke naate ki bachpan se

किशोर मेरे बचपन में आज सबसे अलग चीज जो मेरे साथ कोई वही है कि मेरे मेरे वालिद साहब ने मेरे

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Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए यह मेरे बचपन के बारे में कुछ ज्यादा नहीं बताना चाहूंगा मैं मेरे बचपन के बारे में बताना चाहूंगा कि हमारा बचपन में बहुत ही ज्यादा मेरी कसम है सबसे इंटरेस्टिंग में बचपन की बात यह है कि हमारे गांव में क्या गुर्जरों के जाते हैं तो हम उनके पास जाते थे तो बकवास गुर्जरों के पास फोन करना हम आप सब दोस्तों से अलग हो चुके हैं सबको साथ ऐसी करते हैं बस हम कॉल पर बात हो जाती हमारी बात हो जाती चैट हो जो टाइम नहीं है मेरे पास दोस्ती फ्रेंडशिप में इंटरेस्ट नहीं है

dekhiye yah mere bachpan ke bare me kuch zyada nahi batana chahunga main mere bachpan ke bare me batana chahunga ki hamara bachpan me bahut hi zyada meri kasam hai sabse interesting me bachpan ki baat yah hai ki hamare gaon me kya gurjaron ke jaate hain toh hum unke paas jaate the toh bakwas gurjaron ke paas phone karna hum aap sab doston se alag ho chuke hain sabko saath aisi karte hain bus hum call par baat ho jaati hamari baat ho jaati chat ho jo time nahi hai mere paas dosti friendship me interest nahi hai

देखिए यह मेरे बचपन के बारे में कुछ ज्यादा नहीं बताना चाहूंगा मैं मेरे बचपन के बारे में बता

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Chocolate Boy Dev Beeda

BSTC D EL.ED STUDENT TEACHER

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बचपन में हम दोस्तों के साथ गिल्ली डंडा खेलते थे और कभी कबड्डी कभी खो-खो क्रिकेट सतोलिया आदि खेलते थे बहुत मौज मस्ती किया करते थे लेकिन आज के उन दिनों को बहुत मिस कर रहे हैं जो दिन हमारे बचपन के थे वह आज की जो छोटे बच्चे हैं उनके बचपन में वह दे नहीं है हमारी संस्कृति को धीरे-धीरे भूल रहे हैं हम हैं क्योंकि भारतीय संस्कृति विश्व प्रसिद्ध थी और भारत इसी लिए विश्व गुरु कहलाने किन हम अपनी संस्कृति है उनको धीरे-धीरे भूल रहे हैं हमारे भी जो बच्चे होंगे उनको हम अपने जो खेल हैं या अपनी संस्कृति हैं उनके बारे में बताएं और उनकी संस्था मारे संस्कृति उस को बढ़ावा दें हमारे जो बचपन के दिन है वह बहुत याद आ रहे और हम उनको बहुत मिस कर रहे थे ना

bachpan me hum doston ke saath gilli danda khelte the aur kabhi kabaddi kabhi kho kho cricket satoliya aadi khelte the bahut mauj masti kiya karte the lekin aaj ke un dino ko bahut miss kar rahe hain jo din hamare bachpan ke the vaah aaj ki jo chote bacche hain unke bachpan me vaah de nahi hai hamari sanskriti ko dhire dhire bhool rahe hain hum hain kyonki bharatiya sanskriti vishwa prasiddh thi aur bharat isi liye vishwa guru kahlane kin hum apni sanskriti hai unko dhire dhire bhool rahe hain hamare bhi jo bacche honge unko hum apne jo khel hain ya apni sanskriti hain unke bare me bataye aur unki sanstha maare sanskriti us ko badhawa de hamare jo bachpan ke din hai vaah bahut yaad aa rahe aur hum unko bahut miss kar rahe the na

बचपन में हम दोस्तों के साथ गिल्ली डंडा खेलते थे और कभी कबड्डी कभी खो-खो क्रिकेट सतोलिया आद

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बचपन के दिन में छोटे-छोटे बहन छुट्टियां करते थे लड़ाई झगड़े करते थे

bachpan ke din mein chhote chhote behen chhutiyan karte the ladai jhagde karte the

बचपन के दिन में छोटे-छोटे बहन छुट्टियां करते थे लड़ाई झगड़े करते थे

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